13 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद जैन समाज के पूज्य संत मुनि श्री सुधासागर महाराज के गुना आगमन पर शहर में अभूतपूर्व उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखा गया। उनके स्वागत के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु सड़कों पर उमड़ पड़े और लगभग 2 किलोमीटर लंबी स्वागत यात्रा करते हुए नजर आए। इस भव्य अवसर पर बैंड-बाजे, डीजे, ढोल और अखाड़ों के उस्तादों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया, वहीं लेजाम के द्वारा एक अद्भुत कला प्रस्तुति भी दी गई। पूरे गुना शहर को दुल्हन की तरह सजाया गया था और प्रमुख मार्गों से लेकर प्रवेश द्वारों तक भव्य सजावट की गई थी। मुनि श्री के आगमन पर पारंपरिक और धार्मिक आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने संतों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किया, कई स्थानों पर उनके चरण धोकर वंदन किया गया। मंगल आरती, पुष्पवर्षा और इत्र-सुगंध के साथ उनका अभिनंदन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने अपनी भक्ति और सम्मान का प्रदर्शन किया। स्वागत यात्रा में सनातन संस्कृति और परंपराओं की भी विशेष झलक दिखी, जहाँ ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों ने अपनी बैलगाड़ियों को पारंपरिक शैली में सजाकर शोभायात्रा की शोभा बढ़ाई। ग्रामीण पुरुष और महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए, जबकि बच्चों ने भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और आकर्षक झाँकियों के माध्यम से सभी का ध्यान खींचा। यात्रा के दौरान घोड़े, बैंड-बाजे और धार्मिक ध्वजों के साथ श्रद्धालु जयघोष करते हुए आगे बढ़ते रहे, जिससे पूरा वातावरण धार्मिक उल्लास और भक्ति भावना से सराबोर नजर आया। शहर के विभिन्न मार्गों पर स्वागत मंच बनाए गए थे, जहाँ संतों का अभिनंदन किया गया। भीषण गर्मी को ध्यान में रखते हुए, जैन समाज और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएँ की गईं। जगह-जगह छाया के लिए टेंट लगाए गए तथा ठंडे पानी, छाछ और लस्सी के स्टॉल लगाए गए, जिसका लाभ हजारों श्रद्धालुओं ने उठाया। स्वयंसेवक लगातार व्यवस्थाओं में जुटे रहे ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा न हो। मुनि श्री सुधासागर महाराज के आगमन को लेकर जैन समाज में लंबे समय से उत्साह था, और 13 वर्षों के बाद उनके गुना पहुँचने से समाज के लोगों में विशेष आनंद और उत्साह देखने को मिला। शहरभर में स्वागत द्वार, बैनर और धार्मिक संदेशों से सड़कों को सजाया गया था। श्रद्धालुओं ने इस अवसर को सौभाग्य और आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत बताया, जिसमें अनुशासन, श्रद्धा और सेवा भाव की अनूठी मिसाल देखने को मिली। मुनि श्री के आगमन ने गुना शहर को धार्मिक रंग में रंग दिया और यह ऐतिहासिक स्वागत लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में बना रहेगा।
13 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद जैन समाज के पूज्य संत मुनि श्री सुधासागर महाराज के गुना आगमन पर शहर में अभूतपूर्व उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखा गया। उनके स्वागत के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु सड़कों पर उमड़ पड़े और लगभग 2 किलोमीटर लंबी स्वागत यात्रा करते हुए नजर आए। इस भव्य अवसर पर बैंड-बाजे, डीजे, ढोल और अखाड़ों के उस्तादों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया, वहीं लेजाम के द्वारा एक अद्भुत कला प्रस्तुति भी दी गई। पूरे गुना शहर को दुल्हन की तरह सजाया गया था और प्रमुख मार्गों से लेकर प्रवेश द्वारों तक भव्य सजावट की गई थी। मुनि श्री के आगमन पर पारंपरिक और धार्मिक आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने संतों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किया, कई स्थानों पर उनके चरण धोकर वंदन किया गया। मंगल आरती, पुष्पवर्षा और इत्र-सुगंध के साथ उनका अभिनंदन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने अपनी भक्ति और सम्मान का प्रदर्शन किया। स्वागत यात्रा में सनातन संस्कृति और परंपराओं की भी विशेष झलक दिखी, जहाँ ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों ने अपनी बैलगाड़ियों को पारंपरिक शैली में सजाकर शोभायात्रा की शोभा बढ़ाई। ग्रामीण पुरुष और महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए, जबकि बच्चों ने भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और आकर्षक झाँकियों के माध्यम से सभी का ध्यान खींचा। यात्रा के दौरान घोड़े, बैंड-बाजे और धार्मिक ध्वजों के साथ श्रद्धालु जयघोष करते हुए आगे बढ़ते रहे, जिससे पूरा वातावरण धार्मिक उल्लास और भक्ति भावना से सराबोर नजर आया। शहर के विभिन्न मार्गों पर स्वागत मंच बनाए गए थे, जहाँ संतों का अभिनंदन किया गया। भीषण गर्मी को ध्यान में रखते हुए, जैन समाज और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएँ की गईं। जगह-जगह छाया के लिए टेंट लगाए गए तथा ठंडे पानी, छाछ और लस्सी के स्टॉल लगाए गए, जिसका लाभ हजारों श्रद्धालुओं ने उठाया। स्वयंसेवक लगातार व्यवस्थाओं में जुटे रहे ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा न हो। मुनि श्री सुधासागर महाराज के आगमन को लेकर जैन समाज में लंबे समय से उत्साह था, और 13 वर्षों के बाद उनके गुना पहुँचने से समाज के लोगों में विशेष आनंद और उत्साह देखने को मिला। शहरभर में स्वागत द्वार, बैनर और धार्मिक संदेशों से सड़कों को सजाया गया था। श्रद्धालुओं ने इस अवसर को सौभाग्य और आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत बताया, जिसमें अनुशासन, श्रद्धा और सेवा भाव की अनूठी मिसाल देखने को मिली। मुनि श्री के आगमन ने गुना शहर को धार्मिक रंग में रंग दिया और यह ऐतिहासिक स्वागत लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में बना रहेगा।
- गत 29 मई को हुई मारपीट, रंगदारी और हफ्ता वसूली की घटना के विरोध में मंगलवार को कुंभराज की जनता ने बाजार बंद रखा। इस दौरान आक्रोशित जनता पुलिस थाने पहुंची और मांग की कि उक्त घटना के आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक बाजार बंद रहेगा। सूचना मिलते ही एडीशनल एसपी मानसिंह ठाकुर, एसडीओपी मनोज झा, तहसीलदार कमल मंडेलिया, भाजपा मंडल अध्यक्ष रोहित कासट, नगर परिषद उपाध्यक्ष विक्रम सिंह मीना और सांसद प्रतिनिधि कमलेश साहू मौके पर पहुंचे। इन अधिकारियों ने शीघ्र और सख्त कार्रवाई की मांग की। इस बीच, पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया, जबकि एक आरोपी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था। अधिकारियों ने बाकी अपराधियों को भी जल्द गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया। पूर्व विधायक ममता मीना और लक्ष्मण सिंह भी थाने पहुंचे और घटना पर दुख जताते हुए उसकी निंदा की। उन्होंने भयमुक्त शासन चलाने का वादा करने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि घटना के चार दिन बाद भी वे दिखाई नहीं दिए। जनता ने पुलिस पर आरोपियों के साथ साठगांठ का आरोप लगाया, जिससे उनके हौसले बुलंद हुए हैं। यह भी सामने आया कि घटना का मुख्य आरोपी सांसद प्रतिनिधि कमलेश साहू का रिश्तेदार है, और उसी पर घटना को अंजाम देने का आरोप भी है। हालांकि, कमलेश साहू ने मौके पर स्पष्ट किया कि शिवम साहू से उनका या उनके परिवार का कोई संपर्क या बोलचाल नहीं है। दोनों पूर्व विधायकों, लक्ष्मण सिंह और ममता मीना ने सभी संबंधित आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार कर जिला बदर करने और एनएसए के तहत कार्रवाई करने की मांग की, ताकि अपराधी किसी भी तरह की वारदात करने से बाज आएं। एडीशनल एसपी मानसिंह ठाकुर ने सभी को तीन दिन के भीतर आरोपियों को पकड़कर सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया और लोगों से दुकानें खोलने तथा पुलिस को किसी भी प्रकार की सूचना देने की अपील की। इस आश्वासन के बीच, उक्त आरोपियों से पीड़ित लोग भी कार्रवाई करवाने के लिए आगे आए। लोगों का कहना है कि इन आरोपियों की टोली में कई लोग शामिल हैं जो पिछले दो वर्षों से रंगदारी और हफ्ता वसूली का काम कर रहे हैं, लेकिन उनके भय और आतंक के कारण पीड़ित पुलिस तक नहीं पहुंच पाते थे। उन्होंने दो वर्ष पूर्व गोलमंडल पर एक प्रतिष्ठित व्यापारी पर रंगदारी और लूट की नीयत से प्राणघातक हमला करने की घटना का भी जिक्र किया, जिससे नगर में सनसनी फैल गई थी। स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल भी बुलवाया गया है।4
- केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 'खेत बचाओ अभियान' का शुभारंभ किया है। इस अभियान की शुरुआत रायसेन जिले से की गई।1
- छीपाबड़ौद निजी विद्यालय संघ का वार्षिक अधिवेशन स्थानीय बालाजी की डूंगरी पर संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में आचार्य भागचंद नागर (जिला संरक्षक बारां), वाहिद अलोन (स्कूल शिक्षा परिवार जिला संयोजक छबड़ा), मुकेश शर्मा, राजेश मान, रघुवीर पांचाल और भोजराज तिवारी जैसे अतिथि मौजूद रहे। कार्यक्रम का विधिवत् संचालन गिरिराज बंसल द्वारा किया गया। अधिवेशन के दौरान, निजी विद्यालय संघ के अध्यक्ष सूरज वैष्णव ने संघ के छह वर्ष के कार्यकाल के विषय में जानकारी प्रदान की। इसके बाद, कोषाध्यक्ष राकेश दक्षिणी ने गत तीन वर्षों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया और प्रत्येक सदस्य को मिलने वाले लाभांश की जानकारी भी साझा की। समस्त अतिथियों की उपस्थिति में कार्यकारिणी समिति का चुनाव करवाया गया, जिसमें नवीन कार्यकारिणी समिति में अध्यक्ष पद पर सूरज वैष्णव, उपाध्यक्ष धनराज सुमन, सचिव धर्मेंद्र काकानी, सह सचिव जितेंद्र गोयल, कोषाध्यक्ष राकेश दक्षिणी, संगठन मंत्री राकेश विजय और मीडिया प्रभारी श्याम बहादुर को सर्वसम्मति से चुना गया। अंत में, अतिथियों द्वारा प्रत्येक सदस्य को लाभांश वितरित किया गया, जिसके साथ छीपाबड़ौद निजी विद्यालय संघ का वार्षिक अधिवेशन सफलतापूर्वक संपन्न हो गया।2
- अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियों के संबंध में छीपाबड़ौद स्टेडियम में अभ्यास किया जा रहा है। इस अभ्यास सत्र के दौरान 'डाउनवर्ड फेसिंग' और पैदल चलने जैसी गतिविधियां की जा रही हैं।2
- बुधवार शाम 5 बजे मिली जानकारी के अनुसार, वन एवं प्रशासनिक अधिकारियों की रेंज स्तरीय टीम ने समरानियां क्षेत्र के मामोनी और ढिकवानी के पास बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 50 बीघा भूमि से अतिक्रमण हटाया। इस अभियान के तहत जेसीबी मशीनों की मदद से अवैध कब्जों को ध्वस्त किया गया। कार्रवाई के दौरान अवैध खनन में इस्तेमाल हो रही एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को भी जब्त किया गया। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से क्षेत्र के भू-माफियाओं में हड़कंप मच गया। इस अभियान में समरानियां नाका प्रभारी विनोद कुमार सहित वन विभाग और प्रशासन के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।1
- गुना जिले के ग्राम खरा खेड़ा में एक स्कूल की बाउंड्री वॉल के निर्माण में अनियमितताओं की शिकायत सामने आई है। आरोप है कि बाउंड्री वॉल बनाने में सीमेंट की मात्रा कम इस्तेमाल की गई है। साथ ही, यह भी बताया गया है कि निर्माण की गुणवत्ता तय दरों के अनुरूप नहीं है, जिससे कार्य की घटिया गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।1
- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियों के तहत छीपाबड़ौद स्टेडियम में बटरफ्लाई आसन का अभ्यास किया गया। यह अभ्यास आने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के लिए आयोजित कार्यक्रमों का हिस्सा है।1
- बुधवार शाम 4 बजे मिली जानकारी के अनुसार, राजस्थान के ढिकवानी गांव के आदिवासी किसान वर्षों से तालाब आधारित खेती के एक अनोखे मॉडल के माध्यम से अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। यह अभिनव मॉडल अब पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया है। इस कृषि पद्धति में, बारिश के मौसम में भरने वाले तालाबों के पानी का उपयोग रबी की फसलों जैसे गेहूं, सरसों, चना और धनिया की सिंचाई के लिए किया जाता है, जिससे इन फसलों की बेहतर पैदावार होती है। तालाब के खाली हो जाने के बाद, उसकी नमीयुक्त और उपजाऊ भूमि में तरबूज और खरबूजे की खेती की जाती है। किसानों का कहना है कि यहां पैदा होने वाले इन फलों की मिठास और खुशबू इतनी खास है कि इनकी मांग शिवपुरी और कोलारस तक रहती है, जिससे किसानों को दोहरा लाभ मिलता है।1
- सहरिया समाज की महिलाएं देसी जड़ी-बूटियों का उपयोग कर रही हैं। इन जड़ी-बूटियों में 'कोढ़ी' नामक ऐसी विशेष जड़ी-बूटियां शामिल हैं, जिनके इस्तेमाल से उल्टी की समस्या ठीक हो जाती है।2