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उत्तर प्रदेश में बिजली की गंभीर समस्या को उजागर करते हुए, बलिया के एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीज़ों का इलाज टॉर्च की रोशनी में किया जा रहा है। यह घटना दर्शाती है कि राज्य में बिजली की कितनी भीषण किल्लत है, जिससे स्वास्थ्य विभाग को भी मरीज़ों का इलाज करते समय भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
आदर्श भारत TV
उत्तर प्रदेश में बिजली की गंभीर समस्या को उजागर करते हुए, बलिया के एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीज़ों का इलाज टॉर्च की रोशनी में किया जा रहा है। यह घटना दर्शाती है कि राज्य में बिजली की कितनी भीषण किल्लत है, जिससे स्वास्थ्य विभाग को भी मरीज़ों का इलाज करते समय भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
More news from Uttar Pradesh and nearby areas
- Post by रामअवतार कश्यप गाजियाबाद1
- ट्रेन में सफर के दौरान समोसे खाने वाले यात्रियों को सावधान रहने की सलाह दी जा रही है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक ट्रेन वेंडर समोसों से भरी टोकरी के ऊपर ही आराम से पैर रखकर बैठा हुआ दिखाई दे रहा है। यह वीडियो ट्रेन के अंदर से वायरल हुआ है, जो उन यात्रियों के लिए एक चेतावनी है जो ट्रेन में खाना खाते हैं, विशेषकर समोसे का सेवन करते हैं।1
- गाजियाबाद के राकेश मार्ग स्थित गुलमोहर एन्क्लेव सोसाइटी में खराब लिफ्टों ने निवासियों के लिए भीषण गर्मी में गंभीर परेशानियां खड़ी कर दी हैं। बुधवार को भी एसपी 2 टावर में लगी लिफ्ट नंबर 3 का बोल्ट अचानक निकल गया, जिससे उसका गेट उल्टा खुल गया, जो एक संभावित बड़े हादसे का संकेत था। इस घटना के बाद आरडब्ल्यूए द्वारा नियुक्त लिफ्ट ठीक करने वाले कर्मचारी पिंटू को सूचना दी गई, जिसके बाद लिफ्ट को सही किया जा सका। लिफ्ट खराब होने के कारण आरडब्ल्यूए की कार्यकारिणी सदस्य रश्मि चौधरी को भी छठी मंजिल पर अपने घर पहुंचने के लिए सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ा। वहीं, स्थानीय निवासी गौरव बंसल ने दोपहर करीब 4 बजे अपने घर से निकलकर जब लिफ्ट का दरवाजा खोला, तो वह टूटा हुआ था; उनका कहना है कि यदि वे उसमें बैठ जाते तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था। गौरव बंसल ने तत्काल आरडब्ल्यूए कार्यालय में इसकी सूचना दी, जहाँ सचिव ए के दोहरे मौजूद थे। बंसल के अनुसार, सचिव ने इस बात पर कोई गौर नहीं किया और कार्यालय से चले गए। लिफ्ट का काम देखने वाले पिंटू ने भी बताया कि पांचवीं मंजिल से भी लिफ्ट खराब होने की शिकायत मिली है। निवासियों ने आरडब्ल्यूए पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि भारी भरकम मेंटिनेंस चार्ज लेने के बावजूद लिफ्टों को जानबूझकर सही नहीं कराया जा रहा है। उनका कहना है कि लिफ्टों में न तो एआरडी सिस्टम लगवाया जा रहा है और न ही उनका लिफ्ट्स एक्ट में रजिस्ट्रेशन किया गया है, जिसका उद्देश्य निवासियों को नई लिफ्ट लगवाने के लिए बाध्य करना है। निवासियों का आरोप है कि आरडब्ल्यूए के पदाधिकारी मनमानी कर रहे हैं और ओटिस कंपनी को भारी भरकम एएमसी देने के बाद भी लिफ्टों की व्यवस्थाएँ बदहाल हैं, जिसका खामियाजा स्थानीय निवासियों को भुगतना पड़ रहा है।2
- गाजियाबाद के राकेश मार्ग स्थित गुलमोहर एन्क्लेव सोसाइटी में खराब लिफ्टें निवासियों के लिए गंभीर परेशानी का सबब बन गई हैं। बुधवार को भी एसपी 2 टावर की लिफ्ट नंबर 3 का बोल्ट अचानक टूट गया, जिससे लिफ्ट का गेट उल्टा खुल गया। RWA द्वारा नियुक्त लिफ्ट कर्मचारी पिंटू को सूचना मिलने के बाद इसे ठीक किया जा सका। इस भीषण गर्मी में खराब लिफ्टों के कारण निवासियों को खासी दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं। RWA की कार्यकारिणी सदस्य रश्मि चौधरी को भी छठी मंजिल पर अपने घर जाने के लिए सीढ़ियों का इस्तेमाल करना पड़ा। एक अन्य निवासी गौरव बंसल ने दोपहर करीब 4 बजे लिफ्ट का दरवाजा खोला तो वह टूटा हुआ पाया, जिससे उन्हें हादसे की आशंका हुई। गौरव बंसल ने तुरंत RWA ऑफिस में सचिव ए. के. दोहरे को इसकी सूचना दी, लेकिन आरोप है कि सचिव ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया और ऑफिस से चले गए। लिफ्ट का काम देखने वाले पिंटू ने भी बताया कि पांचवीं मंजिल से भी लिफ्ट खराब होने की शिकायत मिली है। गौरव बंसल का आरोप है कि भारी भरकम मेंटिनेंस चार्ज लेने के बावजूद RWA जानबूझकर लिफ्टों को सही नहीं करा रहा है। साथ ही, लिफ्टों में न तो एआरडी सिस्टम लगवाया जा रहा है और न ही उनका लिफ्ट्स एक्ट में रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है। उनका कहना है कि यह सब इसलिए किया जा रहा है ताकि निवासियों को नई लिफ्ट लगवाने के लिए मजबूर किया जा सके। गौरव ने RWA पदाधिकारियों पर मनमानी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि ओटिस कंपनी को भारी भरकम एएमसी (एनुअल मेंटिनेंस कॉन्ट्रैक्ट) देने के बाद भी लिफ्टों की व्यवस्थाएं चरमराई हुई हैं, जिसका खामियाजा स्थानीय निवासी भुगत रहे हैं।2
- उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में बुधवार सुबह से ही पत्रकार ललित चौधरी और अपूर्वा चौधरी को उनके ही घरों में नज़रबंद कर दिया गया है। पुलिस ने यह कदम पत्रकारों द्वारा बुलाए गए एक विशाल विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए उठाया है, जिसे पुलिस उत्पीड़न के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए निर्धारित किया गया था। इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए, अपूर्वा चौधरी ने पुलिस प्रशासन की तानाशाही पर सवाल उठाते हुए चुनौती दी है कि "आप मुझे कब तक रोकेंगे?" यह पूरा मामला सिद्धार्थ विहार जल निगम पुलिस थाने से शुरू हुआ था, जहाँ संपादक ललित चौधरी और पत्रकार अपूर्वा चौधरी, साथी पत्रकार सुमन मिश्रा के साथ हुए दुर्व्यवहार की शिकायत दर्ज कराने गए थे। आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी में ही विरोधी पक्ष ने उनके साथ गाली-गलौज की। इसके बजाय कार्रवाई करने के, मौके पर तैनात उप-निरीक्षक आयुष कुमार और अन्य पुलिस अधिकारियों ने ललित चौधरी के साथ बेरहमी से मारपीट की, उन्हें घसीटा और अपशब्दों का इस्तेमाल किया। पीड़ितों का यह भी आरोप है कि जब उन्होंने विजयनगर पुलिस थाने के प्रभारी धर्मपाल से शिकायत की, तो उन्होंने सुनने के बजाय उन्हें धमकाकर थाने से बाहर निकाल दिया। इस घटना के बाद, एसीपी उपासना पांडे, डीसीपी सिटी और पुलिस कमिश्नर को फोन पर सूचित किया गया और अगले दिन एक लिखित शिकायत व ज्ञापन भी सौंपा गया। हालांकि, न्याय दिलाने के बजाय, मामले को 'ठंडे बस्ते में' डाल दिया गया और इसमें देरी की कोशिशें की गईं, जिससे दोषियों को लगातार बचाया जा रहा है और जाँच की दिशा में कोई जानकारी नहीं दी जा रही है। पुलिस की क्रूरता और न्याय न मिलने से हताश, पत्रकार अपूर्वा चौधरी पिछले कई दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर चेतावनी भी दी थी कि यदि दोषी सब-इंस्पेक्टर आयुष कुमार, स्टेशन इंचार्ज धर्मपाल और अन्य लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्हें आत्महत्या करने पर मजबूर होना पड़ेगा, जिसके लिए गाजियाबाद पुलिस पूरी तरह से जिम्मेदार होगी। पत्रकारों का कहना है कि यह सब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की "ज़ीरो टॉलरेंस" नीति की अवहेलना है, और गाजियाबाद पुलिस पर उत्पीड़न, मारपीट और तानाशाही के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। पुलिस प्रशासन के संवेदनहीन और तानाशाही रवैये के खिलाफ गाजियाबाद के पत्रकारों में भारी गुस्सा है। उन्होंने आज (बुधवार, 27 मई, 2026) जिला पुलिस आयुक्त के कार्यालय पर एक विशाल और अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन की घोषणा की थी। इसे दबाने के लिए, दर्जनों पुलिसकर्मियों ने ललित चौधरी और अपूर्वा चौधरी के पूरे सोसाइटी को एक छावनी में बदल दिया और उन्हें सुबह से ही नज़रबंद कर दिया। अब पत्रकारों को नज़रबंद किए जाने के बाद, गाजियाबाद के पत्रकार समुदाय में और भी अधिक रोष है। एकजुट पत्रकारों ने साफ तौर पर कहा है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हो रहे इस अत्याचार को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और पुलिस चाहे जो भी हथकंडा अपना ले, न्याय की यह लड़ाई रुकेगी नहीं।1
- बेंगलुरु के शाहिद नगर में एक नदी या नाले में भारी मात्रा में कचरा जमा हो गया है, जिसे साफ करने के लिए कोई भी तैयार नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकायत करने के बावजूद, कल बकरीद होने के कारण कोई भी उनका फोन उठाने को राजी नहीं है। हालाँकि एक नाली से जुड़े फोन कॉल पर कार्रवाई की गई और कचरा हटा दिया गया, लेकिन इस नाले का कचरा या जिसे 'नाला का घोड़ा' कहा गया है, पूरी तरह से जमा हो गया है और उसे हटाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है।3
- डोरस्टेप एयरकॉन गाज़ियाबाद द्वारा एसी की शिफ्टिंग और इंस्टॉलेशन की सेवाएँ उचित मूल्य पर प्रदान की जा रही हैं। ये सेवाएँ 90 दिनों की गारंटी के साथ उपलब्ध हैं। कंपनी खुद को कूलिंग विशेषज्ञ बताती है। सेवाओं के लिए 9211059296 पर संपर्क किया जा सकता है।1
- उत्तर प्रदेश में बिजली की गंभीर समस्या को उजागर करते हुए, बलिया के एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीज़ों का इलाज टॉर्च की रोशनी में किया जा रहा है। यह घटना दर्शाती है कि राज्य में बिजली की कितनी भीषण किल्लत है, जिससे स्वास्थ्य विभाग को भी मरीज़ों का इलाज करते समय भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।1