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कांतिलाल मकवाना कांतिलाल मकवाना मारो राजस्थान वेयर इस 5769
Kantilal Makvana
कांतिलाल मकवाना कांतिलाल मकवाना मारो राजस्थान वेयर इस 5769
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- Post by Kantilal Makvana1
- कुशलगढ़ जिला बांसवाड़ा राजस्थान रिपोर्टर धर्मेन्द्र कुमार सोनी (भारत माता मंदिर परिसर में गैर नूत्य की रहीं धुम दुर दराज व अनेक गांवों से आए लोगों ने लिया भाग) राजस्थान के बांसवाड़ा में स्थित विश्व हिन्दू परिषद के नेतृत्व में भारत माता मंदिर परिसर राती तलाई में आज होली के पर्व पर गैर नूत्य का आयोजन किया गया जिसमें दुर दराज व अलग-अलग गांवों से संगठन के लोग आए और जम कर गैर नूत्य किया जीसे बांसवाड़ा नगर सहित अन्य लोग भी इस धार्मिक कार्यक्रम में शामिल रहे2
- छींच क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल श्री सिद्धि विनायक गणेश मंदिर में होली के पावन पर्व के उपलक्ष्य में भव्य फागोत्सव का आयोजन किया गया। भक्ति और उल्लास के इस संगम में श्रद्धालु पूरी तरह सराबोर नजर आए। मंदिर परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में गुलाल के रंगों और भजनों की स्वर लहरियों ने ऐसा समां बांधा कि हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया। मंदिर समिति के वालेंग राठौड़ ने बताया कि कार्यक्रम का आगाज भगवान गणेश के विशेष श्रृंगार और आरती के साथ हुआ। इसके पश्चात आयोजित भजन संध्या में पुरुष वर्ग ने मोर्चा संभाला। पुरुष श्रद्धालुओं ने पारंपरिक होली गीतों और फाग के भजनों की ऐसी प्रस्तुति दी कि पूरा परिसर 'गणपति बप्पा मोरया' और 'होली है' के जयकारों से गूंज उठा। चंग की थाप और ढोलक की जुगलबंदी पर गाए गए लोकगीतों ने वातावरण को पूरी तरह फागुनी रंग में रंग दिया। एक ओर जहाँ पुरुष वर्ग अपनी गायकी से भगवान को रिझा रहा था, वहीं दूसरी ओर महिला श्रद्धालुओं ने उत्साह और उमंग के साथ फागोत्सव के आनंद को दोगुना कर दिया। महिलाओं ने पारंपरिक वागड़ी लोकगीतों पर सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया। केसरिया और फागुनी परिधानों में सजी महिलाओं ने गुलाल की होली खेलकर अपनी खुशी का इजहार किया। श्रद्धा और संस्कृति के इस अनूठे मेल ने उपस्थित सभी भक्तों का मन मोह लिया। फागोत्सव में उपस्थित महिलाओं ने बताया कि "फागोत्सव हमारी सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। भगवान गणेश के चरणों में भजनों और नृत्य के माध्यम से अपनी हाजिरी लगाना परम सुखद अनुभव है।" उत्सव के अंत में श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। मंदिर मंडल की ओर से सुरक्षा और दर्शन की विशेष व्यवस्था की गई थी। कार्यक्रम के समापन पर भगवान को विशेष भोग लगाया गया और उपस्थित सभी भक्तों में प्रसाद का वितरण किया गया। इस फागोत्सव ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया, बल्कि सामाजिक समरसता और मेल-जोल का संदेश भी दिया। देर शाम तक चले इस उत्सव में छींच सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।4
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