ऊंचाहार सीएचसी में मौत का तांडव! जर्जर छत का प्लास्टर गिरने से मची चीख-पुकार, बाल-बाल बचे कर्मचारी,,,,, ऊंचाहार (रायबरेली)।स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) प्रशासन की गंभीर लापरवाही और जिम्मेदारों की लचर कार्यशैली कभी भी किसी की जान ले सकती है। हालात यह हैं कि यहां तैनात कर्मचारी मौत के साये में अपनी ड्यूटी निभाने को मजबूर हैं। ताजा मामला सीएचसी के कमरा नंबर 16 का है, जो वर्तमान में कंप्यूटर रूम के रूप में इस्तेमाल हो रहा है। मंगलवार को इसी जर्जर कमरे की छत का एक बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर नीचे आ गिरा, जिससे वहां हड़कंप मच गया। हादसे के वक्त कमरे में कंप्यूटर ऑपरेटर और बाबू शकील अहमद बैठकर सरकारी कामकाज निपटा रहे थे। गनीमत यह रही कि प्लास्टर गिरने की आहट मिलते ही दोनों कर्मचारियों ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई। यदि जरा सी भी देर होती, तो बड़ा हादसा टल नहीं सकता था। कागजी लीपापोती और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा अस्पताल करीब 40 साल पहले बने इस सीएचसी के ज्यादातर कमरे और आवासीय परिसर पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है। आलम यह है कि जानलेवा हो चुके इन जर्जर आवासों में कर्मचारी मजबूरन अपने परिवारों के साथ रहने को विवश हैं। अस्पताल के नाम पर केवल ऊपरी तौर पर रंगाई-पुताई और खानापूर्ति की जा रही है, जबकि अंदर से इमारतें खोखली हो चुकी हैं। कभी भी घट सकती है बड़ी अनहोनी स्थानीय लोगों और कर्मचारियों का कहना है कि विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है। जब तक कोई जनहानि नहीं हो जाती, तब तक शायद सुस्त पड़े जिम्मेदार जागेंगे नहीं। जर्जर भवनों की समय पर मरम्मत न होना प्रशासनिक तंत्र की संवेदनहीनता को साफ उजागर करता है। सवाल यह उठता है कि क्या स्वास्थ्य विभाग किसी की अर्थी उठने के बाद ही जागेगा? समय रहते यदि इस जर्जर भवन की सुधि नहीं ली गई, तो ऊंचाहार सीएचसी कभी भी बड़े हादसे का गवाह बन सकता है।
ऊंचाहार सीएचसी में मौत का तांडव! जर्जर छत का प्लास्टर गिरने से मची चीख-पुकार, बाल-बाल बचे कर्मचारी,,,,, ऊंचाहार (रायबरेली)।स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) प्रशासन की गंभीर लापरवाही और जिम्मेदारों की लचर कार्यशैली कभी भी किसी की जान ले सकती है। हालात यह हैं कि यहां तैनात कर्मचारी मौत के साये में अपनी ड्यूटी निभाने को मजबूर हैं। ताजा मामला सीएचसी के कमरा नंबर 16 का है, जो वर्तमान में कंप्यूटर रूम के रूप में इस्तेमाल हो रहा है। मंगलवार को इसी जर्जर कमरे की छत का एक बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर नीचे आ गिरा, जिससे वहां हड़कंप मच गया। हादसे के वक्त कमरे में कंप्यूटर ऑपरेटर और बाबू शकील अहमद बैठकर सरकारी कामकाज निपटा रहे थे। गनीमत यह रही कि प्लास्टर गिरने की आहट मिलते ही दोनों कर्मचारियों ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई। यदि जरा सी भी देर होती, तो बड़ा हादसा टल नहीं सकता था। कागजी लीपापोती और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा अस्पताल करीब 40 साल पहले बने इस सीएचसी के ज्यादातर कमरे और आवासीय परिसर पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है। आलम यह है कि जानलेवा हो चुके इन जर्जर आवासों में कर्मचारी मजबूरन अपने परिवारों के साथ रहने को विवश हैं। अस्पताल के नाम पर केवल ऊपरी तौर पर रंगाई-पुताई और खानापूर्ति की जा रही है, जबकि अंदर से इमारतें खोखली हो चुकी हैं। कभी भी घट सकती है बड़ी अनहोनी स्थानीय लोगों और कर्मचारियों का कहना है कि विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है। जब तक कोई जनहानि नहीं हो जाती, तब तक शायद सुस्त पड़े जिम्मेदार जागेंगे नहीं। जर्जर भवनों की समय पर मरम्मत न होना प्रशासनिक तंत्र की संवेदनहीनता को साफ उजागर करता है। सवाल यह उठता है कि क्या स्वास्थ्य विभाग किसी की अर्थी उठने के बाद ही जागेगा? समय रहते यदि इस जर्जर भवन की सुधि नहीं ली गई, तो ऊंचाहार सीएचसी कभी भी बड़े हादसे का गवाह बन सकता है।
- रायबरेली यातायात पुलिस को मिली हाईटेक इंटरसेप्टर गाड़ी, नियम तोड़ने वालों पर रहेगी पैनी नजर रायबरेली। जिले की यातायात व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से रायबरेली यातायात पुलिस को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस हाईटेक इंटरसेप्टर गाड़ी मिली है। पुलिस अधीक्षक रवि कुमार ने सोमवार को पुलिस लाइन परिसर में वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि नई तकनीक से सुसज्जित यह इंटरसेप्टर गाड़ी सड़क सुरक्षा को मजबूत करने और यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराने में अहम भूमिका निभाएगी। यह हाईटेक वाहन ड्रिंक एंड ड्राइव, ओवरस्पीड, लापरवाही से वाहन चलाने, सड़क हादसों की निगरानी तथा अन्य यातायात नियमों के उल्लंघन पर तत्काल कार्रवाई करने में सक्षम है। गाड़ी में आधुनिक उपकरण लगाए गए हैं, जिनकी मदद से नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों की पहचान कर उनके विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जा सकेगी। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और लोगों में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए यह वाहन काफी उपयोगी साबित होगा। इसके संचालन से जिले में यातायात व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित होगी और सड़क पर चलने वाले लोगों की सुरक्षा भी पहले की तुलना में और मजबूत होगी। यातायात पुलिस ने वाहन चालकों से नियमों का पालन करने और सुरक्षित यात्रा करने की अपील की है।1
- जनपद रायबरेली में डीएम सरनीत कौर व एसपी रवि कुमार ने सावन मास की तैयारियों का किया स्थलीय निरीक्षण रायबरेली : आगामी सावन मास, कांवड़ यात्रा, घाटों पर स्नान एवं शिव मंदिरों में जलाभिषेक के दृष्टिगत जिलाधिकारी सरनीत कौर ब्रोका एवं पुलिस अधीक्षक रवि कुमार ने जनपद के प्रमुख धार्मिक स्थलों का संयुक्त निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान अधिकारियों ने आस्तीक मंदिर एवं भरवेश्वर मंदिर का निरीक्षण कर श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा से संबंधित व्यवस्थाओं का गहन परीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि सावन मास में बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने मंदिर परिसरों एवं आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था, पर्याप्त पेयजल, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था, बैरिकेडिंग, पार्किंग, यातायात प्रबंधन तथा स्वास्थ्य सेवाओं की समुचित व्यवस्था समय से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें तथा प्रत्येक व्यवस्था का पूर्व परीक्षण कर लें, ताकि किसी प्रकार की कमी न रहे। पुलिस अधीक्षक रवि कुमार ने सुरक्षा व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते हुए संबंधित पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि मंदिरों एवं प्रमुख मार्गों पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की जाए। भीड़ नियंत्रण, यातायात संचालन, संवेदनशील स्थलों पर विशेष निगरानी, सीसीटीवी एवं सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखा जाए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मंदिर परिसर, प्रवेश एवं निकास मार्ग, बैरिकेडिंग, प्रकाश व्यवस्था तथा यातायात व्यवस्था का जायजा लेते हुए आवश्यक सुधारात्मक निर्देश भी दिए। साथ ही संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया कि सावन मास के दौरान सभी व्यवस्थाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जाए तथा किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक संसाधन एवं टीमों को सतर्क रखा जाए। निरीक्षण के अवसर पर अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) सिद्धार्थ, उप जिलाधिकारी सदर गौतम सिंह, उप जिलाधिकारी महराजगंज चन्द्र प्रकाश, क्षेत्राधिकारी महराजगंज प्रदीप कुमार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।1
- ऊंचाहार सीएचसी में मौत का तांडव! जर्जर छत का प्लास्टर गिरने से मची चीख-पुकार, बाल-बाल बचे कर्मचारी,,,,, ऊंचाहार (रायबरेली)।स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) प्रशासन की गंभीर लापरवाही और जिम्मेदारों की लचर कार्यशैली कभी भी किसी की जान ले सकती है। हालात यह हैं कि यहां तैनात कर्मचारी मौत के साये में अपनी ड्यूटी निभाने को मजबूर हैं। ताजा मामला सीएचसी के कमरा नंबर 16 का है, जो वर्तमान में कंप्यूटर रूम के रूप में इस्तेमाल हो रहा है। मंगलवार को इसी जर्जर कमरे की छत का एक बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर नीचे आ गिरा, जिससे वहां हड़कंप मच गया। हादसे के वक्त कमरे में कंप्यूटर ऑपरेटर और बाबू शकील अहमद बैठकर सरकारी कामकाज निपटा रहे थे। गनीमत यह रही कि प्लास्टर गिरने की आहट मिलते ही दोनों कर्मचारियों ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई। यदि जरा सी भी देर होती, तो बड़ा हादसा टल नहीं सकता था। कागजी लीपापोती और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा अस्पताल करीब 40 साल पहले बने इस सीएचसी के ज्यादातर कमरे और आवासीय परिसर पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है। आलम यह है कि जानलेवा हो चुके इन जर्जर आवासों में कर्मचारी मजबूरन अपने परिवारों के साथ रहने को विवश हैं। अस्पताल के नाम पर केवल ऊपरी तौर पर रंगाई-पुताई और खानापूर्ति की जा रही है, जबकि अंदर से इमारतें खोखली हो चुकी हैं। कभी भी घट सकती है बड़ी अनहोनी स्थानीय लोगों और कर्मचारियों का कहना है कि विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है। जब तक कोई जनहानि नहीं हो जाती, तब तक शायद सुस्त पड़े जिम्मेदार जागेंगे नहीं। जर्जर भवनों की समय पर मरम्मत न होना प्रशासनिक तंत्र की संवेदनहीनता को साफ उजागर करता है। सवाल यह उठता है कि क्या स्वास्थ्य विभाग किसी की अर्थी उठने के बाद ही जागेगा? समय रहते यदि इस जर्जर भवन की सुधि नहीं ली गई, तो ऊंचाहार सीएचसी कभी भी बड़े हादसे का गवाह बन सकता है।1
- मवेशी चरा रहे बुजुर्ग की नाला में डूबने से हुई मौत - पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा ऊंचाहार , रायबरेली । गंगा के कटरी क्षेत्र में मवेशी चराने गए वृद्ध की तेज बहाव वाले गहरे नाला में गिरने से मौत हो गई । पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्ट मार्टम के लिए भेजा है । उधर इस घटना से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। कोतवाली क्षेत्र के चंदेलहाई मजरे शहजादपुर निवासी राम लखन सिंह ( 65वर्ष) मंगलवार को गांव के पास गंगा कटरी में मवेशी चराने गए थे । जहां गंगा नदी को जाने वाला एक गहरा नाला है । जिसमें इस समय तेज बहाव है । नाले में अचानक उनका संतुलन बिगड़ गया और वह गिर गए। जब तक अन्य चरवाह कुछ समझ पाते ,तब तक बुजुर्ग की पानी में डूबने से मौत हो गई। लोगों के शोर गुल पर आसपास काफी भीड़ जमा हो गई और ग्रामीणों की मदद से उन्हें नाला से बाहर निकाला गया । उसके बाद परिजनों ने इलाज के लिए सीएचसी में भर्ती कराया है। जहां पर चिकित्सकों ने उसे मृत्यु घोषित कर दिया। जिसके बाद अस्पताल के मेमो द्वारा पुलिस को सूचना दी गई है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया है। सीएचसी अधीक्षक डॉ मनोज शुक्ला ने बताया कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही बुजुर्ग युवक की मौत हो चुकी थी।1