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Pramod Kumar Goswami. 16/03/2026
Pramod Kumar Goswami
Pramod Kumar Goswami. 16/03/2026
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- Pramod Kumar Goswami. 16/03/20261
- पूर्व माध्यमिक विद्यालय, करमागजा, करियापार राउत, बस्ती-सदर, बस्ती, 🙏😊👍1
- अजीत मिश्रा (खोजी) लखनऊ के चिनहट सीएचसी की बदहाली देख भड़के ब्रजेश पाठक, पर सवाल वही—क्या मंत्री के जाते ही फिर लौट आएगी 'अंधेरगर्दी'? लखनऊ। उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था का हाल उस पुराने इंजन जैसा हो गया है, जिसे चलाने के लिए बार-बार 'डिप्टी सीएम' के धक्के (औचक निरीक्षण) की ज़रूरत पड़ती है। राजधानी के चिनहट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में जब ब्रजेश पाठक अचानक दाखिल हुए, तो वहां की बदहाली और बेतरतीब भीड़ ने यह साफ कर दिया कि साहब की पिछली सैकड़ों चेतावनियों का अफसरों पर रत्ती भर असर नहीं हुआ है। तमाशा बन गई है स्वास्थ्य सेवा! वीडियो में साफ़ दिख रहा है कि अस्पताल के भीतर मरीजों का समंदर उमड़ा है। दवा काउंटर पर खड़ा लाचार मरीज और ओपीडी के बाहर बिलबिलाते तीमारदार—क्या यही है 'मिशन कायाकल्प'? डिप्टी सीएम ने वहां मौजूद कर्मचारियों को खरी-खोटी सुनाई, व्यवहार सुधारने की नसीहत दी, लेकिन सवाल यह है कि क्या शिष्टाचार से पेट भरता है या बीमारियों का इलाज होता है? चिनहट की यह भीड़ गवाही दे रही है कि सिस्टम पूरी तरह 'कोमा' में है। 'बाहर की दवा' का जहर, कौन करेगा खत्म? डिप्टी सीएम ने एक बार फिर वही घिसा-पिटा सवाल किया—"दवा बाहर से तो नहीं लिख रहे?" मंत्री जी, यह सवाल अब जनता के लिए मजाक बन चुका है। सरकारी अस्पतालों के गेट के बाहर खड़े मेडिकल स्टोरों की चांदी इस बात का सबूत है कि अंदर का 'कमीशन तंत्र' आपकी धमकियों से कहीं ज्यादा ताकतवर है। जब तक भ्रष्ट बाबुओं और डॉक्टरों की गर्दन नहीं नापी जाएगी, तब तक गरीब का खून यूं ही चूसा जाता रहेगा। औचक निरीक्षण: समाधान या सिर्फ़ सुर्खियां? प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अपनी 'छापेमारी' के लिए मशहूर हैं, लेकिन नतीजा क्या? दवाएं आज भी गायब हैं। डॉक्टर आज भी नदारद हैं। मरीजों के साथ बदसलूकी आज भी बदस्तूर जारी है। सीधा प्रहार: क्या चिनहट का यह दौरा महज़ एक और 'फोटो अवसर' था या वाकई किसी बड़े अफसर की कुर्सी हिलेगी? जनता अब इन नाटकीय दौरों से ऊब चुकी है। साहब! चिनहट की जनता को आपकी 'फटकार' नहीं, अस्पताल में 'इलाज' और 'दवा' चाहिए। अगर राजधानी के दिल में यह हाल है, तो प्रदेश के गांवों में तो भगवान ही मालिक है। सत्ता के गलियारों में बैठे हुक्मरान याद रखें, अस्पताल की फर्श पर बैठा वो बेबस बाप और बीमार मां जब बिना इलाज के लौटती है, तो वो आपके सिस्टम के मुंह पर करारा तमाचा होती है।1
- Anchor - रामनगरी अयोध्या में महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के आगामी 19 मार्च को अयोध्या आगमन के मद्देनजर नगर निगम ने सोमवार को विशेष सफाई अभियान छेड़ दिया। यह अभियान आगामी 20 मार्च तक जारी रहेगा। महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी एवं नगर आयुक्त श्री जयेंद्र कुमार के नेतृत्व में राम की पैड़ी से विशेष सफ़ाई अभियान की शुरुआत की गई। नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार पांडेय ने बताया कि सुबह 8: बजे शुरू हुए सफाई अभियान में बड़ी तादाद में नगर निगम के कर्मचारी और स्वयंसेवी संस्थाओं से जुड़ी महिलाएं भी शामिल रहीं। सफाई अभियान पूरी रामकीपैड़ी, सरयूघाट, नागेश्वर नाथ तथा आसपास के मंदिरों के आसपास चला। नगर आयुक्त ने पेयजल व्यवस्था का भी निरीक्षण किया। उन्होंने रामकी पैड़ी एवं आसपास लगाए गए वाटर एटीएम व वाटर क्याक्स के आसपास विशेष सफाई रखने के निर्देश दिए। इस दौरान अपर नगर आयुक्त डॉ. नागेंद्र नाथ एवं भारत भार्गव, महाप्रबंधक जलकर सौरभ श्रीवास्तव, जोनल अधिकारी अशोक कुमार गुप्ता, सहायक अभियंता सिविल राजपति यादव तथा अन्य लोग शामिल रहे। अधिकारियों ने महामहिम राष्ट्रपति के आवागमन मार्ग का भी निरीक्षण कर सफाई, पेयजल एवं अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया।4
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- लगातार धरना आमरण अनसन जारी लगातार सो रहा प्रशासन क्या अंबेडकरनगर में अब न्याय कानून व्यवस्था नहीं बची है क्या मानवता अब नहीं बची है उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री जी इस मामले को गंभीरता से संज्ञान लीजिए आपके छवि को अधिकारी लोग दूषित कर रहे हैं यह जनता भी आपकी है और आप इनके भी मुख्यमंत्री हैं आप राजा हैं आप् जैसे राजा के रहते हुए प्रजा कैसे दुखी रह सकती है कृपया संज्ञान लीजिए *प्रशासन के लापरवाही के कारण ग्रामवासी बैठे धरने पर* खबर चलने के बावजूद भी गहरी निद्रा में सो रहे हैं जिलाधिकारी लोग मजदूर हो रहे हैं आमरण अनसन्न पर *सैकड़ो वर्ष से अधिक पुराने रास्ते पर दबंगों ने दीवाल खड़ी कर किया* 20 साल से अधिक रास्ता इस्तेमाल होने पर उसे रास्ता घोषित कर दिया जाता है ऐसा कोर्ट ने एक मामले मे कहा चुका है *पहले चल चुकी थी यह खबर* तत्काल प्रशासन ले संज्ञान , बड़ी घटना होने की संभावना प्रबल, रास्ता बंद होने से ग्रामीणो मे आक्रोश *न्यायालय को गुमराह करके किसी सार्वजनिक रास्ते को रोकने का आदेश प्राप्त करना* कानूनन अवैध और न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) है। अम्बेडकर नगर अकबरपुर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत दुर्गूपुर मेजर ( जमालपुर) *सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी के आने-जाने का रास्ता नहीं रोका जा सकता है।* झूठे तथ्यों के आधार पर लिया गया आदेश, यदि साबित हो जाए, तो रद्द कर दिया जाता है और दोषी पर कार्रवाई की जा सकती है। *महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु:* रास्ता रोकना अवैध: सर्वोच्च न्यायालय ने रांची के एक मामले में कहा कि किसी भी नागरिक के आने-जाने के रास्ते (Public Passage) को बाउंड्री बनाकर या अन्य तरीकों से नहीं रोका जा सकता, भले ही वह जगह निजी जमीन के करीब हो। *न्यायालय को गुमराह करना:* यदि अदालत को गलत तथ्य या फर्जी दस्तावेज देकर आदेश प्राप्त किया जाता है, तो उसे बाद में रद्द किया जा सकता है और यह न्याय प्रक्रिया में बाधा डालने जैसा है। *अवैध आदेश पर कार्रवाई:* यदि गलत जानकारी देकर रास्ता रोका गया है, तो प्रभावित पक्ष संबंधित उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका या अवमानना याचिका दाखिल कर सकता है। *निष्कर्ष:* सार्वजनिक रास्ते को रोकना एक अपराध है। यदि न्यायालय ने गुमराह होकर ऐसा आदेश दिया है, तो उसे उचित कानूनी कार्यवाही के माध्यम से चुनौती दी जा सकती है। *दैनिक जागरण खबर के अनुसार* 👇 *नहीं रोक सकते किसी के आने-जाने का रास्ता', Supreme Court की बड़ी टिप्पणी* *सुप्रीम कोर्ट ने रांची के हिनू में रास्ता विवाद मामले में सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा।* सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी के आने जाने का रास्ता नहीं बंद किया जा सकता है। हाई कोर्ट का आदेश बिल्कुल सही है। इसमें हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है। इसके बाद अदालत ने एसएलपी खारिज कर दी। *गीता देवी की ओर से अधिवक्ता शशांक शेखर ने सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखा।* झारखंड हाई कोर्ट ने 28 मार्च 2022 को गीता देवी के घर के सामने बनी बॉउंड्री को हटाने का आदेश दिया था। इसके बाद नगर निगम की ओर से कार्रवाई करते आने-जाने का रास्ते पर बनी बाउंड्री को तोड़ दिया था। इसके खिलाफ अंजू मिंज ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। *क्या है पूरा मामला* बता दें कि गीता देवी हिनू में रहती हैं। कुछ दिनों पहले पाहन की जमीन बताते हुए बॉउंड्री बना दिया गया। कहा गया कि इस पर गांव वाले पूजा करते हैं। निजी जमीन से रास्ता नहीं दिया जा सकता है। तब अदालत ने कहा था कि मामले में पहले दिन से कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वह जमीन का मालिकाना हक (टाइटल सूट) तय नहीं कर रहा है। इसके लिए सभी पक्षों को सक्षम अदालत में जाना चाहिए। *रास्ता को लेकर हाई कोर्ट ने सुनवाई की है और यह प्रार्थी का मौलिक अधिकार है।* अदालत ने कहा था कि प्रार्थी 1953 से उक्त रास्ते का इस्तेमाल कर रही हैं। एसएआर कोर्ट के तहत बीस साल से अधिक रास्ता इस्तेमाल करने पर नगर निगम उसे स्ट्रीट (रास्ता) का दर्जा प्रदान कर देता है। *प्रार्थी की ओर से इस पर 2008 में हाई कोर्ट के खंडपीठ के आदेश का हवाला दिया।* इस दौरान हस्तक्षेप कर्ता की ओर से बार- बार आदेश वापस लेने का आग्रह किया जा रहा था। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए उन पर एक लाख का जुर्माना लगाया था। साथ ही वकील के आचरण को अनुकूल नहीं पाते हुए अदालत ने यह मामला बार काउंसिल को भेज दिया था। Suyash Kumar Mishra 8755777000. 9506000647 MYogiAdityanath DM Ambedkarnagar Narendra Modi Ambedkarnagar Police UP Police #india #UttarPradesh #viral #video #reels #dmambedkarnagar #MYogiAdityanath #YogiAdityanath #UPGovt #UPGovernment #suyash #suyashkumarmishra #suyashmishra #suyashkumar #अम्बेडकरनगर #जलालपुर #akbarpur #AmbedkarNagar1
- अजीत मिश्रा (खोजी) लालगंज में बेखौफ खनन माफिया; नगर पंचायत शंकरपुर में दिन-दहाड़े गरज रही हैं प्रतिबंधित मशीनें बस्ती। जिले में खनन माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब उन्हें न तो कानून का खौफ है और न ही प्रशासन का डर। ताजा मामला लालगंज थाना क्षेत्र के नगर पंचायत स्थित शंकरपुर का है, जहाँ 'खाकी' की नाक के नीचे और खनन विभाग की 'रहमत' से अवैध मिट्टी का काला कारोबार जोरों पर फल-फूल रहा है। थाने से चंद कदमों की दूरी, फिर भी पुलिस 'अंजान' हैरानी की बात यह है कि जहाँ यह अवैध खुदाई हो रही है, वहाँ से थाने की दूरी महज कुछ ही मीटर है। दिन के उजाले में प्रतिबंधित मशीनें (JCB) दहाड़ रही हैं और मिट्टी लदे ट्रैक्टर-ट्रॉली फर्राटा भर रहे हैं, लेकिन स्थानीय पुलिस को इसकी भनक तक नहीं है। या यूँ कहें कि "सहमति" का चश्मा पहनकर पुलिस ने अपनी आँखें मूंद ली हैं। खनन अधिकारी की चुप्पी पर उठ रहे सवाल नियमों को ताक पर रखकर हो रही इस खुदाई ने खनन विभाग की कार्यप्रणाली को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। प्रतिबंधित मशीनों के इस्तेमाल पर सख्त पाबंदी के बावजूद माफिया बेखौफ होकर धरती का सीना छलनी कर रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी यह साफ इशारा कर रही है कि यह खेल बिना "ऊपर" के संरक्षण के मुमकिन नहीं है। अवैध कारोबार का 'सिंडिकेट' स्थानीय ग्रामीणों की मानें तो यह पूरा खेल एक संगठित सिंडिकेट के जरिए चल रहा है। रसूखदार माफियाओं और कुछ भ्रष्ट कारिंदों की जुगलबंदी ने सरकार के राजस्व को चूना लगाने और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने की खुली छूट ले रखी है। बड़ा सवाल: क्या जिला प्रशासन इन बेखौफ माफियाओं पर नकेल कसेगा, या फिर "साहबों" की चुप्पी की आड़ में शंकरपुर की जमीन ऐसे ही लुटती रहेगी?1