सीतापुर के थानगांव थाना क्षेत्र के ग्राम सभा ग्वारी में रविवार दोपहर उस समय हड़कंप मच गया, जब बाजार पुरवा निवासी दिलीप (पुत्र दर्शन भार्गव) जिंदगी और मौत का खेल खेलते हुए एक मोबाइल टावर पर चढ़ गया। करीब 300 फीट ऊंचे एयरटेल के इस टावर पर युवक आसमान में कड़कती बिजली, तेज आंधी और झमाझम बारिश के बीच करीब 3 घंटे तक डटा रहा, जिससे मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। घंटों चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद पुलिस ने युवक को उसकी शर्तों पर सुरक्षित नीचे उतारा, तब जाकर प्रशासन ने राहत की सांस ली। दरअसल, दिलीप का गौढ़ी निवासी सुनील, अमरीश और ज्ञानेंद्र (पुत्रगण आशाराम यादव) के साथ ₹3.22 लाख के पैसों के पुराने लेन-देन को लेकर विवाद चल रहा है। दिलीप का आरोप है कि विपक्षियों ने उसके जेवरात गिरवी रखवा लिए हैं और उसके नाम पर फाइनेंस करवाई गई बाइक जबरन अपने पास रख ली है। इसी बात से नाराज होकर दिलीप ने दोपहर करीब 3:00 बजे 'शोले' स्टाइल प्रदर्शन करते हुए ग्वारी गांव में स्थित इस मोबाइल टावर पर चढ़ गया। युवक के टावर पर चढ़ने की खबर फैलते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई, क्योंकि मौसम बेहद खराब था—तेज हवाएं और बारिश होने के कारण टावर पर पैर टिकाना भी मुश्किल था, और दिलीप लगातार नीचे कूदने की धमकी दे रहा था। सूचना मिलते ही थानगांव पुलिस टीम बिना वक्त गंवाए मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए नीचे से ही लाउडस्पीकर के जरिए दिलीप से बातचीत शुरू की। पुलिस ने धैर्यपूर्वक उसे समझाया और उसकी शर्तों को मानते हुए न्याय का भरोसा दिलाया। घंटों की कड़ी मशक्कत और मान-मनौव्वल के बाद दिलीप सुरक्षित नीचे उतरने के लिए तैयार हुआ। युवक के सुरक्षित जमीन पर कदम रखते ही पुलिस और मौके पर मौजूद सैकड़ों ग्रामीणों ने चैन की सांस ली। थानगांव थानाध्यक्ष विमल गौतम ने बताया कि युवक को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया है, और उससे पूछताछ कर मामले की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि दोनों पक्षों को थाने पर बुलाया गया है और बातचीत के जरिए इस वित्तीय विवाद को सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है, और इस घटना ने पूरे इलाके में खूब सुर्खियां बटोरी हैं।
सीतापुर के थानगांव थाना क्षेत्र के ग्राम सभा ग्वारी में रविवार दोपहर उस समय हड़कंप मच गया, जब बाजार पुरवा निवासी दिलीप (पुत्र दर्शन भार्गव) जिंदगी और मौत का खेल खेलते हुए एक मोबाइल टावर पर चढ़ गया। करीब 300 फीट ऊंचे एयरटेल के इस टावर पर युवक आसमान में कड़कती बिजली, तेज आंधी और झमाझम बारिश के बीच करीब 3 घंटे तक डटा रहा, जिससे मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। घंटों चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद पुलिस ने युवक को उसकी शर्तों पर सुरक्षित नीचे उतारा, तब जाकर प्रशासन ने राहत की सांस ली। दरअसल, दिलीप का गौढ़ी निवासी सुनील, अमरीश और ज्ञानेंद्र (पुत्रगण आशाराम यादव) के साथ ₹3.22 लाख के पैसों के पुराने लेन-देन को लेकर विवाद चल रहा है। दिलीप का आरोप है कि विपक्षियों ने उसके जेवरात गिरवी रखवा लिए हैं और उसके नाम पर फाइनेंस करवाई गई बाइक जबरन अपने पास रख ली है। इसी बात से नाराज होकर दिलीप ने दोपहर करीब 3:00 बजे 'शोले' स्टाइल प्रदर्शन करते हुए ग्वारी गांव में स्थित इस मोबाइल टावर पर चढ़ गया। युवक के टावर पर चढ़ने की खबर फैलते ही पूरे इलाके
में सनसनी फैल गई, क्योंकि मौसम बेहद खराब था—तेज हवाएं और बारिश होने के कारण टावर पर पैर टिकाना भी मुश्किल था, और दिलीप लगातार नीचे कूदने की धमकी दे रहा था। सूचना मिलते ही थानगांव पुलिस टीम बिना वक्त गंवाए मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए नीचे से ही लाउडस्पीकर के जरिए दिलीप से बातचीत शुरू की। पुलिस ने धैर्यपूर्वक उसे समझाया और उसकी शर्तों को मानते हुए न्याय का भरोसा दिलाया। घंटों की कड़ी मशक्कत और मान-मनौव्वल के बाद दिलीप सुरक्षित नीचे उतरने के लिए तैयार हुआ। युवक के सुरक्षित जमीन पर कदम रखते ही पुलिस और मौके पर मौजूद सैकड़ों ग्रामीणों ने चैन की सांस ली। थानगांव थानाध्यक्ष विमल गौतम ने बताया कि युवक को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया है, और उससे पूछताछ कर मामले की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि दोनों पक्षों को थाने पर बुलाया गया है और बातचीत के जरिए इस वित्तीय विवाद को सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है, और इस घटना ने पूरे इलाके में खूब सुर्खियां बटोरी हैं।
- उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिला मुख्यालय स्थित एक निजी अस्पताल, आरोग्यं हॉस्पिटल, में एक प्रसूता की मौत के मामले ने मानवता और डॉक्टरी पेशे को शर्मसार किया है। जिलाधिकारी (डीएम) द्वारा गठित त्रिस्तरीय जांच टीम और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में निजी अस्पताल के संचालकों व डॉक्टरों की भयानक लापरवाही उजागर हुई है, जिसमें पैसों के लालच में कम हीमोग्लोबिन के बावजूद महिला का ऑपरेशन करने की बात सामने आई है। जानकारी के अनुसार, खैराबाद थाना क्षेत्र के ग्राम धरैचा की सुमन देवी को प्रसव पीड़ा होने पर 26 मई को परिजनों ने जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया था। वहीं सक्रिय एक आशा बहू ने परिजनों को बरगलाकर शहर के निजी आरोग्यं हॉस्पिटल में शिफ्ट करवा दिया। निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने मरीज की गंभीर स्थिति और खून की कमी को छिपाते हुए तुरंत सिजेरियन ऑपरेशन का फैसला ले लिया। ऑपरेशन के बाद सुमन ने बच्चे को जन्म तो दिया, लेकिन डॉक्टरों की लापरवाही से उसकी हालत बिगड़ती चली गई। स्थिति बिगड़ने पर अस्पताल ने सुमन को आनन-फानन में लखनऊ रेफर कर दिया। लखनऊ के अस्पताल में जब डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए, तो परिजन सुमन को वेंटिलेटर हटाकर वापस सीतापुर ला रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। इस दर्दनाक घटना से आक्रोशित परिजनों ने 29 मई की शाम आरोग्यं हॉस्पिटल के बाहर शव रखकर जोरदार हंगामा किया, आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने सिर्फ पैसे ऐंठने के लिए जबरन ऑपरेशन किया और उनकी बहू को मौत के मुंह में धकेल दिया। प्रसूता सुमन देवी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का मुख्य कारण 'ब्लड पॉइजनिंग' (सेप्टीसीमिया) पाया गया, जो सीधे तौर पर ऑपरेशन के दौरान संक्रमण या गलत इलाज की ओर इशारा करता है। जांच रिपोर्ट में एम्बुलेंस चालक ने भी चौंकाने वाला बयान दिया कि लखनऊ से वापस लाते समय रास्ते में परिजनों ने दो बार मरीज का ऑक्सीजन सपोर्ट हटा दिया था, जिससे उसकी हालत और नाजुक हो गई। जांच रिपोर्ट में अस्पताल की लापरवाही सिद्ध होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। जिलाधिकारी के कड़े निर्देशों के बाद, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) सीतापुर अब आरोग्यं अस्पताल के संचालकों और दोषी डॉक्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने और अस्पताल को सील करने जैसी कठोर कानूनी कार्रवाई की तैयारी में हैं। जिला प्रशासन, सीतापुर ने स्पष्ट किया है कि प्रसूता की जान के साथ खिलवाड़ करने वाले निजी अस्पताल और डॉक्टरों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही कठोरतम वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।1
- सीतापुर जिले में एक ग्रामीण तालाब की घोर उपेक्षा की जा रही है, जिसके कारण चिलचिलाती गर्मी में छोटे गायों और कुत्तों जैसे अनेक जानवर पानी के लिए तरस रहे हैं। बताया गया है कि सरकार द्वारा इस तालाब के लिए आवंटित धन का गबन किया जा रहा है और जानवरों के लिए पानी भरवाने का कोई इंतजाम नहीं किया जा रहा है।2
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- सीतापुर जिले की बिसेन्दा ग्राम पंचायत के सेमरपुरवा गांव का हाल यह है कि "बाबा की सरकार" में अधिकारी मौज काट रहे हैं। वहां "हर घर जल जीवन मिशन" योजना केवल कागजों पर ही सिमटी हुई है।1
- सीतापुर जिले के महमूदाबाद विकास खंड की ग्राम पंचायत सरैया चालाकापुर में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। यहां आग पीड़ित परिवारों ने ग्राम पंचायत अधिकारी पर सीधा आरोप लगाया है कि आवास दिलाने के नाम पर उनसे 20-20 हजार रुपये की मांग की जा रही है। पीड़ित ग्रामीणों का कहना है कि रुपये न देने पर उन्हें कथित तौर पर यह कहकर टाल दिया गया कि "DM साहब धर्मात्मा हैं तो वहीं दे दें।" यह बयान मामले में भ्रष्टाचार के आरोपों को और भी गंभीर बना रहा है। इस मामले को लेकर पीड़ित परिवारों ने जिलाधिकारी सीतापुर को शपथ पत्र के साथ एक शिकायत सौंपी है। उन्होंने जिलाधिकारी से इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और इस कथित भ्रष्टाचार में शामिल दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।1
- जनसत्ता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और जनसत्तादल सुप्रीमो महाराजा कुंवर रघुराज प्रताप सिंह "राजा भइया" जी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संबंध में एक बयान दिया है, जिसकी प्रकृति को लेकर कौतूहल व्यक्त किया गया है। उन्हें उनके समर्थकों द्वारा "पावर स्टार", "वनमैन आर्मी", "शानदार व्यक्तित्व के धनी", "जन-जन के नायक", "आदर्श राजनेता", "अजेय योद्धा", और "संघर्ष, सेवा तथा स्वाभिमान के प्रतीक" जैसे विशेषणों से संबोधित किया गया है। उन्हें "विश्वास का नाम" भी बताया गया है।1
- आज़म खान परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई है, क्योंकि परिवार के एक छोटे भाई को रिहा कर दिया गया है। यह रिहाई अब्दुल्ला आज़म के बाद हुई है, जिससे पूरे आज़म खान परिवार में जश्न का माहौल है।1
- सीतापुर जनपद के रामपुरकला थाना क्षेत्र में एक नवविवाहिता का शव घर के अंदर फंदे से लटका मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है। जानकारी के अनुसार, महिला की शादी को अभी महज 25 दिन ही हुए थे। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतका के मायके पक्ष ने उसके पति राज समेत ससुराल के अन्य लोगों पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने और हत्या करने का गंभीर आरोप लगाया है। परिजनों का आरोप है कि शादी के बाद से ही नवविवाहिता से अतिरिक्त दहेज की मांग की जा रही थी और मांग पूरी न होने पर उसे लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया जा रहा था। मायके पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है, जबकि परिवार में शादी की खुशियों की जगह मातम छा गया है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना की खबर फैलते ही गांव में भारी भीड़ जुट गई, जिससे पूरे क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। पुलिस अधिकारियों ने मामले की गंभीरता से जांच करने का आश्वासन दिया है। उनका कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी, और प्रारंभिक जांच में दहेज उत्पीड़न तथा संदिग्ध मृत्यु से जुड़े सभी पहलुओं पर पड़ताल की जा रही है। स्थानीय लोग भी इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा है कि जांच के बाद तथ्य सामने आने पर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।2