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हरी-भरी संपदा का चीरहरण: परमिट की आड़ में चल रहा था सागौन तस्करी का खेल, वन विभाग ने कसी कमर अजीत मिश्रा (खोजी) बस्ती में 'हरे सोने' का चीरहरण: सुकरौली में सागौन की अवैध कटान और खाकी-खादी की संदेहास्पद चुप्पी हरी-भरी संपदा का चीरहरण: परमिट की आड़ में चल रहा था सागौन तस्करी का खेल, वन विभाग ने कसी कमर ​'हरा सोना' लूटने वालों पर शिकंजा: सुकरौली कांड में वन दरोगा की संलिप्तता उजागर, वाल्टरगंज पुलिस की संदिग्ध चुप्पी पर खड़े हुए बड़े सवाल ​फाइलों में कागजी खेल, धरातल पर उजड़ रहे जंगल: लकड़ी माफियाओं के हौसले बुलंद, क्या खाकी-खादी की मिलीभगत से फल-फूल रहा है अवैध कारोबार? ​गौर, बस्ती: जनपद के गौर ब्लॉक अंतर्गत रामनगर वन रेंज के सुकरौली गांव में पर्यावरण और कानून की धज्जियां उड़ाते हुए 'हरे सोने' यानी बेशकीमती सागौन के पेड़ों का अवैध कटान किया गया है। यह मामला सिर्फ पेड़ों की चोरी का नहीं, बल्कि वन विभाग के निचले स्तर के कर्मचारियों और पुलिस प्रशासन की साठगांठ का एक जीता-जागता उदाहरण है, जिसने व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। ​मुख्य बिंदु: कागजों की आड़ में अवैध कटान का खेल ​परमिट की आड़ में धांधली: कुल 33 सागौन के पेड़ों की अंधाधुंध कटान की गई, जिसमें से केवल 21 पेड़ों के लिए परमिट लिया गया था, जबकि शेष 12 पेड़ों को पूरी तरह अवैध तरीके से काट दिया गया। ​किस पर हुई कार्रवाई: रामनगर रेंजर सोनल वर्मा द्वारा संज्ञान लिए जाने के बाद, जमीन मालिक सर्वजीत चौधरी (पुत्र श्री राम आसरे) और लकड़ी ठेकेदार अखिलेश/अशोक कुमार सिंह (पुत्र सीता राम सिंह) के खिलाफ वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1976 की धारा 4/10 के तहत केस संख्या 25/2026-27 दर्ज किया गया है। ​लकड़ी की तस्करी: मीडिया की पड़ताल में सामने आया कि अवैध रूप से काटी गई इस लकड़ी को ट्रैक्टर-ट्रॉली पर लादकर दुबौला के पास एक ईंट भट्ठे पर ठिकाने लगाया गया है। ​महकमे के भीतर का काला सच: वन दरोगा और पुलिस पर गंभीर सवाल ​इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या बिना विभागीय संरक्षण के इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों का कटान संभव है? ​वन दरोगा की संलिप्तता: शुरुआती जांच में हल्का वन दरोगा अजय कुमार भारती की सीधी मिलीभगत सामने आ रही है, जिनके क्षेत्र में यह अवैध कटान धड़ल्ले से जारी रही। आज भी कई कटे-खड़े पेड़ उनकी कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। ​वाल्टरगंज पुलिस की संदिग्ध भूमिका: सबसे शर्मनाक पहलू वाल्टरगंज थाने की कार्यप्रणाली का है। जहां एक ओर वन विभाग ने मामला दर्ज कर लिया है, वहीं वाल्टरगंज पुलिस ने इस चोरी और अवैध कटान के गंभीर मामले में अभी तक कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया है। स्थानीय स्तर पर चर्चाएं आम हैं कि पुलिस इस मामले में 'लेन-देन' कर इसे पूरी तरह से रफा-दफा करने की जुगत में लगी हुई है। ​निष्कर्ष और प्रशासनिक चेतावनी ​सोशल मीडिया पर जब यह मामला वायरल हुआ, तब जाकर रामनगर रेंजर सोनल वर्मा ने अपनी नींद तोड़ी और कार्रवाई की। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ कागजी कार्रवाई से लकड़ी माफियाओं और उनके संरक्षक भ्रष्ट अधिकारियों के हौसले पस्त हो जाएंगे? ​यदि जिला प्रशासन और उच्चाधिकारी इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए वाल्टरगंज पुलिस की निष्क्रियता और वन दरोगा अजय कुमार भारती की भूमिका की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच नहीं कराते, तो बस्ती में वन संपदा की यह लूट यूं ही बेखौफ जारी रहेगी। अब देखना यह है कि क्या शासन-प्रशासन इस सिंडिकेट पर कठोर शिकंजा कसता है या फिर मामले को फाइलों में दफना दिया जाता है।

18 hrs ago
user_अजीत मिश्रा (खोजी)
अजीत मिश्रा (खोजी)
हर्रैया, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
18 hrs ago

हरी-भरी संपदा का चीरहरण: परमिट की आड़ में चल रहा था सागौन तस्करी का खेल, वन विभाग ने कसी कमर अजीत मिश्रा (खोजी) बस्ती में 'हरे सोने' का चीरहरण: सुकरौली में सागौन की अवैध कटान और खाकी-खादी की संदेहास्पद चुप्पी हरी-भरी संपदा का चीरहरण: परमिट की आड़ में चल रहा था सागौन तस्करी का खेल, वन विभाग ने कसी कमर ​'हरा सोना' लूटने वालों पर शिकंजा: सुकरौली कांड में वन दरोगा की संलिप्तता उजागर, वाल्टरगंज पुलिस की संदिग्ध चुप्पी पर खड़े हुए बड़े सवाल ​फाइलों में कागजी खेल, धरातल पर उजड़ रहे जंगल: लकड़ी माफियाओं के हौसले बुलंद, क्या खाकी-खादी की मिलीभगत से फल-फूल रहा है अवैध कारोबार? ​गौर, बस्ती: जनपद के गौर ब्लॉक अंतर्गत रामनगर वन रेंज के सुकरौली गांव में पर्यावरण और कानून की धज्जियां उड़ाते हुए 'हरे सोने' यानी बेशकीमती सागौन के पेड़ों का अवैध कटान किया गया है। यह मामला सिर्फ पेड़ों की चोरी का नहीं, बल्कि वन विभाग के निचले स्तर के कर्मचारियों और पुलिस प्रशासन की साठगांठ का एक जीता-जागता उदाहरण है, जिसने व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। ​मुख्य बिंदु: कागजों की आड़ में अवैध कटान का खेल ​परमिट की आड़ में धांधली: कुल 33 सागौन के पेड़ों की अंधाधुंध कटान की गई, जिसमें से केवल 21 पेड़ों के लिए परमिट लिया गया था, जबकि शेष 12 पेड़ों को पूरी तरह अवैध तरीके से काट दिया गया। ​किस पर हुई कार्रवाई: रामनगर रेंजर सोनल वर्मा द्वारा संज्ञान लिए जाने के बाद, जमीन मालिक सर्वजीत चौधरी (पुत्र श्री राम आसरे) और लकड़ी ठेकेदार अखिलेश/अशोक कुमार सिंह (पुत्र सीता राम सिंह) के खिलाफ वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1976 की धारा 4/10 के तहत केस संख्या 25/2026-27 दर्ज किया गया है। ​लकड़ी की तस्करी: मीडिया की पड़ताल में सामने आया कि अवैध रूप से काटी गई इस लकड़ी को ट्रैक्टर-ट्रॉली पर लादकर दुबौला के पास एक ईंट भट्ठे पर ठिकाने लगाया गया है। ​महकमे के भीतर का काला सच: वन दरोगा और पुलिस पर गंभीर सवाल ​इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या बिना विभागीय संरक्षण के इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों का कटान संभव है? ​वन दरोगा की संलिप्तता: शुरुआती जांच में हल्का वन दरोगा अजय कुमार भारती की सीधी मिलीभगत सामने आ रही है, जिनके क्षेत्र में यह अवैध कटान धड़ल्ले से जारी रही। आज भी कई कटे-खड़े पेड़ उनकी कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। ​वाल्टरगंज पुलिस की संदिग्ध भूमिका: सबसे शर्मनाक पहलू वाल्टरगंज थाने की कार्यप्रणाली का है। जहां एक ओर वन विभाग ने मामला दर्ज कर लिया है, वहीं वाल्टरगंज पुलिस ने इस चोरी और अवैध कटान के गंभीर मामले में अभी तक कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया है। स्थानीय स्तर पर चर्चाएं आम हैं कि पुलिस इस मामले में 'लेन-देन' कर इसे पूरी तरह से रफा-दफा करने की जुगत में लगी हुई है। ​निष्कर्ष और प्रशासनिक चेतावनी ​सोशल मीडिया पर जब यह मामला वायरल हुआ, तब जाकर रामनगर रेंजर सोनल वर्मा ने अपनी नींद तोड़ी और कार्रवाई की। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ कागजी कार्रवाई से लकड़ी माफियाओं और उनके संरक्षक भ्रष्ट अधिकारियों के हौसले पस्त हो जाएंगे? ​यदि जिला प्रशासन और उच्चाधिकारी इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए वाल्टरगंज पुलिस की निष्क्रियता और वन दरोगा अजय कुमार भारती की भूमिका की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच नहीं कराते, तो बस्ती में वन संपदा की यह लूट यूं ही बेखौफ जारी रहेगी। अब देखना यह है कि क्या शासन-प्रशासन इस सिंडिकेट पर कठोर शिकंजा कसता है या फिर मामले को फाइलों में दफना दिया जाता है।

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  • 🚨 देवरिया में बड़ी खबर: तिरंगा यात्रा के दौरान भीषण गर्मी से करीब 80 छात्राओं की बिगड़ी तबीयत! ​📍 घटना से जुड़े मुख्य बिंदु: ​स्थान: पीएमश्री कस्तूरबा गांधी बालिका इंटर कॉलेज, देवरिया। ​कारण: चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी में तिरंगा यात्रा में शामिल होना। ​स्थिति: यात्रा के दौरान कई छात्राओं को चक्कर और अत्यधिक कमजोरी महसूस हुई। स्कूल लौटने पर कुछ छात्राएं बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ीं। ​अस्पताल में भर्ती: आनन-फानन में सभी छात्राओं को महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। एक साथ इतनी संख्या में छात्राओं के पहुंचने से अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया।
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    🚨 देवरिया में बड़ी खबर: तिरंगा यात्रा के दौरान भीषण गर्मी से करीब 80 छात्राओं की बिगड़ी तबीयत!

​📍 घटना से जुड़े मुख्य बिंदु:

​स्थान: पीएमश्री कस्तूरबा गांधी बालिका इंटर कॉलेज, देवरिया।

​कारण: चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी में तिरंगा यात्रा में शामिल होना।

​स्थिति: यात्रा के दौरान कई छात्राओं को चक्कर और अत्यधिक कमजोरी महसूस हुई। स्कूल लौटने पर कुछ छात्राएं बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ीं।

​अस्पताल में भर्ती: आनन-फानन में सभी छात्राओं को महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। एक साथ इतनी संख्या में छात्राओं के पहुंचने से अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया।
    user_अजीत मिश्रा (खोजी)
    अजीत मिश्रा (खोजी)
    हर्रैया, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    9 hrs ago
  • बस्ती जिला दुबौलिया विकासखंड के गोकुलपुर से नन्हे कुआं होते हुए हो उभाई को जाने वाले मार्ग बस्ती जिला के विकासखंड दुबौलिया के अंतर्गत गोकुलपुर से नई कुआं होते हुए भाई को जाने वाले मार्ग पर लगे दो-दो खम्भे बिना तार वाले खम्भे क्या दर्शा रहा कि ये हटाए जाऐंगे कि नही
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    बस्ती जिला दुबौलिया विकासखंड के गोकुलपुर से नन्हे कुआं होते हुए हो  उभाई को जाने वाले मार्ग 
बस्ती जिला के विकासखंड दुबौलिया के अंतर्गत गोकुलपुर से नई कुआं होते हुए भाई को जाने वाले मार्ग पर लगे दो-दो खम्भे बिना तार वाले खम्भे क्या दर्शा रहा
कि ये हटाए जाऐंगे कि नही
    user_Shani Kumar
    Shani Kumar
    हर्रैया, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    15 hrs ago
  • पेड़ वाले बाबा ने बाबा जागेश्वर नाथ मंदिर में चलाया स्वच्छता अभियान* * *वृक्षारोपण और स्वच्छता के जरिए समाजसेवा का दे रहे संदेश* *तिलकपुर (बस्ती)।* वरिष्ठ समाजसेवी गौहर अली, जिन्हें क्षेत्र में ‘पेड़ वाले बाबा’ के नाम से जाना जाता है, ने बुधवार को तिलकपुर स्थित बाबा जागेश्वर नाथ मंदिर (शिवालय) परिसर में स्वच्छता अभियान चलाया। उन्होंने मंदिर परिसर और आसपास के स्थानों की साफ-सफाई कर लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया। अभियान के दौरान लोगों को सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ रखने के साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाने का संदेश भी दिया गया। स्वच्छता अभियान में भदावल कला के प्रधान रोशन अली भी शामिल हुए। उन्होंने अभियान में सहयोग करते हुए लोगों को मंदिर परिसर सहित सार्वजनिक स्थानों को साफ-सुथरा रखने के लिए प्रेरित किया। गौहर अली लंबे समय से सामाजिक कार्यों से जुड़े हुए हैं। क्षेत्र में उन्हें ‘पेड़ वाले बाबा’ के नाम से जाना जाता है। वह स्वच्छता अभियान के साथ ही पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण के माध्यम से लोगों को जागरूक करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि स्वच्छ वातावरण और हरियाली स्वस्थ एवं बेहतर समाज की पहचान है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने घर और आसपास के क्षेत्र में साफ-सफाई रखने के साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधे लगाने चाहिए। बाबा जागेश्वर नाथ मंदिर परिसर में अभियान के दौरान गौहर अली ने लोगों से मंदिर और अन्य सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्वच्छता किसी एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है। सामूहिक प्रयासों से ही गांव और क्षेत्र को स्वच्छ एवं हरा-भरा बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करना अभियान का मुख्य उद्देश्य है। धार्मिक स्थलों की स्वच्छता बनाए रखना भी सभी की जिम्मेदारी है, क्योंकि इन स्थानों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। क्षेत्र के लोगों ने ‘पेड़ वाले बाबा’ के इस प्रयास की सराहना की। ग्रामीणों ने कहा कि गौहर अली द्वारा लगातार चलाए जा रहे स्वच्छता और वृक्षारोपण अभियान समाज के लिए प्रेरणादायक हैं। लोगों ने भविष्य में भी ऐसे अभियानों में सहयोग करने और स्वच्छता व पर्यावरण संरक्षण का संदेश आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
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    पेड़ वाले बाबा ने बाबा जागेश्वर नाथ मंदिर में चलाया स्वच्छता अभियान*
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*वृक्षारोपण और स्वच्छता के जरिए समाजसेवा का दे रहे संदेश*
*तिलकपुर (बस्ती)।* वरिष्ठ समाजसेवी गौहर अली, जिन्हें क्षेत्र में ‘पेड़ वाले बाबा’ के नाम से जाना जाता है, ने बुधवार को तिलकपुर स्थित बाबा जागेश्वर नाथ मंदिर (शिवालय) परिसर में स्वच्छता अभियान चलाया। उन्होंने मंदिर परिसर और आसपास के स्थानों की साफ-सफाई कर लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया। अभियान के दौरान लोगों को सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ रखने के साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाने का संदेश भी दिया गया। स्वच्छता अभियान में भदावल कला के प्रधान रोशन अली भी शामिल हुए। उन्होंने अभियान में सहयोग करते हुए लोगों को मंदिर परिसर सहित सार्वजनिक स्थानों को साफ-सुथरा रखने के लिए प्रेरित किया। गौहर अली लंबे समय से सामाजिक कार्यों से जुड़े हुए हैं। क्षेत्र में उन्हें ‘पेड़ वाले बाबा’ के नाम से जाना जाता है। वह स्वच्छता अभियान के साथ ही पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण के माध्यम से लोगों को जागरूक करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि स्वच्छ वातावरण और हरियाली स्वस्थ एवं बेहतर समाज की पहचान है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने घर और आसपास के क्षेत्र में साफ-सफाई रखने के साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधे लगाने चाहिए। बाबा जागेश्वर नाथ मंदिर परिसर में अभियान के दौरान गौहर अली ने लोगों से मंदिर और अन्य सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्वच्छता किसी एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है। सामूहिक प्रयासों से ही गांव और क्षेत्र को स्वच्छ एवं हरा-भरा बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करना अभियान का मुख्य उद्देश्य है। धार्मिक स्थलों की स्वच्छता बनाए रखना भी सभी की जिम्मेदारी है, क्योंकि इन स्थानों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। क्षेत्र के लोगों ने ‘पेड़ वाले बाबा’ के इस प्रयास की सराहना की। ग्रामीणों ने कहा कि गौहर अली द्वारा लगातार चलाए जा रहे स्वच्छता और वृक्षारोपण अभियान समाज के लिए प्रेरणादायक हैं। लोगों ने भविष्य में भी ऐसे अभियानों में सहयोग करने और स्वच्छता व पर्यावरण संरक्षण का संदेश आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
    user_विनोद कुमार सोनकर पत्रकार
    विनोद कुमार सोनकर पत्रकार
    बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • रूप नगर रुदौली जिला बस्ती का यह हालत है मैं यह कहना चाहता हूं यहां पर एक कूड़ा दान रख देना चाहिए उसके बाद इस नहर का साफ सफाई कर देना चाहिए क्योंकि यहां पर साफ सफाई होता है पानी रुका हुआ है सर गंदगी गंधार एकदम से बदबू दे रहा है और यहां पर मच्छर पैदा हो रहे हैं काट लेंगे तो मलेरिया हो जाएगा तो आप लोग का क्या रहा है शेयर करें इस वीडियो को
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    रूप नगर रुदौली जिला बस्ती का यह हालत है मैं यह कहना चाहता हूं यहां पर एक कूड़ा दान रख देना चाहिए उसके बाद इस नहर का साफ सफाई कर देना चाहिए क्योंकि यहां पर साफ सफाई होता है पानी रुका हुआ है सर गंदगी गंधार एकदम से बदबू दे रहा है और यहां पर मच्छर पैदा हो रहे हैं काट लेंगे तो मलेरिया हो जाएगा तो आप लोग का क्या रहा है शेयर करें इस वीडियो को
    user_Usman Qureshi
    Usman Qureshi
    बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • कांवरियो ं का सेवा का वीडियो वायरल, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस । कांवरियो ं का सेवा का वीडियो वायरल, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस ।
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    कांवरियो ं का सेवा का वीडियो वायरल,

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस ।
कांवरियो ं का सेवा का वीडियो वायरल,
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस ।
    user_Rajkapur
    Rajkapur
    Local News Reporter Bikapur, Ayodhya•
    4 hrs ago
  • 13 तारीख की तिरंगा यात्रा के दौरान भारी भीड़ और ट्रैफिक के बीच एंबुलेंस के लिए तुरंत रास्ता बनवाकर उसे शीघ्र जिला अस्पताल पहुंचाया गया। राष्ट्रभक्ति के साथ-साथ किसी की जान बचाना और मानवता धर्म निभाना ही हम सबकी प्रथम प्राथमिकता है। पत्रकार एकता जिंदाबाद! ✊🇮🇳
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    13 तारीख की तिरंगा यात्रा के दौरान भारी भीड़ और ट्रैफिक के बीच एंबुलेंस के लिए तुरंत रास्ता बनवाकर उसे शीघ्र जिला अस्पताल पहुंचाया गया। राष्ट्रभक्ति के साथ-साथ किसी की जान बचाना और मानवता धर्म निभाना ही हम सबकी प्रथम प्राथमिकता है।
 पत्रकार एकता जिंदाबाद! ✊🇮🇳
    user_आपकी ताकत अयोध्या
    आपकी ताकत अयोध्या
    Local News Reporter Faizabad, Ayodhya•
    5 hrs ago
  • तिरंगे की शान में गूंजा अयोध्या, पत्रकारों एवं सामाजिक कार्यकर्ता ने निकाली भव्य तिरंगा यात्रा (रामनगरी अयोध्या) स्वतंत्रता दिवस से पहले आज गुरुवार को अयोध्या की सड़कों पर देशभक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा? सिविल लाइंस स्थित गांधी पार्क से सामाजिक कार्यकर्ता एवं पत्रकारों व स्थानीय नागरिकों ने भव्य तिरंगा यात्रा में बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा हाथों में लहराते तिरंगे और “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम्” के गगनभेदी नारों से पूरा शहर राष्ट्रभक्ति से सराबोर हो गया। राकेश तिवारी, अंतरिक्ष तिवारी समेत कई पत्रकारों के सहयोगगांधी पार्क से शुरू हुई यात्रा रिकाबगंज, चौक, चौराहा, उदया आईटीआई, साकेत डिग्री कॉलेज, टेढ़ी बाजार और श्रीराम मंदिर मार्ग होते हुए लता मंगेशकर चौक पहुंची। रास्ते भर लोगों ने पुष्प वर्षा कर तिरंगा यात्रियों का स्वागत किया जगह-जगह जलपान और नाश्ते की व्यवस्था भी की गई। यात्रा के दौरान राम जन्मभूमि थाना पुलिस ने भी सहयोग करते हुए यात्रियों का स्वागत किया इससे यात्रा शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ती रही। लता चौक पर राष्ट्रीय गान के साथ यात्रा का समापन हुआ। इस मौके पर पत्रकारों और नागरिकों ने देश की एकता, अखंडता और राष्ट्रप्रेम का संदेश देते हुए कहा कि तिरंगा केवल झंडा नहीं, बल्कि देश के गौरव, स्वाभिमान और एकता का प्रतीक है। तिरंगा यात्रा में लव कुमार पांडेय, धर्मेंद्र तिवारी, मो. हसन, राकेश मिश्रा, सुनील दुबे, सर्वेश पांडेय, राम धीरज पाठक, उमाशंकर तिवारी, नेहा हाशमी, शशि शर्मा, दिनेश कुमार गौड़, रवि मौर्य वेद प्रकाश तिवारी,समेत बड़ी संख्या में पत्रकार और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक शामिल रहे। अयोध्या की धरती पर निकली यह तिरंगा यात्रा स्वतंत्रता दिवस से पहले राष्ट्रप्रेम और एकजुटता की मजबूत तस्वीर पेश कर गई। ब्यूरो रिपोर्ट
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    तिरंगे की शान में गूंजा अयोध्या, पत्रकारों एवं सामाजिक कार्यकर्ता ने निकाली भव्य तिरंगा यात्रा
(रामनगरी अयोध्या)
स्वतंत्रता दिवस से पहले आज गुरुवार को अयोध्या की सड़कों पर देशभक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा?
सिविल लाइंस स्थित गांधी पार्क से सामाजिक कार्यकर्ता एवं पत्रकारों व स्थानीय नागरिकों ने भव्य तिरंगा यात्रा में बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
हाथों में लहराते तिरंगे और “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम्” के गगनभेदी नारों से पूरा शहर राष्ट्रभक्ति से सराबोर हो गया।
राकेश तिवारी, अंतरिक्ष तिवारी समेत कई पत्रकारों के सहयोगगांधी पार्क से शुरू हुई यात्रा रिकाबगंज, चौक, चौराहा, उदया आईटीआई, साकेत डिग्री कॉलेज, टेढ़ी बाजार और श्रीराम मंदिर मार्ग होते हुए लता मंगेशकर चौक पहुंची। 
रास्ते भर लोगों ने पुष्प वर्षा कर तिरंगा यात्रियों का स्वागत किया जगह-जगह जलपान और नाश्ते की व्यवस्था भी की गई।
यात्रा के दौरान राम जन्मभूमि थाना पुलिस ने भी सहयोग करते हुए यात्रियों का स्वागत किया इससे यात्रा शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ती रही।
लता चौक पर राष्ट्रीय गान के साथ यात्रा का समापन हुआ। 
इस मौके पर पत्रकारों और नागरिकों ने देश की एकता, अखंडता और राष्ट्रप्रेम का संदेश देते हुए कहा कि तिरंगा केवल झंडा नहीं, बल्कि देश के गौरव, स्वाभिमान और एकता का प्रतीक है।
तिरंगा यात्रा में लव कुमार पांडेय, धर्मेंद्र तिवारी, मो. हसन, राकेश मिश्रा, सुनील दुबे, सर्वेश पांडेय, राम धीरज पाठक, उमाशंकर तिवारी, नेहा हाशमी, शशि शर्मा, दिनेश कुमार गौड़, रवि मौर्य वेद प्रकाश तिवारी,समेत बड़ी संख्या में पत्रकार और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक शामिल रहे।
अयोध्या की धरती पर निकली यह तिरंगा यात्रा स्वतंत्रता दिवस से पहले राष्ट्रप्रेम और एकजुटता की मजबूत तस्वीर पेश कर गई। 
ब्यूरो रिपोर्ट
    user_Sarveshpandey
    Sarveshpandey
    Faizabad, Ayodhya•
    6 hrs ago
  • मकान का ताला या मौत का दरवाजा? पिटबुल के आतंक ने छीनी आवासीय सुरक्षा की गारंटी! अजीत मिश्रा (खोजी) ​पटियाला के घुमन नगर से आई यह खबर रूह कंपा देने वाली है। एक दंपती जो अपने सपनों का आशियाना तलाशने निकला था, उन्हें क्या पता था कि एक घर की घंटी बजाना उनके जीवन का सबसे डरावना अनुभव बन जाएगा। प्रॉपर्टी डीलर के साथ पहुंचे इस जोड़े पर जैसे ही घर का दरवाजा खुला, एक खूंखार पिटबुल कुत्ते ने उन पर ऐसा तांडव मचाया कि दोनों गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल जा पहुंचे। ​यह सिर्फ पटियाला की एक अकेली घटना नहीं है, बल्कि यह उस गंभीर सामाजिक बीमारी का आईना है जो हमारे शहरों और मोहल्लों में तेजी से पैर पसार रही है। ​क्यों गंभीर खतरा बन रहा है यह 'स्टेटस सिंबल'? ​आज के दौर में पिटबुल जैसी खतरनाक नस्ल के कुत्तों को पालना लोगों के लिए अपनी 'शान' दिखाने का जरिया बन गया है। लेकिन इस दिखावे की कीमत वे बेकसूर लोग चुका रहे हैं जो गलियों से गुजरते हैं, डिलीवरी बॉय होते हैं या फिर मेहमान बनकर घरों तक पहुंचते हैं। ​इस पूरी त्रासदी में कुछ कड़वे सच सामने आते हैं: ​मालिकों की आपराधिक लापरवाही: खतरनाक नस्ल के कुत्तों को पालने का शौक तो पाल लिया जाता है, लेकिन उनके स्वभाव को नियंत्रित करने की ट्रेनिंग और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम (जैसे मजबूत मज़ल या सही घेराबंदी) करने की जहमत कोई नहीं उठाता। ​दूसरों की जिंदगी से खिलवाड़: आवासीय इलाकों में ऐसे आक्रामक जानवरों को खुला छोड़ना या बिना नियंत्रण के रखना सार्वजनिक सुरक्षा पर सीधा हमला है। ​प्रशासनिक उदासीनता: जब तक कोई खून से लथपथ होकर अस्पताल नहीं पहुंचता, तब तक न तो प्रशासन जागता है और न ही नियमों का सख्ती से पालन होता है। ​अब चुप्पी तोड़ने का वक्त है ​घर देखना या खरीदना किसी भी परिवार के लिए एक खुशी का मौका होता है, लेकिन अगर वह पल आईसीयू के बेड पर दर्द से कराहते हुए बीते, तो यह एक सभ्य समाज के मुंह पर तमाचा है। ​अब समय आ गया है कि प्रशासन केवल औपचारिकता न निभाए, बल्कि खतरनाक नस्लों के कुत्तों के पंजीकरण, उनकी ब्रीडिंग और आवासीय क्षेत्रों में उन्हें रखने को लेकर बेहद कड़े और दंडनीय कानून बनाए। जब तक लापरवाही बरतने वाले मालिकों पर भारी जुर्माने और जेल की सजा का डर नहीं होगा, तब तक बेकसूर लोग यूं ही लहूलुहान होते रहेंगे। ​सुरक्षा का अधिकार हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, किसी के शौक का मोहताज नहीं!
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    मकान का ताला या मौत का दरवाजा? पिटबुल के आतंक ने छीनी आवासीय सुरक्षा की गारंटी!

अजीत मिश्रा (खोजी)
​पटियाला के घुमन नगर से आई यह खबर रूह कंपा देने वाली है। एक दंपती जो अपने सपनों का आशियाना तलाशने निकला था, उन्हें क्या पता था कि एक घर की घंटी बजाना उनके जीवन का सबसे डरावना अनुभव बन जाएगा। प्रॉपर्टी डीलर के साथ पहुंचे इस जोड़े पर जैसे ही घर का दरवाजा खुला, एक खूंखार पिटबुल कुत्ते ने उन पर ऐसा तांडव मचाया कि दोनों गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल जा पहुंचे।
​यह सिर्फ पटियाला की एक अकेली घटना नहीं है, बल्कि यह उस गंभीर सामाजिक बीमारी का आईना है जो हमारे शहरों और मोहल्लों में तेजी से पैर पसार रही है।
​क्यों गंभीर खतरा बन रहा है यह 'स्टेटस सिंबल'?
​आज के दौर में पिटबुल जैसी खतरनाक नस्ल के कुत्तों को पालना लोगों के लिए अपनी 'शान' दिखाने का जरिया बन गया है। लेकिन इस दिखावे की कीमत वे बेकसूर लोग चुका रहे हैं जो गलियों से गुजरते हैं, डिलीवरी बॉय होते हैं या फिर मेहमान बनकर घरों तक पहुंचते हैं।
​इस पूरी त्रासदी में कुछ कड़वे सच सामने आते हैं:
​मालिकों की आपराधिक लापरवाही: खतरनाक नस्ल के कुत्तों को पालने का शौक तो पाल लिया जाता है, लेकिन उनके स्वभाव को नियंत्रित करने की ट्रेनिंग और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम (जैसे मजबूत मज़ल या सही घेराबंदी) करने की जहमत कोई नहीं उठाता।
​दूसरों की जिंदगी से खिलवाड़: आवासीय इलाकों में ऐसे आक्रामक जानवरों को खुला छोड़ना या बिना नियंत्रण के रखना सार्वजनिक सुरक्षा पर सीधा हमला है।
​प्रशासनिक उदासीनता: जब तक कोई खून से लथपथ होकर अस्पताल नहीं पहुंचता, तब तक न तो प्रशासन जागता है और न ही नियमों का सख्ती से पालन होता है।
​अब चुप्पी तोड़ने का वक्त है
​घर देखना या खरीदना किसी भी परिवार के लिए एक खुशी का मौका होता है, लेकिन अगर वह पल आईसीयू के बेड पर दर्द से कराहते हुए बीते, तो यह एक सभ्य समाज के मुंह पर तमाचा है।
​अब समय आ गया है कि प्रशासन केवल औपचारिकता न निभाए, बल्कि खतरनाक नस्लों के कुत्तों के पंजीकरण, उनकी ब्रीडिंग और आवासीय क्षेत्रों में उन्हें रखने को लेकर बेहद कड़े और दंडनीय कानून बनाए। जब तक लापरवाही बरतने वाले मालिकों पर भारी जुर्माने और जेल की सजा का डर नहीं होगा, तब तक बेकसूर लोग यूं ही लहूलुहान होते रहेंगे।
​सुरक्षा का अधिकार हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, किसी के शौक का मोहताज नहीं!
    user_अजीत मिश्रा (खोजी)
    अजीत मिश्रा (खोजी)
    हर्रैया, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    15 hrs ago
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