मध्य प्रदेश पुलिस की जीआरपी ने अपने 'ऑपरेशन हमदर्द' अभियान के तहत भोपाल रेलवे स्टेशन पर 11 दिन पहले लावारिस मिली एक माह की बच्ची के माता-पिता को ढूंढ निकाला है। गत 10 जुलाई को भोपाल रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-6 स्थित ऑटो स्टैंड पर खड़े एक खाली ऑटो में यह मासूम मिली थी, जिसे रोने की आवाज सुनकर लोगों की सूचना पर पुलिस ने अपने संरक्षण में लिया और तत्काल मेडिकल चेकअप कराया। बच्ची को लावारिस छोड़ने के इस मामले में अब पुलिस आरोपी माता-पिता को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ और कानूनी कार्रवाई कर रही है। जीआरपी थाना प्रभारी ज़हीर खान के अनुसार, स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने पर एक महिला, उसके पति और बड़ी बेटी को बच्ची को ऑटो में छोड़कर जाते देखा गया था। तीनों रेलवे स्टेशन के टिकट काउंटर से पुणे का जनरल टिकट खरीदकर ट्रेन से रवाना हुए थे। इसके बाद भोपाल जीआरपी की टीम ने पुणे की जीआरपी और स्थानीय पुलिस के सहयोग से तलाश शुरू की। सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल होने के बाद जब माता-पिता को पता चला कि पुलिस पुणे आ गई है, तो वे बिहार जाने के लिए ट्रेन पकड़कर भोपाल पहुंचे, जहाँ स्टेशन पर उतरते ही पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। प्रारंभिक पूछताछ में माता-पिता ने स्वीकार किया कि अत्यधिक आर्थिक तंगी और परिवार का खर्च उठाने में असमर्थता के कारण ही उन्होंने अपनी नवजात बच्ची को स्टेशन पर छोड़ दिया था। पुणे में मजदूरी करने वाले इस दंपति के कुल पांच बच्चे हैं, जिनमें से तीन बच्चे बिहार के गांव में दादी के पास रहते हैं। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि घटना के पीछे केवल आर्थिक मजबूरी थी या कोई अन्य कारण भी शामिल है। जीआरपी अधिकारियों के मुताबिक 'ऑपरेशन हमदर्द' का उद्देश्य रेलवे परिसरों में मिलने वाले लावारिस, बिछड़े या असहाय लोगों को सुरक्षित संरक्षण देकर उनके परिजनों से मिलाना है।
मध्य प्रदेश पुलिस की जीआरपी ने अपने 'ऑपरेशन हमदर्द' अभियान के तहत भोपाल रेलवे स्टेशन पर 11 दिन पहले लावारिस मिली एक माह की बच्ची के माता-पिता को ढूंढ निकाला है। गत 10 जुलाई को भोपाल रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-6 स्थित ऑटो स्टैंड पर खड़े एक खाली ऑटो में यह मासूम मिली थी, जिसे रोने की आवाज सुनकर लोगों की सूचना पर पुलिस ने अपने संरक्षण में लिया और तत्काल मेडिकल चेकअप कराया। बच्ची को लावारिस छोड़ने के इस मामले में अब पुलिस आरोपी माता-पिता को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ और कानूनी कार्रवाई कर रही है। जीआरपी थाना प्रभारी ज़हीर खान के अनुसार, स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने पर एक महिला, उसके पति और बड़ी बेटी को बच्ची को ऑटो में छोड़कर जाते देखा गया था। तीनों रेलवे स्टेशन के टिकट काउंटर से पुणे का जनरल टिकट खरीदकर ट्रेन से रवाना हुए थे। इसके बाद भोपाल जीआरपी की टीम ने पुणे की जीआरपी और स्थानीय पुलिस के सहयोग से तलाश शुरू की। सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल होने के बाद जब माता-पिता को पता चला कि पुलिस पुणे आ गई है, तो वे बिहार जाने के लिए ट्रेन पकड़कर भोपाल पहुंचे, जहाँ स्टेशन पर उतरते ही पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। प्रारंभिक पूछताछ में माता-पिता ने स्वीकार किया कि अत्यधिक आर्थिक तंगी और परिवार का खर्च उठाने में असमर्थता के कारण ही उन्होंने अपनी नवजात बच्ची को स्टेशन पर छोड़ दिया था। पुणे में मजदूरी करने वाले इस दंपति के कुल पांच बच्चे हैं, जिनमें से तीन बच्चे बिहार के गांव में दादी के पास रहते हैं। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि घटना के पीछे केवल आर्थिक मजबूरी थी या कोई अन्य कारण भी शामिल है। जीआरपी अधिकारियों के मुताबिक 'ऑपरेशन हमदर्द' का उद्देश्य रेलवे परिसरों में मिलने वाले लावारिस, बिछड़े या असहाय लोगों को सुरक्षित संरक्षण देकर उनके परिजनों से मिलाना है।
- पीएम मोदी ने देर रात एक वीडियो जारी कर छात्रों के हित की बात कही है।1
- भोपाल स्थित प्रशासन अकादमी में पहली बार 'त्रिवेणी नृत्य' का आयोजन किया गया है। इस खास आयोजन से जुड़ी विस्तृत जानकारी के लिए पूरी खबर अवश्य देखें।4
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- मध्य प्रदेश पुलिस की जीआरपी ने अपने 'ऑपरेशन हमदर्द' अभियान के तहत भोपाल रेलवे स्टेशन पर 11 दिन पहले लावारिस मिली एक माह की बच्ची के माता-पिता को ढूंढ निकाला है। गत 10 जुलाई को भोपाल रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-6 स्थित ऑटो स्टैंड पर खड़े एक खाली ऑटो में यह मासूम मिली थी, जिसे रोने की आवाज सुनकर लोगों की सूचना पर पुलिस ने अपने संरक्षण में लिया और तत्काल मेडिकल चेकअप कराया। बच्ची को लावारिस छोड़ने के इस मामले में अब पुलिस आरोपी माता-पिता को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ और कानूनी कार्रवाई कर रही है। जीआरपी थाना प्रभारी ज़हीर खान के अनुसार, स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने पर एक महिला, उसके पति और बड़ी बेटी को बच्ची को ऑटो में छोड़कर जाते देखा गया था। तीनों रेलवे स्टेशन के टिकट काउंटर से पुणे का जनरल टिकट खरीदकर ट्रेन से रवाना हुए थे। इसके बाद भोपाल जीआरपी की टीम ने पुणे की जीआरपी और स्थानीय पुलिस के सहयोग से तलाश शुरू की। सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल होने के बाद जब माता-पिता को पता चला कि पुलिस पुणे आ गई है, तो वे बिहार जाने के लिए ट्रेन पकड़कर भोपाल पहुंचे, जहाँ स्टेशन पर उतरते ही पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। प्रारंभिक पूछताछ में माता-पिता ने स्वीकार किया कि अत्यधिक आर्थिक तंगी और परिवार का खर्च उठाने में असमर्थता के कारण ही उन्होंने अपनी नवजात बच्ची को स्टेशन पर छोड़ दिया था। पुणे में मजदूरी करने वाले इस दंपति के कुल पांच बच्चे हैं, जिनमें से तीन बच्चे बिहार के गांव में दादी के पास रहते हैं। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि घटना के पीछे केवल आर्थिक मजबूरी थी या कोई अन्य कारण भी शामिल है। जीआरपी अधिकारियों के मुताबिक 'ऑपरेशन हमदर्द' का उद्देश्य रेलवे परिसरों में मिलने वाले लावारिस, बिछड़े या असहाय लोगों को सुरक्षित संरक्षण देकर उनके परिजनों से मिलाना है।1
- भोपाल के कोतवाली थाने के सामने स्थित करीब 90 साल पुरानी एक तीन मंजिला इमारत का छज्जा देर रात अचानक गिर गया। हादसे के तुरंत बाद प्रशासन ने एहतियात बरतते हुए भवन में रह रहे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर दूसरी जगह भेजा। इसके बाद आज दिन में इस पूरी तरह जर्जर और क्षतिग्रस्त हो चुकी इमारत को बुलडोजर की मदद से ध्वस्त कर दिया गया। इस कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के चलते इलाके का यातायात बुरी तरह प्रभावित रहा। इब्राहिमपुर से लेकर चार बत्ती चौराहे तक लंबा जाम लग गया, जिससे राहगीरों और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।1