कठुआ जिले के बिलावर स्थित मां सुकराला की पावन भूमि में श्री गुरु आश्रम में चल रहे योग साधना शिविर के पाँचवें दिन, पूज्य संत सुभाष शास्त्री महाराज ने उपस्थित संगत को प्रवचनों की वर्षा के साथ ध्यान की विधियाँ समझाईं। इस दौरान उन्होंने आत्मज्ञान और परमात्मा के एकाकार स्वरूप पर गहन चर्चा की। शास्त्री जी ने शिविर में उपस्थित सत्संगियों को संबोधित करते हुए कहा कि ज्ञान की खोज में नित्य सत्संग में आने वाले जब यह जान लेते हैं कि 'मैं अज्ञानी हूँ', तो वास्तव में इसका अर्थ होता है कि 'मैं ज्ञानी हूँ' और 'मैं साक्षी हूँ'। उन्होंने स्पष्ट किया कि आत्मा ही परमात्मा है, जैसा कि हमारे पूर्वज भी हर पल कहते रहे हैं। शास्त्री जी के अनुसार, आत्मज्ञान के लिए भटक रहे साधकों को यह समझना चाहिए कि आत्मा कहीं बाहर नहीं है, बल्कि परमात्मा कोई और नहीं, गैर नहीं और दूर नहीं है। संत शास्त्री ने ऋषियों और गुरु नानक देव जी का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने स्वयं को ब्रह्म जानकर भी कभी स्वयं को ब्रह्म नहीं कहा, बल्कि दूसरों को ब्रह्म को खोजने और जानने के लिए प्रेरित किया। गुरु नानक देव जी ब्रह्मज्ञानी थे, लेकिन उन्होंने कभी स्वयं को परमेश्वर नहीं कहा; इसके बजाय उन्होंने लोगों को समझाया कि ज्ञानी व्यक्ति ही परमात्मा हो जाता है। आत्मज्ञान प्राप्त करने के लिए उन्होंने ध्यान (मेडिटेशन) का सहारा लेने की सलाह दी, जिसमें नेत्र बंद करके आती-जाती श्वास पर पूरा ध्यान केंद्रित करना होता है, ताकि व्यक्ति स्वयं को साक्षी के रूप में अनुभव कर सके। इस प्रक्रिया की अवधि धीरे-धीरे बढ़ाने पर साधक यह महसूस करने लगेगा कि वह जिसे बाहर खोज रहा था, वह स्वयं ही है। शास्त्री जी ने बल दिया कि यह साधना शुद्ध रूप से व्यक्तिगत और निजी है, इसका संबंध किसी व्यक्ति या समाज से नहीं। उन्होंने समझाया कि जो इस स्थिति तक पहुँच जाता है, उसका सत्संग सुनना सार्थक हो जाता है, वह 'फर्स्ट क्लास फर्स्ट पास' हो जाता है। प्रवचन का समापन संत तुलसीदास जी की चौपाई 'बिनु सत्संग बिबेक न हो होई। रामकृपा बिनु सुलभ न सोई' के साथ हुआ।
कठुआ जिले के बिलावर स्थित मां सुकराला की पावन भूमि में श्री गुरु आश्रम में चल रहे योग साधना शिविर के पाँचवें दिन, पूज्य संत सुभाष शास्त्री महाराज ने उपस्थित संगत को प्रवचनों की वर्षा के साथ ध्यान की विधियाँ समझाईं। इस दौरान उन्होंने आत्मज्ञान और परमात्मा के एकाकार स्वरूप पर गहन चर्चा की। शास्त्री जी ने शिविर में उपस्थित सत्संगियों को संबोधित करते हुए कहा कि ज्ञान की खोज में नित्य सत्संग में आने वाले जब यह जान लेते हैं कि 'मैं अज्ञानी हूँ', तो वास्तव में इसका अर्थ होता है कि 'मैं ज्ञानी हूँ' और 'मैं साक्षी हूँ'। उन्होंने स्पष्ट किया कि आत्मा ही परमात्मा है, जैसा कि हमारे पूर्वज भी हर पल कहते
रहे हैं। शास्त्री जी के अनुसार, आत्मज्ञान के लिए भटक रहे साधकों को यह समझना चाहिए कि आत्मा कहीं बाहर नहीं है, बल्कि परमात्मा कोई और नहीं, गैर नहीं और दूर नहीं है। संत शास्त्री ने ऋषियों और गुरु नानक देव जी का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने स्वयं को ब्रह्म जानकर भी कभी स्वयं को ब्रह्म नहीं कहा, बल्कि दूसरों को ब्रह्म को खोजने और जानने के लिए प्रेरित किया। गुरु नानक देव जी ब्रह्मज्ञानी थे, लेकिन उन्होंने कभी स्वयं को परमेश्वर नहीं कहा; इसके बजाय उन्होंने लोगों को समझाया कि ज्ञानी व्यक्ति ही परमात्मा हो जाता है। आत्मज्ञान प्राप्त करने के लिए उन्होंने ध्यान (मेडिटेशन) का सहारा लेने की सलाह दी, जिसमें नेत्र
बंद करके आती-जाती श्वास पर पूरा ध्यान केंद्रित करना होता है, ताकि व्यक्ति स्वयं को साक्षी के रूप में अनुभव कर सके। इस प्रक्रिया की अवधि धीरे-धीरे बढ़ाने पर साधक यह महसूस करने लगेगा कि वह जिसे बाहर खोज रहा था, वह स्वयं ही है। शास्त्री जी ने बल दिया कि यह साधना शुद्ध रूप से व्यक्तिगत और निजी है, इसका संबंध किसी व्यक्ति या समाज से नहीं। उन्होंने समझाया कि जो इस स्थिति तक पहुँच जाता है, उसका सत्संग सुनना सार्थक हो जाता है, वह 'फर्स्ट क्लास फर्स्ट पास' हो जाता है। प्रवचन का समापन संत तुलसीदास जी की चौपाई 'बिनु सत्संग बिबेक न हो होई। रामकृपा बिनु सुलभ न सोई' के साथ हुआ।
- नूरपुर शहर में लगातार सामने आ रही पेयजल समस्या को लेकर नगर परिषद ने पहल तेज कर दी है। नगर परिषद अध्यक्ष नीति महाजन की अध्यक्षता में पार्षदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने आईपीएच विभाग के अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) आनंद वलोरिया से मुलाकात की। इस दौरान शहर की जलापूर्ति व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा हुई, जिसमें बरसात के मौसम से पहले पुरानी पाइपलाइन बदलने और पेयजल आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। अध्यक्ष नीति महाजन ने बताया कि पिछले वर्ष बरसात के दौरान बार-बार पाइपलाइन टूटने के कारण शहर में लगातार 16 दिनों तक पेयजल आपूर्ति बाधित रही थी, जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने विभाग से आग्रह किया कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो, इसके लिए बरसात शुरू होने से पहले सभी जर्जर और पुरानी पाइपलाइन को बदल दिया जाए। बैठक के दौरान पेयजल संकट से जुड़े सभी मुद्दों पर विभागीय अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा हुई। आईपीएच विभाग के अधिशासी अभियंता आनंद वलोरिया ने नगर परिषद को आश्वासन दिया है कि शहर की पेयजल समस्या का शीघ्र समाधान किया जाएगा। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि बरसात से पहले पुरानी पाइपलाइन को बदलने का कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा, जिससे मानसून के दौरान शहरवासियों को किसी भी तरह के पेयजल संकट का सामना न करना पड़े।1
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- ग्राम पंचायत चमबी के तहत आने वाले अकेरा और अच्छेड गांवों के लिए बिछाई गई पानी की पाइपलाइन की हालत बेहद खराब है। जानकारी के अनुसार, यह पाइपलाइन कई स्थानों से टूटी हुई है और उसे अस्थायी रूप से प्लास्टिक के लिफाफों का इस्तेमाल करके जोड़ा गया है।1
- मंदोली का मशहूर दो दिवसीय दंगल शांतिपूर्वक संपन्न हो गया। इस दंगल की सबसे बड़ी माली के लिए पहलवान सिकंदर शेख और पहलवान मोनू के बीच एक महत्वपूर्ण मुकाबला हुआ। इस दौरान, पहलवान सिकंदर शेख ने मोनू पहलवान को पराजित कर बड़ी माली पर अपना कब्जा जमा लिया। मुकाबले के दौरान दोनों पहलवानों ने जबरदस्त दावपेच का प्रदर्शन किया।1
- जंगल गली मेले में डोगरी कलाकार श्री विजय कुमार जी विजय ने एक शानदार स्टेज परफॉर्मेंस दी। मनवाल के रहने वाले ये डोगरी गायक अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए दिखाई दिए। पोस्ट में दर्शकों से इस प्रदर्शन को लाइक, शेयर और फॉलो करने का आग्रह किया गया है।1
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- चंबा जिले के बाज़ार रोड पर रेहड़ियों के अतिक्रमण से आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं को लेकर एक नागरिक ने डीसी महोदय से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। शिकायतकर्ता के अनुसार, बाज़ार रोड पर आधे से ज़्यादा जगह पर, लगभग 22 स्थानों पर, रेहड़ियां लगाई गई हैं, जिसके कारण यह सार्वजनिक रास्ता अवरुद्ध हो गया है। इन रेहड़ियों की वजह से रोज़ाना दुर्घटनाएँ होती रहती हैं, जिनमें लोगों की टांगें टूट रही हैं या हाथ-पैर फ्रैक्चर हो रहे हैं। इस स्थिति से आम जनता को भारी कष्ट उठाना पड़ रहा है। जनता का मार्ग होने के बावजूद रेहड़ियों के कारण हो रही इन समस्याओं को देखते हुए डीसी महोदय से जल्द से जल्द इस मामले में कार्रवाई करने की विनम्र विनती की गई है।1