आकांक्षी जिलों को लेकर पीएम मोदी का बड़ा संदेश, वर्षों से उपेक्षित क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा में लाया गया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आकांक्षी जिलों को लेकर बड़ा संदेश देते हुए कहा कि जिन क्षेत्रों का विकास दशकों तक रुका हुआ था, उन्हें अब समानता के स्तर पर लाकर खड़ा किया गया है। उन्होंने कहा कि देश का संतुलित विकास तभी संभव है, जब अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सरकार की योजनाएं पहुंचे। इसी सोच के साथ आकांक्षी जिला कार्यक्रम की शुरुआत की गई, जिसने देश के पिछड़े जिलों की तस्वीर बदल दी है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पहले की सरकारों में कुछ जिले केवल आंकड़ों तक सीमित रह जाते थे, लेकिन उनकी सरकार ने ऐसे जिलों को प्राथमिकता बनाकर उनके समग्र विकास पर फोकस किया। स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, पेयजल, कृषि, कौशल विकास और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में इन जिलों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि आकांक्षी जिला कार्यक्रम प्रतिस्पर्धा, सहयोग और नवाचार पर आधारित है। जिलों को आपस में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के माध्यम से आगे बढ़ने का अवसर मिला, जिससे प्रशासनिक दक्षता में भी सुधार हुआ। जिलाधिकारियों और स्थानीय प्रशासन को लक्ष्य आधारित कार्य प्रणाली से जोड़ा गया, जिससे योजनाओं का क्रियान्वयन जमीन पर दिखाई देने लगा। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार ने केवल फाइलों में नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर बदलाव लाने का काम किया है। कई आकांक्षी जिलों में मातृ मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर में कमी आई है, स्कूलों में नामांकन बढ़ा है और किसानों को नई तकनीकों से जोड़ा गया है। स्वच्छता, बिजली, सड़क और इंटरनेट कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में भी तेज़ी से काम हुआ है। पीएम मोदी ने कहा कि आकांक्षी जिलों की सफलता यह साबित करती है कि यदि नीति सही हो और नीयत साफ हो, तो कोई भी क्षेत्र पिछड़ा नहीं रहता। उन्होंने इसे ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के मंत्र का जीवंत उदाहरण बताया। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी जिले को पिछड़ा कहना नहीं, बल्कि उसकी संभावनाओं को पहचानकर उसे आगे बढ़ाना है। प्रधानमंत्री के इस संदेश को विकास के नए मॉडल के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें क्षेत्रीय असमानता को खत्म करने की ठोस कोशिश की गई है। आकांक्षी जिलों का अनुभव आने वाले समय में अन्य योजनाओं के लिए भी मार्गदर्शक साबित हो रहा है।
आकांक्षी जिलों को लेकर पीएम मोदी का बड़ा संदेश, वर्षों से उपेक्षित क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा में लाया गया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आकांक्षी जिलों को लेकर बड़ा संदेश देते हुए कहा कि जिन क्षेत्रों का विकास दशकों तक रुका हुआ था, उन्हें अब समानता के स्तर पर लाकर खड़ा किया गया है। उन्होंने कहा कि देश का संतुलित विकास तभी संभव है, जब अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सरकार की योजनाएं पहुंचे। इसी सोच के साथ आकांक्षी जिला कार्यक्रम की शुरुआत की गई, जिसने देश के पिछड़े जिलों की तस्वीर बदल दी है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पहले की सरकारों में कुछ जिले केवल आंकड़ों तक सीमित रह जाते थे, लेकिन उनकी सरकार ने ऐसे जिलों को प्राथमिकता बनाकर उनके समग्र विकास पर फोकस किया। स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, पेयजल, कृषि, कौशल विकास और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में इन जिलों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि आकांक्षी जिला कार्यक्रम प्रतिस्पर्धा, सहयोग और नवाचार पर आधारित है। जिलों को आपस में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के माध्यम से आगे बढ़ने का अवसर मिला, जिससे प्रशासनिक दक्षता में भी सुधार हुआ। जिलाधिकारियों और स्थानीय प्रशासन को लक्ष्य आधारित कार्य प्रणाली से जोड़ा गया, जिससे योजनाओं का क्रियान्वयन जमीन पर दिखाई देने लगा। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार ने केवल फाइलों में नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर बदलाव लाने का काम किया है। कई आकांक्षी जिलों में मातृ मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर में कमी आई है, स्कूलों में नामांकन बढ़ा है और किसानों को नई तकनीकों से जोड़ा गया है। स्वच्छता, बिजली, सड़क और इंटरनेट कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में भी तेज़ी से काम हुआ है। पीएम मोदी ने कहा कि आकांक्षी जिलों की सफलता यह साबित करती है कि यदि नीति सही हो और नीयत साफ हो, तो कोई भी क्षेत्र पिछड़ा नहीं रहता। उन्होंने इसे ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के मंत्र का जीवंत उदाहरण बताया। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी जिले को पिछड़ा कहना नहीं, बल्कि उसकी संभावनाओं को पहचानकर उसे आगे बढ़ाना है। प्रधानमंत्री के इस संदेश को विकास के नए मॉडल के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें क्षेत्रीय असमानता को खत्म करने की ठोस कोशिश की गई है। आकांक्षी जिलों का अनुभव आने वाले समय में अन्य योजनाओं के लिए भी मार्गदर्शक साबित हो रहा है।
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- बीजेपी का मूल मंत्र: पिछड़ों को प्राथमिकता, जिन्हें कभी किसी ने नहीं पूछा भारतीय जनता पार्टी का मूल मंत्र हमेशा से ही उन वर्गों को प्राथमिकता देना रहा है, जिन्हें दशकों तक अनदेखा किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई अवसरों पर स्पष्ट किया है कि बीजेपी की राजनीति सत्ता के सुख के लिए नहीं, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान के लिए है। उन्होंने कहा कि जिन पिछड़े, वंचित और उपेक्षित वर्गों की कभी किसी ने सुध नहीं ली, उन्हें विकास की मुख्यधारा में लाना ही बीजेपी की असली पहचान है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि विकास केवल चुनिंदा वर्गों तक सीमित न रहे, बल्कि उसका लाभ समाज के हर तबके तक पहुंचे। पिछड़े वर्ग, गरीब, आदिवासी, दलित और दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए विशेष योजनाएं बनाकर उन्हें प्राथमिकता दी गई। सरकार का फोकस उन लोगों पर रहा, जो वर्षों तक बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहे। पीएम मोदी ने कहा कि पहले की सरकारों में विकास योजनाएं कागजों तक सिमटी रहती थीं, लेकिन बीजेपी सरकार ने योजनाओं को जमीन पर उतारने का काम किया। उज्ज्वला योजना के माध्यम से गरीब परिवारों की महिलाओं को गैस कनेक्शन दिए गए, जिससे उन्हें धुएं से मुक्ति मिली। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाखों गरीब परिवारों को पक्का मकान मिला। आयुष्मान भारत योजना ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराईं। सरकार ने पिछड़े इलाकों के विकास के लिए आकांक्षी जिला कार्यक्रम की शुरुआत की, जिसके तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सड़क और बुनियादी ढांचे पर विशेष ध्यान दिया गया। जिन जिलों का विकास वर्षों से रुका हुआ था, उन्हें अन्य विकसित जिलों के समान खड़ा करने का प्रयास किया गया। इसका सकारात्मक असर आज जमीनी स्तर पर साफ दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि बीजेपी का मानना है कि जब तक समाज का आखिरी व्यक्ति आगे नहीं बढ़ेगा, तब तक देश का विकास अधूरा रहेगा। इसी सोच के साथ सरकार ने जनधन योजना के जरिए गरीबों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा, स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय बनवाए और हर घर नल से जल पहुंचाने की दिशा में ठोस कदम उठाए। बीजेपी के मूल मंत्र में सामाजिक न्याय केवल नारा नहीं, बल्कि व्यवहारिक नीति है। सरकार ने पिछड़े वर्गों के युवाओं के लिए शिक्षा और रोजगार के नए अवसर पैदा किए। स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रमों के जरिए उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश की गई। प्रधानमंत्री मोदी ने विश्वास जताया कि जब वंचित और पिछड़े वर्ग सशक्त होंगे, तभी देश सशक्त बनेगा। बीजेपी की यह नीति और नीयत ही उसे अन्य दलों से अलग करती है। पार्टी का लक्ष्य है कि कोई भी नागरिक खुद को उपेक्षित न महसूस करे और हर व्यक्ति को समान अवसर मिले। यही कारण है कि बीजेपी की जनकल्याणकारी योजनाओं को देशभर में व्यापक समर्थन मिल रहा है।1
- Post by Ajay Politics1
- BJP, RSS, VHP, BAJRANG DAL PAR LAGE GAMBHIR AAROP : PRASHANT BHUSHAN PRESS CLUB OF INDIA1
- राजपथ न्यूज़ पर "एक मुलाकात" प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डा गुरभेज सिंह ढिल्लों जी के साथ, बीएचयू से डिग्री हासिल कर राजज्योतिष परिवार से मान्यता प्राप्त ज्योतिषाचार्य डा गुरभेज देश विदेश में वास्तू, रत्न, धर्म विज्ञान के मार्गदर्शन के लिए सम्मानित किए जा चुके हैं.... डॉ गुरभेज सिंह ढिल्लों हरियाणा के सिरसा में निवास रहते हैं। आप भी डॉ गुरभेज सिंह ढिल्लों से कोई सलाह लेना चाहते हैं तो इस नंबर पर फोन कर सकते हैं.... 9466990065, 9671573199.1
- संगम विहार विधानसभा क्षेत्र में विकास की गति को और तेज करने के उद्देश्य से, माननीय मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता आगामी रविवार, 25 जनवरी 2026 को दोपहर 1:00 बजे DDA पार्क, मंगल बाजार रोड पर विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगी।1
- गाने की आवाज आ रही है एक चुम्मा ले जा गाल में एक दिलवाले जा रुमाल में हमारा वीडियो कैसा लगता है आप लोग बताइए कमेंट में4
- आकांक्षी जिलों को लेकर पीएम मोदी का बड़ा संदेश, वर्षों से उपेक्षित क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा में लाया गया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आकांक्षी जिलों को लेकर बड़ा संदेश देते हुए कहा कि जिन क्षेत्रों का विकास दशकों तक रुका हुआ था, उन्हें अब समानता के स्तर पर लाकर खड़ा किया गया है। उन्होंने कहा कि देश का संतुलित विकास तभी संभव है, जब अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सरकार की योजनाएं पहुंचे। इसी सोच के साथ आकांक्षी जिला कार्यक्रम की शुरुआत की गई, जिसने देश के पिछड़े जिलों की तस्वीर बदल दी है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पहले की सरकारों में कुछ जिले केवल आंकड़ों तक सीमित रह जाते थे, लेकिन उनकी सरकार ने ऐसे जिलों को प्राथमिकता बनाकर उनके समग्र विकास पर फोकस किया। स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, पेयजल, कृषि, कौशल विकास और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में इन जिलों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि आकांक्षी जिला कार्यक्रम प्रतिस्पर्धा, सहयोग और नवाचार पर आधारित है। जिलों को आपस में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के माध्यम से आगे बढ़ने का अवसर मिला, जिससे प्रशासनिक दक्षता में भी सुधार हुआ। जिलाधिकारियों और स्थानीय प्रशासन को लक्ष्य आधारित कार्य प्रणाली से जोड़ा गया, जिससे योजनाओं का क्रियान्वयन जमीन पर दिखाई देने लगा। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार ने केवल फाइलों में नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर बदलाव लाने का काम किया है। कई आकांक्षी जिलों में मातृ मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर में कमी आई है, स्कूलों में नामांकन बढ़ा है और किसानों को नई तकनीकों से जोड़ा गया है। स्वच्छता, बिजली, सड़क और इंटरनेट कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में भी तेज़ी से काम हुआ है। पीएम मोदी ने कहा कि आकांक्षी जिलों की सफलता यह साबित करती है कि यदि नीति सही हो और नीयत साफ हो, तो कोई भी क्षेत्र पिछड़ा नहीं रहता। उन्होंने इसे ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के मंत्र का जीवंत उदाहरण बताया। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी जिले को पिछड़ा कहना नहीं, बल्कि उसकी संभावनाओं को पहचानकर उसे आगे बढ़ाना है। प्रधानमंत्री के इस संदेश को विकास के नए मॉडल के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें क्षेत्रीय असमानता को खत्म करने की ठोस कोशिश की गई है। आकांक्षी जिलों का अनुभव आने वाले समय में अन्य योजनाओं के लिए भी मार्गदर्शक साबित हो रहा है।1