मकान का ताला या मौत का दरवाजा? पिटबुल के आतंक ने छीनी आवासीय सुरक्षा की गारंटी! अजीत मिश्रा (खोजी) पटियाला के घुमन नगर से आई यह खबर रूह कंपा देने वाली है। एक दंपती जो अपने सपनों का आशियाना तलाशने निकला था, उन्हें क्या पता था कि एक घर की घंटी बजाना उनके जीवन का सबसे डरावना अनुभव बन जाएगा। प्रॉपर्टी डीलर के साथ पहुंचे इस जोड़े पर जैसे ही घर का दरवाजा खुला, एक खूंखार पिटबुल कुत्ते ने उन पर ऐसा तांडव मचाया कि दोनों गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल जा पहुंचे। यह सिर्फ पटियाला की एक अकेली घटना नहीं है, बल्कि यह उस गंभीर सामाजिक बीमारी का आईना है जो हमारे शहरों और मोहल्लों में तेजी से पैर पसार रही है। क्यों गंभीर खतरा बन रहा है यह 'स्टेटस सिंबल'? आज के दौर में पिटबुल जैसी खतरनाक नस्ल के कुत्तों को पालना लोगों के लिए अपनी 'शान' दिखाने का जरिया बन गया है। लेकिन इस दिखावे की कीमत वे बेकसूर लोग चुका रहे हैं जो गलियों से गुजरते हैं, डिलीवरी बॉय होते हैं या फिर मेहमान बनकर घरों तक पहुंचते हैं। इस पूरी त्रासदी में कुछ कड़वे सच सामने आते हैं: मालिकों की आपराधिक लापरवाही: खतरनाक नस्ल के कुत्तों को पालने का शौक तो पाल लिया जाता है, लेकिन उनके स्वभाव को नियंत्रित करने की ट्रेनिंग और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम (जैसे मजबूत मज़ल या सही घेराबंदी) करने की जहमत कोई नहीं उठाता। दूसरों की जिंदगी से खिलवाड़: आवासीय इलाकों में ऐसे आक्रामक जानवरों को खुला छोड़ना या बिना नियंत्रण के रखना सार्वजनिक सुरक्षा पर सीधा हमला है। प्रशासनिक उदासीनता: जब तक कोई खून से लथपथ होकर अस्पताल नहीं पहुंचता, तब तक न तो प्रशासन जागता है और न ही नियमों का सख्ती से पालन होता है। अब चुप्पी तोड़ने का वक्त है घर देखना या खरीदना किसी भी परिवार के लिए एक खुशी का मौका होता है, लेकिन अगर वह पल आईसीयू के बेड पर दर्द से कराहते हुए बीते, तो यह एक सभ्य समाज के मुंह पर तमाचा है। अब समय आ गया है कि प्रशासन केवल औपचारिकता न निभाए, बल्कि खतरनाक नस्लों के कुत्तों के पंजीकरण, उनकी ब्रीडिंग और आवासीय क्षेत्रों में उन्हें रखने को लेकर बेहद कड़े और दंडनीय कानून बनाए। जब तक लापरवाही बरतने वाले मालिकों पर भारी जुर्माने और जेल की सजा का डर नहीं होगा, तब तक बेकसूर लोग यूं ही लहूलुहान होते रहेंगे। सुरक्षा का अधिकार हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, किसी के शौक का मोहताज नहीं!
मकान का ताला या मौत का दरवाजा? पिटबुल के आतंक ने छीनी आवासीय सुरक्षा की गारंटी! अजीत मिश्रा (खोजी) पटियाला के घुमन नगर से आई यह खबर रूह कंपा देने वाली है। एक दंपती जो अपने सपनों का आशियाना तलाशने निकला था, उन्हें क्या पता था कि एक घर की घंटी बजाना उनके जीवन का सबसे डरावना अनुभव बन जाएगा। प्रॉपर्टी डीलर के साथ पहुंचे इस जोड़े पर जैसे ही घर का दरवाजा खुला, एक खूंखार पिटबुल कुत्ते ने उन पर ऐसा तांडव मचाया कि दोनों गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल जा पहुंचे। यह सिर्फ पटियाला की एक अकेली घटना नहीं है, बल्कि यह उस गंभीर सामाजिक बीमारी का आईना है जो हमारे शहरों और मोहल्लों में तेजी से पैर पसार रही है। क्यों गंभीर खतरा बन रहा है यह 'स्टेटस सिंबल'? आज के दौर में पिटबुल जैसी खतरनाक नस्ल के कुत्तों को पालना लोगों के लिए अपनी 'शान' दिखाने का जरिया बन गया है। लेकिन इस दिखावे की कीमत वे बेकसूर लोग चुका रहे हैं जो गलियों से गुजरते हैं, डिलीवरी बॉय होते हैं या फिर मेहमान बनकर घरों तक पहुंचते हैं। इस पूरी त्रासदी में कुछ कड़वे सच सामने आते हैं: मालिकों की आपराधिक लापरवाही: खतरनाक नस्ल के कुत्तों को पालने का शौक तो पाल लिया जाता है, लेकिन उनके स्वभाव को नियंत्रित करने की ट्रेनिंग और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम (जैसे मजबूत मज़ल या सही घेराबंदी) करने की जहमत कोई नहीं उठाता। दूसरों की जिंदगी से खिलवाड़: आवासीय इलाकों में ऐसे आक्रामक जानवरों को खुला छोड़ना या बिना नियंत्रण के रखना सार्वजनिक सुरक्षा पर सीधा हमला है। प्रशासनिक उदासीनता: जब तक कोई खून से लथपथ होकर अस्पताल नहीं पहुंचता, तब तक न तो प्रशासन जागता है और न ही नियमों का सख्ती से पालन होता है। अब चुप्पी तोड़ने का वक्त है घर देखना या खरीदना किसी भी परिवार के लिए एक खुशी का मौका होता है, लेकिन अगर वह पल आईसीयू के बेड पर दर्द से कराहते हुए बीते, तो यह एक सभ्य समाज के मुंह पर तमाचा है। अब समय आ गया है कि प्रशासन केवल औपचारिकता न निभाए, बल्कि खतरनाक नस्लों के कुत्तों के पंजीकरण, उनकी ब्रीडिंग और आवासीय क्षेत्रों में उन्हें रखने को लेकर बेहद कड़े और दंडनीय कानून बनाए। जब तक लापरवाही बरतने वाले मालिकों पर भारी जुर्माने और जेल की सजा का डर नहीं होगा, तब तक बेकसूर लोग यूं ही लहूलुहान होते रहेंगे। सुरक्षा का अधिकार हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, किसी के शौक का मोहताज नहीं!
- हमारे यहां देखे हो खूब तेज बारिश हुआ है रुदौली रोड नगर जिला बस्ती में आप लोग यह देख सकते हैं शाम का वक्त है1
- भोलेनाथ जी खा रहे हैं समोसे Bholenath khud samosa khate hue... भोलेनाथ जी खा रहे हैं समोसे Bholenath khud samosa khate hue...1
- अयोध्या में अंतरजनपदीय लूट गिरोह का पर्दाफाश, तीन शातिर गिरफ्तार अयोध्या। कुमारगंज थाना क्षेत्र में सर्विलांस, एसओजी और थाना कुमारगंज पुलिस की संयुक्त टीम ने अंतरजनपदीय लूट गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लूट की घटनाओं से संबंधित संपत्ति भी बरामद की है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार अभियुक्तों से पूछताछ के बाद लूट की कई घटनाओं का अनावरण हुआ है। पुलिस टीम अब आरोपियों के आपराधिक इतिहास और गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी जुटा रही है। पूरे मामले की जानकारी देते हुए पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अयोध्या श्री बलवंत कुमार चौधरी ने बताया कि संयुक्त पुलिस टीम की कार्रवाई से अंतरजनपदीय लूट की घटनाओं का खुलासा करने में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार अभियुक्तों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जा रही है।1
- संपूर्ण भारतवर्ष में हर घर तिरंगा अभियान आज़ादी का उत्सव मनाये रास्ट्र भक्ति के साथ चले देश महान स्वतंत्रता दिवस मनाये,।।।।।। ।। reporting Lal chand SONI,,।। ।।,aaj subah times, ।।1
- एसओजी और सर्विलांस टीम ने 3 लूट के आरोपियों को किया गिरफ्तार कुमारगंज पुलिस, एसओजी और सर्विलांस टीम ने 3 लूट के आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक गिरोह सफेद अपाचे मोटरसाइकिल से लूट की वारदात करता था। पीड़ितों में डर पैदा करने के लिए असली तमंचे के साथ नकली पिस्टल का भी करता थे इस्तेमाल अयोध्या। जनपद अयोध्या के कुमारगंज पुलिस एसओजी और सर्विलांस टीम ने 3 लूट के आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है । आरोपियों की पहचान अंकित कुमार पाण्डेय, अरविन्द कुमार पाण्डेय और आलोक यादव के रूप मे हुई हैं । पीड़ितों में डर पैदा करने के लिए असली तमंचे के साथ नकली पिस्टल का भी इस्तेमाल किया जाता था। कुमारगंज क्षेत्र की 8 और 9 अगस्त की दो लूट की घटनाओं का खुलासा हुआ। पूछताछ में अमेठी के शुक्ल बाजार थाना क्षेत्र की एक लूट में भी शामिल होने की बात सामने आई। पुलिस ने एक अपाचे, 4 मोबाइल फोन, सोने का कान का बाला और ₹11,170 नकद बरामद किए। इसके अलावा 315 बोर का तमंचा, 4 जिंदा कारतूस, 2 खोखे और नकली पिस्टल भी बरामद हुई। पुलिस ने CCTV, यक्ष ऐप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की मदद से आरोपियों तक पहुंच बनाई। गिरफ्तार आरोपियों में अंकित पाण्डेय का HS नंबर 131A भी दर्ज है।2
- मवई में बेखौफ हरे पेड़ों पर चल रहा आरा, जिम्मेदारों की भूमिका पर उठे सवाल *मवई में बेखौफ हरे पेड़ों पर चल रहा आरा, जिम्मेदारों की भूमिका पर उठे सवाल।* ➖➖➖➖➖➖➖➖➖ अयोध्या। जहां एक ओर प्रदेश सरकार पर्यावरण संरक्षण को लेकर *‘एक पेड़ मां के नाम’* सहित वृहद वृक्षारोपण अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर मवई थाना क्षेत्र में हरे-भरे प्रतिबंधित पेड़ों की कथित अवैध कटान का मामला सामने आया है। मवई थाना क्षेत्र के मदारपुर ईदगाह मार्ग पर पिछले कई दिनों से हरे-भरे पेड़ों पर लगातार आरा चलने की शिकायत सामने आ रही है। आरोप है कि लकड़कट्टे बेखौफ होकर पेड़ों की कटान कर रहे हैं। स्थानीय सूत्रों की मानें तो पिछले करीब एक सप्ताह से लगातार पेड़ों की कटान का सिलसिला जारी है और मौके पर पेड़ों की कटी हुई जड़ें भी मौजूद हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि जिम्मेदार अधिकारियों को रात में ही अवैध कटान की सूचना दे दी गई थी, तो इसके बावजूद पेड़ों की कटान क्यों नहीं रुकी..? क्षेत्रीय वन अधिकारी जेपी गुप्ता और मवई थानाध्यक्ष मनोज यादव को सूचना दिए जाने के बाद भी कार्रवाई न होने के आरोपों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार जहां एक ओर लाखों पौधे लगाकर पर्यावरण बचाने का संदेश दे रही है, वहीं दूसरी ओर हरे पेड़ों की कथित अवैध कटान पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से अभियान की गंभीरता पर सवाल उठ रहे हैं। अब देखना यह है कि वन विभाग और पुलिस प्रशासन मामले का संज्ञान लेकर मौके पर जांच करता है या फिर हरे पेड़ों पर चलता आरा यूं ही जारी रहता है? आखिर बेखौफ लकड़कट्टों को किसका संरक्षण प्राप्त है और सूचना के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई—यह जांच का विषय है।1
- हरी-भरी संपदा का चीरहरण: परमिट की आड़ में चल रहा था सागौन तस्करी का खेल, वन विभाग ने कसी कमर अजीत मिश्रा (खोजी) बस्ती में 'हरे सोने' का चीरहरण: सुकरौली में सागौन की अवैध कटान और खाकी-खादी की संदेहास्पद चुप्पी हरी-भरी संपदा का चीरहरण: परमिट की आड़ में चल रहा था सागौन तस्करी का खेल, वन विभाग ने कसी कमर 'हरा सोना' लूटने वालों पर शिकंजा: सुकरौली कांड में वन दरोगा की संलिप्तता उजागर, वाल्टरगंज पुलिस की संदिग्ध चुप्पी पर खड़े हुए बड़े सवाल फाइलों में कागजी खेल, धरातल पर उजड़ रहे जंगल: लकड़ी माफियाओं के हौसले बुलंद, क्या खाकी-खादी की मिलीभगत से फल-फूल रहा है अवैध कारोबार? गौर, बस्ती: जनपद के गौर ब्लॉक अंतर्गत रामनगर वन रेंज के सुकरौली गांव में पर्यावरण और कानून की धज्जियां उड़ाते हुए 'हरे सोने' यानी बेशकीमती सागौन के पेड़ों का अवैध कटान किया गया है। यह मामला सिर्फ पेड़ों की चोरी का नहीं, बल्कि वन विभाग के निचले स्तर के कर्मचारियों और पुलिस प्रशासन की साठगांठ का एक जीता-जागता उदाहरण है, जिसने व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। मुख्य बिंदु: कागजों की आड़ में अवैध कटान का खेल परमिट की आड़ में धांधली: कुल 33 सागौन के पेड़ों की अंधाधुंध कटान की गई, जिसमें से केवल 21 पेड़ों के लिए परमिट लिया गया था, जबकि शेष 12 पेड़ों को पूरी तरह अवैध तरीके से काट दिया गया। किस पर हुई कार्रवाई: रामनगर रेंजर सोनल वर्मा द्वारा संज्ञान लिए जाने के बाद, जमीन मालिक सर्वजीत चौधरी (पुत्र श्री राम आसरे) और लकड़ी ठेकेदार अखिलेश/अशोक कुमार सिंह (पुत्र सीता राम सिंह) के खिलाफ वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1976 की धारा 4/10 के तहत केस संख्या 25/2026-27 दर्ज किया गया है। लकड़ी की तस्करी: मीडिया की पड़ताल में सामने आया कि अवैध रूप से काटी गई इस लकड़ी को ट्रैक्टर-ट्रॉली पर लादकर दुबौला के पास एक ईंट भट्ठे पर ठिकाने लगाया गया है। महकमे के भीतर का काला सच: वन दरोगा और पुलिस पर गंभीर सवाल इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या बिना विभागीय संरक्षण के इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों का कटान संभव है? वन दरोगा की संलिप्तता: शुरुआती जांच में हल्का वन दरोगा अजय कुमार भारती की सीधी मिलीभगत सामने आ रही है, जिनके क्षेत्र में यह अवैध कटान धड़ल्ले से जारी रही। आज भी कई कटे-खड़े पेड़ उनकी कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। वाल्टरगंज पुलिस की संदिग्ध भूमिका: सबसे शर्मनाक पहलू वाल्टरगंज थाने की कार्यप्रणाली का है। जहां एक ओर वन विभाग ने मामला दर्ज कर लिया है, वहीं वाल्टरगंज पुलिस ने इस चोरी और अवैध कटान के गंभीर मामले में अभी तक कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया है। स्थानीय स्तर पर चर्चाएं आम हैं कि पुलिस इस मामले में 'लेन-देन' कर इसे पूरी तरह से रफा-दफा करने की जुगत में लगी हुई है। निष्कर्ष और प्रशासनिक चेतावनी सोशल मीडिया पर जब यह मामला वायरल हुआ, तब जाकर रामनगर रेंजर सोनल वर्मा ने अपनी नींद तोड़ी और कार्रवाई की। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ कागजी कार्रवाई से लकड़ी माफियाओं और उनके संरक्षक भ्रष्ट अधिकारियों के हौसले पस्त हो जाएंगे? यदि जिला प्रशासन और उच्चाधिकारी इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए वाल्टरगंज पुलिस की निष्क्रियता और वन दरोगा अजय कुमार भारती की भूमिका की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच नहीं कराते, तो बस्ती में वन संपदा की यह लूट यूं ही बेखौफ जारी रहेगी। अब देखना यह है कि क्या शासन-प्रशासन इस सिंडिकेट पर कठोर शिकंजा कसता है या फिर मामले को फाइलों में दफना दिया जाता है।1
- अयोध्या रेलवे स्टेशन पर एक युवक के ट्रेन की छत पर चढ़ने से अफरा-तफरी मच गई। वह हाई-वोल्टेज ओवरहेड तारों के बेहद करीब पहुंच गया था। GRP और RPF की टीम ने मौके पर पहुंचकर उसे सुरक्षित नीचे उतारा। ⚠️ सावधान: ट्रेन की छत या रेलवे के बिजली वाले तारों के पास जाना बेहद खतरनाक है। ऐसी हरकत कभी न करें। #AyodhyaNews #RailwaySafety #TrainSafety #RailwayAlert #Ayodhya अयोध्या रेलवे स्टेशन पर एक युवक के ट्रेन की छत पर चढ़ने से अफरा-तफरी मच गई। वह हाई-वोल्टेज ओवरहेड तारों के बेहद करीब पहुंच गया था। GRP और RPF की टीम ने मौके पर पहुंचकर उसे सुरक्षित नीचे उतारा। ⚠️ सावधान: ट्रेन की छत या रेलवे के बिजली वाले तारों के पास जाना बेहद खतरनाक है। ऐसी हरकत कभी न करें। #AyodhyaNews #RailwaySafety #TrainSafety #RailwayAlert #Ayodhya1
- अयोध्या कैंट के जमथरा घाट बंधा पर समय से कार्य न होने पर घाघरा का जल स्तर बढ़ने से पानी में ही कार्य किया जा रहा है1