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रील और रफ़्तार का घातक मेल: क्या हमने सड़कों को 'डिजिटल श्मशान' बना दिया है? अजीत मिश्रा (खोजी) लखनऊ: जनेश्वर मिश्र पार्क के पास हुआ वह भीषण हादसा, जिसमें नैतिक नामक युवक ने अपनी जान गंवा दी, सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं है। यह उस 'डिजिटल दिखावे' की बलि है, जिसका शिकार आज का युवा हर दिन हो रहा है। सोशल मीडिया पर 'बाइकर्स ग्रुप' और 'राइडिंग कंटेंट' के नाम पर जो रफ़्तार का जुनून परोसा जा रहा है, उसने सड़कों को रेसिंग ट्रैक और युवाओं को 'कंटेंट' का मोहरा बना दिया है। कैमरा, एक्शन... और मौत आजकल बाइकर्स ग्रुप के साथ राइडिंग का मतलब केवल सवारी करना नहीं रह गया है। इसके पीछे एक अदृश्य दबाव होता है—बेहतर शॉट लेने का, हाई-स्पीड का वीडियो बनाकर फॉलोअर्स बढ़ाने का। क्या नैतिक का ग्रुप भी उसी 'परफेक्ट रील' की तलाश में था? जब नजरें सड़क पर होने के बजाय कैमरे के एंगल पर होती हैं, तो मौत की संभावना सौ गुना बढ़ जाती है। सोशल मीडिया का 'ग्लेमर' बनाम जमीनी हकीकत सोशल मीडिया हमें राइडिंग का जो ग्लैमराइज्ड (Glamorized) चेहरा दिखाता है, उसमें हेलमेट के पीछे की घबराहट या अनियंत्रित बाइक का डर नहीं दिखता। दिखावे की संस्कृति: इंस्टाग्राम और फेसबुक पर रफ़्तार का महिमामंडन करने वाले इन्फ्लुएंसरों ने युवाओं के दिमाग में यह गलत संदेश भर दिया है कि 'स्पीड ही पहचान है।' ग्रुप प्रेशर: किसी ग्रुप का हिस्सा होने पर 'सबसे आगे रहने' या 'स्टंट करने' का जो दबाव होता है, वह अक्सर अनुभवहीन युवाओं को मौत के मुहाने पर ले आता है। अब और कितने 'नैतिक' चाहिए? सोशल मीडिया की चमक-धमक में हम यह भूल गए हैं कि सड़क पर रफ़्तार का मतलब केवल एक गलती और अंत। एक बिजली विभाग के AE के बेटे की मृत्यु ने एक हँसता-खेलता घर उजाड़ दिया है। क्या कुछ लाइक्स, कमेंट्स या चंद मिनटों के वीडियो की खातिर जान गंवाना सौदा घाटे का नहीं है? समाज और अभिभावकों से सवाल हम बच्चों को महंगी बाइक तो दिला देते हैं, लेकिन क्या हम उन्हें यह सिखा पा रहे हैं कि सड़क किसी के 'कंटेंट' का स्टूडियो नहीं है? डिजिटल अनुशासन: क्या अभिभावक अपने बच्चों के सोशल मीडिया व्यवहार पर नजर रख रहे हैं? जिम्मेदार राइडिंग: बाइकर्स ग्रुप्स को अपनी जिम्मेदारी तय करनी होगी। क्या वे राइडिंग के दौरान सुरक्षा के बजाय वीडियो क्वालिटी को ज्यादा अहमियत तो नहीं दे रहे? निष्कर्ष: सोशल मीडिया पर रफ़्तार की रील डालना आसान है, लेकिन उस दर्द को वापस लाना असंभव है जो एक परिवार ने नैतिक को खोकर सहा है। समय आ गया है कि हम 'स्पीड' के इस डिजिटल पागलपन को रोकें, इससे पहले कि अगली रील किसी की अंतिम विदाई का वीडियो बन जाए। सड़क पर रफ़्तार का खेल बंद होना चाहिए, क्योंकि मौत का कोई 'रीटेक' नहीं होता।

11 hrs ago
user_अजीत मिश्रा (खोजी)
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
11 hrs ago

रील और रफ़्तार का घातक मेल: क्या हमने सड़कों को 'डिजिटल श्मशान' बना दिया है? अजीत मिश्रा (खोजी) लखनऊ: जनेश्वर मिश्र पार्क के पास हुआ वह भीषण हादसा, जिसमें नैतिक नामक युवक ने अपनी जान गंवा दी, सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं है। यह उस 'डिजिटल दिखावे' की बलि है, जिसका शिकार आज का युवा हर दिन हो रहा है। सोशल मीडिया पर 'बाइकर्स ग्रुप' और 'राइडिंग कंटेंट' के नाम पर जो रफ़्तार का जुनून परोसा जा रहा है, उसने सड़कों को रेसिंग ट्रैक और युवाओं को 'कंटेंट' का मोहरा बना दिया है। कैमरा, एक्शन... और मौत आजकल बाइकर्स ग्रुप के साथ राइडिंग का मतलब केवल सवारी करना नहीं रह गया है। इसके पीछे एक अदृश्य दबाव होता है—बेहतर शॉट लेने का, हाई-स्पीड का वीडियो बनाकर फॉलोअर्स बढ़ाने का। क्या नैतिक का ग्रुप भी उसी 'परफेक्ट रील' की तलाश में था? जब नजरें सड़क पर होने के बजाय कैमरे के एंगल पर होती हैं, तो मौत की संभावना सौ गुना बढ़ जाती है। सोशल मीडिया का 'ग्लेमर' बनाम जमीनी हकीकत सोशल मीडिया हमें राइडिंग का जो ग्लैमराइज्ड (Glamorized) चेहरा दिखाता है, उसमें हेलमेट के पीछे की घबराहट या अनियंत्रित बाइक का डर नहीं दिखता। दिखावे की संस्कृति: इंस्टाग्राम और फेसबुक पर रफ़्तार का महिमामंडन करने वाले इन्फ्लुएंसरों ने युवाओं के दिमाग में यह गलत संदेश भर दिया है कि 'स्पीड ही पहचान है।' ग्रुप प्रेशर: किसी ग्रुप का हिस्सा होने पर 'सबसे आगे रहने' या 'स्टंट करने' का जो दबाव होता है, वह अक्सर अनुभवहीन युवाओं को मौत के मुहाने पर ले आता है। अब और कितने 'नैतिक' चाहिए? सोशल मीडिया की चमक-धमक में हम यह भूल गए हैं कि सड़क पर रफ़्तार का मतलब केवल एक गलती और अंत। एक बिजली विभाग के AE के बेटे की मृत्यु ने एक हँसता-खेलता घर उजाड़ दिया है। क्या कुछ लाइक्स, कमेंट्स या चंद मिनटों के वीडियो की खातिर जान गंवाना सौदा घाटे का नहीं है? समाज और अभिभावकों से सवाल हम बच्चों को महंगी बाइक तो दिला देते हैं, लेकिन क्या हम उन्हें यह सिखा पा रहे हैं कि सड़क किसी के 'कंटेंट' का स्टूडियो नहीं है? डिजिटल अनुशासन: क्या अभिभावक अपने बच्चों के सोशल मीडिया व्यवहार पर नजर रख रहे हैं? जिम्मेदार राइडिंग: बाइकर्स ग्रुप्स को अपनी जिम्मेदारी तय करनी होगी। क्या वे राइडिंग के दौरान सुरक्षा के बजाय वीडियो क्वालिटी को ज्यादा अहमियत तो नहीं दे रहे? निष्कर्ष: सोशल मीडिया पर रफ़्तार की रील डालना आसान है, लेकिन उस दर्द को वापस लाना असंभव है जो एक परिवार ने नैतिक को खोकर सहा है। समय आ गया है कि हम 'स्पीड' के इस डिजिटल पागलपन को रोकें, इससे पहले कि अगली रील किसी की अंतिम विदाई का वीडियो बन जाए। सड़क पर रफ़्तार का खेल बंद होना चाहिए, क्योंकि मौत का कोई 'रीटेक' नहीं होता।

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  • पूर्व माध्यमिक विद्यालय, करमागजा, करियापार राउत, बस्ती-सदर, बस्ती, 🙏😊👍
    1
    पूर्व माध्यमिक विद्यालय, करमागजा,
करियापार राउत, बस्ती-सदर, बस्ती,
🙏😊👍
    user_Santosh Jaiswal
    Santosh Jaiswal
    Basti, Uttar Pradesh•
    1 hr ago
  • अजीत मिश्रा (खोजी) लखनऊ के चिनहट सीएचसी की बदहाली देख भड़के ब्रजेश पाठक, पर सवाल वही—क्या मंत्री के जाते ही फिर लौट आएगी 'अंधेरगर्दी'? लखनऊ। उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था का हाल उस पुराने इंजन जैसा हो गया है, जिसे चलाने के लिए बार-बार 'डिप्टी सीएम' के धक्के (औचक निरीक्षण) की ज़रूरत पड़ती है। राजधानी के चिनहट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में जब ब्रजेश पाठक अचानक दाखिल हुए, तो वहां की बदहाली और बेतरतीब भीड़ ने यह साफ कर दिया कि साहब की पिछली सैकड़ों चेतावनियों का अफसरों पर रत्ती भर असर नहीं हुआ है। तमाशा बन गई है स्वास्थ्य सेवा! वीडियो में साफ़ दिख रहा है कि अस्पताल के भीतर मरीजों का समंदर उमड़ा है। दवा काउंटर पर खड़ा लाचार मरीज और ओपीडी के बाहर बिलबिलाते तीमारदार—क्या यही है 'मिशन कायाकल्प'? डिप्टी सीएम ने वहां मौजूद कर्मचारियों को खरी-खोटी सुनाई, व्यवहार सुधारने की नसीहत दी, लेकिन सवाल यह है कि क्या शिष्टाचार से पेट भरता है या बीमारियों का इलाज होता है? चिनहट की यह भीड़ गवाही दे रही है कि सिस्टम पूरी तरह 'कोमा' में है। 'बाहर की दवा' का जहर, कौन करेगा खत्म? डिप्टी सीएम ने एक बार फिर वही घिसा-पिटा सवाल किया—"दवा बाहर से तो नहीं लिख रहे?" मंत्री जी, यह सवाल अब जनता के लिए मजाक बन चुका है। सरकारी अस्पतालों के गेट के बाहर खड़े मेडिकल स्टोरों की चांदी इस बात का सबूत है कि अंदर का 'कमीशन तंत्र' आपकी धमकियों से कहीं ज्यादा ताकतवर है। जब तक भ्रष्ट बाबुओं और डॉक्टरों की गर्दन नहीं नापी जाएगी, तब तक गरीब का खून यूं ही चूसा जाता रहेगा। औचक निरीक्षण: समाधान या सिर्फ़ सुर्खियां? प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अपनी 'छापेमारी' के लिए मशहूर हैं, लेकिन नतीजा क्या? दवाएं आज भी गायब हैं। डॉक्टर आज भी नदारद हैं। मरीजों के साथ बदसलूकी आज भी बदस्तूर जारी है। सीधा प्रहार: क्या चिनहट का यह दौरा महज़ एक और 'फोटो अवसर' था या वाकई किसी बड़े अफसर की कुर्सी हिलेगी? जनता अब इन नाटकीय दौरों से ऊब चुकी है। साहब! चिनहट की जनता को आपकी 'फटकार' नहीं, अस्पताल में 'इलाज' और 'दवा' चाहिए। अगर राजधानी के दिल में यह हाल है, तो प्रदेश के गांवों में तो भगवान ही मालिक है। सत्ता के गलियारों में बैठे हुक्मरान याद रखें, अस्पताल की फर्श पर बैठा वो बेबस बाप और बीमार मां जब बिना इलाज के लौटती है, तो वो आपके सिस्टम के मुंह पर करारा तमाचा होती है।
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    अजीत मिश्रा (खोजी)
लखनऊ के चिनहट सीएचसी की बदहाली देख भड़के ब्रजेश पाठक, पर सवाल वही—क्या मंत्री के जाते ही फिर लौट आएगी 'अंधेरगर्दी'?
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था का हाल उस पुराने इंजन जैसा हो गया है, जिसे चलाने के लिए बार-बार 'डिप्टी सीएम' के धक्के (औचक निरीक्षण) की ज़रूरत पड़ती है। राजधानी के चिनहट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में जब ब्रजेश पाठक अचानक दाखिल हुए, तो वहां की बदहाली और बेतरतीब भीड़ ने यह साफ कर दिया कि साहब की पिछली सैकड़ों चेतावनियों का अफसरों पर रत्ती भर असर नहीं हुआ है।
तमाशा बन गई है स्वास्थ्य सेवा!
वीडियो में साफ़ दिख रहा है कि अस्पताल के भीतर मरीजों का समंदर उमड़ा है। दवा काउंटर पर खड़ा लाचार मरीज और ओपीडी के बाहर बिलबिलाते तीमारदार—क्या यही है 'मिशन कायाकल्प'? डिप्टी सीएम ने वहां मौजूद कर्मचारियों को खरी-खोटी सुनाई, व्यवहार सुधारने की नसीहत दी, लेकिन सवाल यह है कि क्या शिष्टाचार से पेट भरता है या बीमारियों का इलाज होता है? चिनहट की यह भीड़ गवाही दे रही है कि सिस्टम पूरी तरह 'कोमा' में है।
'बाहर की दवा' का जहर, कौन करेगा खत्म?
डिप्टी सीएम ने एक बार फिर वही घिसा-पिटा सवाल किया—"दवा बाहर से तो नहीं लिख रहे?" मंत्री जी, यह सवाल अब जनता के लिए मजाक बन चुका है। सरकारी अस्पतालों के गेट के बाहर खड़े मेडिकल स्टोरों की चांदी इस बात का सबूत है कि अंदर का 'कमीशन तंत्र' आपकी धमकियों से कहीं ज्यादा ताकतवर है। जब तक भ्रष्ट बाबुओं और डॉक्टरों की गर्दन नहीं नापी जाएगी, तब तक गरीब का खून यूं ही चूसा जाता रहेगा।
औचक निरीक्षण: समाधान या सिर्फ़ सुर्खियां?
प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अपनी 'छापेमारी' के लिए मशहूर हैं, लेकिन नतीजा क्या?
दवाएं आज भी गायब हैं।
डॉक्टर आज भी नदारद हैं।
मरीजों के साथ बदसलूकी आज भी बदस्तूर जारी है।
सीधा प्रहार: क्या चिनहट का यह दौरा महज़ एक और 'फोटो अवसर' था या वाकई किसी बड़े अफसर की कुर्सी हिलेगी? जनता अब इन नाटकीय दौरों से ऊब चुकी है। साहब! चिनहट की जनता को आपकी 'फटकार' नहीं, अस्पताल में 'इलाज' और 'दवा' चाहिए। अगर राजधानी के दिल में यह हाल है, तो प्रदेश के गांवों में तो भगवान ही मालिक है।
सत्ता के गलियारों में बैठे हुक्मरान याद रखें, अस्पताल की फर्श पर बैठा वो बेबस बाप और बीमार मां जब बिना इलाज के लौटती है, तो वो आपके सिस्टम के मुंह पर करारा तमाचा होती है।
    user_अजीत मिश्रा (खोजी)
    अजीत मिश्रा (खोजी)
    बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • सहारा चैरिटेबल ट्रस्ट के ब्रांड एंबेसडर का बाइट
    1
    सहारा चैरिटेबल ट्रस्ट के ब्रांड एंबेसडर का बाइट
    user_Amit yadav
    Amit yadav
    Local News Reporter Sant Kabeer Nagar, Uttar Pradesh•
    2 hrs ago
  • Pramod Kumar Goswami. 16/03/2026
    1
    Pramod Kumar Goswami.              16/03/2026
    user_Pramod Kumar Goswami
    Pramod Kumar Goswami
    हर्रैया, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • कांशीराम स्पोर्ट्स स्टेडियम में जिला केसरी सहित चार वर्गों की कुश्ती प्रतियोगिता संपन्न प्रशांत बने जिला केसरी, अजय ने कुमार केसरी का खिताब जीता; विजेता पहलवानों को अतिथियों ने किया सम्मानित संत कबीर नगर । जनपद के कांशीराम स्पोर्ट्स स्टेडियम में सोमवार को जिला केसरी, कुमार केसरी, वीर अभिमन्यु एवं बाल केसरी कुश्ती प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में जिले के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों से आए पहलवानों ने दमखम और दांव-पेच का शानदार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मेहदावल विधायक अनिल त्रिपाठी सदर विधायक अंकुर राज त्रिपाठी की अनुपस्थिति में उनके छोटे भाई उदया स्कूल प्रबंध निदेशक अंकित राज तिवारी, सदर विधायक प्रतिनिधि भोला अग्रहरि, धनघटा विधायक गणेश चौहान की अनुपस्थिति में उनकी पत्नी हैसर ब्लॉक प्रमुख कालिंदी देवी एवं नगर पालिका अध्यक्ष खलीलाबाद जगत जायसवाल उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ मेंहदावल विधायक अनिल त्रिपाठी तथा नगर पालिका परिषद खलीलाबाद के अध्यक्ष जगत जायसवाल द्वारा किया गया। इस अवसर पर विधायक अनिल त्रिपाठी ने पहलवानों का उत्साहवर्धन करते हुए विधायक अनिल त्रिपाठी ने कहा कि कुश्ती भारत की प्राचीन एवं गौरवशाली खेल परंपरा का हिस्सा है। ऐसे आयोजनों से युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरणा मिलती है और उनकी प्रतिभा को मंच मिलता है। नगर पालिका अध्यक्ष जगत जायसवाल ने खिलाड़ियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि आज के युवा खिलाड़ी मेहनत और अनुशासन के बल पर भविष्य में राज्य तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन कर सकते हैं। प्रतियोगिता के दौरान विभिन्न वर्गों के मुकाबले बेहद रोमांचक रहे। पहलवानों ने कड़े संघर्ष के बीच अपने प्रतिद्वंद्वियों को पराजित कर खिताब अपने नाम किया। प्रतियोगिता के विजेता इस प्रकार रहे: जिला केसरी: प्रथम स्थान – प्रशांत, द्वितीय स्थान – अजय कुमार केसरी: प्रथम स्थान – अजय, द्वितीय स्थान – अभिषेक वीर अभिमन्यु: प्रथम स्थान – विवेक, द्वितीय स्थान – जोगेंद्र सरफरा बाल केसरी: प्रथम स्थान – विवेक (खलीलाबाद), द्वितीय स्थान – सत्यम (खलीलाबाद) रहे। कार्यक्रम का समापन सदर विधायक अंकुर राज तिवारी की अनुपस्थिति में उनके भाई एवं उदया स्कूल के प्रबंध निदेशक अंकित राज तिवारी, सदर विधायक प्रतिनिधि भोला अग्रहरि, मेंहदावल विधायक अनिल त्रिपाठी तथा हैंसर ब्लॉक प्रमुख कालिंदी चौहान द्वारा किया गया। अतिथियों ने विजेता पहलवानों को फूलमाला पहनाकर तथा स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। प्रतियोगिता के सफल आयोजन में योगेंद्र यादव (फौजी), यादवेंद्र यादव (कुश्ती प्रशिक्षक), रमेश प्रसाद (एथलेटिक्स प्रशिक्षक) तथा राष्ट्रीय पहलवान यशपाल यादव सहित आयोजन समिति के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन मंडल द्वारा पहली बार आयोजित इस प्रतियोगिता का कार्यक्रम शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ, जिसकी अतिथियों एवं उपस्थित लोगों ने सराहना करते हुए आयोजन समिति को बधाई दी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में खिलाड़ी, खेल प्रेमी तथा स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
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    कांशीराम स्पोर्ट्स स्टेडियम में जिला केसरी सहित चार वर्गों की कुश्ती प्रतियोगिता संपन्न
प्रशांत बने जिला केसरी, अजय ने कुमार केसरी का खिताब जीता; विजेता पहलवानों को अतिथियों ने किया सम्मानित
संत कबीर नगर ।
जनपद के कांशीराम स्पोर्ट्स स्टेडियम में सोमवार को जिला केसरी, कुमार केसरी, वीर अभिमन्यु एवं बाल केसरी कुश्ती प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में जिले के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों से आए पहलवानों ने दमखम और दांव-पेच का शानदार प्रदर्शन किया। 
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मेहदावल विधायक अनिल त्रिपाठी सदर विधायक अंकुर राज त्रिपाठी की अनुपस्थिति में उनके छोटे भाई उदया स्कूल प्रबंध निदेशक अंकित राज तिवारी, सदर विधायक प्रतिनिधि भोला अग्रहरि, धनघटा विधायक गणेश चौहान की अनुपस्थिति में उनकी पत्नी हैसर ब्लॉक प्रमुख कालिंदी देवी एवं नगर पालिका अध्यक्ष खलीलाबाद जगत जायसवाल उपस्थित रहे। 
कार्यक्रम का शुभारंभ मेंहदावल विधायक अनिल त्रिपाठी तथा नगर पालिका परिषद खलीलाबाद के अध्यक्ष जगत जायसवाल द्वारा किया गया। 
इस अवसर पर विधायक अनिल त्रिपाठी ने पहलवानों का उत्साहवर्धन करते हुए विधायक अनिल त्रिपाठी ने कहा कि कुश्ती भारत की प्राचीन एवं गौरवशाली खेल परंपरा का हिस्सा है। ऐसे आयोजनों से युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरणा मिलती है और उनकी प्रतिभा को मंच मिलता है।
नगर पालिका अध्यक्ष जगत जायसवाल ने खिलाड़ियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि आज के युवा खिलाड़ी मेहनत और अनुशासन के बल पर भविष्य में राज्य तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन कर सकते हैं।
प्रतियोगिता के दौरान विभिन्न वर्गों के मुकाबले बेहद रोमांचक रहे। पहलवानों ने कड़े संघर्ष के बीच अपने प्रतिद्वंद्वियों को पराजित कर खिताब अपने नाम किया।
प्रतियोगिता के विजेता इस प्रकार रहे:
जिला केसरी: प्रथम स्थान – प्रशांत, द्वितीय स्थान – अजय
कुमार केसरी: प्रथम स्थान – अजय, द्वितीय स्थान – अभिषेक
वीर अभिमन्यु: प्रथम स्थान – विवेक, द्वितीय स्थान – जोगेंद्र सरफरा
बाल केसरी: प्रथम स्थान – विवेक (खलीलाबाद), द्वितीय स्थान – सत्यम (खलीलाबाद)
रहे।
कार्यक्रम का समापन सदर विधायक अंकुर राज तिवारी की अनुपस्थिति में उनके भाई एवं उदया स्कूल के प्रबंध निदेशक अंकित राज तिवारी, सदर विधायक प्रतिनिधि भोला अग्रहरि, मेंहदावल विधायक अनिल त्रिपाठी तथा हैंसर ब्लॉक प्रमुख कालिंदी चौहान द्वारा किया गया। अतिथियों ने विजेता पहलवानों को फूलमाला पहनाकर तथा स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
प्रतियोगिता के सफल आयोजन में योगेंद्र यादव (फौजी), यादवेंद्र यादव (कुश्ती प्रशिक्षक), रमेश प्रसाद (एथलेटिक्स प्रशिक्षक) तथा राष्ट्रीय पहलवान यशपाल यादव सहित आयोजन समिति के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन मंडल द्वारा पहली बार आयोजित इस प्रतियोगिता का कार्यक्रम शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ, जिसकी अतिथियों एवं उपस्थित लोगों ने सराहना करते हुए आयोजन समिति को बधाई दी।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में खिलाड़ी, खेल प्रेमी तथा स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
    user_LIVE UP ONE NEWS UTTAR PRADESH
    LIVE UP ONE NEWS UTTAR PRADESH
    खलीलाबाद, संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश•
    10 min ago
  • Post by Shailendra Pandey
    1
    Post by Shailendra Pandey
    user_Shailendra Pandey
    Shailendra Pandey
    Singing teaching and political work. खलीलाबाद, संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • (ब्यूरो संतकबीरनगर) आज दिनांक 16/03/26 को क्षेत्राधिकारी धनघटा महोदय द्वारा थाना महुली क्षेत्रांतर्गत कस्बा महुली में पुलिस बल के साथ पैदल गश्त किया गया। पैदल गश्त के दौरान बाजार, प्रमुख चौराहों एवं भीड़भाड़ वाले स्थानों का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया गया। इस दौरान रमजान माह के दृष्टिगत क्षेत्राधिकारी महोदय द्वारा स्थानीय लोगों,व्यापारियों एवं आमजन से संवाद स्थापित कर आपसी सौहार्द एवं शांति बनाए रखने की अपील की गई तथा किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को देने हेतु कहा गया। साथ ही क्षेत्राधिकारी द्वारा 7कस्बे के व्यापारियों एवं प्रतिष्ठान मालिकों को अपने प्रतिष्ठानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने एवं उन्हें क्रियाशील रखने के लिए प्रेरित किया गया, जिससे अपराध की रोकथाम एवं अपराधियों की पहचान में सहायता मिल सके। इसके अतिरिक्त आमजन को साइबर अपराध से बचाव के संबंध में जागरूक करते हुए बताया गया कि किसी भी अनजान कॉल, लिंक या ओटीपी को साझा न करें तथा किसी प्रकार की साइबर ठगी होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 या नजदीकी पुलिस थाना को सूचना दें। पुलिस द्वारा यह भी बताया गया कि जनपद पुलिस आमजन की सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने हेतु सदैव तत्पर है।
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    (ब्यूरो संतकबीरनगर)
आज दिनांक 16/03/26 को क्षेत्राधिकारी धनघटा महोदय द्वारा थाना महुली क्षेत्रांतर्गत कस्बा महुली में पुलिस बल के साथ पैदल गश्त किया गया। पैदल गश्त के दौरान बाजार, प्रमुख चौराहों एवं भीड़भाड़ वाले स्थानों का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया गया।
इस दौरान रमजान माह के दृष्टिगत क्षेत्राधिकारी महोदय द्वारा स्थानीय लोगों,व्यापारियों एवं आमजन से संवाद स्थापित कर आपसी सौहार्द एवं शांति बनाए रखने की अपील की गई तथा किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को देने हेतु कहा गया।
साथ ही क्षेत्राधिकारी द्वारा 7कस्बे के व्यापारियों एवं प्रतिष्ठान मालिकों को अपने प्रतिष्ठानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने एवं उन्हें क्रियाशील रखने के लिए प्रेरित किया गया, जिससे अपराध की रोकथाम एवं अपराधियों की पहचान में सहायता मिल सके।
इसके अतिरिक्त आमजन को साइबर अपराध से बचाव के संबंध में जागरूक करते हुए बताया गया कि किसी भी अनजान कॉल, लिंक या ओटीपी को साझा न करें तथा किसी प्रकार की साइबर ठगी होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 या नजदीकी पुलिस थाना को सूचना दें।
पुलिस द्वारा यह भी बताया गया कि जनपद पुलिस आमजन की सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने हेतु सदैव तत्पर है।
    user_Ashwini Kumar Pandey
    Ashwini Kumar Pandey
    पत्रकार Khalilabad, Sant Kabeer Nagar•
    3 hrs ago
  • अजीत मिश्रा (खोजी) लालगंज में बेखौफ खनन माफिया; नगर पंचायत शंकरपुर में दिन-दहाड़े गरज रही हैं प्रतिबंधित मशीनें बस्ती। जिले में खनन माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब उन्हें न तो कानून का खौफ है और न ही प्रशासन का डर। ताजा मामला लालगंज थाना क्षेत्र के नगर पंचायत स्थित शंकरपुर का है, जहाँ 'खाकी' की नाक के नीचे और खनन विभाग की 'रहमत' से अवैध मिट्टी का काला कारोबार जोरों पर फल-फूल रहा है। थाने से चंद कदमों की दूरी, फिर भी पुलिस 'अंजान' हैरानी की बात यह है कि जहाँ यह अवैध खुदाई हो रही है, वहाँ से थाने की दूरी महज कुछ ही मीटर है। दिन के उजाले में प्रतिबंधित मशीनें (JCB) दहाड़ रही हैं और मिट्टी लदे ट्रैक्टर-ट्रॉली फर्राटा भर रहे हैं, लेकिन स्थानीय पुलिस को इसकी भनक तक नहीं है। या यूँ कहें कि "सहमति" का चश्मा पहनकर पुलिस ने अपनी आँखें मूंद ली हैं। खनन अधिकारी की चुप्पी पर उठ रहे सवाल नियमों को ताक पर रखकर हो रही इस खुदाई ने खनन विभाग की कार्यप्रणाली को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। प्रतिबंधित मशीनों के इस्तेमाल पर सख्त पाबंदी के बावजूद माफिया बेखौफ होकर धरती का सीना छलनी कर रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी यह साफ इशारा कर रही है कि यह खेल बिना "ऊपर" के संरक्षण के मुमकिन नहीं है। अवैध कारोबार का 'सिंडिकेट' स्थानीय ग्रामीणों की मानें तो यह पूरा खेल एक संगठित सिंडिकेट के जरिए चल रहा है। रसूखदार माफियाओं और कुछ भ्रष्ट कारिंदों की जुगलबंदी ने सरकार के राजस्व को चूना लगाने और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने की खुली छूट ले रखी है। बड़ा सवाल: क्या जिला प्रशासन इन बेखौफ माफियाओं पर नकेल कसेगा, या फिर "साहबों" की चुप्पी की आड़ में शंकरपुर की जमीन ऐसे ही लुटती रहेगी?
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    अजीत मिश्रा (खोजी)
लालगंज में बेखौफ खनन माफिया; नगर पंचायत शंकरपुर में दिन-दहाड़े गरज रही हैं प्रतिबंधित मशीनें
बस्ती। जिले में खनन माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब उन्हें न तो कानून का खौफ है और न ही प्रशासन का डर। ताजा मामला लालगंज थाना क्षेत्र के नगर पंचायत स्थित शंकरपुर का है, जहाँ 'खाकी' की नाक के नीचे और खनन विभाग की 'रहमत' से अवैध मिट्टी का काला कारोबार जोरों पर फल-फूल रहा है।
थाने से चंद कदमों की दूरी, फिर भी पुलिस 'अंजान'
हैरानी की बात यह है कि जहाँ यह अवैध खुदाई हो रही है, वहाँ से थाने की दूरी महज कुछ ही मीटर है। दिन के उजाले में प्रतिबंधित मशीनें (JCB) दहाड़ रही हैं और मिट्टी लदे ट्रैक्टर-ट्रॉली फर्राटा भर रहे हैं, लेकिन स्थानीय पुलिस को इसकी भनक तक नहीं है। या यूँ कहें कि "सहमति" का चश्मा पहनकर पुलिस ने अपनी आँखें मूंद ली हैं।
खनन अधिकारी की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
नियमों को ताक पर रखकर हो रही इस खुदाई ने खनन विभाग की कार्यप्रणाली को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। प्रतिबंधित मशीनों के इस्तेमाल पर सख्त पाबंदी के बावजूद माफिया बेखौफ होकर धरती का सीना छलनी कर रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी यह साफ इशारा कर रही है कि यह खेल बिना "ऊपर" के संरक्षण के मुमकिन नहीं है।
अवैध कारोबार का 'सिंडिकेट'
स्थानीय ग्रामीणों की मानें तो यह पूरा खेल एक संगठित सिंडिकेट के जरिए चल रहा है। रसूखदार माफियाओं और कुछ भ्रष्ट कारिंदों की जुगलबंदी ने सरकार के राजस्व को चूना लगाने और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने की खुली छूट ले रखी है।
बड़ा सवाल: क्या जिला प्रशासन इन बेखौफ माफियाओं पर नकेल कसेगा, या फिर "साहबों" की चुप्पी की आड़ में शंकरपुर की जमीन ऐसे ही लुटती रहेगी?
    user_अजीत मिश्रा (खोजी)
    अजीत मिश्रा (खोजी)
    बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    11 hrs ago
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