प्रधानमंत्री राहत योजना (PM-RAHAT) के तहत, सड़क हादसों में घायल किसी भी व्यक्ति को देश भर के किसी भी रजिस्टर्ड अस्पताल में दुर्घटना की तारीख से 7 दिनों तक ₹1.5 लाख तक का कैशलेस (मुफ्त) इलाज मिलता है। नर्मदापुरम (होशंगाबाद) और इसके आसपास के इलाकों के लोगों के लिए भी इस योजना का लाभ उठाने हेतु कुछ प्रमुख बिंदु ध्यान में रखने आवश्यक हैं। इस योजना के अंतर्गत, हादसे के दौरान पीड़ित के पास पैसे न होने पर भी ₹1.5 लाख तक का आपातकालीन इलाज उपलब्ध है, जिसमें दवाइयां, ऑपरेशन और बिस्तर का खर्च शामिल है। जीवन के लिए खतरनाक मामलों में, सरकार मरीज को शुरुआती 24 से 48 घंटे तक स्थिर (stabilize) करने का पूरा खर्च उठाती है, जिसे 'गोल्डन आवर' कवर कहा जाता है। भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के तहत आने वाले PM-JAY पैनल से जुड़े सभी निजी और सरकारी अस्पताल इस सुविधा में शामिल हैं। नर्मदापुरम में इस योजना की प्रक्रिया इस प्रकार काम करती है: दुर्घटना होने पर तुरंत 112 (Emergency Response Support System) पर कॉल करना चाहिए। इसके बाद, पुलिस या एंबुलेंस पीड़ित को नजदीकी सूचीबद्ध (empanelled) अस्पताल ले जाएगी। अस्पताल में किसी भी तरह का अग्रिम भुगतान नहीं करना होगा, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम (eDAR और TMS 2.0) के जरिए अस्पताल सीधे सरकार से इलाज के बिल का दावा करते हैं।
प्रधानमंत्री राहत योजना (PM-RAHAT) के तहत, सड़क हादसों में घायल किसी भी व्यक्ति को देश भर के किसी भी रजिस्टर्ड अस्पताल में दुर्घटना की तारीख से 7 दिनों तक ₹1.5 लाख तक का कैशलेस (मुफ्त) इलाज मिलता है। नर्मदापुरम (होशंगाबाद) और इसके आसपास के इलाकों के लोगों के लिए भी इस योजना का लाभ उठाने हेतु कुछ प्रमुख बिंदु ध्यान में रखने आवश्यक हैं। इस योजना के अंतर्गत, हादसे के दौरान पीड़ित के पास पैसे न होने पर भी ₹1.5 लाख तक का आपातकालीन इलाज उपलब्ध है, जिसमें दवाइयां, ऑपरेशन और बिस्तर का खर्च शामिल है। जीवन के लिए खतरनाक मामलों में, सरकार मरीज को शुरुआती 24 से 48 घंटे तक स्थिर (stabilize) करने का पूरा खर्च उठाती है, जिसे 'गोल्डन आवर' कवर कहा जाता है। भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के तहत आने वाले PM-JAY पैनल से जुड़े सभी निजी और सरकारी अस्पताल इस सुविधा में शामिल हैं। नर्मदापुरम में इस योजना की प्रक्रिया इस प्रकार काम करती है: दुर्घटना होने पर तुरंत 112 (Emergency Response Support System) पर कॉल करना चाहिए। इसके बाद, पुलिस या एंबुलेंस पीड़ित को नजदीकी सूचीबद्ध (empanelled) अस्पताल ले जाएगी। अस्पताल में किसी भी तरह का अग्रिम भुगतान नहीं करना होगा, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम (eDAR और TMS 2.0) के जरिए अस्पताल सीधे सरकार से इलाज के बिल का दावा करते हैं।
- बुधवार दोपहर करीब 3:30 बजे पिपरिया-पचमढ़ी रोड पर एक ट्रैक्टर और ऑटो के बीच जोरदार टक्कर हो गई। यह हादसा इतना भीषण था कि ट्रैक्टर दो टुकड़ों में बंट गया। इस दुर्घटना में ट्रैक्टर चालक गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि ऑटो में सवार लोगों को भी चोटें आने की सूचना है। घटना के तुरंत बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई, जिसके बाद घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस इस मामले की जांच में जुटी है और घायलों का अस्पताल में उपचार जारी है।1
- मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले की ग्राम पंचायत हंकरियां के वार्ड क्रमांक 1 में 28 तारीख को आए आंधी-तूफान के कारण 29 तारीख को बिजली आपूर्ति ठप हो गई, जिससे ट्रांसफार्मर जल गया और ग्रामीण पानी के लिए परेशान हैं। लोगों का कहना है कि उनके मोटर कनेक्शन इसी बिजली पर निर्भर हैं, और बिना बिजली के वे पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। स्थानीय जेई को सूचित करने पर लाइनमैन ने आकर जाँच की और ट्रांसफार्मर जलने की पुष्टि की। ग्रामीणों ने विधायक नरेंद्र प्रजापति से भी संपर्क किया, लेकिन उन्होंने मदद करने से साफ मना कर दिया। विधायक और सरपंच दोनों का कहना है कि पहले बिजली बिल जमा किया जाए, उसके बाद ही ट्रांसफार्मर लगाने पर विचार किया जाएगा। पानी की समस्या इतनी गंभीर है कि लोग मोटर कनेक्शन के अभाव में जीवन यापन कर रहे हैं। वर्तमान में, ग्रामीण श्री भगवत प्रसाद विश्वकर्मा और श्री शिवम मिश्रा द्वारा लगाए गए एक निजी ट्रांसफार्मर से मोटर चालू करवाकर पानी भर रहे हैं, जिसे दो लोगों ने मिलकर लगवाया था। हालांकि, ये लोग कई बार बिजली देने से मना कर देते हैं, जिससे ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ जाती है। एक ग्रामीण ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा कि वे गरीब हैं और पानी के लिए मरने को मजबूर हैं। उन्होंने निजी ट्रांसफार्मर लगवाने की इच्छा जताई है, जिसके लिए वे ₹20,000 से ₹30,000 तक का खर्च उठाने को तैयार हैं, यहाँ तक कि कर्ज लेकर भी। उनकी यह विनती है ताकि पानी की कमी से कोई परेशानी न हो।3
- गंभीर आरोपों के बीच, रायसेन के कालभैरव धाम सांचेत के बाबा सुनील सराठे के अस्पताल से अचानक नदारद होने की खबर सामने आई है। 'बाबा, बीवी और बवाल' मामले में इसे अब तक का सबसे बड़ा ट्विस्ट बताया जा रहा है। गिरफ्तारी की लटकती तलवार से बचने के लिए बाबा ने गुपचुप तरीके से अग्रिम जमानत के लिए आवेदन भी कर दिया है। अब यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या रायसेन के इस बाबा का 'भौकाल' सच में दरक चुका है।1
- मध्य प्रदेश के रायसेन जिले की बालमपुर घाटी में एक बस ने लोडिंग ऑटो को टक्कर मार दी, जिसके परिणामस्वरूप ऑटो पलट गया। इस दुर्घटना में एक बड़ा हादसा होने से टल गया, जिससे सभी बड़े नुकसान या गंभीर परिणाम बच गए।1
- रायसेन में नाला निर्माण कार्य में कथित मनमर्जी को लेकर ब्लॉक कांग्रेस ने एक ज्ञापन सौंपा है। कांग्रेस ने साफ चेतावनी दी है कि यदि इस मनमानी को तुरंत रोका नहीं गया, तो वे इसके विरोध में एक बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे।1
- प्रधानमंत्री राहत योजना (PM-RAHAT) के तहत, सड़क हादसों में घायल किसी भी व्यक्ति को देश भर के किसी भी रजिस्टर्ड अस्पताल में दुर्घटना की तारीख से 7 दिनों तक ₹1.5 लाख तक का कैशलेस (मुफ्त) इलाज मिलता है। नर्मदापुरम (होशंगाबाद) और इसके आसपास के इलाकों के लोगों के लिए भी इस योजना का लाभ उठाने हेतु कुछ प्रमुख बिंदु ध्यान में रखने आवश्यक हैं। इस योजना के अंतर्गत, हादसे के दौरान पीड़ित के पास पैसे न होने पर भी ₹1.5 लाख तक का आपातकालीन इलाज उपलब्ध है, जिसमें दवाइयां, ऑपरेशन और बिस्तर का खर्च शामिल है। जीवन के लिए खतरनाक मामलों में, सरकार मरीज को शुरुआती 24 से 48 घंटे तक स्थिर (stabilize) करने का पूरा खर्च उठाती है, जिसे 'गोल्डन आवर' कवर कहा जाता है। भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के तहत आने वाले PM-JAY पैनल से जुड़े सभी निजी और सरकारी अस्पताल इस सुविधा में शामिल हैं। नर्मदापुरम में इस योजना की प्रक्रिया इस प्रकार काम करती है: दुर्घटना होने पर तुरंत 112 (Emergency Response Support System) पर कॉल करना चाहिए। इसके बाद, पुलिस या एंबुलेंस पीड़ित को नजदीकी सूचीबद्ध (empanelled) अस्पताल ले जाएगी। अस्पताल में किसी भी तरह का अग्रिम भुगतान नहीं करना होगा, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम (eDAR और TMS 2.0) के जरिए अस्पताल सीधे सरकार से इलाज के बिल का दावा करते हैं।1