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Munchun Kumar
- User10171Behea, Bhojpur🤝4 hrs ago
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- Post by Munchun Kumar1
- लोहार समुदाय के लिए आरक्षण का प्रावधान पुराना है और यह कोई नया विषय नहीं है। यह पूरा मामला सिर्फ 'Lohara' शब्द के हिंदी सुधार से संबंधित है।1
- भोजपुर जिले के आरा सदर प्रखंड अंतर्गत बारा-बसंतपुर गांव में परम पूज्य जीयर स्वामी जी महाराज के सान्निध्य में श्री सूर्यनारायण प्राण प्रतिष्ठात्मक सूर्य महायज्ञ का शुभारंभ शनिवार को किया गया। यह धार्मिक आयोजन भव्य जलयात्रा और वरुण पूजन के साथ प्रारंभ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पूजा-अर्चना की और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। आयोजन समिति के अनुसार, यह महायज्ञ 27 जून से 3 जुलाई 2026 तक चलेगा। इस दौरान प्रतिदिन वैदिक रीति-रिवाजों के साथ विभिन्न अनुष्ठान संपन्न होंगे, जिनमें मंडप पूजन, हवन, अरणी मंथन, जलाधिवास, अन्नाधिवास, पुष्पाधिवास, महास्नान, नगर भ्रमण, प्राण प्रतिष्ठा, गंगा आरती और हवन पूर्णाहुति शामिल हैं। महायज्ञ के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में 1 जुलाई को भगवान श्री सूर्यनारायण की प्राण प्रतिष्ठा तथा संध्या में भव्य गंगा आरती का आयोजन होगा। इसके बाद, 3 जुलाई को हवन पूर्णाहुति, एक विशाल भंडारा और विदाई समारोह के साथ इस महायज्ञ का समापन किया जाएगा। इस महायज्ञ के यज्ञाचार्य पंडित ब्रह्मेश्वर मिश्रा (आरा) हैं। आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं से इस पुण्य अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर धर्म लाभ लेने तथा महायज्ञ में सहयोग करने की अपील की है। वर्तमान में पूरे क्षेत्र का वातावरण वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और श्रद्धालुओं की गहरी आस्था से भक्तिमय बना हुआ है।1
- जगदीशपुर में गायत्री परिवार द्वारा एक तीन दिवसीय महायज्ञ का आरंभ हुआ है। इस महायज्ञ की शुरुआत जलभरी के अनुष्ठान के साथ की गई, जिसमें कई श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।1
- जितन राम मांझी के पुत्र और मंत्री संतोष सुमन का आरा आगमन हुआ है।1
- भोजपुर जिले के आरा सदर प्रखंड अंतर्गत भकुरा पंचायत के बसंतपुर गांव में शनिवार, 27 जून 2026 को जियर स्वामी जी महाराज के तत्वावधान में एक भव्य जलभरी यात्रा का आयोजन किया गया। इस धार्मिक आयोजन में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने कलश लेकर भाग लिया, जिससे पूरे गांव में भक्तिमय वातावरण छा गया। पारंपरिक रीति-रिवाजों और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच निकली इस ऐतिहासिक जलभरी यात्रा में महिला, पुरुष, युवा और बच्चों सभी ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। श्रद्धालुओं के जयघोष, भजन-कीर्तन और श्रद्धा से सराबोर माहौल ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया। आयोजकों के अनुसार, यह जलभरी यात्रा वर्षों से चली आ रही एक धार्मिक परंपरा का हिस्सा है, और इस बार श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने आयोजन को और भी भव्य एवं ऐतिहासिक बना दिया।1
- यह संदेश दिया गया है कि गाँव के लोगों को किसी भी समस्या के खिलाफ अपनी आवाज़ उठानी चाहिए। यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि लोग अपनी आवाज़ उठाएँगे, तो इससे देश में सुधार आएगा।1
- एक व्यक्ति की मुस्कराहट को देखकर यह विचार व्यक्त किया गया कि वे निश्चित रूप से कुछ सकारात्मक कार्य कर रहे हैं, जिससे उनके चेहरे पर खुशी झलक रही है।2