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प्रयागराज की बारा तहसील में लगातार हो रहे पेपर लीक और धरना दे रहे छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में अधिवक्ता सड़क पर उतर आए हैं। बारा तहसील परिसर में अधिवक्ताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाना कोई अपराध नहीं है और सरकार तानाशाही तरीके से जनता की आवाज को नहीं दबा सकती। अधिवक्ताओं ने राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें पेपर लीक पर तुरंत रोक लगाने और छात्रों पर अत्याचार करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि अब छात्रों पर अत्याचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसका पूरे देश में विरोध होगा। प्रदर्शन के दौरान तहसील परिसर नारों से गूंजायमान रहा।
पुष्पराज सिंह
प्रयागराज की बारा तहसील में लगातार हो रहे पेपर लीक और धरना दे रहे छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में अधिवक्ता सड़क पर उतर आए हैं। बारा तहसील परिसर में अधिवक्ताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाना कोई अपराध नहीं है और सरकार तानाशाही तरीके से जनता की आवाज को नहीं दबा सकती। अधिवक्ताओं ने राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें पेपर लीक पर तुरंत रोक लगाने और छात्रों पर अत्याचार करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि अब छात्रों पर अत्याचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसका पूरे देश में विरोध होगा। प्रदर्शन के दौरान तहसील परिसर नारों से गूंजायमान रहा।
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- प्रयागराज के बारा में भारतीय किसान यूनियन "प्रयाग" के जिलाध्यक्ष रिषी पाण्डेय के नेतृत्व में किसानों ने उप जिला अधिकारी (SDM) बारा को जिलाधिकारी प्रयागराज के नाम 6 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। इस दौरान मौके पर संगठन के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। किसानों की मुख्य मांगें सिंचाई, बिजली, फसल बीमा, खाद-बीज की उपलब्धता और अन्य किसान हित से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित थीं। ज्ञापन प्राप्त करने के बाद SDM बारा ने किसानों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं को जल्द से जल्द जिला प्रशासन तक पहुंचाकर उनका निस्तारण कराया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर पुलिस प्रशासन भी मौजूद रहा।1
- प्रयागराज के शंकरगढ़ स्थित रानीगंज तिराहे पर जंतर-मंतर पर अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज के विरोध में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) के कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। कार्यकर्ताओं ने रानीगंज तिराहे पर जोरदार प्रदर्शन करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला दहन किया और उनकी तत्काल बर्खास्तगी की मांग की। प्रदर्शन के दौरान एकत्र हुए BKU (टिकैत) के दर्जनों कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं का कहना था कि अपनी वाजिब मांगों को लेकर आवाज उठा रहे छात्रों पर पुलिसिया बल प्रयोग पूरी तरह से तानाशाही और असंवैधानिक है। यूनियन के पदाधिकारियों ने कहा कि युवा देश का भविष्य हैं और अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरे छात्रों पर लाठियां बरसाना बेहद शर्मनाक है। शिक्षा मंत्रालय अपनी विफलताओं और छात्रों की समस्याओं को सुलझाने के बजाय उन्हें दबाने में लगा है। पुतला दहन और प्रदर्शन के दौरान रानीगंज तिराहे पर कुछ समय के लिए यातायात बाधित रहा, जहां स्थिति को नियंत्रित करने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा। कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि लाठीचार्ज के दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं हुई और छात्रों की मांगें नहीं मानी गईं, तो यह आंदोलन और उग्र रूप लेगा तथा शिक्षा मंत्री के इस्तीफे या बर्खास्तगी तक यह विरोध जारी रहेगा।1
- दिल्ली आंदोलन मामले को लेकर छात्रों में भारी नाराजगी देखी जा रही है, जो अब प्रयागराज में भी खुलकर सड़कों पर दिखाई दे रही है। कल से ही जारी इस विरोध के बीच भारी संख्या में छात्र स्टेनली रोड और कलश चौराहे से होते हुए सुभाष चौराहे की ओर बढ़ रहे हैं। चौराहे को क्रॉस करते हुए सड़कों पर उतरे यह छात्र लगातार नारेबाजी कर रहे हैं और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं।1
- अखिलेश यादव अपने और अपने पिता के कर्मों की कहानी भूल गए हैं। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री रहते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने वर्ष 1990 में 30 अक्टूबर और 2 नवंबर को अयोध्या में बाबरी मस्जिद की ओर बढ़ रहे कारसेवकों पर गोली चलवाई थी, जो राम मंदिर आंदोलन के दौरान हुई एक दुखद घटना थी। इसके अलावा, 27 मई 2014 को उत्तर प्रदेश में हुई बदायूं गैंगरेप की घटना सपा के शासनकाल में महिलाओं के खिलाफ हुए अपराधों की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक है, जिसमें दो बच्चियों को मारकर पेड़ पर लटका दिया गया था। लाल टोपी वाले गिरगिट के शासनकाल का जिक्र करते हुए सीधा हमला बोला गया है कि सपा सरकार का सीधा मतलब जंगलराज था।1
- प्रयागराज के फाफामऊ नवाबगंज क्षेत्र में सड़क पर ही सब्जी की बाजार सजने की वजह से आए दिन भारी जाम की स्थिति बन रही है। इस अव्यवस्था के कारण यहां से गुजरने वाले राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि इसी मुख्य राजमार्ग से लगातार वीआईपी लोगों के कारवां की आवाजाही बनी रहती है। इसके बावजूद नवाबगंज पुलिस पूरी तरह मूक दर्शक बनी बैठी है और इस समस्या पर कोई ध्यान नहीं दे रही है।1
- प्रयागराज के फूलपुर अंतर्गत प्रतापपुर थाना क्षेत्र में नेता सुभाष यादव और नवयुवकों ने धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया और उनका पुतला जलाया। जंतर-मंतर के नजारों को देखकर ग्रामीण युवाओं ने एकजुट होकर अपनी आवाज उठाई। इस प्रदर्शन के दौरान युवाओं और स्थानीय नेताओं ने अमित शाह एवं नरेंद्र मोदी के खिलाफ तानाशाही की जमकर नारेबाजी भी की।1
- उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ शहर स्थित अम्बेडकर चौराहे पर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं का भारी हुजूम उमड़ पड़ा है। पूरे जिले से पहुंचे दोनों दलों के कार्यकर्ता कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को हिरासत में लिए जाने का जोरदार विरोध कर रहे हैं।1