महू तहसील के सबसे बड़े गांव दतोदा के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का मामला सामने आया है। दतोदा स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पिछले 5 वर्षों से प्राचार्य का पद रिक्त है। यह विद्यालय एक संकुल की जिम्मेदारी भी निभा रहा है, ऐसे में लंबे समय से प्राचार्य की नियुक्ति नहीं होने के कारण विद्यालय के प्रशासनिक एवं शैक्षणिक कार्यों पर असर पड़ने की बात सामने आ रही है। प्राचार्य की नियुक्ति की मांग को लेकर (ACS) आदिवासी छात्र संगठन एवं (abvp)अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा उपप्राचार्य को ज्ञापन सौंपा गया है। छात्र संगठनों ने मांग की है कि सरकार एवं शिक्षा विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दतोदा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में जल्द से जल्द स्थायी प्राचार्य की नियुक्ति करें, ताकि विद्यालय का शैक्षणिक एवं प्रशासनिक संचालन बेहतर तरीके से हो सके। महू तहसील के सबसे बड़े गांव दतोदा के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का मामला सामने आया है। दतोदा स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पिछले 5 वर्षों से प्राचार्य का पद रिक्त है। यह विद्यालय एक संकुल की जिम्मेदारी भी निभा रहा है, ऐसे में लंबे समय से प्राचार्य की नियुक्ति नहीं होने के कारण विद्यालय के प्रशासनिक एवं शैक्षणिक कार्यों पर असर पड़ने की बात सामने आ रही है। प्राचार्य की नियुक्ति की मांग को लेकर (ACS) आदिवासी छात्र संगठन एवं (abvp)अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा उपप्राचार्य को ज्ञापन सौंपा गया है। छात्र संगठनों ने मांग की है कि सरकार एवं शिक्षा विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दतोदा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में जल्द से जल्द स्थायी प्राचार्य की नियुक्ति करें, ताकि विद्यालय का शैक्षणिक एवं प्रशासनिक संचालन बेहतर तरीके से हो सके।
महू तहसील के सबसे बड़े गांव दतोदा के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का मामला सामने आया है। दतोदा स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पिछले 5 वर्षों से प्राचार्य का पद रिक्त है। यह विद्यालय एक संकुल की जिम्मेदारी भी निभा रहा है, ऐसे में लंबे समय से प्राचार्य की नियुक्ति नहीं होने के कारण विद्यालय के प्रशासनिक एवं शैक्षणिक कार्यों पर असर पड़ने की बात सामने आ रही है। प्राचार्य की नियुक्ति की मांग को लेकर (ACS) आदिवासी छात्र संगठन एवं (abvp)अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा उपप्राचार्य को ज्ञापन सौंपा गया है। छात्र संगठनों ने मांग की है कि सरकार एवं शिक्षा विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दतोदा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में जल्द से जल्द स्थायी प्राचार्य की नियुक्ति करें, ताकि विद्यालय का शैक्षणिक एवं प्रशासनिक संचालन बेहतर तरीके से हो सके। महू
तहसील के सबसे बड़े गांव दतोदा के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का मामला सामने आया है। दतोदा स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पिछले 5 वर्षों से प्राचार्य का पद रिक्त है। यह विद्यालय एक संकुल की जिम्मेदारी भी निभा रहा है, ऐसे में लंबे समय से प्राचार्य की नियुक्ति नहीं होने के कारण विद्यालय के प्रशासनिक एवं शैक्षणिक कार्यों पर असर पड़ने की बात सामने आ रही है। प्राचार्य की नियुक्ति की मांग को लेकर (ACS) आदिवासी छात्र संगठन एवं (abvp)अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा उपप्राचार्य को ज्ञापन सौंपा गया है। छात्र संगठनों ने मांग की है कि सरकार एवं शिक्षा विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दतोदा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में जल्द से जल्द स्थायी प्राचार्य की नियुक्ति करें, ताकि विद्यालय का शैक्षणिक एवं प्रशासनिक संचालन बेहतर तरीके से हो सके।
- महू तहसील के सबसे बड़े गांव दतोदा के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का मामला सामने आया है। दतोदा स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पिछले 5 वर्षों से प्राचार्य का पद रिक्त है। यह विद्यालय एक संकुल की जिम्मेदारी भी निभा रहा है, ऐसे में लंबे समय से प्राचार्य की नियुक्ति नहीं होने के कारण विद्यालय के प्रशासनिक एवं शैक्षणिक कार्यों पर असर पड़ने की बात सामने आ रही है। प्राचार्य की नियुक्ति की मांग को लेकर (ACS) आदिवासी छात्र संगठन एवं (abvp)अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा उपप्राचार्य को ज्ञापन सौंपा गया है। छात्र संगठनों ने मांग की है कि सरकार एवं शिक्षा विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दतोदा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में जल्द से जल्द स्थायी प्राचार्य की नियुक्ति करें, ताकि विद्यालय का शैक्षणिक एवं प्रशासनिक संचालन बेहतर तरीके से हो सके। महू तहसील के सबसे बड़े गांव दतोदा के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का मामला सामने आया है। दतोदा स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पिछले 5 वर्षों से प्राचार्य का पद रिक्त है। यह विद्यालय एक संकुल की जिम्मेदारी भी निभा रहा है, ऐसे में लंबे समय से प्राचार्य की नियुक्ति नहीं होने के कारण विद्यालय के प्रशासनिक एवं शैक्षणिक कार्यों पर असर पड़ने की बात सामने आ रही है। प्राचार्य की नियुक्ति की मांग को लेकर (ACS) आदिवासी छात्र संगठन एवं (abvp)अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा उपप्राचार्य को ज्ञापन सौंपा गया है। छात्र संगठनों ने मांग की है कि सरकार एवं शिक्षा विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दतोदा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में जल्द से जल्द स्थायी प्राचार्य की नियुक्ति करें, ताकि विद्यालय का शैक्षणिक एवं प्रशासनिक संचालन बेहतर तरीके से हो सके।1
- कुटी काली बिल्लोद प्रभातम कॉलोनी में चल रहे आमरण अनशन हुआ खत्म कुटी काली बिल्लोद प्रभातम कॉलोनी में चल रहे आमरण अनशन हुआ खत्म बताया जा रहा है कि प्रशासन ने उनके सभीमांगों को स्वीकार कर लिया है जल्द ही सभी कार्यों की शुरुआत करने वाले1
- हम ये समझते थे कि हमारी इंदौर की यह सँस्कृति खत्म हो जाएगी मगर इंदौरी किसी भंगेड़ी से कम नही है वो अगर ठान ले तो उनके लिए कुछ असम्भव नही इंदौर, हाल फिलहाल में चिकमंगलूर चौराहे पर हु ओर आप जो घर मे बैठे है वो इस शहर के मिजाज का अंदाजा नहीं लगा सकते है क्यो की अब हम कूप मण्डूक हो चुके है ,थक गए या बोरिया गए है, मगर इस शहर की ऊर्जा अलग है ,माँ अहिल्या ओर माँ नर्मदा का जो आशीष ओर पुनयाई ओर आशीर्वाद है वो सदैव बना रहेगा, आप गाड़ियों का काफिला इस वीडियो में देखे, महिलाओं का हुजूम देखे, माताएं अपने बच्चों को इस सँस्कृति से रूबरू कराना चाह1 रही है और शासन इसे मिट्टी में मिलाने में तुला है, दुसरो के पाप गिना देने से अपने कम नही हो जाते बहरहाल मेने ऐसा उत्साह अपने बाल्यकाल में ही देखा था, आश्चर्य चकित हु में ,मेरी सोच के विपरीत जब माहौल देखा तो मुझे यह लिखना पड़ा कि आपके विचार नईं पीढ़ी से कतई मेल नहीं खाते है हम ,आप खारिज हो चुके है, दम्भ भरने वाले, सत्य को सत्य कहने वाले जिन्होंने चश्मे लगा रखे है ,बहरहाल सुकून मिला इंदौर की सँस्कृति को सास लेते हुवे माँ अहिल्या ओर माँ नर्मदा की कृपा बनी रहे बस🙏🏻✒️🦚🚩हर्षवाल3
- आनंद चवदस का झिलमिलता निकला ता हुआ निकाला कारवां जेल रोड इंदौर हर साल की तरह इस साल में 2026 में भी झंकियों का झिलमिलता निकला कारवा लाखों की तादाद में इंदौरी पहुंचे इसे देखने1
- इंदौर में 103 साल पुरानी परंपरा | किन्नर समाज करता है अनंत चतुर्दशी की झांकियों का स्वागत1
- इंदौर में अनंत चतुर्दशी का पर्व और झांकियों का परंपरागत आयोजन 100 साल से भी अधिक समय से होता आ रहा है। मालवा क्षेत्र की इस ऐतिहासिक परंपरा को देखने के लिए मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि दूसरे प्रदेशों से भी लोग इंदौर पहुंचते हैं। हर साल की तरह इस बार भी झांकियों और अखाड़ों का कारवां शहर के अलग-अलग स्थानों से निकलकर राजवाड़ा पहुंच रहा है। इंदौर की ऐतिहासिक झांकियां अपने-अपने स्थानों से निकलकर निर्धारित मार्ग से होते हुए राजवाड़ा पहुंचती हैं। रास्ते में कई स्थानों पर मंच बनाकर झांकियों और अखाड़ों का स्वागत किया जाता है। यहां कलाकारों और प्रतिभागियों का सम्मान भी किया जाता है। इस पूरे आयोजन में किन्नर समाज की भी विशेष भूमिका रही है। नंदलालपुरा क्षेत्र में किन्नर समाज द्वारा पिछले 103 वर्षों से झांकियों और अखाड़ों के स्वागत एवं सम्मान के लिए मंच लगाया जाता है। यहां हर साल झांकियों और अखाड़ों का गर्मजोशी से स्वागत किया जाता है। नंदलालपुरा गादी की महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी, बहुचर नंद गिरी महामंडलेश्वर, सोना मंगला नंद गिरी महामंडलेश्वर सहित किन्नर समाज की ओर से झांकियों और अखाड़ों का स्वागत किया जाता है इस दौरान पायल गुरु, शिमला गुरु, झूमर गुरु, गोल्डन गुरु और पूजा गुरु सहित किन्नर समाज के अन्य सदस्य भी मौजूद रहते हैं। इंदौर की यह ऐतिहासिक परंपरा धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक सहभागिता का अनूठा उदाहरण है। झांकियों और अखाड़ों के स्वागत के दौरान शहर में उत्सव और श्रद्धा का अलग ही माहौल देखने को मिलता है। Indore TV news 24x71
- इंदौर में अनंत चतुर्थी का पर्व परंपरागत आयोजन 100 वर्ष से भी अधिक समय से होता रहा है इंदौर में अनंत चतुर्दशी का पर्व और झांकियों का परंपरागत आयोजन 100 साल से भी अधिक समय से होता आ रहा है। मालवा क्षेत्र की इस ऐतिहासिक परंपरा को देखने के लिए मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि दूसरे प्रदेशों से भी लोग इंदौर पहुंचते हैं। हर साल की तरह इस बार भी झांकियों और अखाड़ों का कारवां शहर के अलग-अलग स्थानों से निकलकर राजवाड़ा पहुंच रहा है। इंदौर की ऐतिहासिक झांकियां अपने-अपने स्थानों से निकलकर निर्धारित मार्ग से होते हुए राजवाड़ा पहुंचती हैं। रास्ते में कई स्थानों पर मंच बनाकर झांकियों और अखाड़ों का स्वागत किया जाता है। यहां कलाकारों और प्रतिभागियों का सम्मान भी किया जाता है। इस पूरे आयोजन में किन्नर समाज की भी विशेष भूमिका रही है। नंदलालपुरा क्षेत्र में किन्नर समाज द्वारा पिछले 103 वर्षों से झांकियों और अखाड़ों के स्वागत एवं सम्मान के लिए मंच लगाया जाता है। यहां हर साल झांकियों और अखाड़ों का गर्मजोशी से स्वागत किया जाता है। नंदलालपुरा गादी की महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी, बहुचर नंद गिरी महामंडलेश्वर, सोना मंगला नंद गिरी महामंडलेश्वर सहित किन्नर समाज की ओर से झांकियों और अखाड़ों का स्वागत किया जाता है इस दौरान पायल गुरु, शिमला गुरु, झूमर गुरु, गोल्डन गुरु और पूजा गुरु सहित किन्नर समाज के अन्य सदस्य भी मौजूद रहते हैं। इंदौर की यह ऐतिहासिक परंपरा धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक सहभागिता का अनूठा उदाहरण है। झांकियों और अखाड़ों के स्वागत के दौरान शहर में उत्सव और श्रद्धा का अलग ही माहौल देखने को मिलता है।4
- महू तहसील के सबसे बड़े गांव दतोदा के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का मामला सामने आया है। दतोदा स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पिछले 5 वर्षों से प्राचार्य का पद रिक्त है। यह विद्यालय एक संकुल की जिम्मेदारी भी निभा रहा है, ऐसे में लंबे समय से प्राचार्य की नियुक्ति नहीं होने के कारण विद्यालय के प्रशासनिक एवं शैक्षणिक कार्यों पर असर पड़ने की बात सामने आ रही है। प्राचार्य की नियुक्ति की मांग को लेकर (ACS) आदिवासी छात्र संगठन एवं (abvp)अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा उपप्राचार्य को ज्ञापन सौंपा गया है। छात्र संगठनों ने मांग की है कि सरकार एवं शिक्षा विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दतोदा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में जल्द से जल्द स्थायी प्राचार्य की नियुक्ति करें, ताकि विद्यालय का शैक्षणिक एवं प्रशासनिक संचालन बेहतर तरीके से हो सके। महू तहसील के सबसे बड़े गांव दतोदा के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का मामला सामने आया है। दतोदा स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पिछले 5 वर्षों से प्राचार्य का पद रिक्त है। यह विद्यालय एक संकुल की जिम्मेदारी भी निभा रहा है, ऐसे में लंबे समय से प्राचार्य की नियुक्ति नहीं होने के कारण विद्यालय के प्रशासनिक एवं शैक्षणिक कार्यों पर असर पड़ने की बात सामने आ रही है। प्राचार्य की नियुक्ति की मांग को लेकर (ACS) आदिवासी छात्र संगठन एवं (abvp)अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा उपप्राचार्य को ज्ञापन सौंपा गया है। छात्र संगठनों ने मांग की है कि सरकार एवं शिक्षा विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दतोदा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में जल्द से जल्द स्थायी प्राचार्य की नियुक्ति करें, ताकि विद्यालय का शैक्षणिक एवं प्रशासनिक संचालन बेहतर तरीके से हो सके।2