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बागावास चौरासी कस्बे में श्री ओमकार सेकेंडरी स्कूल के कक्षा 10 वीं के स्टूडेंट्स के सम्मान में रैली निकाली गई,शानदार परीक्षा परिणाम के बाद कस्बे में उत्सव का माहौल बन गया, इन होनहार स्टूडेंट्स की उपलब्धि को यादगार बनाने के लिए कस्बे में खुले जीप में जुलूस निकाला गया,जगह-जगह ग्रामीणों और पेरेंट्स ने स्टूडेंट्स का अभिनंदन किया। टॉपर्स को साफा पहनाकर और मालाएं पहनाकर स्वागत किया गया ,इस दौरान स्टूडेंट्स के चेहरों पर खुशी नजर आई।
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बागावास चौरासी कस्बे में श्री ओमकार सेकेंडरी स्कूल के कक्षा 10 वीं के स्टूडेंट्स के सम्मान में रैली निकाली गई,शानदार परीक्षा परिणाम के बाद कस्बे में उत्सव का माहौल बन गया, इन होनहार स्टूडेंट्स की उपलब्धि को यादगार बनाने के लिए कस्बे में खुले जीप में जुलूस निकाला गया,जगह-जगह ग्रामीणों और पेरेंट्स ने स्टूडेंट्स का अभिनंदन किया। टॉपर्स को साफा पहनाकर और मालाएं पहनाकर स्वागत किया गया ,इस दौरान स्टूडेंट्स के चेहरों पर खुशी नजर आई।
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- जयपुर से बड़ी खबर राजधानी जयपुर के ब्रह्मपुरी थाना इलाके में तेज अंधड़ और बारिश के चलते एक बड़ा हादसा हो गया। जोरावर सिंह गेट स्थित सुरेश स्मृति पार्क के पास टीन शेड का एक मकान अचानक ढह गया, जिसके मलबे में एक महिला दब गई। घटना की सूचना मिलते ही चेतक ब्रह्मपुरी टीम मौके पर पहुंची। हालात बेहद गंभीर थे—टूटे हुए बिजली के तारों में करंट दौड़ रहा था और मलबे के नीचे महिला फंसी हुई थी। इस दौरान हेड कांस्टेबल भागीरथ और कांस्टेबल हंसराज ने बहादुरी दिखाते हुए अपनी जान की परवाह किए बिना अंदर प्रवेश किया। उन्होंने सावधानीपूर्वक टीन शेड हटाकर महिला को सुरक्षित बाहर निकाला। रेस्क्यू के बाद महिला को तुरंत चेतक वाहन से भारी भीड़ के बीच निकालकर एसएमएस हॉस्पिटल के ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया, जहां उसकी हालत अब सामान्य बताई जा रही है। यह साहसिक कार्य पुलिस के कर्तव्यनिष्ठा और आमजन की सुरक्षा के प्रति समर्पण का जीता-जागता उदाहरण है।1
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- जोबनेर रेनवाल सड़क मार्ग पर रमजीपुरा मोड़ के पास मुर्गियों से भरी पिकअप और ट्रक की आमने-सामने की जबरदस्त भिड़ंत हो जाने के बाद आसपास के इलाके में हड़कंप मच गया। टक्कर इतनी जबरदस्ती की पिकअप और ट्रक के आगे का हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इस दौरान पिकअप गाड़ी में भारी दर्जनों मुर्गियों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि कुछ मुर्गियां इधर-उधर भागने लगी। इसके साथ ही हादसे में पिकअप चालक गंभीर रूप से घायल हो गया। वही एक्सीडेंट की सूचना के बाद किशनगढ़ रेनवाल थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटना स्थल कहां जायजा लिया। पुलिस ने एंबुलेंस की सहायता से गंभीर रूप से घायल युवक को राजकीय अस्पताल में भर्ती करवाया जहां पर चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल के लिए रेफर किया। वही एक्सीडेंट के बाद आसपास के लोग मौके पर इकट्ठा हो गए और सड़क के दोनों तरफ कुछ देर के लिए लंबा जाम लग गया। पुलिस ने क्षतिग्रस्त गाड़ियों को क्रेन की सहायता से हटाकर यातायात को सुचारू करवाया। पुलिस ने बताया कि पिकअप जोबनेर की तरफ से आ रही थी और ट्रक रेनवाल से जोबनेर की ओर जा रहा था इसी दौरान दोनों की आमने-सामने की भिड़ंत हो गई थी। फिलहाल पुलिस पूरे मामले को लेकर जांच करने में जुटी हुई है।1
- भावुक विदाई: जब रामपुर के कप्तान की रवानगी पर छलक पड़े पुलिसकर्मियों के आंसू रामपुर (उत्तर प्रदेश): अक्सर पुलिस महकमे में अधिकारियों के तबादले एक सामान्य प्रक्रिया माने जाते हैं, जहाँ विदाई समारोह महज एक औपचारिकता बनकर रह जाते हैं। लेकिन रामपुर के एसपी आईपीएस विद्यासागर मिश्र की विदाई ने एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने यह साबित कर दिया कि एक अधिकारी अपने व्यवहार और संवेदनशीलता से लोगों के दिलों में कितनी गहरी जगह बना सकता है। परंपरा से हटकर भावुक हुआ माहौल राजस्थान और उत्तर भारत के कई हिस्सों में आईपीएस अधिकारियों की विदाई के समय घोड़ी, गाजे-बाजे और शाही अंदाज की परंपरा रही है। हालांकि, रामपुर में नजारा इससे बिल्कुल अलग और दिल को छू लेने वाला था। यहाँ भव्यता से ज्यादा भावनाओं का सैलाब देखने को मिला। क्यों नम हुईं स्टाफ की आंखें? विदाई समारोह के दौरान जैसे ही एसपी विद्यासागर मिश्र की रवानगी का समय आया, वहां मौजूद पुलिस स्टाफ खुद को संभाल नहीं पाया। कई जवानों और अधिकारियों की आंखें नम हो गईं। इसकी मुख्य वजहें थीं: संवेदनशील व्यवहार: आईपीएस मिश्र को केवल एक कड़क अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि एक संवेदनशील इंसान के रूप में जाना गया। कार्यशैली: उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान स्टाफ के साथ एक परिवार के मुखिया जैसा व्यवहार किया। लोकप्रियता: उनकी इंसानियत और मिलनसार स्वभाव ने उन्हें पुलिस महकमे के हर छोटे-बड़े कर्मचारी के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया था। एक मिसाल बनी विदाई जहाँ आज के दौर में पुलिस की छवि अक्सर कठोर मानी जाती है, वहीं विद्यासागर मिश्र की विदाई का यह दृश्य इस बात का प्रमाण है कि यदि नेतृत्व में इंसानियत और व्यवहार कुशलता हो, तो वह एक यादगार भावनात्मक जुड़ाव पैदा कर सकता है। रामपुर के लिए यह पल केवल एक तबादला नहीं, बल्कि एक ऐसे 'अभिभावक' की रवानगी थी जिसने खाकी के पीछे छिपे मानवीय चेहरे को उजागर किया। "विदाई तो सिर्फ एक औपचारिकता थी, असली विदाई तो उन आंसुओं ने दी जो स्टाफ की आंखों से उनके सम्मान में निकले।"1
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