वोट आपका… मुद्दे किसके? तिरहुत स्नातक चुनाव में छात्रों की आवाज कहां? तिरहुत स्नातक क्षेत्र चुनाव को लेकर प्रत्याशी शिक्षकों की समस्याओं और उनके मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहे हैं, लेकिन स्नातक छात्रों की समस्याएं चुनावी चर्चा से दूर दिखाई दे रही हैं। खास बात यह है कि इन्हीं स्नातक छात्रों के वोट से प्रत्याशियों की जीत-हार तय होनी है। दूसरी ओर छात्र अपनी मांगों को लेकर आंदोलन की राह पर हैं। 30 सितंबर से विश्वविद्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन और इसके बाद अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का ऐलान किया गया है। तिरहुत स्नातक क्षेत्र चुनाव के बीच स्नातक छात्रों के मुद्दों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। छात्र-छात्राएं लंबे समय से विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, नामांकन शुल्क, छात्रावास और प्रशासनिक समस्याओं को लेकर अपनी मांगें उठा रहे हैं। इसके बावजूद चुनावी मैदान में इन मुद्दों की चर्चा अपेक्षाकृत कम दिखाई दे रही है। छात्रों की प्रमुख मांगों में विश्वविद्यालय के विभागों और महाविद्यालयों में सभी वर्गों की छात्राओं तथा SC/ST छात्रों से नामांकन शुल्क लेने पर रोक लगाने की मांग शामिल है। साथ ही पूर्व के शैक्षणिक सत्रों में लिए गए नामांकन शुल्क को वापस करने की मांग भी की गई है। छात्रों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति यानी NEP के अनुरूप शैक्षणिक व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने की मांग की है। इसके अलावा लंगट सिंह महाविद्यालय के बंद पड़े सभी छात्रावासों को तत्काल खोलने और छात्र-छात्राओं को छात्रावास आवंटित करने की मांग भी प्रमुख है। ड्यूक हॉस्टल के बंद होने का मुद्दा भी छात्रों के बीच लगातार उठाया जा रहा है। छात्रों ने विश्वविद्यालय में व्याप्त शैक्षणिक अराजकता, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक समस्याओं को दूर कर व्यवस्था को सुचारु और पारदर्शी बनाने की मांग रखी है। इन्हीं मांगों को लेकर छात्र-छात्राओं ने 30 सितंबर को विश्वविद्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। इसके बाद छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने जा रहे हैं। ऐसे में तिरहुत स्नातक क्षेत्र चुनाव के बीच सवाल यह है कि जिस स्नातक वोट की बदौलत प्रत्याशी चुनाव जीतने की उम्मीद कर रहे हैं, क्या उन्हीं स्नातक छात्रों के मुद्दे भी चुनावी चर्चा और प्रत्याशियों के एजेंडे का हिस्सा बनेंगे?
वोट आपका… मुद्दे किसके? तिरहुत स्नातक चुनाव में छात्रों की आवाज कहां? तिरहुत स्नातक क्षेत्र चुनाव को लेकर प्रत्याशी शिक्षकों की समस्याओं और उनके मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहे हैं, लेकिन स्नातक छात्रों की समस्याएं चुनावी चर्चा से दूर दिखाई दे रही हैं। खास बात यह है कि इन्हीं स्नातक छात्रों के वोट से प्रत्याशियों की जीत-हार तय होनी है। दूसरी ओर छात्र अपनी मांगों को लेकर आंदोलन की राह पर हैं। 30 सितंबर से विश्वविद्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन और इसके बाद अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का ऐलान किया गया है। तिरहुत स्नातक क्षेत्र चुनाव के बीच स्नातक छात्रों के मुद्दों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। छात्र-छात्राएं लंबे समय से विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, नामांकन शुल्क, छात्रावास और प्रशासनिक समस्याओं को लेकर अपनी मांगें उठा रहे हैं। इसके बावजूद चुनावी मैदान में इन मुद्दों की चर्चा अपेक्षाकृत कम दिखाई दे रही है। छात्रों की प्रमुख मांगों में विश्वविद्यालय के विभागों और महाविद्यालयों में सभी वर्गों की छात्राओं तथा SC/ST छात्रों से नामांकन शुल्क लेने पर रोक लगाने की मांग शामिल है। साथ ही पूर्व के शैक्षणिक सत्रों में लिए गए नामांकन शुल्क को वापस करने की मांग भी की गई है। छात्रों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति यानी NEP के अनुरूप शैक्षणिक व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने की मांग की है। इसके अलावा लंगट सिंह महाविद्यालय के बंद पड़े सभी छात्रावासों को तत्काल खोलने और छात्र-छात्राओं को छात्रावास आवंटित करने की मांग भी प्रमुख है। ड्यूक हॉस्टल के बंद होने का मुद्दा भी छात्रों के बीच लगातार उठाया जा रहा है। छात्रों ने विश्वविद्यालय में व्याप्त शैक्षणिक अराजकता, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक समस्याओं को दूर कर व्यवस्था को सुचारु और पारदर्शी बनाने की मांग रखी है। इन्हीं मांगों को लेकर छात्र-छात्राओं ने 30 सितंबर को विश्वविद्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। इसके बाद छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने जा रहे हैं। ऐसे में तिरहुत स्नातक क्षेत्र चुनाव के बीच सवाल यह है कि जिस स्नातक वोट की बदौलत प्रत्याशी चुनाव जीतने की उम्मीद कर रहे हैं, क्या उन्हीं स्नातक छात्रों के मुद्दे भी चुनावी चर्चा और प्रत्याशियों के एजेंडे का हिस्सा बनेंगे?
- वोट आपका… मुद्दे किसके? तिरहुत स्नातक चुनाव में छात्रों की आवाज कहां? तिरहुत स्नातक क्षेत्र चुनाव को लेकर प्रत्याशी शिक्षकों की समस्याओं और उनके मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहे हैं, लेकिन स्नातक छात्रों की समस्याएं चुनावी चर्चा से दूर दिखाई दे रही हैं। खास बात यह है कि इन्हीं स्नातक छात्रों के वोट से प्रत्याशियों की जीत-हार तय होनी है। दूसरी ओर छात्र अपनी मांगों को लेकर आंदोलन की राह पर हैं। 30 सितंबर से विश्वविद्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन और इसके बाद अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का ऐलान किया गया है। तिरहुत स्नातक क्षेत्र चुनाव के बीच स्नातक छात्रों के मुद्दों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। छात्र-छात्राएं लंबे समय से विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, नामांकन शुल्क, छात्रावास और प्रशासनिक समस्याओं को लेकर अपनी मांगें उठा रहे हैं। इसके बावजूद चुनावी मैदान में इन मुद्दों की चर्चा अपेक्षाकृत कम दिखाई दे रही है। छात्रों की प्रमुख मांगों में विश्वविद्यालय के विभागों और महाविद्यालयों में सभी वर्गों की छात्राओं तथा SC/ST छात्रों से नामांकन शुल्क लेने पर रोक लगाने की मांग शामिल है। साथ ही पूर्व के शैक्षणिक सत्रों में लिए गए नामांकन शुल्क को वापस करने की मांग भी की गई है। छात्रों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति यानी NEP के अनुरूप शैक्षणिक व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने की मांग की है। इसके अलावा लंगट सिंह महाविद्यालय के बंद पड़े सभी छात्रावासों को तत्काल खोलने और छात्र-छात्राओं को छात्रावास आवंटित करने की मांग भी प्रमुख है। ड्यूक हॉस्टल के बंद होने का मुद्दा भी छात्रों के बीच लगातार उठाया जा रहा है। छात्रों ने विश्वविद्यालय में व्याप्त शैक्षणिक अराजकता, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक समस्याओं को दूर कर व्यवस्था को सुचारु और पारदर्शी बनाने की मांग रखी है। इन्हीं मांगों को लेकर छात्र-छात्राओं ने 30 सितंबर को विश्वविद्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। इसके बाद छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने जा रहे हैं। ऐसे में तिरहुत स्नातक क्षेत्र चुनाव के बीच सवाल यह है कि जिस स्नातक वोट की बदौलत प्रत्याशी चुनाव जीतने की उम्मीद कर रहे हैं, क्या उन्हीं स्नातक छात्रों के मुद्दे भी चुनावी चर्चा और प्रत्याशियों के एजेंडे का हिस्सा बनेंगे?1
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- 🔴 बड़ी खबर | शिक्षक स्थानांतरण पर भावपूर्ण विदाई समारोह 📍 बखरी दोआ, वैशाली: पीएम श्री उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बखरी दोआ में सोमवार को शिक्षक स्थानांतरण के बाद विदाई समारोह आयोजित किया गया। विद्यालय परिवार की ओर से पूर्व प्रभारी प्राचार्य भोला दास, मनोज कुमार सिन्हा एवं शिक्षिका सोनी कुमारी को विधिवत विदाई दी गई। समारोह से पहले चेहराकलां BEO मो. इस्माइल अंसारी ने विद्यालय का औचक निरीक्षण किया। कक्षा में एक शिक्षक को बेहतर ढंग से पढ़ाते देख BEO ने प्रसन्नता जताई और उन्हें क्लास ऑफिस रूम में फूल-माला पहनाकर सम्मानित किया। इसके बाद BEO ने स्थानांतरित शिक्षकों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं और नए विद्यालय में भी बच्चों के हित में निष्ठा एवं समर्पण के साथ कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया। विद्यालय से कुल सात शिक्षकों का स्थानांतरण हुआ है। शिक्षिका रुपाली कुमारी अपने नए विद्यालय में पहले ही योगदान कर चुकी हैं। विदाई समारोह में प्रभारी प्राचार्य रमण प्रसाद सुधांशु ने कहा— “राजतिलक होने वाला था, आज वनवास हुआ।” उन्होंने भगवान राम के धैर्य का उदाहरण देते हुए शिक्षकों से हर परिस्थिति में कर्तव्य के प्रति समर्पित रहने का संदेश दिया। विद्यालय परिवार ने सभी स्थानांतरित शिक्षकों के उज्ज्वल भविष्य और नए कार्यस्थल पर बेहतर योगदान की कामना की। सत्यम ग्राम न्यूज़ | ग्राम की खबर सबसे पहले!1
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