Shuru
Apke Nagar Ki App…
एआई कॉन्फ्रेंस में अनंत अंबानी ने मोदी जी को समझाया, मुख्यमंत्री बिष्ट शंकराचार्य को समझें-अखिलेश, किसानों की रोज़ी से कांग्रेस को समझौता मंजूर नहीं, डोटासरा मार देंगे घोटा, बीजेपी विधायक होने से दुखी विधायकजी और तीन अपराधी मंत्रियों को नहीं बोलने देंगे कांग्रेसी मप्र में.... देखिए देश दुनिया की छ बड़ी खबरें राजपथ न्यूज़ को....
Rajpath News
एआई कॉन्फ्रेंस में अनंत अंबानी ने मोदी जी को समझाया, मुख्यमंत्री बिष्ट शंकराचार्य को समझें-अखिलेश, किसानों की रोज़ी से कांग्रेस को समझौता मंजूर नहीं, डोटासरा मार देंगे घोटा, बीजेपी विधायक होने से दुखी विधायकजी और तीन अपराधी मंत्रियों को नहीं बोलने देंगे कांग्रेसी मप्र में.... देखिए देश दुनिया की छ बड़ी खबरें राजपथ न्यूज़ को....
More news from दिल्ली and nearby areas
- राजधानी दिल्ली में देखने को मिला कल का संगम अद्भुत कला बेमिसाल1
- Post by Monu Patel2
- एआई कॉन्फ्रेंस में अनंत अंबानी ने मोदी जी को समझाया, मुख्यमंत्री बिष्ट शंकराचार्य को समझें-अखिलेश, किसानों की रोज़ी से कांग्रेस को समझौता मंजूर नहीं, डोटासरा मार देंगे घोटा, बीजेपी विधायक होने से दुखी विधायकजी और तीन अपराधी मंत्रियों को नहीं बोलने देंगे कांग्रेसी मप्र में.... देखिए देश दुनिया की छ बड़ी खबरें राजपथ न्यूज़ को....1
- Post by Jainul Siddiqui1
- Post by Pradesh Khabar1
- दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था को और भी अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में आज दिल्ली पुलिस के 79वें स्थापना दिवस समारोह में ₹857 करोड़ की लागत से निर्मित ‘सेफ सिटी प्रोजेक्ट’ का लोकार्पण किया। साथ ही, ₹368 करोड़ की लागत से स्पेशल सेल के इंटीग्रेटेड हेडक्वार्टर का ई-शिलान्यास किया।1
- तहसील में जमानत प्रक्रिया पर उठे सवाल बिना अधिकारी और पेशकार के प्राइवेट कर्मचारियों द्वारा जमानत कराए जाने का आरोप शाहाबाद (हरदोई)। तहसील शाहाबाद में जमानत प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि यहां बिना संबंधित अधिकारी और पेशकार की मौजूदगी के प्राइवेट कर्मचारी ही जमानत संबंधी कार्य निपटा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, फौजदारी अहलमद का चार्ज राजेंद्र बाबू के पास है, लेकिन व्यवहारिक रूप से अधिकतर कार्य प्राइवेट कर्मचारियों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि जमानत से जुड़े दस्तावेजों की जांच-पड़ताल और प्रक्रिया पूरी कराने का काम भी बाहरी कर्मचारियों के माध्यम से किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।स्थानीय logo और वादकारियों का कहना है कि न्यायालयीन कार्यों में अधिकृत कर्मचारियों की अनुपस्थिति से न केवल प्रक्रिया की वैधता प्रभावित होती है, बल्कि आमजन को भी असुविधा का सामना करना पड़ता है। उनका कहना है कि जमानत जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में नियमानुसार अधिकारी और अधिकृत स्टाफ की उपस्थिति आवश्यक है। इस संबंध में जब संबंधित अधिकारियों से जानकारी करने का प्रयास किया गया तो स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका उच्चाधिकारियों से मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, ताकि न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहे।1
- Post by Monu Patel2