आतंक का प्रयाय बना एस्टरॉइड अब रोमांच बनकर आ रहा पृथ्वी के करीब पृथ्वी से टकराने को लेकर कुछ वर्ष पहले ,कभी आतंक का प्रयाय रहा एस्टरॉइड Apophis (99942 Apophis) अब रोमांच के साथ आ हमारे करीब आ रहा है। इसके धरती से टकराने की कोई गुंजाइश नहीं, जिसे नासा पहले से ही खारिज कर चुका है। अब नई जानकारी आ रही है कि वह हमारे इतने करीब आएगा कि धरती के कई हिस्सों से दिखाई देगा। ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण एशिया, दक्षिण यूरोप, अफ्रीका से इसे बखूबी देखा जा सकता है। खास बात यह है कि इस एस्टरॉइड को देखने और कैमरे में कैद करने के लिए अभी से तैयारियां शुरू होने लगी है। 3 साल बाद, 13 अप्रैल 2029 (शुक्रवार) को एस्टरॉइड Apophis पृथ्वी के बहुत पास से गुजरेगा। यह इतना चमकदार होगा कि बिना दूरबीन के भी कुछ जगहों से दिख सकता है। यह लगभग 340 मीटर (1100 फीट) व्यास का है । एक बड़े फुटबॉल स्टेडियम जितना विशाल है। यदि पृथ्वी से टकरा जाए तो सैकड़ों किमी हिस्से को पलक झपकते ही तबाह कर जाता और हजारों किमी दायरा धूल के गुबार में समा जाता। इसका परिणाम इतना खतरनाक होता कि करोड़ों जीव जंतुओं का जीवन समाप्त कर जाता। बहरहाल अब ऐसा नहीं होने वाला है और यदि इसके टकराने की संभावना होती तो इसे वैज्ञानिक आसमान में ही निबटा देते। बहरहाल अब यह 13 अप्रैल 2029 यानी ठीक 3 साल बाद हमारे करीब पहुंचेगा। तब पृथ्वी की सतह से इसकी दूरी सिर्फ 31,643 किलोमीटर (19,662 मील) दूर रह जाएगी, जबकि चंद्रमा की पृथ्वी से औसतन दूरी 3,84,000 किमी है। इसका मतलब है कि यह हमारे बेहद करीब आने जा रहा है। खास बात यह है कि तब यह इतना चमकेगा कि नग्न आंखों से देखा जा सकेगा। यही कारण है कि अब यह रोमांच बनकर आ रहा है और लोगों को इसे देखने की होड़ अभी से नजर आ रही है। 2004 में जब इसे खोजा गया, तो शुरुआती गणना में 2029 में पृथ्वी से टकराने की 2.7 प्रतिशत संभावना बताई गई थी। तब मीडिया में जैसे हंगामा ही मच गया था। तब झूठी खबरें चलाई जा रही थी कि यह 13 अप्रैल 2013 में पृथ्वी से टकरा जाएगा। मनगढ़ंत कहानियों से टीवी चैनल भरे पड़े थे। मीडिया की बेतुकी हरकतों से कमसेकम खगोल वैज्ञानिक बेहद हैरान हुए थे और मीडिया की खासकर टीवी चैनलों की खूब किरकिरी हुई थी। टीवी चैनलों ने खासकर 13 अंक को टारगेट किया था कि यह अंक खतरनाक होता है। बस 13 के अंक पर भी इतनी कहानियां गढ़ी गई कि 21वीं सदी में अंध विश्वास की हद नहीं थी। टीवी चैनलों की खबरें मज़ाक बनकर रह गई थी। मुझे याद है कि तब एरीज के वैज्ञानिक डा शशिभूषण पांडेय और आई आई ए बंगलुरु के खगोल वैज्ञानिक प्रो आर सी कपूर से अक्सर फोन पर बातें हुआ करती थी। अब प्रो आर सी कपूर हमारे बीच नहीं रहे। एपोफिस की हकीकत को लेकर तब मीडिया मजाक बनकर रह गया था Apophis के मिलने के साथ ही 2004 में मैने दैनिक जागरण में पहली स्टोरी लिखी थी और इसी समाचार पत्र में तब से आज तक करीब दो दर्जन से अधिक। स्टोरी लिख चुका हूं। फिलहाल अब इसके करीब पहुंचने का इंतजार रहेगा । फोटो : NASA श्रोत: Dr Shashibhushan Pandey, ARIES
आतंक का प्रयाय बना एस्टरॉइड अब रोमांच बनकर आ रहा पृथ्वी के करीब पृथ्वी से टकराने को लेकर कुछ वर्ष पहले ,कभी आतंक का प्रयाय रहा एस्टरॉइड Apophis (99942 Apophis) अब रोमांच के साथ आ हमारे करीब आ रहा है। इसके धरती से टकराने की कोई गुंजाइश नहीं, जिसे नासा पहले से ही खारिज कर चुका है। अब नई जानकारी आ रही है कि वह हमारे इतने करीब आएगा कि धरती के कई हिस्सों से दिखाई देगा। ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण एशिया, दक्षिण यूरोप, अफ्रीका से इसे बखूबी देखा जा सकता है। खास बात यह है कि इस एस्टरॉइड को देखने और कैमरे में कैद करने के लिए अभी से तैयारियां शुरू होने लगी है। 3 साल बाद, 13 अप्रैल 2029 (शुक्रवार) को एस्टरॉइड Apophis पृथ्वी के बहुत पास से गुजरेगा। यह इतना चमकदार होगा कि बिना
दूरबीन के भी कुछ जगहों से दिख सकता है। यह लगभग 340 मीटर (1100 फीट) व्यास का है । एक बड़े फुटबॉल स्टेडियम जितना विशाल है। यदि पृथ्वी से टकरा जाए तो सैकड़ों किमी हिस्से को पलक झपकते ही तबाह कर जाता और हजारों किमी दायरा धूल के गुबार में समा जाता। इसका परिणाम इतना खतरनाक होता कि करोड़ों जीव जंतुओं का जीवन समाप्त कर जाता। बहरहाल अब ऐसा नहीं होने वाला है और यदि इसके टकराने की संभावना होती तो इसे वैज्ञानिक आसमान में ही निबटा देते। बहरहाल अब यह 13 अप्रैल 2029 यानी ठीक 3 साल बाद हमारे करीब पहुंचेगा। तब पृथ्वी की सतह से इसकी दूरी सिर्फ 31,643 किलोमीटर (19,662 मील) दूर रह जाएगी, जबकि चंद्रमा की पृथ्वी से औसतन दूरी 3,84,000 किमी है। इसका मतलब है कि यह हमारे बेहद करीब आने
जा रहा है। खास बात यह है कि तब यह इतना चमकेगा कि नग्न आंखों से देखा जा सकेगा। यही कारण है कि अब यह रोमांच बनकर आ रहा है और लोगों को इसे देखने की होड़ अभी से नजर आ रही है। 2004 में जब इसे खोजा गया, तो शुरुआती गणना में 2029 में पृथ्वी से टकराने की 2.7 प्रतिशत संभावना बताई गई थी। तब मीडिया में जैसे हंगामा ही मच गया था। तब झूठी खबरें चलाई जा रही थी कि यह 13 अप्रैल 2013 में पृथ्वी से टकरा जाएगा। मनगढ़ंत कहानियों से टीवी चैनल भरे पड़े थे। मीडिया की बेतुकी हरकतों से कमसेकम खगोल वैज्ञानिक बेहद हैरान हुए थे और मीडिया की खासकर टीवी चैनलों की खूब किरकिरी हुई थी। टीवी चैनलों ने खासकर 13 अंक को टारगेट किया था कि यह अंक खतरनाक
होता है। बस 13 के अंक पर भी इतनी कहानियां गढ़ी गई कि 21वीं सदी में अंध विश्वास की हद नहीं थी। टीवी चैनलों की खबरें मज़ाक बनकर रह गई थी। मुझे याद है कि तब एरीज के वैज्ञानिक डा शशिभूषण पांडेय और आई आई ए बंगलुरु के खगोल वैज्ञानिक प्रो आर सी कपूर से अक्सर फोन पर बातें हुआ करती थी। अब प्रो आर सी कपूर हमारे बीच नहीं रहे। एपोफिस की हकीकत को लेकर तब मीडिया मजाक बनकर रह गया था Apophis के मिलने के साथ ही 2004 में मैने दैनिक जागरण में पहली स्टोरी लिखी थी और इसी समाचार पत्र में तब से आज तक करीब दो दर्जन से अधिक। स्टोरी लिख चुका हूं। फिलहाल अब इसके करीब पहुंचने का इंतजार रहेगा । फोटो : NASA श्रोत: Dr Shashibhushan Pandey, ARIES
- Post by Rajkumar mehra press reporter2
- विडियो देखें-अल्मोड़ा ( उत्तराखंड ) अल्मोड़ा के राजपुरा क्षेत्र की यह घटनाक्रम वायरल हो रहा है जिसमें यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण और डराने वाला विडियो है एक नशे में धुत व्यक्ति ने ना सिर्फ रात में गाली-गलौज की, बल्कि खुलेआम नशे की हालत में मारने की धमकी भी दे डाली। नशे के कारण महिलाएं , बच्चे और आमजन लोग सुरक्षित नहीं हैं! लोगो में डर का माहौल बना रहता है। नशा विनाश का कारण है इसे रोकना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।1
- मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविन्द राम जायसवाल ने अवगत कराया है कि, शैक्षिक वर्ष 2026-27 में समस्त राजकीय एवं राजकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्य-पुस्तकों के साथ-साथ नोटबुक भी वितरित की जाएंगी। यह निर्णय विद्यार्थियों को आवश्यक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराने तथा उनकी पढ़ाई को सुगम एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा निदेशालय से प्राप्त निर्देशानुसार नोटबुक का वितरण विभिन्न प्रकार से किया जाएगा— कक्षा 1 से 2 तक के प्रत्येक विद्यार्थी को 2 नोटबुक, कक्षा 3 से 5 तक के प्रत्येक विद्यार्थी को 3 नोटबुक तथा कक्षा 6 से 12 तक के प्रत्येक विद्यार्थी को 5 नोटबुक प्रदान की जाएंगी। इस पहल से विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा तथा उन्हें अध्ययन सामग्री की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। इससे विद्यालयों में नामांकन, उपस्थिति एवं शिक्षण-सीखने की प्रक्रिया को भी प्रोत्साहन मिलने की अपेक्षा है।1
- Post by Jagdish Ballabh Sharma1
- अल्मोड़ा में यूथ कांग्रेस के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों का स्वागत हुआ। नगर के चौघानपाटा में यूथ कांग्रेस के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों का कांग्रेस और यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया। इसके बाद कांग्रेस कार्यालय में स्वागत किया गया।1
- बिलासपुर में नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन की स्थानीय शाखा द्वारा संगठन का 78वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ आयुर्वेद प्रवर्तक भगवान धन्वंतरि के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्वलन और धन्वंतरि स्तवन के साथ हुआ। कार्यक्रम के दौरान मुख्य वक्ता और नीमा केंद्रीय परिषद सदस्य डा. वीके शर्मा ने संगठन के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 13 अप्रैल 1948 को नीमा का गठन किया गया था। तब से लेकर आज तक संगठन मजबूती के साथ कार्य कर रहा है। कहा कि सरकार द्वारा अब इंटीग्रेटेड चिकित्सकों के क्लीनिकों का पंजीकरण व नवीनीकरण पांच वर्ष के लिए किया जा रहा है। चेतावनी देते हुए कहा कि जनपद में क्षेत्रीय आयुर्वेद यूनानी कार्यालय में पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान किसी भी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा सुविधा शुल्क की मांग की गई या चिकित्सकों का उत्पीड़न किया गया तो संगठन उनके विरुद्ध सख्त कानूनी और विधि सम्मत कार्रवाई करेगा। उन्होंने सभी आयुष चिकित्सकों से नियमानुसार प्रपत्र पूर्ण कर पंजीकरण कराने का आह्वान किया। इस अवसर पर डा. योगेश कुमार, डा. पीके जैन, डा. एसके शुक्ला, डा. असलम परवेज, डा. कुलविंदर सिंह बाजवा, डा. राजीव अरोरा, डा. भूपेंदर सिंह पन्नू, डा. शुभांशु जनार्दन और डा. शुभम शुक्ला समेत कई चिकित्सक उपस्थित रहे।1
- आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों ने न्यूनतम वेतनमान और महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की मांग उठाई, जो अब तक अनसुनी रही है। कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि मांग पूरी न होने पर धरना और आंदोलन जारी रहेगा। इस आंदोलन को यूकेडी गरुड़ का भी खुला समर्थन मिला है। यूकेडी के ब्लॉक अध्यक्ष ने कहा कि एक मजदूर को भी 700 रुपये प्रतिदिन मिल रहे हैं, जबकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बहुत कम मानदेय दिया जा रहा है। उन्होंने सरकार से कार्यकर्ताओं की मांगों को शीघ्र पूरा करने की अपील की।1
- प्रदर्शन कवर कर रहे दैनिक भास्कर के पत्रकार साकेत आनंद के साथ पुलिसकर्मी द्वारा मारपीट के मामले में, DCP नोएडा सेंट्रल के सामने घटना की शिकायत की गई है और आरोपी पुलिसकर्मी जितेंद्र सिंह के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई है। पत्रकार ने आरोप लगाया है कि उन्हें लाठी से पीटा गया। यह घटना 13-14 अप्रैल 2026 के आसपास हुई, जब कर्मचारी वेतन वृद्धि के लिए प्रदर्शन कर रहे थे।1