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स्वास्थ्य विभाग का 'बीमार' सिस्टम: डिप्टी सीएम की फटकार या महज़ सरकारी शिष्टाचार? अजीत मिश्रा (खोजी) लखनऊ के चिनहट सीएचसी की बदहाली देख भड़के ब्रजेश पाठक, पर सवाल वही—क्या मंत्री के जाते ही फिर लौट आएगी 'अंधेरगर्दी'? लखनऊ। उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था का हाल उस पुराने इंजन जैसा हो गया है, जिसे चलाने के लिए बार-बार 'डिप्टी सीएम' के धक्के (औचक निरीक्षण) की ज़रूरत पड़ती है। राजधानी के चिनहट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में जब ब्रजेश पाठक अचानक दाखिल हुए, तो वहां की बदहाली और बेतरतीब भीड़ ने यह साफ कर दिया कि साहब की पिछली सैकड़ों चेतावनियों का अफसरों पर रत्ती भर असर नहीं हुआ है। तमाशा बन गई है स्वास्थ्य सेवा! वीडियो में साफ़ दिख रहा है कि अस्पताल के भीतर मरीजों का समंदर उमड़ा है। दवा काउंटर पर खड़ा लाचार मरीज और ओपीडी के बाहर बिलबिलाते तीमारदार—क्या यही है 'मिशन कायाकल्प'? डिप्टी सीएम ने वहां मौजूद कर्मचारियों को खरी-खोटी सुनाई, व्यवहार सुधारने की नसीहत दी, लेकिन सवाल यह है कि क्या शिष्टाचार से पेट भरता है या बीमारियों का इलाज होता है? चिनहट की यह भीड़ गवाही दे रही है कि सिस्टम पूरी तरह 'कोमा' में है। 'बाहर की दवा' का जहर, कौन करेगा खत्म? डिप्टी सीएम ने एक बार फिर वही घिसा-पिटा सवाल किया—"दवा बाहर से तो नहीं लिख रहे?" मंत्री जी, यह सवाल अब जनता के लिए मजाक बन चुका है। सरकारी अस्पतालों के गेट के बाहर खड़े मेडिकल स्टोरों की चांदी इस बात का सबूत है कि अंदर का 'कमीशन तंत्र' आपकी धमकियों से कहीं ज्यादा ताकतवर है। जब तक भ्रष्ट बाबुओं और डॉक्टरों की गर्दन नहीं नापी जाएगी, तब तक गरीब का खून यूं ही चूसा जाता रहेगा। औचक निरीक्षण: समाधान या सिर्फ़ सुर्खियां? प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अपनी 'छापेमारी' के लिए मशहूर हैं, लेकिन नतीजा क्या? दवाएं आज भी गायब हैं। डॉक्टर आज भी नदारद हैं। मरीजों के साथ बदसलूकी आज भी बदस्तूर जारी है। सीधा प्रहार: क्या चिनहट का यह दौरा महज़ एक और 'फोटो अवसर' था या वाकई किसी बड़े अफसर की कुर्सी हिलेगी? जनता अब इन नाटकीय दौरों से ऊब चुकी है। साहब! चिनहट की जनता को आपकी 'फटकार' नहीं, अस्पताल में 'इलाज' और 'दवा' चाहिए। अगर राजधानी के दिल में यह हाल है, तो प्रदेश के गांवों में तो भगवान ही मालिक है। सत्ता के गलियारों में बैठे हुक्मरान याद रखें, अस्पताल की फर्श पर बैठा वो बेबस बाप और बीमार मां जब बिना इलाज के लौटती है, तो वो आपके सिस्टम के मुंह पर करारा तमाचा होती है।

2 hrs ago
user_अजीत मिश्रा (खोजी)
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
2 hrs ago

स्वास्थ्य विभाग का 'बीमार' सिस्टम: डिप्टी सीएम की फटकार या महज़ सरकारी शिष्टाचार? अजीत मिश्रा (खोजी) लखनऊ के चिनहट सीएचसी की बदहाली देख भड़के ब्रजेश पाठक, पर सवाल वही—क्या मंत्री के जाते ही फिर लौट आएगी 'अंधेरगर्दी'? लखनऊ। उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था का हाल उस पुराने इंजन जैसा हो गया है, जिसे चलाने के लिए बार-बार 'डिप्टी सीएम' के धक्के (औचक निरीक्षण) की ज़रूरत पड़ती है। राजधानी के चिनहट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में जब ब्रजेश पाठक अचानक दाखिल हुए, तो वहां की बदहाली और बेतरतीब भीड़ ने यह साफ कर दिया कि साहब की पिछली सैकड़ों चेतावनियों का अफसरों पर रत्ती भर असर नहीं हुआ है। तमाशा बन गई है स्वास्थ्य सेवा! वीडियो में साफ़ दिख रहा है कि अस्पताल के भीतर मरीजों का समंदर उमड़ा है। दवा काउंटर पर खड़ा लाचार मरीज और ओपीडी के बाहर बिलबिलाते तीमारदार—क्या यही है 'मिशन कायाकल्प'? डिप्टी सीएम ने वहां मौजूद कर्मचारियों को खरी-खोटी सुनाई, व्यवहार सुधारने की नसीहत दी, लेकिन सवाल यह है कि क्या शिष्टाचार से पेट भरता है या बीमारियों का इलाज होता है? चिनहट की यह भीड़ गवाही दे रही है कि सिस्टम पूरी तरह 'कोमा' में है। 'बाहर की दवा' का जहर, कौन करेगा खत्म? डिप्टी सीएम ने एक बार फिर वही घिसा-पिटा सवाल किया—"दवा बाहर से तो नहीं लिख रहे?" मंत्री जी, यह सवाल अब जनता के लिए मजाक बन चुका है। सरकारी अस्पतालों के गेट के बाहर खड़े मेडिकल स्टोरों की चांदी इस बात का सबूत है कि अंदर का 'कमीशन तंत्र' आपकी धमकियों से कहीं ज्यादा ताकतवर है। जब तक भ्रष्ट बाबुओं और डॉक्टरों की गर्दन नहीं नापी जाएगी, तब तक गरीब का खून यूं ही चूसा जाता रहेगा। औचक निरीक्षण: समाधान या सिर्फ़ सुर्खियां? प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अपनी 'छापेमारी' के लिए मशहूर हैं, लेकिन नतीजा क्या? दवाएं आज भी गायब हैं। डॉक्टर आज भी नदारद हैं। मरीजों के साथ बदसलूकी आज भी बदस्तूर जारी है। सीधा प्रहार: क्या चिनहट का यह दौरा महज़ एक और 'फोटो अवसर' था या वाकई किसी बड़े अफसर की कुर्सी हिलेगी? जनता अब इन नाटकीय दौरों से ऊब चुकी है। साहब! चिनहट की जनता को आपकी 'फटकार' नहीं, अस्पताल में 'इलाज' और 'दवा' चाहिए। अगर राजधानी के दिल में यह हाल है, तो प्रदेश के गांवों में तो भगवान ही मालिक है। सत्ता के गलियारों में बैठे हुक्मरान याद रखें, अस्पताल की फर्श पर बैठा वो बेबस बाप और बीमार मां जब बिना इलाज के लौटती है, तो वो आपके सिस्टम के मुंह पर करारा तमाचा होती है।

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  • आज दिनांक 16/03/26 को मारपीट के प्रकरण में गिरफ्तार अभियुक्तगण, जो हवालात पुरुष में निरुद्ध थे, को बाहर निकालकर अन्तर्गत धारा 170/126/135 बीएनएसएस में शांति भंग की आशंका के दृष्टिगत चालान कर माननीय न्यायालय भेजा गया। अभियुक्तगण का विवरण निम्नवत है– 1.दुर्विजय पुत्र विदेशी, निवासी ग्राम पिडारी पूर्वी, थाना महुली, जनपद संतकबीरनगर 2.उदयभान पुत्र विदेशी, निवासी ग्राम पिडारी पूर्वी, थाना महुली, जनपद संतकबीरनगर 3.विकास चौहान पुत्र विदेशी, निवासी ग्राम पिडारी पूर्वी, थाना महुली, जनपद संतकबीरनगर 4.रामविलास पुत्र भगौती, निवासी ग्राम ठाठर, थाना महुली, जनपद संतकबीरनगर 5.राजकुमार यादव पुत्र भगौती, निवासी ग्राम ठाठर पूर्वी, थाना महुली, जनपद संतकबीरनगर 6.सूरज यादव पुत्र राजकुमार, निवासी ग्राम ठाठर, थाना महुली, जनपद संतकबीरनगर 7.मनीष यादव पुत्र राजकुमार, निवासी ग्राम ठाठर, थाना महुली, जनपद संतकबीरनगर 8.मुन्ना यादव उर्फ रामाज्ञा पुत्र रामभरोस, निवासी ग्राम भगता, थाना महुली, जनपद संतकबीरनगर उक्त सभी अभियुक्तगणों को आवश्यक विधिक कार्यवाही करते हुए न्यायालय प्रेषित किया गया।
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    आज दिनांक 16/03/26 को मारपीट के प्रकरण में गिरफ्तार अभियुक्तगण, जो हवालात पुरुष में निरुद्ध थे, को बाहर निकालकर अन्तर्गत धारा 170/126/135 बीएनएसएस में शांति भंग की आशंका के दृष्टिगत चालान कर माननीय न्यायालय भेजा गया।
अभियुक्तगण का विवरण निम्नवत है–
1.दुर्विजय पुत्र विदेशी, निवासी ग्राम पिडारी पूर्वी, थाना महुली, जनपद संतकबीरनगर
2.उदयभान पुत्र विदेशी, निवासी ग्राम पिडारी पूर्वी, थाना महुली, जनपद संतकबीरनगर
3.विकास चौहान पुत्र विदेशी, निवासी ग्राम पिडारी पूर्वी, थाना महुली, जनपद संतकबीरनगर
4.रामविलास पुत्र भगौती, निवासी ग्राम ठाठर, थाना महुली, जनपद संतकबीरनगर
5.राजकुमार यादव पुत्र भगौती, निवासी ग्राम ठाठर पूर्वी, थाना महुली, जनपद संतकबीरनगर
6.सूरज यादव पुत्र राजकुमार, निवासी ग्राम ठाठर, थाना महुली, जनपद संतकबीरनगर
7.मनीष यादव पुत्र राजकुमार, निवासी ग्राम ठाठर, थाना महुली, जनपद संतकबीरनगर
8.मुन्ना यादव उर्फ रामाज्ञा पुत्र रामभरोस, निवासी ग्राम भगता, थाना महुली, जनपद संतकबीरनगर
उक्त सभी अभियुक्तगणों को आवश्यक विधिक कार्यवाही करते हुए न्यायालय प्रेषित किया गया।
    user_Ashwini Kumar Pandey
    Ashwini Kumar Pandey
    पत्रकार Khalilabad, Sant Kabeer Nagar•
    3 hrs ago
  • Post by Vipin Times Khlilabad
    4
    Post by Vipin Times Khlilabad
    user_Vipin Times Khlilabad
    Vipin Times Khlilabad
    Local News Reporter खलीलाबाद, संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश•
    9 hrs ago
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    user_Shahrukh Tanda
    Shahrukh Tanda
    टांडा, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश•
    10 hrs ago
  • आकाशवाणी, 16 3 2026 ई0 मित्रों! सोकर उठ गए हो तो आइए, हर हर महादेव के उच्चारण के साथ आज के दिन चर्या का प्रारंभ करते हैं। हर हर महादेव 🚩 ॐ नमः शिवाय! ✍️ 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🙏
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    आकाशवाणी, 
16 3 2026 ई0
मित्रों! सोकर उठ गए हो तो  आइए, हर हर महादेव के उच्चारण के साथ आज के दिन चर्या  का प्रारंभ करते हैं। 
हर हर महादेव 🚩
ॐ नमः शिवाय! ✍️
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🙏
    user_Kamalakant tiwari
    Kamalakant tiwari
    Journalist खलीलाबाद, संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश•
    12 hrs ago
  • Post by अनिल कुमार प्रजापति
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    Post by अनिल कुमार प्रजापति
    user_अनिल कुमार प्रजापति
    अनिल कुमार प्रजापति
    Voice of people घनघटा, संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश•
    23 hrs ago
  • अंबेडकर नगर में कल सवर्ण समाज के नेताओं का हो रहा है जमावड़ा... यूजीसी कानून के खिलाफ होने जा रहा है महासंग्राम
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    अंबेडकर नगर में कल सवर्ण समाज के नेताओं का हो रहा है जमावड़ा... यूजीसी कानून के खिलाफ होने जा रहा है महासंग्राम
    user_ABN News Plus
    ABN News Plus
    पत्रकार Ambedkar Nagar, Uttar Pradesh•
    36 min ago
  • अजीत मिश्रा (खोजी) लखनऊ: जनेश्वर मिश्र पार्क के पास हुआ वह भीषण हादसा, जिसमें नैतिक नामक युवक ने अपनी जान गंवा दी, सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं है। यह उस 'डिजिटल दिखावे' की बलि है, जिसका शिकार आज का युवा हर दिन हो रहा है। सोशल मीडिया पर 'बाइकर्स ग्रुप' और 'राइडिंग कंटेंट' के नाम पर जो रफ़्तार का जुनून परोसा जा रहा है, उसने सड़कों को रेसिंग ट्रैक और युवाओं को 'कंटेंट' का मोहरा बना दिया है। कैमरा, एक्शन... और मौत आजकल बाइकर्स ग्रुप के साथ राइडिंग का मतलब केवल सवारी करना नहीं रह गया है। इसके पीछे एक अदृश्य दबाव होता है—बेहतर शॉट लेने का, हाई-स्पीड का वीडियो बनाकर फॉलोअर्स बढ़ाने का। क्या नैतिक का ग्रुप भी उसी 'परफेक्ट रील' की तलाश में था? जब नजरें सड़क पर होने के बजाय कैमरे के एंगल पर होती हैं, तो मौत की संभावना सौ गुना बढ़ जाती है। सोशल मीडिया का 'ग्लेमर' बनाम जमीनी हकीकत सोशल मीडिया हमें राइडिंग का जो ग्लैमराइज्ड (Glamorized) चेहरा दिखाता है, उसमें हेलमेट के पीछे की घबराहट या अनियंत्रित बाइक का डर नहीं दिखता। दिखावे की संस्कृति: इंस्टाग्राम और फेसबुक पर रफ़्तार का महिमामंडन करने वाले इन्फ्लुएंसरों ने युवाओं के दिमाग में यह गलत संदेश भर दिया है कि 'स्पीड ही पहचान है।' ग्रुप प्रेशर: किसी ग्रुप का हिस्सा होने पर 'सबसे आगे रहने' या 'स्टंट करने' का जो दबाव होता है, वह अक्सर अनुभवहीन युवाओं को मौत के मुहाने पर ले आता है। अब और कितने 'नैतिक' चाहिए? सोशल मीडिया की चमक-धमक में हम यह भूल गए हैं कि सड़क पर रफ़्तार का मतलब केवल एक गलती और अंत। एक बिजली विभाग के AE के बेटे की मृत्यु ने एक हँसता-खेलता घर उजाड़ दिया है। क्या कुछ लाइक्स, कमेंट्स या चंद मिनटों के वीडियो की खातिर जान गंवाना सौदा घाटे का नहीं है? समाज और अभिभावकों से सवाल हम बच्चों को महंगी बाइक तो दिला देते हैं, लेकिन क्या हम उन्हें यह सिखा पा रहे हैं कि सड़क किसी के 'कंटेंट' का स्टूडियो नहीं है? डिजिटल अनुशासन: क्या अभिभावक अपने बच्चों के सोशल मीडिया व्यवहार पर नजर रख रहे हैं? जिम्मेदार राइडिंग: बाइकर्स ग्रुप्स को अपनी जिम्मेदारी तय करनी होगी। क्या वे राइडिंग के दौरान सुरक्षा के बजाय वीडियो क्वालिटी को ज्यादा अहमियत तो नहीं दे रहे? निष्कर्ष: सोशल मीडिया पर रफ़्तार की रील डालना आसान है, लेकिन उस दर्द को वापस लाना असंभव है जो एक परिवार ने नैतिक को खोकर सहा है। समय आ गया है कि हम 'स्पीड' के इस डिजिटल पागलपन को रोकें, इससे पहले कि अगली रील किसी की अंतिम विदाई का वीडियो बन जाए। सड़क पर रफ़्तार का खेल बंद होना चाहिए, क्योंकि मौत का कोई 'रीटेक' नहीं होता।
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    अजीत मिश्रा (खोजी)
लखनऊ: जनेश्वर मिश्र पार्क के पास हुआ वह भीषण हादसा, जिसमें नैतिक नामक युवक ने अपनी जान गंवा दी, सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं है। यह उस 'डिजिटल दिखावे' की बलि है, जिसका शिकार आज का युवा हर दिन हो रहा है। सोशल मीडिया पर 'बाइकर्स ग्रुप' और 'राइडिंग कंटेंट' के नाम पर जो रफ़्तार का जुनून परोसा जा रहा है, उसने सड़कों को रेसिंग ट्रैक और युवाओं को 'कंटेंट' का मोहरा बना दिया है।
कैमरा, एक्शन... और मौत
आजकल बाइकर्स ग्रुप के साथ राइडिंग का मतलब केवल सवारी करना नहीं रह गया है। इसके पीछे एक अदृश्य दबाव होता है—बेहतर शॉट लेने का, हाई-स्पीड का वीडियो बनाकर फॉलोअर्स बढ़ाने का। क्या नैतिक का ग्रुप भी उसी 'परफेक्ट रील' की तलाश में था? जब नजरें सड़क पर होने के बजाय कैमरे के एंगल पर होती हैं, तो मौत की संभावना सौ गुना बढ़ जाती है।
सोशल मीडिया का 'ग्लेमर' बनाम जमीनी हकीकत
सोशल मीडिया हमें राइडिंग का जो ग्लैमराइज्ड (Glamorized) चेहरा दिखाता है, उसमें हेलमेट के पीछे की घबराहट या अनियंत्रित बाइक का डर नहीं दिखता।
दिखावे की संस्कृति: इंस्टाग्राम और फेसबुक पर रफ़्तार का महिमामंडन करने वाले इन्फ्लुएंसरों ने युवाओं के दिमाग में यह गलत संदेश भर दिया है कि 'स्पीड ही पहचान है।'
ग्रुप प्रेशर: किसी ग्रुप का हिस्सा होने पर 'सबसे आगे रहने' या 'स्टंट करने' का जो दबाव होता है, वह अक्सर अनुभवहीन युवाओं को मौत के मुहाने पर ले आता है।
अब और कितने 'नैतिक' चाहिए?
सोशल मीडिया की चमक-धमक में हम यह भूल गए हैं कि सड़क पर रफ़्तार का मतलब केवल एक गलती और अंत। एक बिजली विभाग के AE के बेटे की मृत्यु ने एक हँसता-खेलता घर उजाड़ दिया है। क्या कुछ लाइक्स, कमेंट्स या चंद मिनटों के वीडियो की खातिर जान गंवाना सौदा घाटे का नहीं है?
समाज और अभिभावकों से सवाल
हम बच्चों को महंगी बाइक तो दिला देते हैं, लेकिन क्या हम उन्हें यह सिखा पा रहे हैं कि सड़क किसी के 'कंटेंट' का स्टूडियो नहीं है?
डिजिटल अनुशासन: क्या अभिभावक अपने बच्चों के सोशल मीडिया व्यवहार पर नजर रख रहे हैं?
जिम्मेदार राइडिंग: बाइकर्स ग्रुप्स को अपनी जिम्मेदारी तय करनी होगी। क्या वे राइडिंग के दौरान सुरक्षा के बजाय वीडियो क्वालिटी को ज्यादा अहमियत तो नहीं दे रहे?
निष्कर्ष: सोशल मीडिया पर रफ़्तार की रील डालना आसान है, लेकिन उस दर्द को वापस लाना असंभव है जो एक परिवार ने नैतिक को खोकर सहा है। समय आ गया है कि हम 'स्पीड' के इस डिजिटल पागलपन को रोकें, इससे पहले कि अगली रील किसी की अंतिम विदाई का वीडियो बन जाए। सड़क पर रफ़्तार का खेल बंद होना चाहिए, क्योंकि मौत का कोई 'रीटेक' नहीं होता।
    user_अजीत मिश्रा (खोजी)
    अजीत मिश्रा (खोजी)
    बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    10 hrs ago
  • Post by Vipin Times Khlilabad
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    Post by Vipin Times Khlilabad
    user_Vipin Times Khlilabad
    Vipin Times Khlilabad
    Local News Reporter खलीलाबाद, संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश•
    22 hrs ago
  • फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि नाले से गैस बनाने की प्रेरणा भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन को कहां से मिली किस वैज्ञानिक से यह शिक्षा मिली
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    फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि नाले से गैस बनाने की प्रेरणा भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन को कहां से मिली किस वैज्ञानिक से यह शिक्षा मिली
    user_रिपोर्टरआलापुर अंबेडकरनगर
    रिपोर्टरआलापुर अंबेडकरनगर
    Voice of people अल्लापुर, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
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