मानवता की सेवा, करुणा और निःस्वार्थ समर्पण से भरतपुर जिले के बझेरा गाँव स्थित अपना घर आश्रम ने वैश्विक पटल पर एक स्वर्णिम अध्याय लिखा है। आधिकारिक तौर पर यह आश्रम अब दुनिया का सबसे बड़ा महिला आश्रय गृह बन गया है, और इसका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है। गिनीज बुक के अधिकृत जज और रिकॉर्ड टीम के प्रमुख ऋषिनाथ की टीम ने दो दिनों तक आश्रम की व्यवस्थाओं, दस्तावेजों और भवन क्षमता का गहन जमीनी सत्यापन किया। ऑनलाइन स्क्रूटनी के छह महीने बाद हुए इस ऑफलाइन वेरिफिकेशन में आश्रम की व्यवस्थाएं अंतरराष्ट्रीय मानकों से भी बेहतर पाई गईं, जिसके बाद उसे विश्व रिकॉर्ड का आधिकारिक प्रमाण पत्र सौंपा गया। अपना घर आश्रम ने अमेरिका के मियामी स्थित 'लोटस हाउस वूमन शेल्टर' का रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जिसे अब तक दुनिया का सबसे बड़ा महिला शेल्टर माना जाता था और जहाँ लगभग 1,500 महिलाओं, युवाओं और बच्चों को आश्रय मिलता था। इसके मुकाबले, भरतपुर के अपना घर आश्रम ने 3,295 निराश्रित एवं असहाय महिलाओं के प्रमाणित आंकड़े के साथ यह कीर्तिमान स्थापित किया है। जांच के समय आश्रम में महिला आवासियों की कुल संख्या 3,473 दर्ज की गई थी, जिसमें बच्चे और बुजुर्ग शामिल नहीं हैं। आश्रम 9.10 लाख वर्ग फीट में फैला है, जिसमें 5.22 लाख वर्ग फीट क्षेत्र में आधुनिक और सर्वसुविधायुक्त निर्माण किया गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रति व्यक्ति 100 वर्ग फुट जगह का मानक है, जबकि यहाँ प्रत्येक महिला आवासी को 126 वर्ग फुट की खुली और सम्मानजनक जगह उपलब्ध है। यहाँ आवासियों के लिए स्वच्छता, नियमित चिकित्सा और पौष्टिक भोजन की व्यवस्था की गई है। संस्थापक डॉ. बीएम भारद्वाज ने इस उपलब्धि को ईंट-पत्थरों या संसाधनों की नहीं, बल्कि उस सेवा भावना की जीत बताया जो हर बेसहारा को 'प्रभुजी' मानकर सेवा देती है। सन 2000 में बझेरा में शुरू हुई इस संस्था ने पिछले ढाई दशक में 14,710 बेसहारा महिलाओं का सफल इलाज और पुनर्वास करवाकर उन्हें उनके परिवारों से दोबारा मिलवाया है। वर्तमान में देशभर में अपना घर के 57 आश्रम संचालित हैं, जिनमें 12,000 से अधिक आवासी आश्रय पा रहे हैं, जिनमें लगभग 6,500 महिला प्रभुजी हैं।
मानवता की सेवा, करुणा और निःस्वार्थ समर्पण से भरतपुर जिले के बझेरा गाँव स्थित अपना घर आश्रम ने वैश्विक पटल पर एक स्वर्णिम अध्याय लिखा है। आधिकारिक तौर पर यह आश्रम अब दुनिया का सबसे बड़ा महिला आश्रय गृह बन गया है, और इसका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है। गिनीज बुक के अधिकृत जज और रिकॉर्ड टीम के प्रमुख ऋषिनाथ की टीम ने दो दिनों तक आश्रम की व्यवस्थाओं, दस्तावेजों और भवन क्षमता का गहन जमीनी सत्यापन किया। ऑनलाइन स्क्रूटनी के छह महीने बाद हुए इस ऑफलाइन वेरिफिकेशन में आश्रम की व्यवस्थाएं अंतरराष्ट्रीय मानकों से भी बेहतर पाई गईं, जिसके बाद उसे विश्व रिकॉर्ड का आधिकारिक प्रमाण पत्र सौंपा गया। अपना घर आश्रम ने अमेरिका के मियामी स्थित 'लोटस हाउस वूमन शेल्टर' का रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जिसे अब तक दुनिया का सबसे बड़ा महिला शेल्टर माना जाता था और जहाँ लगभग 1,500 महिलाओं, युवाओं और बच्चों को आश्रय मिलता था। इसके मुकाबले, भरतपुर के अपना घर आश्रम ने 3,295 निराश्रित एवं असहाय महिलाओं के प्रमाणित आंकड़े के साथ यह कीर्तिमान स्थापित किया है। जांच के समय आश्रम में महिला आवासियों की कुल संख्या 3,473 दर्ज की गई थी, जिसमें बच्चे और बुजुर्ग शामिल नहीं हैं। आश्रम 9.10 लाख वर्ग फीट में फैला है, जिसमें 5.22 लाख वर्ग फीट क्षेत्र में आधुनिक और सर्वसुविधायुक्त निर्माण किया गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रति व्यक्ति 100 वर्ग फुट जगह का मानक है, जबकि यहाँ प्रत्येक महिला आवासी को 126 वर्ग फुट की खुली और सम्मानजनक जगह उपलब्ध है। यहाँ आवासियों के लिए स्वच्छता, नियमित चिकित्सा और पौष्टिक भोजन की व्यवस्था की गई है। संस्थापक डॉ. बीएम भारद्वाज ने इस उपलब्धि को ईंट-पत्थरों या संसाधनों की नहीं, बल्कि उस सेवा भावना की जीत बताया जो हर बेसहारा को 'प्रभुजी' मानकर सेवा देती है। सन 2000 में बझेरा में शुरू हुई इस संस्था ने पिछले ढाई दशक में 14,710 बेसहारा महिलाओं का सफल इलाज और पुनर्वास करवाकर उन्हें उनके परिवारों से दोबारा मिलवाया है। वर्तमान में देशभर में अपना घर के 57 आश्रम संचालित हैं, जिनमें 12,000 से अधिक आवासी आश्रय पा रहे हैं, जिनमें लगभग 6,500 महिला प्रभुजी हैं।
- अयोध्या स्थित हनुमान गढ़ी से राम मंदिर के दिव्य दर्शन कराए गए हैं। यह दर्शन भक्ति और प्रेम के वातावरण में संपन्न हुआ, जिसमें 'राधे राधे' के जयघोष के माध्यम से श्रद्धालु अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रहे हैं।1
- ब्रिज चौरासी कोस परिक्रमा के लिए पूरा प्रशासन मंडल सज चुका है, जिसकी तैयारियों का जायजा लेने के लिए मंडल आयुक्त नागेंद्र प्रताप ने बलदेव के हथोड़ा गांव से गुजरने वाले चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग का दौरा किया। इस निरीक्षण के दौरान, उन्होंने मार्ग पर की गई सभी व्यवस्थाओं को परखा। इस मौके पर बलदेव पब्लिक स्कूल के डायरेक्टर भी मंडल आयुक्त नागेंद्र प्रताप के साथ मौजूद रहे।1
- मथुरा जिले के महोली गांव में हुए बवाल के दौरान फायरिंग की घटना सामने आई है। इस फायरिंग में एक ही गांव के दो लोगों के घायल होने की सूचना मिली है।1
- मथुरा के होलीगेट पर ट्रैफिक पुलिस और श्रद्धालुओं के बीच तीखी झड़प का मामला सामने आया है। इस घटना के चलते बीच बाजार में काफी हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों और पोस्ट में यह सवाल उठाया जा रहा है कि इस झड़प में आखिर गलती किसकी थी।1
- मथुरा में चल रही पावन 84 कोस परिक्रमा के दौरान उस वक्त सनसनी फैल गई, जब श्रद्धा और भक्ति का माहौल अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट में बदल गया।1
- मथुरा के थाना हाईवे क्षेत्र स्थित महोली गांव में गुरुवार को पुरानी रंजिश एक बार फिर हिंसक रूप में सामने आई। दो पक्षों के बीच शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते पथराव और फायरिंग तक पहुंच गया, जिससे पूरे गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस घटना में कई लोग घायल हुए हैं। सूचना मिलने पर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। जानकारी के अनुसार, यह विवाद करीब छह महीने पहले पार्षद प्रतिनिधि राजवीर सिंह और गांव निवासी चंद्रपाल के बीच हुआ था, जिसकी पुरानी रंजिश ने अब हिंसक रूप ले लिया है और गांव में दहशत फैल गई है।1
- भाजपा सरकार पर आशा सहयोगिनियों की अनदेखी का आरोप एक बार फिर तेज हो गया है। हाल ही में मुख्यमंत्री के बन्द बरेठा दौरे के दौरान, अपनी पीड़ा सुनाने पहुंचीं आशा बहनों को पुलिस और प्रशासन ने उनसे मिलने से रोक दिया। इस घटना पर सवाल उठ रहा है कि जब सैकड़ों महिलाएं सड़क पर बैठकर न्याय मांग रही थीं, तो क्या मुख्यमंत्री तक इसकी भनक नहीं पहुंची? यह संभव नहीं लगता। आशा सहयोगिनियां महीनों से वेतन न मिलने, बढ़ते डिजिटल काम के बोझ और मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर प्रशासन के माध्यम से अपनी बात भाजपा सरकार तक पहुंचा रही हैं, लेकिन सरकार इस पर कोई ध्यान नहीं दे रही है। जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य योजनाओं को चलाने वाली ये महिलाएं आज खुद भूखे-प्यासे हैं। कोविड काल में घर-घर जाकर जान जोखिम में डालने वाली इन आशा बहनों के साथ ऐसा रवैया सरकार की संवेदनहीनता को उजागर करता है। आशा सहयोगिनियों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने अब भी उनकी बात नहीं सुनी, तो राजस्थान भर में उनका आंदोलन और तेज होगा। सीधा सवाल है कि क्या सरकार 53 हजार आशा बहनों की आवाज सुनकर उन्हें सम्मानजनक समाधान प्रदान करेगी? इन सबके बीच, आशा सहयोगिनी बहनों का कहना है, "कौन सुनेगा, किसको सुनाएं"।1
- अयोध्या धाम में स्थित श्री राम मंदिर के भव्य और दिव्य दर्शन उपलब्ध हैं। मंदिर की यह महिमा भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।1
- 84 कोस परिक्रमा के दौरान गोलियों की गूंज सुनाई दी, जहाँ भंडारे को लेकर दो पक्ष आपस में भिड़ गए। इस विवाद के बाद दोनों पक्षों के बीच करीब आधे घंटे तक गोलीबारी चलती रही।1