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खटीमा में वन विभाग की तानाशाही! थारू जनजाति का शोषण और तस्करों को संरक्षण, ग्रामीणों में भारी रोष।
Mr Salim
खटीमा में वन विभाग की तानाशाही! थारू जनजाति का शोषण और तस्करों को संरक्षण, ग्रामीणों में भारी रोष।
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- Post by Mr Salim1
- Post by अशोक सरकार1
- रणथंभौर: जोन-3 में बाघ का शाही अंदाज, खुली जिप्सी में दीदार कर रोमांचित हुए पर्यटक सवाई माधोपुर | विश्व प्रसिद्ध रणथंभौर नेशनल पार्क से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बेहद सुखद खबर सामने आई है। पार्क के सबसे खूबसूरत और लोकप्रिय माने जाने वाले जोन संख्या 3 में पर्यटकों को बाघ का एक यादगार दीदार हुआ, जिसने सफारी पर निकले लोगों का दिन बना दिया। जिप्सी के सामने 'शाही चहलकदमी' मंगलवार सुबह की पाली में जब पर्यटकों का दल जिप्सी से जंगल भ्रमण पर था, तभी अचानक झाड़ियों के बीच से निकलकर एक विशाल बाघ मुख्य रास्ते पर आ गया। बाघ को इतने करीब और खुले अंदाज में देखकर पर्यटकों की सांसें थम गईं। बाघ ने बिना किसी हड़बड़ाहट के जिप्सी के सामने काफी देर तक चहलकदमी की और फिर पास ही स्थित झील के किनारे आराम फरमाने लगा। पर्यटकों में दिखा भारी उत्साह खुली जिप्सी में बाघ को महज कुछ ही फीट की दूरी पर देखकर पर्यटक गदगद हो गए। प्रकृति और वन्यजीवों की इस अद्भुत खूबसूरती को पर्यटकों ने अपने कैमरों और मोबाइल में कैद किया। सफारी से लौटे पर्यटकों ने बताया कि "यह उनके जीवन का सबसे यादगार अनुभव था। बाघ का इस तरह बेखौफ होकर घूमना रणथंभौर की असली पहचान है।" जोन-3: बाघों का पसंदीदा ठिकाना रणथंभौर का जोन-3 अपनी झीलों (पद्म तालाब, राजबाग और मलिक तालाब) और ऐतिहासिक किले के बैकड्रॉप के कारण बाघों की पहली पसंद माना जाता है। वर्तमान में यहाँ की शानदार साइटिंग ने पर्यटकों के बीच इस जोन का क्रेज और बढ़ा दिया है। विशेष नोट: हाल ही में रणथंभौर के जोन-9 में बाघ, लेपर्ड और कुनो से आए चीता (KP-2) के एक साथ देखे जाने की दुर्लभ घटना ने भी पूरी दुनिया का ध्यान रणथंभौर की ओर खींचा है।1
- लगातार बढ़ते बिजली बिलों के बीच अब आम लोगों के लिए राहत की खबर है। घरों की छत पर सोलर पैनल लगवाने का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है और सरकार भी इसे बढ़ावा दे रही है। सोलर पैनल लगने के बाद उपभोक्ता अपने घर की बिजली खुद बना सकते हैं, जिससे हर महीने आने वाला भारी-भरकम बिल काफी हद तक कम हो जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक बार सोलर सिस्टम लगवाने के बाद 20 से 25 साल तक बिजली का खर्च लगभग नगण्य हो जाता है। साथ ही, नेट मीटरिंग की सुविधा से अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजकर कमाई भी की जा सकती है। यही कारण है कि शहरों के साथ-साथ छोटे कस्बों में भी लोग तेजी से सोलर की ओर बढ़ रहे हैं। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ बचत का ही नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी बड़ा कदम है। सोलर एनर्जी से प्रदूषण नहीं होता और यह पूरी तरह स्वच्छ ऊर्जा का स्रोत है। अगर आप भी अपने घर पर सोलर पैनल लगवाने की सोच रहे हैं, तो विश्वसनीय सेवा प्रदाता Solar Sync India से संपर्क कर सही जानकारी और बेहतर इंस्टॉलेशन का लाभ उठा सकते हैं। निष्कर्ष: सोलर पैनल अब सिर्फ विकल्प नहीं, बल्कि1
- पीलीभीत। तहसील कलीनगर के गांव वोधिपुर की महिलाएं सुभासपा जिलाध्यक्ष कै नेतृत्व में डीएम कार्यालय पहुंची और शिकायत दर्ज कराकर गांव से शराब की दुकान हटवाए जाने की मांग की है1
- Post by समाचार Crime News1
- अमरिया क्षेत्र में ड्यूनी डैम रोड पर मगरमच्छ की दस्तक? वायरल वीडियो से दहशत1
- Post by Mr Salim1