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“22 फरवरी सुबह 11 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘मन की बात’ कार्यक्रम अवश्य सुनें — डॉ. राजीव बिंदल”

18 hrs ago
user_न्यूज रिपोर्टर
न्यूज रिपोर्टर
Chaupal, Shimla•
18 hrs ago

“22 फरवरी सुबह 11 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘मन की बात’ कार्यक्रम अवश्य सुनें — डॉ. राजीव बिंदल”

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  • Post by न्यूज रिपोर्टर
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    Post by न्यूज रिपोर्टर
    user_न्यूज रिपोर्टर
    न्यूज रिपोर्टर
    Chaupal, Shimla•
    18 hrs ago
  • लोकेशन ज्वाला जी कांगड़ा  भारतीय सेना की सेना शिक्षा कोर (एईसी) के पूर्व सैनिकों का राष्ट्रीय सम्मेलन आज पवित्र तीर्थस्थल ज्वालाजी मंदिर में विधिवत रूप से आरंभ हो गया। देवभूमि हिमाचल प्रदेश में आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में एईसी वेटरन्स भाग ले रहे हैं। उद्घाटन सत्र में वक्ताओं ने सेना शिक्षा कोर की ऐतिहासिक भूमिका, उसके गौरवशाली योगदान तथा सेवानिवृत्ति के पश्चात भी समाज के प्रति पूर्व सैनिकों की सक्रिय भागीदारी पर प्रकाश डाला। शिक्षा और पर्यावरण पर विशेष फोकस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य पूर्व सैनिकों के बीच आपसी भाईचारे को सुदृढ़ करना, शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हेतु ठोस रणनीति तैयार करना तथा पर्यावरण संरक्षण जैसे समसामयिक विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श करना है। अपने विचार मिडिया से साझा करते हुए विधार्थी ने कहा कि यह ऐसोसिएशन का छंटा वार्षिक अधिवेशन है हर साल अलग अलग राज्यों में आयोजित होता है और पहला वार्षिक उत्सव दिल्ली में आयोजित किया गया था और इस समारोह का उद्देश्य समाज के युवा वर्ग को भी समाज के विभिन्न क्षेत्रों में जागरूक करना व अच्छा कार्य करने वाले युवाओं को प्रोत्साहित करना है ऐसोसिएशन द्वारा हर वर्ष प्रकाशित की जाने वाली स्मारिका में ऐसे युवाओं के फोटो राइजिंग स्टार के रुप में प्रकाशित किये जाते हैं इसके साथ साथ पर्यावरण व शिक्षा के साथ साथ सरकार द्वारा चलाए जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए ऐसोसिएशन काम कर रही है और देश भर के राज्य सरकारों को प्रस्ताव‌ भेजे गए हैं इस मौका पर सुबेदार योगेश कुमार अत्री , सुबेदार मेजर जसवीर सिंह, सुबेदार मेजर अरूण कुमार, सुबेदार मेजर राम वीर सिंह, सुबेदार सी आर परेजा,शेरसिह राणा ,केप्टन उमेश कुमार,अरूण कुमार,आदि ने अपने अपने विचार साझा किये । पहले दिन आयोजित सत्रो  शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के उपाय युवाओं के नैतिक एवं नेतृत्व विकास की दिशा, पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास समाज में जागरूकता अभियान चलाने की रणनीति, जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार सैन्य अनुशासन और शिक्षण पद्धति को समाजहित में प्रभावी रूप से लागू किया जा सकता है। ऐतिहासिक रही है सेना शिक्षा कोर की भूमिका सेना शिक्षा कोर का मूल उद्देश्य सैनिकों को शिक्षा, प्रशिक्षण और नेतृत्व क्षमता से सशक्त बनाना रहा है। “सैनिक भी हम, शिक्षक भी हम” का उद्घोष इसकी बहुआयामी भूमिका को दर्शाता है। एईसी ने सैनिकों को बुनियादी शिक्षा, विशेष प्रशिक्षण और व्यक्तित्व विकास से जोड़कर सेना की कार्यकुशलता को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में अहम योगदान दिया है। सेवा के बाद भी समाजसेवा का संकल्प सेना से सेवानिवृत्ति के उपरांत भी एईसी के पूर्व सैनिक शिक्षा के प्रचार-प्रसार, पर्यावरण संरक्षण, युवाओं के मार्गदर्शन तथा सामाजिक जागरूकता अभियानों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। सम्मेलन में इन विषयों पर ठोस कार्ययोजना तैयार कर उसे विभिन्न राज्यों में लागू करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। ज्वालाजी की पावन भूमि पर आयोजित यह सम्मेलन न केवल पूर्व सैनिकों के पुनर्मिलन का अवसर है, बल्कि समाज निर्माण की दिशा में एक सशक्त पहल भी है। सेना शिक्षा कोर के इतिहास में यह आयोजन एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हो सकता है, जो शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में पूर्व सैनिकों की राष्ट्रीय स्तर पर भागीदारी को नई पहचान देगा। नोट : बाईट देने वाले सभी सदस्यों ने अपने नाम व पद बता रखें है
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    लोकेशन ज्वाला जी कांगड़ा 
भारतीय सेना की सेना शिक्षा कोर (एईसी) के पूर्व सैनिकों का राष्ट्रीय सम्मेलन आज पवित्र तीर्थस्थल ज्वालाजी मंदिर में विधिवत रूप से आरंभ हो गया। देवभूमि हिमाचल प्रदेश में आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में एईसी वेटरन्स भाग ले रहे हैं।
उद्घाटन सत्र में वक्ताओं ने सेना शिक्षा कोर की ऐतिहासिक भूमिका, उसके गौरवशाली योगदान तथा सेवानिवृत्ति के पश्चात भी समाज के प्रति पूर्व सैनिकों की सक्रिय भागीदारी पर प्रकाश डाला।
शिक्षा और पर्यावरण पर विशेष फोकस
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य पूर्व सैनिकों के बीच आपसी भाईचारे को सुदृढ़ करना, शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हेतु ठोस रणनीति तैयार करना तथा पर्यावरण संरक्षण जैसे समसामयिक विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श करना है। अपने विचार मिडिया से साझा करते हुए विधार्थी ने कहा कि यह ऐसोसिएशन का छंटा वार्षिक अधिवेशन है हर साल अलग अलग राज्यों में आयोजित होता है और पहला वार्षिक उत्सव दिल्ली में आयोजित किया गया था और इस समारोह का उद्देश्य समाज के युवा वर्ग को भी समाज के विभिन्न क्षेत्रों में जागरूक करना व अच्छा कार्य करने वाले युवाओं को प्रोत्साहित करना है ऐसोसिएशन द्वारा हर वर्ष प्रकाशित की जाने वाली स्मारिका में ऐसे युवाओं के फोटो राइजिंग स्टार के रुप में प्रकाशित किये जाते हैं इसके साथ साथ पर्यावरण व शिक्षा के साथ साथ सरकार द्वारा चलाए जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए ऐसोसिएशन काम कर रही है और देश भर के राज्य सरकारों को प्रस्ताव‌ भेजे गए हैं इस मौका पर सुबेदार योगेश कुमार अत्री , सुबेदार मेजर जसवीर सिंह, सुबेदार मेजर अरूण कुमार, सुबेदार मेजर राम वीर सिंह, सुबेदार सी आर परेजा,शेरसिह राणा ,केप्टन उमेश कुमार,अरूण कुमार,आदि ने अपने अपने विचार साझा किये । पहले दिन आयोजित सत्रो 
शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के उपाय
युवाओं के नैतिक एवं नेतृत्व विकास की दिशा, पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास
समाज में जागरूकता अभियान चलाने की रणनीति, जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार सैन्य अनुशासन और शिक्षण पद्धति को समाजहित में प्रभावी रूप से लागू किया जा सकता है।
ऐतिहासिक रही है सेना शिक्षा कोर की भूमिका
सेना शिक्षा कोर का मूल उद्देश्य सैनिकों को शिक्षा, प्रशिक्षण और नेतृत्व क्षमता से सशक्त बनाना रहा है। “सैनिक भी हम, शिक्षक भी हम” का उद्घोष इसकी बहुआयामी भूमिका को दर्शाता है। एईसी ने सैनिकों को बुनियादी शिक्षा, विशेष प्रशिक्षण और व्यक्तित्व विकास से जोड़कर सेना की कार्यकुशलता को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में अहम योगदान दिया है।
सेवा के बाद भी समाजसेवा का संकल्प
सेना से सेवानिवृत्ति के उपरांत भी एईसी के पूर्व सैनिक शिक्षा के प्रचार-प्रसार, पर्यावरण संरक्षण, युवाओं के मार्गदर्शन तथा सामाजिक जागरूकता अभियानों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। सम्मेलन में इन विषयों पर ठोस कार्ययोजना तैयार कर उसे विभिन्न राज्यों में लागू करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
ज्वालाजी की पावन भूमि पर आयोजित यह सम्मेलन न केवल पूर्व सैनिकों के पुनर्मिलन का अवसर है, बल्कि समाज निर्माण की दिशा में एक सशक्त पहल भी है। सेना शिक्षा कोर के इतिहास में यह आयोजन एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हो सकता है, जो शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में पूर्व सैनिकों की राष्ट्रीय स्तर पर भागीदारी को नई पहचान देगा।
नोट : बाईट देने वाले सभी सदस्यों ने अपने नाम व पद बता रखें है
    user_पत्रकार
    पत्रकार
    राजगढ़, सिरमौर, हिमाचल प्रदेश•
    12 hrs ago
  • CBSE स्कूल के लिये परीक्षा आयोजित करने पर भड़का हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ, सरकार को दो टूक परीक्षा के माध्यम से शिक्षक की दक्षता को जांचना मान सम्मान को ठेस,CM को भेज ज्ञापन,नही परीक्षा आवेदन फॉर्म हिमाचल प्रदेश शिक्षा बोर्ड के स्कूलों को CBSE बोर्ड लागू करने को लेकर शिक्षक भड़क गए है।शिक्षकों ने सरकार को दो टूक कह दिया है कि शिक्षक की दक्षता जांचने के लिए परीक्षा आयोजित करने का कोई औचित्य नही बनता वह फॉर्म नही भरेंगे और शिक्षक की दक्षता को जांचने के लिए यह नियम सही नही है। शिक्षकों की दक्षता जांचने की लिए आयोजित की जाने वाली परीक्षा का हिमाचल राजकीय अध्यपक संघ ने विरोध किया है।आज पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने सरकार के इस निर्णय को गलत बताया है साथ ही इस परीक्षा को शिक्षकों के मान सम्मान को ठेस करार दिया है।सरकार 134 स्कूलों में CBSE बोर्ड शुरू करने जा रहा है ।इसके लिए शिक्षकों की दक्षता जांचने के लिए परीक्षा का आयोजन भी किया जा रहा है।इस परीक्षा का विरोध करते हुए हिमाचल राजकीय शिक्षक संघ ने आह्वान किया है कि इस परीक्षा के लिए फॉर्म भरने की आवश्यकता नही है।जब शिक्षक आवेदन ही नही करेंगे तो 5500 पद कहां से भरे जाएंगे। वुओ: हिमाचल प्रदेश राजकीय अध्यापक संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने कहा कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षक वर्षों से बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं। जितने भी शिक्षक बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं वह परीक्षा पास कर ही यहां आए हैं अब इतने वर्षों बाद परीक्षा के माध्यम से शिक्षकों की दक्षता जांचना उचित नहीं है यह उनके मान सम्मान को ठेस है। उन्होंने कहा कि एक IAS भी इतने वर्षों बाद इस की परीक्षा नहीं दे पाएगा ।जो शिक्षक 40 वर्षों से स्कूल में पढ़ा रहे हैं तो हो सकता है उन्हें भी आज इस शिक्षा देने में दिक्कतें पेश आएं। उन्होंने कहा कि अभी तक इस शिक्षा आयोजन के लिए मात्र 1500 आवेदन ही आए हैं जबकि पूरे प्रदेश भर में 80000 शिक्षक हैं उन्होंने प्रदेश के सभी शिक्षकों से आह्वान किया कि इस परीक्षा के लिए उन्हें आवेदन नहीं देना चाहिए और उन्होंने कहा कि सभी शिक्षकों की राय है कि वह इस परीक्षा के लिए आवेदन नहीं देंगे उन्होंने कहा कि वह इस बाबत मुख्यमंत्री मुख्य सचिव शिक्षा मंत्री सहित अन्य अधिकारियों को ज्ञापन भी दे चुके हैं सुरेंद्र चौहान ने कहा कि वह इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री से भी मिलेंगे उन्होंने कहा कि इस परीक्षा का जो स्टार रखा गया है वह काफी हाई स्टैंडर्ड का है जबकि कई शिक्षक पुराने हैं जो इस हाई स्टैंडर्ड पर करना उत्तर पाए और साथ ही कई नेशनल आबादी भी हैं जो इस परीक्षा को उत्तीर्ण ना कर सके तो क्या जो उन्हें शिक्षा के लिए अवार्ड मिला है वह क्या व्यर्थ है शिक्षक की दक्षता जांचने के लिए पैरामीटर उचित नही हैं।उन्होंने कहा कि CBSE सिस्टम लागू करते समय शिक्षकों और स्कूलों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। CBSE स्कूलों में तैनाती के लिए अनुभवी शिक्षकों की दक्षता जांचने हेतु अलग से टेस्ट या परीक्षा न कराई जाए। साथ ही, पहले से कार्यरत शिक्षकों को कम से कम एक वर्ष का समय दिया जाए ताकि वे बोर्ड परीक्षा के आधार पर अपनी कार्यक्षमता साबित कर सकें। उसके बाद ही अगर वह उसपर खरा नही उतरता है तो आगे का निर्णय लिया जाए।इसके साथ ही CBSE और हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड में अन्तर विद्यालय स्थानांतरण नीति हो जिससे अगर शिक्षक CBSE से हिमाचल शिक्षा बोर्ड में जाना चाहे तो जा सके अन्यथा उसकी पदोन्नति पर इसका प्रभाव पड़ेगा। स्कूलों में शिक्षकों की रिक्तियां 100 प्रतिशत भरी जाएं और प्रिंसिपल व शिक्षकों का मूल्यांकन परीक्षा परिणाम और स्टाफ की उपलब्धता के आधार पर किया जाए। इंटर-बोर्ड ट्रांसफर शिक्षकों की इच्छा के अनुसार जारी रखने की बात भी कही।उन्होंने कहा कि लड़कों और लड़कियों के स्कूलों को मर्ज करने के बजाय उन्हें मजबूत किया जाए तथा पदोन्नति व्यवस्था प्रभावित न हो। आवश्यकता अनुसार वाइस-प्रिंसिपल के पद सृजित करने की मांग भी की गई ।वहीं उन्होंने कहा कि CBSE का फीस स्ट्रक्चर बहुत अधिक है हो सकता है ग्रामीण क्षेत्र के लोग यह फीस वहन ना कर सके। फीस संरचना न बढ़ाने और शिक्षा विभाग में किसी भी प्रकार के निजीकरण का कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि इन सुझावों पर विचार करने से सरकार और शिक्षकों के बीच बेहतर समन्वय बनेगा। बाइट : वीरेंद्र चौहान अध्यक्ष हिमाचल राजकीय शिक्षक संघ के अध्यक्ष
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    CBSE स्कूल के लिये परीक्षा आयोजित करने पर भड़का हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ, सरकार को दो टूक परीक्षा के माध्यम से शिक्षक की दक्षता को जांचना मान सम्मान को ठेस,CM को भेज ज्ञापन,नही परीक्षा आवेदन फॉर्म
हिमाचल प्रदेश शिक्षा बोर्ड के स्कूलों को CBSE बोर्ड लागू करने को लेकर शिक्षक भड़क गए है।शिक्षकों ने सरकार को दो टूक कह दिया है कि शिक्षक की दक्षता जांचने के लिए परीक्षा आयोजित करने का कोई औचित्य नही बनता वह फॉर्म नही भरेंगे और शिक्षक की दक्षता को जांचने के लिए यह नियम सही नही है। शिक्षकों की दक्षता जांचने की लिए आयोजित की जाने वाली परीक्षा का हिमाचल राजकीय अध्यपक संघ ने विरोध किया है।आज पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने सरकार के इस निर्णय को गलत बताया है साथ ही इस परीक्षा को शिक्षकों के मान सम्मान को ठेस करार दिया है।सरकार 134 स्कूलों में  CBSE बोर्ड शुरू करने जा रहा है ।इसके लिए शिक्षकों की दक्षता जांचने के लिए परीक्षा का आयोजन भी किया जा रहा है।इस परीक्षा का विरोध करते हुए हिमाचल राजकीय शिक्षक संघ ने आह्वान किया है कि इस परीक्षा के लिए फॉर्म भरने की आवश्यकता नही है।जब शिक्षक आवेदन ही नही करेंगे तो 5500 पद कहां से भरे जाएंगे।
वुओ:  हिमाचल प्रदेश राजकीय अध्यापक संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने कहा कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षक वर्षों से बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं। जितने भी शिक्षक बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं वह परीक्षा पास कर ही यहां आए हैं अब इतने वर्षों बाद परीक्षा के माध्यम से शिक्षकों की दक्षता जांचना उचित नहीं है यह उनके मान सम्मान को ठेस है। उन्होंने कहा कि एक IAS भी इतने वर्षों बाद इस की परीक्षा नहीं दे पाएगा ।जो शिक्षक 40 वर्षों से स्कूल में पढ़ा रहे हैं तो हो सकता है उन्हें भी आज इस शिक्षा देने में दिक्कतें पेश आएं। उन्होंने कहा कि अभी तक इस शिक्षा आयोजन के लिए मात्र 1500 आवेदन ही आए हैं जबकि पूरे प्रदेश भर में 80000 शिक्षक हैं उन्होंने प्रदेश के सभी शिक्षकों से आह्वान किया कि इस परीक्षा के लिए उन्हें आवेदन नहीं देना चाहिए और उन्होंने कहा कि सभी शिक्षकों की राय है कि वह इस परीक्षा के लिए आवेदन नहीं देंगे उन्होंने कहा कि वह इस बाबत मुख्यमंत्री मुख्य सचिव शिक्षा मंत्री सहित अन्य अधिकारियों को ज्ञापन भी दे चुके हैं सुरेंद्र चौहान ने कहा कि वह इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री से भी मिलेंगे उन्होंने कहा कि इस परीक्षा का जो स्टार रखा गया है वह काफी हाई स्टैंडर्ड का है जबकि कई शिक्षक पुराने हैं जो इस हाई स्टैंडर्ड पर करना उत्तर पाए और साथ ही कई नेशनल आबादी भी हैं जो इस परीक्षा को उत्तीर्ण ना कर सके तो क्या जो उन्हें शिक्षा के लिए अवार्ड मिला है वह क्या व्यर्थ है शिक्षक की दक्षता जांचने के लिए पैरामीटर उचित नही हैं।उन्होंने कहा कि CBSE सिस्टम लागू करते समय शिक्षकों और स्कूलों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। CBSE स्कूलों में तैनाती के लिए अनुभवी शिक्षकों की दक्षता जांचने हेतु अलग से टेस्ट या परीक्षा न कराई जाए। साथ ही, पहले से कार्यरत शिक्षकों को कम से कम एक वर्ष का समय दिया जाए ताकि वे बोर्ड परीक्षा के आधार पर अपनी कार्यक्षमता साबित कर सकें। उसके बाद ही अगर वह उसपर खरा नही उतरता है तो आगे का निर्णय लिया जाए।इसके साथ ही CBSE और हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड में अन्तर विद्यालय स्थानांतरण नीति हो जिससे अगर शिक्षक CBSE से हिमाचल शिक्षा बोर्ड में जाना चाहे तो जा सके अन्यथा उसकी पदोन्नति पर इसका प्रभाव पड़ेगा। स्कूलों में शिक्षकों की रिक्तियां 100 प्रतिशत भरी जाएं और प्रिंसिपल व शिक्षकों का मूल्यांकन परीक्षा परिणाम और स्टाफ की उपलब्धता के आधार पर किया जाए। इंटर-बोर्ड ट्रांसफर शिक्षकों की इच्छा के अनुसार जारी रखने की बात भी कही।उन्होंने कहा कि लड़कों और लड़कियों के स्कूलों को मर्ज करने के बजाय उन्हें मजबूत किया जाए तथा पदोन्नति व्यवस्था प्रभावित न हो। आवश्यकता अनुसार वाइस-प्रिंसिपल के पद सृजित करने की मांग भी की गई ।वहीं उन्होंने कहा कि CBSE का फीस स्ट्रक्चर बहुत अधिक है हो सकता है ग्रामीण क्षेत्र के लोग यह फीस वहन ना कर सके। फीस संरचना न बढ़ाने और शिक्षा विभाग में किसी भी प्रकार के निजीकरण का कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि इन सुझावों पर विचार करने से सरकार और शिक्षकों के बीच बेहतर समन्वय बनेगा।
बाइट : वीरेंद्र चौहान अध्यक्ष हिमाचल राजकीय शिक्षक संघ के अध्यक्ष
    user_Roshan Sharma
    Roshan Sharma
    Local News Reporter Shimla (Urban), Himachal Pradesh•
    19 hrs ago
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    user_Public news
    Public news
    Actor नाहन, सिरमौर, हिमाचल प्रदेश•
    7 hrs ago
  • Pauri Garhwal : सीएम धामी के दौरे का विरोध करते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गो बैक के नारे लगाये. विरोध कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कहा प्रदेश सरकार जन मुद्दों की अनदेखी कर रही है. जिसके चलते वे मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का विरोध कर रहे हैं. कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा जिले की सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी बुनियादी समस्याओं पर सरकार ने कोई स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत नहीं किया.
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    Pauri Garhwal : सीएम धामी के दौरे का विरोध करते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गो बैक के नारे लगाये. विरोध कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कहा प्रदेश सरकार जन मुद्दों की अनदेखी कर रही है. जिसके चलते वे मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का विरोध कर रहे हैं.
कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा जिले की सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी बुनियादी समस्याओं पर सरकार ने कोई स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत नहीं किया.
    user_NI KHIL
    NI KHIL
    Journalist विकास नगर, देहरादून, उत्तराखंड•
    11 hrs ago
  • Post by Dev Raj Thakur
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    Post by Dev Raj  Thakur
    user_Dev Raj  Thakur
    Dev Raj Thakur
    Farmer निरमंड, कुल्लू, हिमाचल प्रदेश•
    20 hrs ago
  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सोलन जिले के कसौली स्थित (सीआरआई) में टेटनस और एडल्ट डिफ्थीरिया (टीडी) वैक्सीन लॉन्च की
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    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सोलन जिले के कसौली स्थित (सीआरआई) में टेटनस और एडल्ट डिफ्थीरिया (टीडी) वैक्सीन लॉन्च की
    user_Journalist Pawan Kumar Singh
    Journalist Pawan Kumar Singh
    कुनिहार, सोलन, हिमाचल प्रदेश•
    7 hrs ago
  • Post by न्यूज रिपोर्टर
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    Post by न्यूज रिपोर्टर
    user_न्यूज रिपोर्टर
    न्यूज रिपोर्टर
    Shimla (Urban), Himachal Pradesh•
    9 hrs ago
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