कॉन्स्टेबल ने बुजुर्ग संत पर दिखाई दबंगता, मारपीट का आरोप, ग्रामीणों ने सख्त कार्यवाही की मांग की। दैनिक वीरधरा राजस्थान। बेंगु। नन्दवाई पुलिस चौकी में तैनात एक कांस्टेबल पर संत-महात्मा के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार और मारपीट करने का आरोप लगा है। इस घटना के बाद इलाके में काफी चर्चा हो रही है। बताया जा रहा है कि शौचालय को लेकर हुए विवाद के बाद कांस्टेबल गोकुल लाल मीणा ने संत-महात्मा के साथ मारपीट की। इस मामले को लेकर संत समाज और स्थानीय लोगों में काफी नाराजगी है। बनन्दवाई के लोगों ने पुलिस के बड़े अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद बेगूं डीएसपी अंकित कुड़ी, पारसोली थाना अधिकारी आशुतोष सिंह, एएसआई रामदयाल, हेड कांस्टेबल मिश्री लाल और चांद मल खटीक अपनी टीम के साथ नन्दवाई कस्बे पहुंचे। उन्होंने गांव वालों और संत-महात्मा से बातचीत की। देर रात तक यह मामला शांत हुआ। मामला सामने आने के बाद जिला पुलिस अधीक्षक ने तुरन्त कांस्टेबल गोकुल लाल मीणा को चित्तौड़गढ़ लाइन हाजिर कर दिया। ग्रामीण निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने पर उचित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। हालांकि पुलिस ने अभी तक इस घटना पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
कॉन्स्टेबल ने बुजुर्ग संत पर दिखाई दबंगता, मारपीट का आरोप, ग्रामीणों ने सख्त कार्यवाही की मांग की। दैनिक वीरधरा राजस्थान। बेंगु। नन्दवाई पुलिस चौकी में तैनात एक कांस्टेबल पर संत-महात्मा के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार और मारपीट करने का आरोप लगा है। इस घटना के बाद इलाके में काफी चर्चा हो रही है। बताया जा रहा है कि शौचालय को लेकर हुए विवाद के बाद कांस्टेबल गोकुल लाल मीणा ने संत-महात्मा के साथ मारपीट की। इस मामले को लेकर संत समाज और स्थानीय लोगों में काफी नाराजगी है। बनन्दवाई के लोगों ने पुलिस के बड़े अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद बेगूं डीएसपी अंकित कुड़ी, पारसोली थाना अधिकारी आशुतोष सिंह, एएसआई रामदयाल, हेड कांस्टेबल मिश्री लाल और चांद मल खटीक अपनी टीम के साथ नन्दवाई कस्बे पहुंचे। उन्होंने गांव वालों और संत-महात्मा से बातचीत की। देर रात तक यह मामला शांत हुआ। मामला सामने आने के बाद जिला पुलिस अधीक्षक ने तुरन्त कांस्टेबल गोकुल लाल मीणा को चित्तौड़गढ़ लाइन हाजिर कर दिया। ग्रामीण निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने पर उचित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। हालांकि पुलिस ने अभी तक इस घटना पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
- धनेतकलां में एक महीने में चार मौतों का असर, जन्माष्टमी पर कृष्ण मंदिर में कम दिखी भीड़ एक महीने में चार मौतों से धनेतकलां गांव में छाया गम का साया, जन्माष्टमी पर कृष्ण मंदिर में पहले की अपेक्षा कम दिखी भीड़, फिर भी श्रद्धालुओं की रही अच्छी खासी मौजूदगी — सामने आया जन्माष्टमी का वीडियो #धनेतकलां #चित्तौड़गढ़ #जन्माष्टमी #कृष्णजन्माष्टमी #कृष्णमंदिर #Janmashtami2026 #DhanetKalan #Chittorgarh #HelloChittorgarhNews #RajasthanNews1
- चित्तौड़गढ़ CP Joshi का दावा: चित्तौड़गढ़ में फिर लहराएगा BJP का परचम, बोर्ड बनना तय!1
- कॉन्स्टेबल ने बुजुर्ग संत पर दिखाई दबंगता, मारपीट का आरोप, ग्रामीणों ने सख्त कार्यवाही की मांग की। दैनिक वीरधरा राजस्थान। बेंगु। नन्दवाई पुलिस चौकी में तैनात एक कांस्टेबल पर संत-महात्मा के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार और मारपीट करने का आरोप लगा है। इस घटना के बाद इलाके में काफी चर्चा हो रही है। बताया जा रहा है कि शौचालय को लेकर हुए विवाद के बाद कांस्टेबल गोकुल लाल मीणा ने संत-महात्मा के साथ मारपीट की। इस मामले को लेकर संत समाज और स्थानीय लोगों में काफी नाराजगी है। बनन्दवाई के लोगों ने पुलिस के बड़े अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद बेगूं डीएसपी अंकित कुड़ी, पारसोली थाना अधिकारी आशुतोष सिंह, एएसआई रामदयाल, हेड कांस्टेबल मिश्री लाल और चांद मल खटीक अपनी टीम के साथ नन्दवाई कस्बे पहुंचे। उन्होंने गांव वालों और संत-महात्मा से बातचीत की। देर रात तक यह मामला शांत हुआ। मामला सामने आने के बाद जिला पुलिस अधीक्षक ने तुरन्त कांस्टेबल गोकुल लाल मीणा को चित्तौड़गढ़ लाइन हाजिर कर दिया। ग्रामीण निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने पर उचित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। हालांकि पुलिस ने अभी तक इस घटना पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।1
- दामाखेड़ा में सांस्कृतिक कार्यक्रम करते हुए भील जाति की सांस्कृतिक कार्यक्रम गवरी का खेल1
- विकास के दावों की खुली पोल:5 साल से श्मशान घाट में टिनशेड का इंतजार विकास के दावों की खुली पोल: 5 साल से श्मशान घाट में टीनशेड का इंतजार! धूप हो या बारिश... खुले आसमान के नीचे अंतिम संस्कार को मजबूर ग्रामीण, सरपंच से विधायक तक के विकास दावों पर उठे सवाल भीलवाड़ा जिले की सहाड़ा विधानसभा क्षेत्र। ग्राम पंचायत चीड़ खेड़ा में विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच श्मशान घाट की बदहाल स्थिति जिम्मेदारों के दावों पर सवाल खड़े कर रही है। गांव में निर्माण कार्यों और सुविधाओं की तस्वीर भले ही विकास की कहानी बयां करती हो, लेकिन अंतिम विदाई की जगह आज भी मूलभूत सुविधा के लिए तरस रही है। ग्रामीणों के अनुसार करीब पांच साल से श्मशान घाट में टीनशेड लगाने की मांग की जा रही है, लेकिन वर्षों गुजरने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। गर्मी के दिनों में चिलचिलाती धूप और बारिश के मौसम में बरसते पानी के बीच अंतिम संस्कार करने वाले परिजनों और ग्रामीणों को खुले आसमान के नीचे खड़े रहने की मजबूरी रहती है। एक तरफ सराय, दूसरी तरफ श्मशान घाट बदहाल ग्रामीणों का कहना है कि गांव में लोगों के बैठने के लिए सराय का निर्माण हो गया, लेकिन जिस स्थान पर ग्रामीणों को अपने प्रियजनों को अंतिम विदाई देनी पड़ती है, वहां आज तक एक साधारण टीनशेड तक नहीं लग पाया। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि विकास की प्राथमिकता में श्मशान घाट आखिर कब आएगा? पांच साल से आश्वासन, समाधान अब भी दूर ग्रामीणों के मुताबिक कई बार जिम्मेदारों के सामने समस्या रखी गई, लेकिन हर बार आश्वासन ही मिला। पांच साल का लंबा समय बीत जाने के बाद भी टीनशेड नहीं लगना ग्रामीणों में नाराजगी का कारण बना हुआ है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब गांव में अन्य निर्माण कार्यों के लिए योजनाएं और बजट उपलब्ध हो सकते हैं, तो श्मशान घाट जैसी आवश्यक सुविधा के लिए आखिर क्यों इंतजार करना पड़ रहा है? अंतिम विदाई भी विकास की प्राथमिकता में शामिल नहीं? जिस परिवार ने अपना सदस्य खोया हो, उसके लिए अंतिम संस्कार का समय पहले ही बेहद पीड़ादायक होता है। ऐसे में धूप और बारिश के बीच खुले आसमान के नीचे अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करना परिजनों के लिए परेशानी को और बढ़ा देता है। ग्रामीणों का कहना है—“विकास के दावे बहुत सुन लिए, अब श्मशान घाट में टीनशेड लगाकर विकास जमीन पर दिखाईए।” प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से तत्काल समाधान की मांग ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से श्मशान घाट की समस्या को गंभीरता से लेते हुए तत्काल टीनशेड, बैठने की व्यवस्था और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। अब सवाल यह है कि पांच साल से लंबित यह मांग आखिर कब पूरी होगी? क्या जिम्मेदार इस समस्या का स्थायी समाधान करेंगे या फिर श्मशान घाट भी विकास के दावों की तरह सिर्फ कागजों में ही सिमटा रहेगा?1
- संगेसरा गांव राम रसोड़ा में आरती करते हुए पैदल जाने वाले अर्थ यात्री सेवा में खड़े हुए थे सभी ग्रामवासी1
- भीलवाड़ा बड़ला चौराहा की होटलों में सजी चुनावी चौपाल, फाइनल लिस्ट के बाद बढ़ी सियासी हलचल बड़ला चौराहा की होटलों में सजी चुनावी चौपाल, फाइनल लिस्ट के बाद बढ़ी सियासी हलचल भीलवाड़ा। नगर निगम निकाय चुनाव को लेकर प्रत्याशियों की फाइनल लिस्ट सामने आने के बाद शहर में चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। नामांकन वापसी और प्रत्याशियों की स्थिति साफ होने के बाद अब चुनावी चर्चाओं का दौर भी अपने चरम पर पहुंचता नजर आ रहा है। शहर के बड़ला चौराहा और शास्त्री नगर क्षेत्र की होटलों में इन दिनों चुनावी चर्चाएं खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। आसपास बड़ी संख्या में वार्ड होने के चलते सुबह से लेकर देर शाम तक अलग-अलग राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों से जुड़े समर्थकों की आवाजाही दिखाई दे रही है। होटलों पर कहीं प्रत्याशियों के जीत-हार के समीकरण लगाए जा रहे हैं, तो कहीं यह चर्चा चल रही है कि किस वार्ड में कौन प्रत्याशी मजबूत स्थिति में है। कौन किसके सामने भारी पड़ सकता है, किस प्रत्याशी का अपने क्षेत्र में प्रभाव है और किसके पक्ष में मतदाताओं का रुझान बन रहा है—इन तमाम मुद्दों पर चाय की चुस्कियों के साथ चुनावी मंथन जारी है। खास बात यह है कि चर्चाओं में प्रत्याशियों के व्यवहार, व्यक्तिगत संपर्क, पुराने राजनीतिक अनुभव और मतदाताओं से जुड़ाव तक का विश्लेषण किया जा रहा है। वहीं कई लोग अलग-अलग बूथों के समीकरणों को लेकर भी अपने-अपने दावे और आकलन पेश कर रहे हैं। हालांकि होटल की इन चुनावी चौपालों में लगाए जा रहे जीत-हार के आंकड़े और दावे अभी सिर्फ राजनीतिक चर्चाओं और समर्थकों के आकलन तक सीमित हैं। असली तस्वीर तो मतदान और मतगणना के बाद ही साफ होगी। फिलहाल बड़ला चौराहा और शास्त्री नगर क्षेत्र की होटलें चुनावी चर्चाओं का नया केंद्र बन गई हैं और जैसे-जैसे मतदान का दिन नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे इन चर्चाओं में भी गर्माहट बढ़ती जा रही है। यानी भीलवाड़ा में चुनाव मैदान के साथ-साथ अब होटल की मेजों पर भी चुनावी रणनीति और जीत-हार का गणित खूब दिखाई दे रहा है।1
- चित्तौड़गढ़ निकाय चुनाव में सियासी संग्राम, ‘मिशन 60’ बनाम कांग्रेस की साख! 2014 का ‘कमल’ या 2019 का ‘हाथ’? चित्तौड़गढ़ के 60 वार्डों में सियासी शह-मात का खेल, ‘मिशन 60’ के सामने कांग्रेस की साख और निर्दलीयों की चुनौती!1