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अलवर में शाम 7.45 बजे ब्लैक आऊट मॉक ड्रिल, नागरिक सुरक्षा के मद्देनजर तैयारियां

2 hrs ago
user_सुनील कान्त गोल्डी
सुनील कान्त गोल्डी
रिपोर्टर किशनगढ़ बास, अलवर, राजस्थान•
2 hrs ago

अलवर में शाम 7.45 बजे ब्लैक आऊट मॉक ड्रिल, नागरिक सुरक्षा के मद्देनजर तैयारियां

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  • अलवर में शाम 7.45 बजे ब्लैक आऊट मॉक ड्रिल, नागरिक सुरक्षा के मद्देनजर तैयारियां
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    अलवर में शाम 7.45 बजे ब्लैक आऊट मॉक ड्रिल, नागरिक सुरक्षा के मद्देनजर तैयारियां
    user_सुनील कान्त गोल्डी
    सुनील कान्त गोल्डी
    रिपोर्टर किशनगढ़ बास, अलवर, राजस्थान•
    2 hrs ago
  • Post by संवाददाता दैनिक कंचन केसरी
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    Post by संवाददाता दैनिक कंचन केसरी
    user_संवाददाता दैनिक कंचन केसरी
    संवाददाता दैनिक कंचन केसरी
    पत्रकार खैरथल, अलवर, राजस्थान•
    22 hrs ago
  • Post by पत्रकार
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    Post by पत्रकार
    user_पत्रकार
    पत्रकार
    मंडावर, अलवर, राजस्थान•
    21 hrs ago
  • को समाज की महिलाओ के द्वारा प्रात: 8.00 बजे गाव के चारो और कलश यात्रा शोभा यात्रा का व रात्रि 9.00 से विशाल सत्मग का आयोजन होगा माथ ही दिनाक 22 अप्रेल 2026 को प्रात: 8.00 बजे महान सन्त बाबा गरीब नाथ व उनके शिष्य प्रेम नाथ जी महाराज की मूर्ति स्थापना के पस्ताछ भण्डारे वितरण का कार्यक्रम रखा गया
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    को समाज की महिलाओ के द्वारा प्रात: 8.00 बजे गाव के चारो और कलश यात्रा शोभा यात्रा का व रात्रि 9.00 से विशाल सत्मग का आयोजन होगा माथ ही दिनाक 22 अप्रेल 2026 को प्रात: 8.00 बजे महान सन्त बाबा गरीब नाथ व उनके शिष्य प्रेम नाथ जी महाराज की मूर्ति स्थापना के पस्ताछ भण्डारे वितरण का कार्यक्रम रखा गया
    user_R Balvinder Singh
    R Balvinder Singh
    Court reporter रामगढ़, अलवर, राजस्थान•
    6 hrs ago
  • उत्तर पुस्तिका भी जमा कर दे, तब भी उसे 2 अंक दिए जाते हैं। मॉस्को विश्वविद्यालय में जब मुझे यह बात पहले दिन पता चली, तो मैं सचमुच हैरान रह गया। मुझे यह बिल्कुल तर्कसंगत नहीं लगा। मेरे मन में सवाल उठा — अगर किसी ने कुछ भी नहीं लिखा, तो उसे शून्य अंक क्यों नहीं मिलते? जिज्ञासा के कारण मैंने डॉ. थियोडोर मेद्रायेव से पूछा, “सर, यह कैसे सही है कि जिसने कुछ भी नहीं लिखा, उसे भी 2 अंक दिए जाएँ?” डॉ. मेद्रायेव मुस्कराए। फिर शांत और विचारशील स्वर में बोले : “शून्य का अर्थ है—अस्तित्वहीन। जब तक कोई व्यक्ति प्रयास कर रहा है, वह शून्य कैसे हो सकता है ? ज़रा सोचिए—कक्षा तक पहुँचने के लिए एक छात्र कितना प्रयास करता है। हो सकता है वह ठिठुरती ठंड में सुबह-सुबह उठा हो, दूर से बस, ट्राम या ट्रेन में खड़े-खड़े आया हो। भले ही उसने खाली काग़ज़ जमा किया हो, लेकिन उसका आना ही यह बताता है कि उसने कोशिश की। फिर मैं उसे शून्य कैसे दे सकता हूँ ?” उन्होंने आगे कहा : “हो सकता है छात्र उत्तर न लिख पाया हो। लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि उसका पूरा प्रयास मिटा दिया जाए ? जिन रातों में वह जागा, जिन कॉपियों को उसने खरीदा, जिन किताबों को खोला, जिन संघर्षों से वह गुज़रा—क्या हम सब कुछ नज़रअंदाज़ कर दें ? नहीं, मेरे प्रिय ! *इंसान कभी शून्य नहीं होता। जब हम शून्य देते हैं, तो हम उसका आत्मविश्वास छीन लेते हैं, उसके भीतर की आग बुझा देते हैं।* एक शिक्षक के रूप में हमारा उद्देश्य छात्रों को बार-बार खड़ा होने में मदद करना है—उन्हें हार मानने पर मजबूर करना नहीं।” मैं चुपचाप सुनता रहा। उस क्षण मेरे भीतर कुछ हिल गया। तब मुझे समझ आया— *शिक्षा केवल अंकों या लिखे गए उत्तरों का नाम नहीं है। शिक्षा लोगों को जीवित रखने की प्रक्रिया है, प्रयास को पहचानने की कला है, आशा की रक्षा करने का माध्यम है।* उस दिन डॉ. मेद्रायेव ने मुझे एक गहरी सच्चाई सिखाई : *शिक्षा केवल ज्ञान का वितरण नहीं है, बल्कि मानवता का अभ्यास है।* काग़ज़ पर लगा शून्य अक्सर छात्रों के लिए मृत्यु-घंटी बन जाता है। वह शून्य उन्हें भय से भर देता है, रुचि छीन लेता है और धीरे-धीरे सीखने से घृणा पैदा कर देता है। लेकिन एक शिक्षक का दायित्व है प्रोत्साहित करना, आश्वस्त करना और कहना— _*“तुम कर सकते हो। फिर से कोशिश करो।”*_ जब हम खाली उत्तर पुस्तिका पर भी न्यूनतम अंक देते हैं, तो हम वास्तव में यह कहते हैं— “तुम शून्य नहीं हो। तुम अब भी महत्वपूर्ण हो। तुम सक्षम हो। तुम असफल नहीं हुए—बस इस बार सफल नहीं हो पाए। फिर से प्रयास करो।” यही सच्ची शिक्षा है। एक छात्र का भविष्य शिक्षक के हाथों में आकार लेता है। अगर शिक्षक थोड़ा और मानवीय बन जाएँ, अगर वे अंकों से परे प्रयास को देखना सीख लें, तो कितने ही हतोत्साहित छात्र फिर से सपने देखने का साहस कर सकते हैं। मुझे लगता है यह कहानी केवल रूस तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसे दुनिया भर के शिक्षकों तक पहुँचना चाहिए। क्योंकि शून्य अंक कभी शिक्षा नहीं होते। शून्य अंक अक्सर किसी की यात्रा का अंत होते हैं। जब तक कोई व्यक्ति प्रयास कर रहा है, वह कम से कम आश्वासन और पहचान का अधिकारी है। — *रूस में अध्ययनरत एक अज्ञात भारतीय छात्र द्वारा लिखित*
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    उत्तर पुस्तिका भी जमा कर दे, तब भी उसे 2 अंक दिए जाते हैं।
मॉस्को विश्वविद्यालय में जब मुझे यह बात पहले दिन पता चली, तो मैं सचमुच हैरान रह गया। मुझे यह बिल्कुल तर्कसंगत नहीं लगा। मेरे मन में सवाल उठा — अगर किसी ने कुछ भी नहीं लिखा, तो उसे शून्य अंक क्यों नहीं मिलते?
जिज्ञासा के कारण मैंने डॉ. थियोडोर मेद्रायेव से पूछा, “सर, यह कैसे सही है कि जिसने कुछ भी नहीं लिखा, उसे भी 2 अंक दिए जाएँ?”
डॉ. मेद्रायेव मुस्कराए। फिर शांत और विचारशील स्वर में बोले : “शून्य का अर्थ है—अस्तित्वहीन। जब तक कोई व्यक्ति प्रयास कर रहा है, वह शून्य कैसे हो सकता है ? ज़रा सोचिए—कक्षा तक पहुँचने के लिए एक छात्र कितना प्रयास करता है। हो सकता है वह ठिठुरती ठंड में सुबह-सुबह उठा हो, दूर से बस, ट्राम या ट्रेन में खड़े-खड़े आया हो। भले ही उसने खाली काग़ज़ जमा किया हो, लेकिन उसका आना ही यह बताता है कि उसने कोशिश की। फिर मैं उसे शून्य कैसे दे सकता हूँ ?”
उन्होंने आगे कहा : “हो सकता है छात्र उत्तर न लिख पाया हो। लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि उसका पूरा प्रयास मिटा दिया जाए ? जिन रातों में वह जागा, जिन कॉपियों को उसने खरीदा, जिन किताबों को खोला, जिन संघर्षों से वह गुज़रा—क्या हम सब कुछ नज़रअंदाज़ कर दें ? नहीं, मेरे प्रिय ! *इंसान कभी शून्य नहीं होता। जब हम शून्य देते हैं, तो हम उसका आत्मविश्वास छीन लेते हैं, उसके भीतर की आग बुझा देते हैं।* एक शिक्षक के रूप में हमारा उद्देश्य छात्रों को बार-बार खड़ा होने में मदद करना है—उन्हें हार मानने पर मजबूर करना नहीं।”
मैं चुपचाप सुनता रहा। उस क्षण मेरे भीतर कुछ हिल गया। तब मुझे समझ आया— *शिक्षा केवल अंकों या लिखे गए उत्तरों का नाम नहीं है। शिक्षा लोगों को जीवित रखने की प्रक्रिया है, प्रयास को पहचानने की कला है, आशा की रक्षा करने का माध्यम है।*
उस दिन डॉ. मेद्रायेव ने मुझे एक गहरी सच्चाई सिखाई : *शिक्षा केवल ज्ञान का वितरण नहीं है, बल्कि मानवता का अभ्यास है।* काग़ज़ पर लगा शून्य अक्सर छात्रों के लिए मृत्यु-घंटी बन जाता है। वह शून्य उन्हें भय से भर देता है, रुचि छीन लेता है और धीरे-धीरे सीखने से घृणा पैदा कर देता है। लेकिन एक शिक्षक का दायित्व है प्रोत्साहित करना, आश्वस्त करना और कहना—
_*“तुम कर सकते हो। फिर से कोशिश करो।”*_
जब हम खाली उत्तर पुस्तिका पर भी न्यूनतम अंक देते हैं, तो हम वास्तव में यह कहते हैं—
“तुम शून्य नहीं हो। तुम अब भी महत्वपूर्ण हो। तुम सक्षम हो। तुम असफल नहीं हुए—बस इस बार सफल नहीं हो पाए। फिर से प्रयास करो।”
यही सच्ची शिक्षा है। एक छात्र का भविष्य शिक्षक के हाथों में आकार लेता है। अगर शिक्षक थोड़ा और मानवीय बन जाएँ, अगर वे अंकों से परे प्रयास को देखना सीख लें, तो कितने ही हतोत्साहित छात्र फिर से सपने देखने का साहस कर सकते हैं।
मुझे लगता है यह कहानी केवल रूस तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसे दुनिया भर के शिक्षकों तक पहुँचना चाहिए। क्योंकि शून्य अंक कभी शिक्षा नहीं होते। शून्य अंक अक्सर किसी की यात्रा का अंत होते हैं। जब तक कोई व्यक्ति प्रयास कर रहा है, वह कम से कम आश्वासन और पहचान का अधिकारी है।
— *रूस में अध्ययनरत एक अज्ञात भारतीय छात्र द्वारा लिखित*
    user_महेंद्र सिंह
    महेंद्र सिंह
    Local News Reporter अलवर, अलवर, राजस्थान•
    9 hrs ago
  • कोटपुतली-बहरोड़ जिले के नीमराना औद्योगिक क्षेत्र में सोमवार को एक बार फिर श्रमिक असंतोष खुलकर सामने आया। इंडियन और जापानी जोन की कंपनियों—हेलोज पैकेजिंग और एस्टमो—के बाहर बड़ी संख्या में मजदूर एकत्रित होकर वेतन वृद्धि की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन में सैकड़ों महिला श्रमिकों की भागीदारी भी देखने को मिली, जिससे आंदोलन ने व्यापक रूप ले लिया। इस दौरान कुछ समय के लिए सड़क जाम की स्थिति भी बन गई। मजदूरों ने नारेबाजी करते हुए कंपनी प्रबंधन के खिलाफ रोष जताया। उनका कहना है कि लंबे समय से वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि महंगाई लगातार बढ़ रही है, जिससे उनके लिए परिवार का पालन-पोषण करना मुश्किल हो गया है। श्रमिकों ने आरोप लगाया कि कई बार मांग उठाने के बावजूद प्रबंधन उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर रहा है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। नीमराना एसडीएम महेंद्र यादव और एडिशनल एसपी सुरेश खींची सहित प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और हालात पर नजर बनाए रखी। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की। गौरतलब है कि दो दिन पहले ही नीमराना की निडेक कंपनी में भी मजदूरों ने वेतन वृद्धि सहित विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया था। इसी को देखते हुए प्रशासन पहले से अलर्ट था और एस्टमो कंपनी के बाहर हुए प्रदर्शन में तुरंत कार्रवाई की गई। प्रदर्शन के दौरान कुछ श्रमिकों ने उग्र होने की कोशिश की, जिस पर पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए 6 लोगों को हिरासत में ले लिया। इसके बाद कुछ देर के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया, लेकिन प्रशासन की तत्परता से स्थिति को जल्द ही नियंत्रण में कर लिया गया। श्रमिकों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। फिलहाल क्षेत्र में स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन एहतियातन पुलिस बल तैनात है। यह घटना एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ते श्रमिक असंतोष की ओर इशारा करती है, जिस पर समय रहते समाधान निकालना बेहद जरूरी हो गया है।
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    कोटपुतली-बहरोड़ जिले के नीमराना औद्योगिक क्षेत्र में सोमवार को एक बार फिर श्रमिक असंतोष खुलकर सामने आया। इंडियन और जापानी जोन की कंपनियों—हेलोज पैकेजिंग और एस्टमो—के बाहर बड़ी संख्या में मजदूर एकत्रित होकर वेतन वृद्धि की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन में सैकड़ों महिला श्रमिकों की भागीदारी भी देखने को मिली, जिससे आंदोलन ने व्यापक रूप ले लिया। इस दौरान कुछ समय के लिए सड़क जाम की स्थिति भी बन गई।
मजदूरों ने नारेबाजी करते हुए कंपनी प्रबंधन के खिलाफ रोष जताया। उनका कहना है कि लंबे समय से वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि महंगाई लगातार बढ़ रही है, जिससे उनके लिए परिवार का पालन-पोषण करना मुश्किल हो गया है। श्रमिकों ने आरोप लगाया कि कई बार मांग उठाने के बावजूद प्रबंधन उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर रहा है।
स्थिति को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। नीमराना एसडीएम महेंद्र यादव और एडिशनल एसपी सुरेश खींची सहित प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और हालात पर नजर बनाए रखी। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की।
गौरतलब है कि दो दिन पहले ही नीमराना की निडेक कंपनी में भी मजदूरों ने वेतन वृद्धि सहित विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया था। इसी को देखते हुए प्रशासन पहले से अलर्ट था और एस्टमो कंपनी के बाहर हुए प्रदर्शन में तुरंत कार्रवाई की गई।
प्रदर्शन के दौरान कुछ श्रमिकों ने उग्र होने की कोशिश की, जिस पर पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए 6 लोगों को हिरासत में ले लिया। इसके बाद कुछ देर के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया, लेकिन प्रशासन की तत्परता से स्थिति को जल्द ही नियंत्रण में कर लिया गया।
श्रमिकों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। फिलहाल क्षेत्र में स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन एहतियातन पुलिस बल तैनात है।
यह घटना एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ते श्रमिक असंतोष की ओर इशारा करती है, जिस पर समय रहते समाधान निकालना बेहद जरूरी हो गया है।
    user_प्रेस रिपोर्टर
    प्रेस रिपोर्टर
    प्रेस रिपोर्टर Neemrana, Alwar•
    19 hrs ago
  • Post by Sachin kumar
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    Post by Sachin kumar
    user_Sachin kumar
    Sachin kumar
    Electrician रेवाड़ी, रेवाड़ी, हरियाणा•
    4 hrs ago
  • भिवाड़ी: चौपानकी औद्योगिक क्षेत्र में स्थित Balkrishna Industries Limited (BKT) में श्रमिकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल शुरू कर दी
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    भिवाड़ी: चौपानकी औद्योगिक क्षेत्र में स्थित Balkrishna Industries Limited (BKT) में श्रमिकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल शुरू कर दी
    user_सुनील कान्त गोल्डी
    सुनील कान्त गोल्डी
    रिपोर्टर किशनगढ़ बास, अलवर, राजस्थान•
    7 hrs ago
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