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बिहार के प्रसिद्ध ककोलत जलप्रपात (जिसे 'बिहार का कश्मीर' भी कहते हैं) के लिए नए नियम लागू हो गए हैं। पर्यटक को वहां जाने से पहले इन नियमों को जानना ज़रूरी है। अन्यथा उन्हें बिना घूमे ही वापस लौटना पड़ सकता है।
Kanhai chaudhary
बिहार के प्रसिद्ध ककोलत जलप्रपात (जिसे 'बिहार का कश्मीर' भी कहते हैं) के लिए नए नियम लागू हो गए हैं। पर्यटक को वहां जाने से पहले इन नियमों को जानना ज़रूरी है। अन्यथा उन्हें बिना घूमे ही वापस लौटना पड़ सकता है।
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- बिहार के प्रसिद्ध ककोलत जलप्रपात (जिसे 'बिहार का कश्मीर' भी कहते हैं) के लिए नए नियम लागू हो गए हैं। पर्यटक को वहां जाने से पहले इन नियमों को जानना ज़रूरी है। अन्यथा उन्हें बिना घूमे ही वापस लौटना पड़ सकता है।1
- हिसुआ नगर परिषद की आम बैठक में मुख्य पार्षद और पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। मुख्य पार्षद की कथित मनमानी से नाराज उपमुख्य पार्षद समेत सभी वार्ड पार्षदों ने विधायक के सामने बैठक का बहिष्कार कर दिया। इसके चलते बैठक बिना किसी निर्णय के समाप्त हो गई, जिससे स्थानीय विकास कार्यों पर असर पड़ने की आशंका है।3
- नवादा के प्रसिद्ध ककोलत जलप्रपात पर सैलानियों के लिए प्रवेश शुल्क में बढ़ोतरी की गई है। इस फैसले से स्थानीय पर्यटन और आसपास के लोगों की आजीविका पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।1
- UGC बिल पर बिहार की वारसलीगंज विधायिका अनिता मेहता ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बिल के प्रावधानों और शिक्षा क्षेत्र पर इसके संभावित प्रभावों पर चिंता जताई।1
- नवादा जिले के ढोंढा गाँव में ग्रामीण भीषण पानी की किल्लत से परेशान हैं। स्थानीय मुखिया, सरपंच या वार्ड सदस्य भी इस गंभीर समस्या का समाधान करने में असमर्थ दिख रहे हैं।1
- नवादा जिले के गोबिंदपुर प्रखंड में पर्यटकों के लिए प्रवेश शुल्क बढ़ा दिया गया है। इस कारण स्थानीय होटल संचालक चिंतित हैं, उनका कहना है कि इससे उनके कारोबार में भारी नुकसान हो रहा है।1
- नवादा के हिसुआ में शुक्रवार शाम तेज़ हवाओं और हल्की बारिश के साथ छोटे-छोटे ओले गिरे। इस दौरान एक घर का छप्पर उड़ गया और घर में पानी भर गया। हालांकि, इस बेमौसम बारिश से लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है।2
- गोविंदपुर प्रखंड के मध्य विद्यालय मोहगांई में बाल सांसद और मीना मंच का चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ मतदान में भाग लिया, जिसमें अंशु कुमारी बाल प्रधानमंत्री चुनी गईं। इस पहल से बच्चों में नेतृत्व क्षमता और लोकतांत्रिक मूल्यों की समझ विकसित होगी।1