आगरा के खंदौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां रात के समय डॉक्टर नदारद होने के कारण एक घायल मरीज तड़पता रहा। थाना क्षेत्र में मारपीट में घायल हुए एक व्यक्ति को देर रात उपचार के लिए अस्पताल लाया गया था, लेकिन आरोप है कि उस समय वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। गंभीर रूप से घायल पीड़ित के मुंह और नाक से लगातार खून बहता रहा और उसके परिजन डॉक्टर की तलाश में इधर-उधर भटकते रहे। परिजनों का कहना है कि समय पर इलाज न मिलने के कारण घायल की हालत लगातार बिगड़ती गई और इलाज में इस तरह की देरी से किसी भी मरीज की जान जा सकती थी। इस घोर लापरवाही को लेकर लोगों में भारी नाराजगी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सीएचसी में रात में डॉक्टरों के गायब रहने की यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि इससे पहले भी ऐसी शिकायतें कई बार सामने आ चुकी हैं। लोगों का कहना है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि खंदौली सीएचसी में रात्रिकालीन ड्यूटी पर डॉक्टरों की अनिवार्य मौजूदगी सुनिश्चित की जाए और इस लापरवाही के जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में फिर किसी मरीज की जान खतरे में न पड़े।
आगरा के खंदौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां रात के समय डॉक्टर नदारद होने के कारण एक घायल मरीज तड़पता रहा। थाना क्षेत्र में मारपीट में घायल हुए एक व्यक्ति को देर रात उपचार के लिए अस्पताल लाया गया था, लेकिन आरोप है कि उस समय वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। गंभीर रूप से घायल पीड़ित के मुंह और नाक से लगातार खून बहता रहा और उसके परिजन डॉक्टर की तलाश में इधर-उधर भटकते रहे। परिजनों का कहना है कि समय पर इलाज न मिलने के कारण घायल की हालत लगातार बिगड़ती गई और इलाज में इस तरह की देरी से किसी भी मरीज की जान जा सकती थी। इस घोर लापरवाही को लेकर लोगों में भारी नाराजगी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सीएचसी में रात में डॉक्टरों के गायब रहने की यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि इससे पहले भी ऐसी शिकायतें कई बार सामने आ चुकी हैं। लोगों का कहना है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि खंदौली सीएचसी में रात्रिकालीन ड्यूटी पर डॉक्टरों की अनिवार्य मौजूदगी सुनिश्चित की जाए और इस लापरवाही के जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में फिर किसी मरीज की जान खतरे में न पड़े।
- मध्य प्रदेश के भिंड में कांग्रेस के पूर्व मंत्री डॉक्टर गोविंद सिंह ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।1
- मध्य प्रदेश के भिंड जिला अस्पताल की गंभीर लापरवाही सामने आई है, जहाँ एक रेप पीड़िता रात 1 बजे से मेडिकल परीक्षण कराने के लिए दर-दर भटक रही है। सुरपुरा थाना पुलिस पीड़िता को मेडिकल कराने के लिए जिला अस्पताल लेकर आई थी, लेकिन 7 घंटे बीत जाने के बाद भी महिला का परीक्षण नहीं हो सका। अस्पताल में किसी महिला डॉक्टर की उपस्थिति न होने के कारण पीड़िता लगातार परेशान होती रही। इस मामले की कलेक्टर से शिकायत किए जाने के बाद अस्पताल का स्टाफ आनन-फानन में वहाँ पहुँचा। इस बड़ी लापरवाही पर जब सिविल सर्जन डॉ. आर. के. मिश्रा से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने पूरी तरह चुप्पी साध ली और वे कैमरे के सामने से भागते हुए नजर आए। पुलिस के अनुसार, तीन लोगों ने मिलकर इस महिला के साथ बलात्कार की वारदात को अंजाम दिया था, और पुलिस फिलहाल मामले की जाँच में जुटी हुई है।1
- फिरोजाबाद में जिलाधिकारी (DM) ने सहकारी समितियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा एक्शन लिया है। जिलाधिकारी द्वारा सहकारी समितियों को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। इसके साथ ही किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और एग्रीमार्ट को लेकर भी एक बड़ा फैसला लिया गया है।1
- आगरा के फतेहाबाद स्थित निबोहरा थाना क्षेत्र के गांव निबोहरा में एक 36 वर्षीय दिव्यांग महिला का शव घर के अंदर फंदे पर लटका मिलने से सनसनी फैल गई। घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। इस बीच, महिला के मायके पक्ष के लोगों ने ससुराल वालों पर हत्या कर शव को फंदे पर लटकाने का आरोप लगाया है, जिसके बाद पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। मृतका की पहचान देवरी, आगरा निवासी मुरारी लाल की पुत्री गीता देवी (36 वर्ष) के रूप में हुई है, जिनकी शादी करीब 20 वर्ष पहले निबोहरा निवासी रामसिया के पुत्र विनोद कुमार के साथ हुई थी। यह पति-पत्नी दोनों ही दिव्यांग बताए गए हैं। दंपती के दो बेटे अमन (15 वर्ष) और विवेक (12 वर्ष) हैं। ग्रामीणों के अनुसार, गुरुवार को पति-पत्नी के बीच बकरी बांधने को लेकर कहासुनी हुई थी, जिसके बाद विनोद काम पर चला गया था और गीता देवी अपने दोनों बेटों के साथ घर पर ही थीं। मृतका के बेटों ने बताया कि वे अपनी मां के साथ सो रहे थे। कुछ देर बाद जब छोटे बेटे विवेक की नींद खुली, तो उसने मां को पास न पाकर तलाश शुरू की और कमरे में गीता देवी को साड़ी के फंदे से लटका पाया। विवेक ने तुरंत अपने बड़े भाई अमन को इसकी जानकारी दी। बच्चों के अनुसार, घटना के समय घर पर उनके अलावा कोई और मौजूद नहीं था। उधर, मृतका के चचेरे भाई मुकेश (पुत्र पूरन सिंह) ने आरोप लगाया है कि ससुराल पक्ष ने गीता देवी के साथ पहले मारपीट की और फिर उनकी हत्या करके शव को फंदे पर लटका दिया। मामले पर निबोहरा थाना के प्रभारी निरीक्षक बृजेश कुमार गौतम ने बताया कि उन्हें महिला द्वारा फांसी लगाने की सूचना मिली थी, जिसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने और मामले की जांच के आधार पर ही आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।1
- उत्तर प्रदेश के आगरा के कागरौल स्थित नगला हीरा सिंह में एफएसडीए टास्क फोर्स ने दो डेयरियों पर बड़ी छापेमारी की है। लखनऊ मुख्यालय के निर्देश पर चलाए जा रहे प्रदेशव्यापी अभियान के तहत की गई इस कार्रवाई के दौरान डेयरियों में भारी गंदगी के बीच दूध के उत्पाद तैयार होते मिले। इस कार्रवाई के दौरान मिलावट की आशंका जताते हुए टीम ने करीब ₹6 लाख की कीमत का 10.50 क्विंटल घी सीज कर दिया है। इसके अलावा जांच के लिए घी, दूध और अन्य उत्पादों के 3 नमूने लैब भेजे गए हैं। दोनों डेयरियों में साफ-सफाई की गंभीर कमियां पाए जाने पर संचालकों को नोटिस जारी किए गए हैं। इस बड़ी कार्रवाई की भनक लगते ही आसपास के कई अन्य डेयरी संचालकों ने अपने प्रतिष्ठानों के शटर बंद कर दिए।1
- आगरा के खंदौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां रात के समय डॉक्टर नदारद होने के कारण एक घायल मरीज तड़पता रहा। थाना क्षेत्र में मारपीट में घायल हुए एक व्यक्ति को देर रात उपचार के लिए अस्पताल लाया गया था, लेकिन आरोप है कि उस समय वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। गंभीर रूप से घायल पीड़ित के मुंह और नाक से लगातार खून बहता रहा और उसके परिजन डॉक्टर की तलाश में इधर-उधर भटकते रहे। परिजनों का कहना है कि समय पर इलाज न मिलने के कारण घायल की हालत लगातार बिगड़ती गई और इलाज में इस तरह की देरी से किसी भी मरीज की जान जा सकती थी। इस घोर लापरवाही को लेकर लोगों में भारी नाराजगी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सीएचसी में रात में डॉक्टरों के गायब रहने की यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि इससे पहले भी ऐसी शिकायतें कई बार सामने आ चुकी हैं। लोगों का कहना है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि खंदौली सीएचसी में रात्रिकालीन ड्यूटी पर डॉक्टरों की अनिवार्य मौजूदगी सुनिश्चित की जाए और इस लापरवाही के जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में फिर किसी मरीज की जान खतरे में न पड़े।1