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सोनभद्र जिले के विण्ढमगंज थाना पुलिस ने हत्या के एक मामले का मात्र 8 घंटे के भीतर सफलतापूर्वक खुलासा किया है। इस त्वरित कार्रवाई में पुलिस ने घटना के अभियुक्त को हत्या में इस्तेमाल किए गए आला कत्ल के साथ गिरफ्तार कर लिया। इस संबंध में अपर पुलिस अधीक्षक (ऑपरेशन) सोनभद्र, श्री ऋषभ रुणवाल ने जानकारी दी है।

6 hrs ago
user_Nitesh Kumar
Nitesh Kumar
Mandi Agent Mahuli•
6 hrs ago

सोनभद्र जिले के विण्ढमगंज थाना पुलिस ने हत्या के एक मामले का मात्र 8 घंटे के भीतर सफलतापूर्वक खुलासा किया है। इस त्वरित कार्रवाई में पुलिस ने घटना के अभियुक्त को हत्या में इस्तेमाल किए गए आला कत्ल के साथ गिरफ्तार कर लिया। इस संबंध में अपर पुलिस अधीक्षक (ऑपरेशन) सोनभद्र, श्री ऋषभ रुणवाल ने जानकारी दी है।

More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
  • विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सोनभद्र में किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा ने कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान सैकड़ों कार्यकर्ता आम के पौधे लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और पूरे जिले में 2 लाख फलदार पौधे लगाने का संकल्प लिया। मोर्चा ने तेंदुआ सफारी, कृषि वानिकी विश्वविद्यालय की स्थापना, खनन निधि का जनहित में उपयोग सुनिश्चित करने और जल, जंगल एवं जमीन को बचाने की मांग को लेकर एक ज्ञापन भी सौंपा। यह प्रदर्शन पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के प्रति उनके दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।
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    विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सोनभद्र में किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा ने कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान सैकड़ों कार्यकर्ता आम के पौधे लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और पूरे जिले में 2 लाख फलदार पौधे लगाने का संकल्प लिया। मोर्चा ने तेंदुआ सफारी, कृषि वानिकी विश्वविद्यालय की स्थापना, खनन निधि का जनहित में उपयोग सुनिश्चित करने और जल, जंगल एवं जमीन को बचाने की मांग को लेकर एक ज्ञापन भी सौंपा। यह प्रदर्शन पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के प्रति उनके दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।
    user_Buro chief Sonbhadra Kameshwar Buro Chief
    Buro chief Sonbhadra Kameshwar Buro Chief
    आवाज न्यूज़ 24X7 ब्यूरो चीफ ओबरा, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हरित आवरण बढ़ाने की पहल के तहत शुक्रवार को सोनभद्र जनपद में वृहद स्तर पर पौधरोपण महाअभियान और 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान की शुरुआत हुई। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शुरू किए गए इस कार्यक्रम के तहत जनपद के विभिन्न स्थानों पर व्यापक स्तर पर पौधरोपण किया गया। इस महाअभियान के अंतर्गत जिले में कुल 1,61,69,686 (एक करोड़ इकसठ लाख उनहत्तर हज़ार छह सौ छियासी) पौधे रोपने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 1,02,18,000 (एक करोड़ दो लाख अठारह हज़ार) पौधे वन विभाग द्वारा लगाए जाएंगे, जबकि शेष 59,51,686 (उनसठ लाख इक्यावन हज़ार छह सौ छियासी) पौधे 22 अन्य विभागों द्वारा रोपे जाएंगे। विकास खंड घोरावल के तिलौली कला में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में घोरावल विधायक डॉ. अनिल कुमार मौर्य, जिलाधिकारी चर्चित गौड़, मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी सहित अन्य जनपद स्तरीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इसके अतिरिक्त, सदर विधायक भूपेश चौबे, विभिन्न ब्लॉक प्रमुखों, अन्य जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में आमजन ने भी जनपद के अलग-अलग स्थानों पर पौधरोपण कर अभियान में सक्रिय सहभागिता निभाई। 'मिशन छाया' के तहत सड़कों के दोनों ओर छायादार पौधे लगाकर उन्हें हरा-भरा बनाने का भी लक्ष्य है। इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने पर्यावरण संरक्षण, हरित आवरण बढ़ाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ व सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करने का आह्वान किया। उन्होंने जनपदवासियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आग्रह किया। पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का रूप देने के उद्देश्य से, यह वृहद वृक्षारोपण अभियान विभिन्न विभागों, ग्राम पंचायतों, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से संचालित किया गया, जहाँ लोगों ने 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के अंतर्गत पौधे लगाकर पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
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    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हरित आवरण बढ़ाने की पहल के तहत शुक्रवार को सोनभद्र जनपद में वृहद स्तर पर पौधरोपण महाअभियान और 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान की शुरुआत हुई। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शुरू किए गए इस कार्यक्रम के तहत जनपद के विभिन्न स्थानों पर व्यापक स्तर पर पौधरोपण किया गया। इस महाअभियान के अंतर्गत जिले में कुल 1,61,69,686 (एक करोड़ इकसठ लाख उनहत्तर हज़ार छह सौ छियासी) पौधे रोपने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 1,02,18,000 (एक करोड़ दो लाख अठारह हज़ार) पौधे वन विभाग द्वारा लगाए जाएंगे, जबकि शेष 59,51,686 (उनसठ लाख इक्यावन हज़ार छह सौ छियासी) पौधे 22 अन्य विभागों द्वारा रोपे जाएंगे।

विकास खंड घोरावल के तिलौली कला में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में घोरावल विधायक डॉ. अनिल कुमार मौर्य, जिलाधिकारी चर्चित गौड़, मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी सहित अन्य जनपद स्तरीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इसके अतिरिक्त, सदर विधायक भूपेश चौबे, विभिन्न ब्लॉक प्रमुखों, अन्य जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में आमजन ने भी जनपद के अलग-अलग स्थानों पर पौधरोपण कर अभियान में सक्रिय सहभागिता निभाई। 'मिशन छाया' के तहत सड़कों के दोनों ओर छायादार पौधे लगाकर उन्हें हरा-भरा बनाने का भी लक्ष्य है।

इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने पर्यावरण संरक्षण, हरित आवरण बढ़ाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ व सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करने का आह्वान किया। उन्होंने जनपदवासियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आग्रह किया। पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का रूप देने के उद्देश्य से, यह वृहद वृक्षारोपण अभियान विभिन्न विभागों, ग्राम पंचायतों, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से संचालित किया गया, जहाँ लोगों ने 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के अंतर्गत पौधे लगाकर पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
    user_पत्रकार किरण गौड़ (ब्यूरो चीफ)
    पत्रकार किरण गौड़ (ब्यूरो चीफ)
    Media company ओबरा, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • गढ़वा जिले के डंडई थाना क्षेत्र के रारो गांव में गुरुवार को 25 वर्षीय मधु कुमारी नामक विवाहित महिला का शव उसके मायके स्थित घर में साड़ी के फंदे से लटका हुआ मिला। इस घटना की जानकारी मिलते ही पूरे गांव में सनसनी फैल गई और महिला के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मिली जानकारी के अनुसार, गुरुवार दोपहर मधु कुमारी ने अपनी मां सुबसीया कुंवर और बच्चे के साथ भोजन किया था। इसके बाद उसकी मां पड़ोस में काम करने चली गई। कुछ घंटों बाद जब मां घर लौटी, तो अपनी बेटी को फंदे से झूलता देखकर स्तब्ध रह गई। मां के शोर मचाने पर आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने इस घटना की सूचना स्थानीय प्रशासन को दी। सूचना मिलते ही डंडई पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस इस मामले की गहनता से जांच कर रही है। बताया गया है कि मृतका एक अत्यंत गरीब परिवार से थी और उसकी एक बच्ची भी है। उसकी ससुराल जिले के ही एक गांव में है। परिजनों के कथनानुसार, यह उसकी तीसरी शादी थी। महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसका वास्तविक खुलासा पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। इस दुखद घटना से पूरे गांव में शोक का माहौल है।
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    गढ़वा जिले के डंडई थाना क्षेत्र के रारो गांव में गुरुवार को 25 वर्षीय मधु कुमारी नामक विवाहित महिला का शव उसके मायके स्थित घर में साड़ी के फंदे से लटका हुआ मिला। इस घटना की जानकारी मिलते ही पूरे गांव में सनसनी फैल गई और महिला के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

मिली जानकारी के अनुसार, गुरुवार दोपहर मधु कुमारी ने अपनी मां सुबसीया कुंवर और बच्चे के साथ भोजन किया था। इसके बाद उसकी मां पड़ोस में काम करने चली गई। कुछ घंटों बाद जब मां घर लौटी, तो अपनी बेटी को फंदे से झूलता देखकर स्तब्ध रह गई। मां के शोर मचाने पर आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे।

ग्रामीणों ने इस घटना की सूचना स्थानीय प्रशासन को दी। सूचना मिलते ही डंडई पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस इस मामले की गहनता से जांच कर रही है।

बताया गया है कि मृतका एक अत्यंत गरीब परिवार से थी और उसकी एक बच्ची भी है। उसकी ससुराल जिले के ही एक गांव में है। परिजनों के कथनानुसार, यह उसकी तीसरी शादी थी। महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसका वास्तविक खुलासा पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। इस दुखद घटना से पूरे गांव में शोक का माहौल है।
    user_दैनिक भास्कर डंडई
    दैनिक भास्कर डंडई
    Teacher दंदई, गढ़वा, झारखंड•
    18 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा हालिया फेरबदल के बाद, सोनभद्र जिले की कमान नवनियुक्त राज्य मंत्री/MLC हंसराज विश्वकर्मा को सौंपी गई है, जिन्होंने 5 जून, 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के जन्मदिवस की पूर्व संध्या पर जिले का अपना पहला आधिकारिक दौरा किया। पूर्व प्रभारी मंत्री रविंद्र जायसवाल के स्थान पर आए विश्वकर्मा जी की कलेक्ट्रेट सभागार में हुई स्वागत सह समीक्षा बैठक में जिला अधिकारी, पुलिस अधीक्षक और ओबरा के विधायक व राज्य मंत्री संजीव सिंह गौड़ सहित पूरा प्रशासनिक व राजनीतिक अमला उपस्थित था। हालांकि, इस प्रथम प्रवास के दौरान सत्ता पक्ष के ही मंच से खनिज संपदा को लेकर दिए गए वक्तव्यों ने जिले की प्रशासनिक व्यवस्था और विभागीय रिपोर्टिंग पर कई स्वाभाविक एवं गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। काशी क्षेत्र के वरिष्ठ सांगठनिक चेहरे और मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले हंसराज विश्वकर्मा के इस पहले दौरे पर, स्वागत मंच से ही व्यवस्था के व्यावहारिक पहलुओं पर तीखा विमर्श सामने आया। पूर्व सांसद नरेंद्र कुमार कुशवाहा ने खनिज संपदा से जुड़ी समस्याओं को प्रखरता से उठाया। बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर 2004 में मिर्जापुर से सांसद रहे और फिर 2023 में भारतीय जानी पार्टी में शामिल हुए कुशवाहा ने, जिला अधिकारी और पुलिस अधीक्षक की मौजूदगी में बिना किसी विशिष्ट पट्टा धारक या खदान का नाम लिए "बाहरी तत्वों के हस्तक्षेप" और "सुरक्षा के गंभीर संकट" का जिक्र किया। यह वक्तव्य तत्कालीन 'भूमिधरि नियमावली' के तहत स्थानीय किसानों को मिलने वाले छोटे पट्टों की आसान व्यवस्था से हटकर, वर्तमान ई-टेंडरिंग प्रणाली की वैश्विक प्रतिस्पर्धा के चलते स्थानीय काश्तकारों को आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों को रेखांकित करता है, जिसमें कानूनी रॉयल्टी दर ₹160 प्रति घन मीटर से शुरू होती है। इस पूरी प्रशासनिक बैठक का सबसे गंभीर पहलू यह है कि प्रदेश में भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग सीधे मुख्यमंत्री के अधीन आता है। एक ओर जहां मुख्यमंत्री राज्य से "माफिया राज" और "गुंडागर्दी" के खात्मे की बात करते हैं, वहीं उनके जन्मदिन से ठीक एक दिन पहले, उनके करीबी प्रभारी मंत्री के सामने सार्वजनिक रूप से व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए, और इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होना कई विधिक और प्रशासनिक यक्ष प्रश्न खड़े करता है। पहला प्रश्न यह है कि यदि खनन राजस्व का महत्वपूर्ण स्तंभ है और सरकार की ई-टेंडरिंग नीति पारदर्शी है, तो बिना प्रामाणिक साक्ष्य के सार्वजनिक आरोप वैध व्यवसायियों की सुरक्षा और साख को क्यों प्रभावित कर रहे हैं? दूसरा, 15 नवंबर 2025 के उस भीषण खदान हादसे में, जिसमें एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और जिला प्रशासन के ऑन-रिकॉर्ड आंकड़ों के अनुसार 7 मौतें दर्ज थीं, शिकायतों में मृतकों की संख्या 10-12 बताई गई, जिससे जिला प्रशासन की राहत कार्यवाहियों और विभागीय रिपोर्टिंग की विश्वसनीयता पर सवाल उठे; इसी कारण जिम्मेदार आला अधिकारी (DM-SP) मौन रहे। तीसरा और सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब सत्ता पक्ष के वरिष्ठ नेता स्वयं सुरक्षा खतरों का जिक्र करते हैं, तो वे विशिष्ट खदानों या विसंगतियों का नाम स्पष्ट रूप से सामने क्यों नहीं रखते? निष्कर्षतः, सोनभद्र जैसे आदिवासी बहुल जिले की खनिज संपदा पूरे प्रदेश को आर्थिक मजबूती देती है, लेकिन यहां का स्थानीय समाज आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित रोजगार जैसी प्राथमिक आवश्यकताओं के लिए संघर्षरत है, जिसके कारण कभी-कभी स्थानीय सामाजिक परिवेश में आक्रामकता देखने को मिलती है। प्रभारी मंत्री हंसराज विश्वकर्मा के प्रथम प्रवास में सामने आए इन सांगठनिक अंतर्विरोधों और बयानों को शासन को "जमीनी फीडबैक" के रूप में देखना चाहिए। यह आवश्यक है कि खनन से प्राप्त राजस्व का एक निश्चित हिस्सा जिला खनिज कोष (DMF) के माध्यम से सोनभद्र के मूल आदिवासियों के विकास पर पारदर्शी तरीके से खर्च किया जाए, ताकि यह समृद्ध जिला आर्थिक मजबूती के साथ-साथ सामाजिक शांति भी बनाए रख सके।
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    उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा हालिया फेरबदल के बाद, सोनभद्र जिले की कमान नवनियुक्त राज्य मंत्री/MLC हंसराज विश्वकर्मा को सौंपी गई है, जिन्होंने 5 जून, 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के जन्मदिवस की पूर्व संध्या पर जिले का अपना पहला आधिकारिक दौरा किया। पूर्व प्रभारी मंत्री रविंद्र जायसवाल के स्थान पर आए विश्वकर्मा जी की कलेक्ट्रेट सभागार में हुई स्वागत सह समीक्षा बैठक में जिला अधिकारी, पुलिस अधीक्षक और ओबरा के विधायक व राज्य मंत्री संजीव सिंह गौड़ सहित पूरा प्रशासनिक व राजनीतिक अमला उपस्थित था। हालांकि, इस प्रथम प्रवास के दौरान सत्ता पक्ष के ही मंच से खनिज संपदा को लेकर दिए गए वक्तव्यों ने जिले की प्रशासनिक व्यवस्था और विभागीय रिपोर्टिंग पर कई स्वाभाविक एवं गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

काशी क्षेत्र के वरिष्ठ सांगठनिक चेहरे और मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले हंसराज विश्वकर्मा के इस पहले दौरे पर, स्वागत मंच से ही व्यवस्था के व्यावहारिक पहलुओं पर तीखा विमर्श सामने आया। पूर्व सांसद नरेंद्र कुमार कुशवाहा ने खनिज संपदा से जुड़ी समस्याओं को प्रखरता से उठाया। बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर 2004 में मिर्जापुर से सांसद रहे और फिर 2023 में भारतीय जानी पार्टी में शामिल हुए कुशवाहा ने, जिला अधिकारी और पुलिस अधीक्षक की मौजूदगी में बिना किसी विशिष्ट पट्टा धारक या खदान का नाम लिए "बाहरी तत्वों के हस्तक्षेप" और "सुरक्षा के गंभीर संकट" का जिक्र किया। यह वक्तव्य तत्कालीन 'भूमिधरि नियमावली' के तहत स्थानीय किसानों को मिलने वाले छोटे पट्टों की आसान व्यवस्था से हटकर, वर्तमान ई-टेंडरिंग प्रणाली की वैश्विक प्रतिस्पर्धा के चलते स्थानीय काश्तकारों को आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों को रेखांकित करता है, जिसमें कानूनी रॉयल्टी दर ₹160 प्रति घन मीटर से शुरू होती है।

इस पूरी प्रशासनिक बैठक का सबसे गंभीर पहलू यह है कि प्रदेश में भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग सीधे मुख्यमंत्री के अधीन आता है। एक ओर जहां मुख्यमंत्री राज्य से "माफिया राज" और "गुंडागर्दी" के खात्मे की बात करते हैं, वहीं उनके जन्मदिन से ठीक एक दिन पहले, उनके करीबी प्रभारी मंत्री के सामने सार्वजनिक रूप से व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए, और इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होना कई विधिक और प्रशासनिक यक्ष प्रश्न खड़े करता है। पहला प्रश्न यह है कि यदि खनन राजस्व का महत्वपूर्ण स्तंभ है और सरकार की ई-टेंडरिंग नीति पारदर्शी है, तो बिना प्रामाणिक साक्ष्य के सार्वजनिक आरोप वैध व्यवसायियों की सुरक्षा और साख को क्यों प्रभावित कर रहे हैं? दूसरा, 15 नवंबर 2025 के उस भीषण खदान हादसे में, जिसमें एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और जिला प्रशासन के ऑन-रिकॉर्ड आंकड़ों के अनुसार 7 मौतें दर्ज थीं, शिकायतों में मृतकों की संख्या 10-12 बताई गई, जिससे जिला प्रशासन की राहत कार्यवाहियों और विभागीय रिपोर्टिंग की विश्वसनीयता पर सवाल उठे; इसी कारण जिम्मेदार आला अधिकारी (DM-SP) मौन रहे। तीसरा और सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब सत्ता पक्ष के वरिष्ठ नेता स्वयं सुरक्षा खतरों का जिक्र करते हैं, तो वे विशिष्ट खदानों या विसंगतियों का नाम स्पष्ट रूप से सामने क्यों नहीं रखते?

निष्कर्षतः, सोनभद्र जैसे आदिवासी बहुल जिले की खनिज संपदा पूरे प्रदेश को आर्थिक मजबूती देती है, लेकिन यहां का स्थानीय समाज आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित रोजगार जैसी प्राथमिक आवश्यकताओं के लिए संघर्षरत है, जिसके कारण कभी-कभी स्थानीय सामाजिक परिवेश में आक्रामकता देखने को मिलती है। प्रभारी मंत्री हंसराज विश्वकर्मा के प्रथम प्रवास में सामने आए इन सांगठनिक अंतर्विरोधों और बयानों को शासन को "जमीनी फीडबैक" के रूप में देखना चाहिए। यह आवश्यक है कि खनन से प्राप्त राजस्व का एक निश्चित हिस्सा जिला खनिज कोष (DMF) के माध्यम से सोनभद्र के मूल आदिवासियों के विकास पर पारदर्शी तरीके से खर्च किया जाए, ताकि यह समृद्ध जिला आर्थिक मजबूती के साथ-साथ सामाजिक शांति भी बनाए रख सके।
    user_Abhishek agrahari संस्थापक सोन
    Abhishek agrahari संस्थापक सोन
    Student union ओबरा, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    22 hrs ago
  • चिनिया प्रखंड मुख्यालय क्षेत्र की बिलैतीखर पंचायत के रानीचेरी गांव स्थित अकेलवा टोला में पिछले तीन वर्षों से बंद पड़ा चापानल आखिरकार दोबारा चालू हो गया है। सहभागी शिक्षण केंद्र द्वारा संचालित पलामू वाटर इनिशिएटिव (PWI) परियोजना के तहत इस चापानल की मरम्मत और इसके प्लेटफॉर्म का नवीनीकरण कर ग्रामीणों को पेयजल संकट से राहत प्रदान की गई। अकेलवा टोला में लगभग आठ पीवीटीजी (कोरवा) परिवार रहते हैं, जिन्हें चापानल खराब होने के कारण पीने का पानी लाने के लिए रोजाना लगभग 800 मीटर दूर जाना पड़ता था, जिससे उन्हें भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। ग्रामीणों की इस समस्या को देखते हुए संस्था ने चापानल के खराब हुए पार्ट्स को बदलकर उसे फिर से शुरू कराया और जर्जर प्लेटफॉर्म की भी मरम्मत की। इस पूरे कार्य में स्थानीय महिलाओं ने बढ़-चढ़कर श्रमदान किया, जो सामुदायिक भागीदारी का एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया। संस्था ने आवश्यक निर्माण सामग्री और मिस्त्री की व्यवस्था की, जबकि ग्रामीणों ने अपने श्रम सहयोग से इस कार्य को सफल बनाया। चापानल के फिर से चालू हो जाने के बाद पूरे टोले में खुशी का माहौल है और लोगों को स्वच्छ पेयजल की सुविधा एक बार फिर से उपलब्ध हो गई है। ग्रामीणों ने इस पहल के लिए सहभागी शिक्षण केंद्र और पंचायत का हार्दिक आभार व्यक्त किया है। इसके साथ ही, पंचायत की ओर से जल निकासी व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए सोकपिट निर्माण कराने का आश्वासन भी दिया गया है। यह पूरी पहल ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक सहयोग और जल प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है।
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    चिनिया प्रखंड मुख्यालय क्षेत्र की बिलैतीखर पंचायत के रानीचेरी गांव स्थित अकेलवा टोला में पिछले तीन वर्षों से बंद पड़ा चापानल आखिरकार दोबारा चालू हो गया है। सहभागी शिक्षण केंद्र द्वारा संचालित पलामू वाटर इनिशिएटिव (PWI) परियोजना के तहत इस चापानल की मरम्मत और इसके प्लेटफॉर्म का नवीनीकरण कर ग्रामीणों को पेयजल संकट से राहत प्रदान की गई। अकेलवा टोला में लगभग आठ पीवीटीजी (कोरवा) परिवार रहते हैं, जिन्हें चापानल खराब होने के कारण पीने का पानी लाने के लिए रोजाना लगभग 800 मीटर दूर जाना पड़ता था, जिससे उन्हें भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।

ग्रामीणों की इस समस्या को देखते हुए संस्था ने चापानल के खराब हुए पार्ट्स को बदलकर उसे फिर से शुरू कराया और जर्जर प्लेटफॉर्म की भी मरम्मत की। इस पूरे कार्य में स्थानीय महिलाओं ने बढ़-चढ़कर श्रमदान किया, जो सामुदायिक भागीदारी का एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया। संस्था ने आवश्यक निर्माण सामग्री और मिस्त्री की व्यवस्था की, जबकि ग्रामीणों ने अपने श्रम सहयोग से इस कार्य को सफल बनाया।

चापानल के फिर से चालू हो जाने के बाद पूरे टोले में खुशी का माहौल है और लोगों को स्वच्छ पेयजल की सुविधा एक बार फिर से उपलब्ध हो गई है। ग्रामीणों ने इस पहल के लिए सहभागी शिक्षण केंद्र और पंचायत का हार्दिक आभार व्यक्त किया है। इसके साथ ही, पंचायत की ओर से जल निकासी व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए सोकपिट निर्माण कराने का आश्वासन भी दिया गया है। यह पूरी पहल ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक सहयोग और जल प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है।
    user_Hemant Kumar
    Hemant Kumar
    चिनिया, गढ़वा, झारखंड•
    7 hrs ago
  • गढ़वा जिले के केतार अंतर्गत बक्शीपुर गांव में एक दुखद घटना सामने आई है, जहाँ हार्ट अटैक के कारण परिवार का सहारा छिन गया है। इस घटना के बाद से पूरे बक्शीपुर में गमगीन माहौल बना हुआ है।
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    गढ़वा जिले के केतार अंतर्गत बक्शीपुर गांव में एक दुखद घटना सामने आई है, जहाँ हार्ट अटैक के कारण परिवार का सहारा छिन गया है। इस घटना के बाद से पूरे बक्शीपुर में गमगीन माहौल बना हुआ है।
    user_The Update Abtak
    The Update Abtak
    Court reporter केतर, गढ़वा, झारखंड•
    18 hrs ago
  • विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सोनभद्र के दुद्धी विकास खंड के हरनाकछार गांव निवासी युवा समाजसेवी अखिलेश कुमार गुप्ता ने क्षेत्रवासियों से पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए अधिक से अधिक पौधारोपण करने की अपील की। उन्होंने जोर देकर कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है। अखिलेश गुप्ता ने बताया कि तेजी से बढ़ते प्रदूषण, वनों की कटाई और बदलते जलवायु चक्र के कारण प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है। इस स्थिति में वृक्षारोपण ही एकमात्र ऐसा माध्यम है जो पर्यावरण को सुरक्षित रखने के साथ-साथ मानव जीवन को भी स्वस्थ और समृद्ध बना सकता है। उन्होंने पेड़ों के महत्व को समझाते हुए कहा कि वे हमें शुद्ध वायु प्रदान करते हैं, वातावरण को ठंडा रखते हैं और प्रदूषण कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अतिरिक्त, वृक्ष भूजल स्तर को बनाए रखने, वर्षा को संतुलित करने और मिट्टी के कटाव को रोकने में भी सहायक होते हैं। पेड़-पौधे अनेक जीव-जंतुओं और पक्षियों के लिए प्राकृतिक आवास भी उपलब्ध कराते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वर्तमान पीढ़ी पर्यावरण के प्रति जागरूक नहीं हुई, तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर प्राकृतिक संकटों का सामना करना पड़ेगा। इसलिए, उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति से आग्रह किया कि वे अपने जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ या किसी भी विशेष अवसर पर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसकी उचित देखभाल भी करें। अखिलेश गुप्ता ने विशेष रूप से युवाओं और विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण अभियान से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि छोटे-छोटे प्रयास मिलकर ही बड़े बदलाव का आधार बनते हैं, और 'आज लगाया गया पौधा, कल की सुरक्षा की गारंटी' है।
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    विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सोनभद्र के दुद्धी विकास खंड के हरनाकछार गांव निवासी युवा समाजसेवी अखिलेश कुमार गुप्ता ने क्षेत्रवासियों से पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए अधिक से अधिक पौधारोपण करने की अपील की। उन्होंने जोर देकर कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है।

अखिलेश गुप्ता ने बताया कि तेजी से बढ़ते प्रदूषण, वनों की कटाई और बदलते जलवायु चक्र के कारण प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है। इस स्थिति में वृक्षारोपण ही एकमात्र ऐसा माध्यम है जो पर्यावरण को सुरक्षित रखने के साथ-साथ मानव जीवन को भी स्वस्थ और समृद्ध बना सकता है। उन्होंने पेड़ों के महत्व को समझाते हुए कहा कि वे हमें शुद्ध वायु प्रदान करते हैं, वातावरण को ठंडा रखते हैं और प्रदूषण कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अतिरिक्त, वृक्ष भूजल स्तर को बनाए रखने, वर्षा को संतुलित करने और मिट्टी के कटाव को रोकने में भी सहायक होते हैं। पेड़-पौधे अनेक जीव-जंतुओं और पक्षियों के लिए प्राकृतिक आवास भी उपलब्ध कराते हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वर्तमान पीढ़ी पर्यावरण के प्रति जागरूक नहीं हुई, तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर प्राकृतिक संकटों का सामना करना पड़ेगा। इसलिए, उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति से आग्रह किया कि वे अपने जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ या किसी भी विशेष अवसर पर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसकी उचित देखभाल भी करें। अखिलेश गुप्ता ने विशेष रूप से युवाओं और विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण अभियान से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि छोटे-छोटे प्रयास मिलकर ही बड़े बदलाव का आधार बनते हैं, और 'आज लगाया गया पौधा, कल की सुरक्षा की गारंटी' है।
    user_Jitendr Prshad
    Jitendr Prshad
    Court reporter दुद्धी, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
  • सोनभद्र पुलिस ने विंढमगंज थाना क्षेत्र के जोरूखाड़ गाँव में हुए हत्याकांड का खुलासा महज 8 घंटे के भीतर कर दिया है। यह मामला रजनीकांत गोंड की हत्या से जुड़ा था, जिसके पीछे प्रेम-प्रसंग के शक को मुख्य कारण बताया गया है। पुलिस ने इस मामले में आरोपी दिनेश को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद, हत्या में इस्तेमाल किया गया चापड़, आरोपी का मोबाइल फोन और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य भी बरामद किए गए हैं। सोनभद्र पुलिस की इस त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की क्षेत्र में व्यापक सराहना हो रही है।
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    सोनभद्र पुलिस ने विंढमगंज थाना क्षेत्र के जोरूखाड़ गाँव में हुए हत्याकांड का खुलासा महज 8 घंटे के भीतर कर दिया है। यह मामला रजनीकांत गोंड की हत्या से जुड़ा था, जिसके पीछे प्रेम-प्रसंग के शक को मुख्य कारण बताया गया है।

पुलिस ने इस मामले में आरोपी दिनेश को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद, हत्या में इस्तेमाल किया गया चापड़, आरोपी का मोबाइल फोन और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य भी बरामद किए गए हैं। सोनभद्र पुलिस की इस त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की क्षेत्र में व्यापक सराहना हो रही है।
    user_Buro chief Sonbhadra Kameshwar Buro Chief
    Buro chief Sonbhadra Kameshwar Buro Chief
    आवाज न्यूज़ 24X7 ब्यूरो चीफ ओबरा, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • सोनभद्र के चोपन थाना क्षेत्र के रजधन गांव में गुरुवार रात एक 30 वर्षीय विवाहिता रानी, पत्नी श्यामसुंदर वर्मा, ने संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। परिजनों ने बताया कि रानी काफी देर तक कमरे से बाहर नहीं निकली, जिसके बाद संदेह होने पर उन्होंने दरवाजा तोड़कर देखा। उन्हें रानी कच्चे घर के बड़ेर से दुपट्टे के सहारे फंदे पर लटकी मिली। इस घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। पीआरबी 112 और चोपन थाना प्रभारी निरीक्षक पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुँचे, निरीक्षण किया और आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। मृतका अपने पीछे दो पुत्र छोड़ गई है, और उनके पति श्यामसुंदर वर्मा रोजी-रोटी के लिए पुणे में मजदूरी करते हैं। फिलहाल, आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चल सका है, और गाँव में घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएँ हो रही हैं। पुलिस का कहना है कि मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगा। मामले की जाँच अभी जारी है।
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    सोनभद्र के चोपन थाना क्षेत्र के रजधन गांव में गुरुवार रात एक 30 वर्षीय विवाहिता रानी, पत्नी श्यामसुंदर वर्मा, ने संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

परिजनों ने बताया कि रानी काफी देर तक कमरे से बाहर नहीं निकली, जिसके बाद संदेह होने पर उन्होंने दरवाजा तोड़कर देखा। उन्हें रानी कच्चे घर के बड़ेर से दुपट्टे के सहारे फंदे पर लटकी मिली। इस घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। पीआरबी 112 और चोपन थाना प्रभारी निरीक्षक पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुँचे, निरीक्षण किया और आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। मृतका अपने पीछे दो पुत्र छोड़ गई है, और उनके पति श्यामसुंदर वर्मा रोजी-रोटी के लिए पुणे में मजदूरी करते हैं।

फिलहाल, आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चल सका है, और गाँव में घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएँ हो रही हैं। पुलिस का कहना है कि मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगा। मामले की जाँच अभी जारी है।
    user_पत्रकार किरण गौड़ (ब्यूरो चीफ)
    पत्रकार किरण गौड़ (ब्यूरो चीफ)
    Media company ओबरा, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    13 hrs ago
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