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हरदोई के शाहाबाद कस्बे में बकरीद के मौके पर एक मामूली सड़क हादसा देखते ही देखते दो समुदायों के टकराव और फिर पुलिसिया विवाद में बदल गया। मोहल्ला चौक क्षेत्र में हुई इस मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। पुलिस के अनुसार, 28 मई को विशाल पुत्र राजेश अपनी बहन श्वेता के साथ बाइक से बाजार जा रहे थे। कैनरा बैंक के पास सामने से स्कूटी पर आ रहे निसार और रिजवान पुत्रगण अली अहमद से उनकी टक्कर हो गई। आरोप है कि टक्कर के बाद दोनों पक्षों में कहासुनी शुरू हुई, जो मारपीट में बदल गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने प्रथम पक्ष के दो और द्वितीय पक्ष के चार लोगों को हिरासत में लिया। पुलिस ने प्रथम पक्ष का मेडिकल परीक्षण कराने के बाद उनकी तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया। हालांकि, असली विवाद घटना के बाद शुरू हुआ, जब प्रथम पक्ष की महिलाएं क्षेत्राधिकारी (सीओ) कार्यालय पहुंचीं और वहां जमकर बहस व हंगामा हुआ। इसी दौरान, एक युवती द्वारा मोबाइल से वीडियो बनाए जाने पर आरक्षी वीरेश कुमार ने उसका मोबाइल छीन लिया। पुलिस का दावा है कि जांच में छेड़खानी जैसी कोई घटना सामने नहीं आई है, लेकिन वायरल वीडियो और घटनास्थल पर हुए हाई-वोल्टेज ड्रामे ने शाहाबाद पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि त्योहार के दिन एक मामूली विवाद को समय रहते शांत न कर पाना पुलिस की संवेदनशीलता और नियंत्रण क्षमता दोनों पर प्रश्नचिह्न लगाता है। इस पूरे मामले में अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी मार्तंड प्रकाश सिंह ने पुलिस कार्रवाई और घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बयान जारी किया है। सीओ कार्यालय के बाहर पुलिस और पीड़ित परिवार के बीच सड़क पर हुए इस हाई-वोल्टेज हंगामे ने सीधे तौर पर शाहाबाद सीओ सर्कल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, खासकर सीओ पद पर तैनात आईपीएस आलोक राज नारायण की कार्यशैली पर। क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि उनके कार्यकाल में शाहाबाद सीओ सर्कल लगातार विवादों, बढ़ते अपराधों और पुलिस की आक्रामक कार्यशैली को लेकर चर्चा में रहा है। लोगों का कहना है कि शाहाबाद के इतिहास में पहली बार सीओ कार्यालय और सीओ पेशी की छवि इतनी अधिक विवादित और बदनाम दिखाई दे रही है। आईपीएस के 'सिंघम' मॉडल पर भी सवाल उठे हैं, जैसे कि ट्रक सीजिंग में सख्ती दिखती है, लेकिन नशा, खनन, डकैती और माफियाओं पर चुप्पी क्यों है? ओवरलोड ट्रकों पर कार्रवाई होती है, लेकिन गांजा, स्मैक और चरस तस्करी के बड़े नेटवर्क आज तक नहीं टूटे। सीओ पेशी कार्यालय के पीछे तक गांजा बिक्री की चर्चाओं के बावजूद निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? शिकायतकर्ताओं के अनुसार, बड़े अपराधों और खनन मामलों में फोन तक रिसीव नहीं होते, जबकि सड़क पर आम लोगों से भिड़ंत की तस्वीरें वायरल हो जाती हैं। मलकापुर डकैती जैसे मामलों में दूसरे जिले की पुलिस को खुलासा करना पड़ा, जिससे स्थानीय खुफिया और अपराध नियंत्रण तंत्र की भूमिका पर प्रश्नचिह्न लगता है। खनन माफियाओं, भूमाफियाओं, जुआ-सट्टा और अवैध नशा कारोबार पर वैसी 'सिंघम स्टाइल' कार्रवाई क्यों नहीं दिखी, जैसी ट्रक सीजिंग में दिखाई गई? अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब सीओ कार्यालय के ठीक बाहर ही हालात नियंत्रित नहीं रह पा रहे हैं, तो पूरे सर्किल की कानून व्यवस्था आखिर किस भरोसे चल रही है? घटना के बाद इलाके में पुलिस की कार्यशैली को लेकर नाराजगी और चर्चा दोनों तेज हो गई हैं।

13 hrs ago
user_OmdevDixit (Pappu Dixit)
OmdevDixit (Pappu Dixit)
Farmer हरदोई, हरदोई, उत्तर प्रदेश•
13 hrs ago

हरदोई के शाहाबाद कस्बे में बकरीद के मौके पर एक मामूली सड़क हादसा देखते ही देखते दो समुदायों के टकराव और फिर पुलिसिया विवाद में बदल गया। मोहल्ला चौक क्षेत्र में हुई इस मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। पुलिस के अनुसार, 28 मई को विशाल पुत्र राजेश अपनी बहन श्वेता के साथ बाइक से बाजार जा रहे थे। कैनरा बैंक के पास सामने से स्कूटी पर आ रहे निसार और रिजवान पुत्रगण अली अहमद से उनकी टक्कर हो गई। आरोप है कि टक्कर के बाद दोनों पक्षों में कहासुनी शुरू हुई, जो मारपीट में बदल गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने प्रथम पक्ष के दो और द्वितीय पक्ष के चार लोगों को हिरासत में लिया। पुलिस ने प्रथम पक्ष का मेडिकल परीक्षण कराने के बाद उनकी तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया। हालांकि, असली विवाद घटना के बाद शुरू हुआ, जब प्रथम पक्ष की महिलाएं क्षेत्राधिकारी (सीओ) कार्यालय पहुंचीं और वहां जमकर बहस व हंगामा हुआ। इसी दौरान, एक युवती द्वारा मोबाइल से वीडियो बनाए जाने पर आरक्षी वीरेश कुमार ने उसका मोबाइल

छीन लिया। पुलिस का दावा है कि जांच में छेड़खानी जैसी कोई घटना सामने नहीं आई है, लेकिन वायरल वीडियो और घटनास्थल पर हुए हाई-वोल्टेज ड्रामे ने शाहाबाद पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि त्योहार के दिन एक मामूली विवाद को समय रहते शांत न कर पाना पुलिस की संवेदनशीलता और नियंत्रण क्षमता दोनों पर प्रश्नचिह्न लगाता है। इस पूरे मामले में अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी मार्तंड प्रकाश सिंह ने पुलिस कार्रवाई और घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बयान जारी किया है। सीओ कार्यालय के बाहर पुलिस और पीड़ित परिवार के बीच सड़क पर हुए इस हाई-वोल्टेज हंगामे ने सीधे तौर पर शाहाबाद सीओ सर्कल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, खासकर सीओ पद पर तैनात आईपीएस आलोक राज नारायण की कार्यशैली पर। क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि उनके कार्यकाल में शाहाबाद सीओ सर्कल लगातार विवादों, बढ़ते अपराधों और पुलिस की आक्रामक कार्यशैली को लेकर चर्चा में रहा है। लोगों का कहना है कि शाहाबाद के इतिहास में पहली बार सीओ कार्यालय और सीओ पेशी की छवि इतनी अधिक विवादित और बदनाम दिखाई दे रही है। आईपीएस के

'सिंघम' मॉडल पर भी सवाल उठे हैं, जैसे कि ट्रक सीजिंग में सख्ती दिखती है, लेकिन नशा, खनन, डकैती और माफियाओं पर चुप्पी क्यों है? ओवरलोड ट्रकों पर कार्रवाई होती है, लेकिन गांजा, स्मैक और चरस तस्करी के बड़े नेटवर्क आज तक नहीं टूटे। सीओ पेशी कार्यालय के पीछे तक गांजा बिक्री की चर्चाओं के बावजूद निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? शिकायतकर्ताओं के अनुसार, बड़े अपराधों और खनन मामलों में फोन तक रिसीव नहीं होते, जबकि सड़क पर आम लोगों से भिड़ंत की तस्वीरें वायरल हो जाती हैं। मलकापुर डकैती जैसे मामलों में दूसरे जिले की पुलिस को खुलासा करना पड़ा, जिससे स्थानीय खुफिया और अपराध नियंत्रण तंत्र की भूमिका पर प्रश्नचिह्न लगता है। खनन माफियाओं, भूमाफियाओं, जुआ-सट्टा और अवैध नशा कारोबार पर वैसी 'सिंघम स्टाइल' कार्रवाई क्यों नहीं दिखी, जैसी ट्रक सीजिंग में दिखाई गई? अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब सीओ कार्यालय के ठीक बाहर ही हालात नियंत्रित नहीं रह पा रहे हैं, तो पूरे सर्किल की कानून व्यवस्था आखिर किस भरोसे चल रही है? घटना के बाद इलाके में पुलिस की कार्यशैली को लेकर नाराजगी और चर्चा दोनों तेज हो गई हैं।

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  • हरदोई जिले के पिहानी कस्बे में स्थित पुराने और चर्चित बंदर पार्क ने अब एक नई पहचान प्राप्त कर ली है। नगर पालिका परिषद द्वारा कराए गए व्यापक सौंदर्यीकरण और विकास कार्यों के बाद इसे सरदार पटेल चौक का नया स्वरूप दिया गया है, जिसका आज क्षेत्रीय विधायक श्याम प्रकाश के हाथों लोकार्पण किया जाएगा। कार्यक्रम को लेकर नगर पालिका प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं और पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। नगर के बीचों-बीच स्थित यह स्थल, जो लंबे समय तक बंदर पार्क के नाम से जाना जाता था, अब आधुनिक सुविधाओं और आकर्षक स्वरूप के साथ लोगों को एक नई अनुभूति देगा। चौक को रंगीन रोशनी, खूबसूरत सजावट और सुव्यवस्थित हरियाली से इस तरह संवारा गया है कि पूरा परिसर किसी उत्सव स्थल जैसा नजर आता है, खासकर शाम ढलते ही जगमगाती लाइटें इसकी सुंदरता में चार चांद लगा देती हैं। अधिशासी अधिकारी अमित कुमार सिंह ने बताया कि यह चौक नगर के लोगों के लिए एक बेहतर सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित किया गया है, जिससे न केवल नगर की सुंदरता बढ़ेगी, बल्कि लोगों को बैठने, घूमने और सामाजिक गतिविधियों के लिए भी एक बेहतर स्थान उपलब्ध होगा। लोकार्पण समारोह की व्यवस्थाओं की निगरानी विधायक प्रतिनिधि धर्मेश मिश्रा और विपिन मिश्रा लगातार कर रहे हैं, वहीं नगर पालिका के अधिकारी और कर्मचारी आयोजन को सफल बनाने में पूरी तरह जुटे हुए हैं। तैयारियों को अंतिम रूप देने में अरुण अग्निहोत्री, अशोक कुमार, सतीश कुमार सहित नगर पालिका के कई कर्मचारी लगातार सक्रिय रहे। नगरवासियों में इस लोकार्पण समारोह को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। लोगों का मानना है कि चौक का यह नया स्वरूप कस्बे की पहचान को मजबूती देगा और आने वाले समय में यह क्षेत्र का प्रमुख आकर्षण केंद्र बनेगा। नगर पालिका प्रशासन ने सभी से कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है।
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    हरदोई जिले के पिहानी कस्बे में स्थित पुराने और चर्चित बंदर पार्क ने अब एक नई पहचान प्राप्त कर ली है। नगर पालिका परिषद द्वारा कराए गए व्यापक सौंदर्यीकरण और विकास कार्यों के बाद इसे सरदार पटेल चौक का नया स्वरूप दिया गया है, जिसका आज क्षेत्रीय विधायक श्याम प्रकाश के हाथों लोकार्पण किया जाएगा। कार्यक्रम को लेकर नगर पालिका प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं और पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है।

नगर के बीचों-बीच स्थित यह स्थल, जो लंबे समय तक बंदर पार्क के नाम से जाना जाता था, अब आधुनिक सुविधाओं और आकर्षक स्वरूप के साथ लोगों को एक नई अनुभूति देगा। चौक को रंगीन रोशनी, खूबसूरत सजावट और सुव्यवस्थित हरियाली से इस तरह संवारा गया है कि पूरा परिसर किसी उत्सव स्थल जैसा नजर आता है, खासकर शाम ढलते ही जगमगाती लाइटें इसकी सुंदरता में चार चांद लगा देती हैं। अधिशासी अधिकारी अमित कुमार सिंह ने बताया कि यह चौक नगर के लोगों के लिए एक बेहतर सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित किया गया है, जिससे न केवल नगर की सुंदरता बढ़ेगी, बल्कि लोगों को बैठने, घूमने और सामाजिक गतिविधियों के लिए भी एक बेहतर स्थान उपलब्ध होगा।

लोकार्पण समारोह की व्यवस्थाओं की निगरानी विधायक प्रतिनिधि धर्मेश मिश्रा और विपिन मिश्रा लगातार कर रहे हैं, वहीं नगर पालिका के अधिकारी और कर्मचारी आयोजन को सफल बनाने में पूरी तरह जुटे हुए हैं। तैयारियों को अंतिम रूप देने में अरुण अग्निहोत्री, अशोक कुमार, सतीश कुमार सहित नगर पालिका के कई कर्मचारी लगातार सक्रिय रहे। नगरवासियों में इस लोकार्पण समारोह को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। लोगों का मानना है कि चौक का यह नया स्वरूप कस्बे की पहचान को मजबूती देगा और आने वाले समय में यह क्षेत्र का प्रमुख आकर्षण केंद्र बनेगा। नगर पालिका प्रशासन ने सभी से कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है।
    user_ज्ञानेश मिश्रा
    ज्ञानेश मिश्रा
    Traditional Storyteller हरदोई, हरदोई, उत्तर प्रदेश•
    17 hrs ago
  • हरदोई जनपद में सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक विवादित रील को लेकर गहरा आक्रोश व्याप्त है। 'सुभाष शास्त्री' नामक एक युवक द्वारा बनाई गई इस रील में कथित तौर पर चार जनपदों का नाम लेते हुए हरदोई को "हरामियों का जिला" बताया गया है, जिससे लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं और जनपद की छवि धूमिल होने का आरोप लगा है। इस मामले में, थाना मल्लावां क्षेत्र के नेवादा परस गांव निवासी सूरज तिवारी पुत्र अनिल तिवारी ने हरदोई के पुलिस अधीक्षक को एक शिकायती प्रार्थना पत्र सौंपा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि रील में इस्तेमाल की गई भाषा न केवल हरदोई जनपद का अपमान करती है, बल्कि यह सामाजिक वैमनस्य और तनाव को भी जन्म दे सकती है। प्रार्थना पत्र में युवक पर जानबूझकर जनपद की छवि खराब करने और शांतिपूर्ण माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाते हुए कठोर कार्रवाई की मांग की गई है। इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस छिड़ गई है। जहां कई लोग आरोपी युवक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में भी देख रहे हैं। फिलहाल, पुलिस को शिकायत दिए जाने के बाद अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
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    हरदोई जनपद में सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक विवादित रील को लेकर गहरा आक्रोश व्याप्त है। 'सुभाष शास्त्री' नामक एक युवक द्वारा बनाई गई इस रील में कथित तौर पर चार जनपदों का नाम लेते हुए हरदोई को "हरामियों का जिला" बताया गया है, जिससे लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं और जनपद की छवि धूमिल होने का आरोप लगा है।

इस मामले में, थाना मल्लावां क्षेत्र के नेवादा परस गांव निवासी सूरज तिवारी पुत्र अनिल तिवारी ने हरदोई के पुलिस अधीक्षक को एक शिकायती प्रार्थना पत्र सौंपा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि रील में इस्तेमाल की गई भाषा न केवल हरदोई जनपद का अपमान करती है, बल्कि यह सामाजिक वैमनस्य और तनाव को भी जन्म दे सकती है। प्रार्थना पत्र में युवक पर जानबूझकर जनपद की छवि खराब करने और शांतिपूर्ण माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाते हुए कठोर कार्रवाई की मांग की गई है।

इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस छिड़ गई है। जहां कई लोग आरोपी युवक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में भी देख रहे हैं। फिलहाल, पुलिस को शिकायत दिए जाने के बाद अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
    user_VNN news channel / मुख्य आवाज
    VNN news channel / मुख्य आवाज
    Newspaper publisher हरदोई, हरदोई, उत्तर प्रदेश•
    18 hrs ago
  • हरदोई में बकरीद के दिन एक ई-रिक्शा चालक को समुदाय विशेष के दबंगों ने बीच सड़क पर बेरहमी से पीटा, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली और उनके इकबाल पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। घटना से एक दिन पहले ही नगर में पुलिस ने भारी संख्या में फ्लैग मार्च किया था, इसके बावजूद हुई इस वारदात और पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई से प्रथम पक्ष हैरान है। पिटाई का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। घटना 28 मई की है, जब मोहल्ला खेडाबीबीजेई निवासी दलित विशाल पुत्र राजेश अपनी बहन श्वेता के साथ मोटरसाइकिल पर बाजार जा रहे थे। कैनरा बैंक मोहल्ला चौक के पास सामने से स्कूटी पर आ रहे मोहल्ला हाता सुभान खाँ, कस्बा व शाहाबाद निवासी निसार व रिजवान पुत्रगण अली अहमद से उनकी टक्कर हो गई। इसी मामूली बात पर विवाद बढ़ने पर ई-रिक्शा चालक की जमकर पिटाई की गई। वीडियो वायरल होने के बाद कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों के कुल छह लोगों – विशाल के पक्ष से दो और रिजवान-निसार पक्ष से चार – को हिरासत में लिया। पीड़ित पक्ष की महिलाओं ने छेड़छाड़ का भी आरोप लगाया था। इस संबंध में अपर पुलिस अधीक्षक मार्तंड प्रताप सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि विशाल और एक अन्य युवक का मेडिकल परीक्षण कराया गया और तहरीर के आधार पर द्वितीय पक्ष के रिजवान, निसार सहित चार लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया। एएसपी सिंह ने यह भी बताया कि घटना के बाद विशाल पक्ष की महिलाएं थाना और सीओ कार्यालय पर विवाद कर रही थीं, और एक युवती मोबाइल से वीडियो बना रही थी। आरक्षी वीरेश कुमार ने उसे वीडियो बनाने से मना किया और युवती का मोबाइल छीन लिया। महिला द्वारा लगाए गए छेड़छाड़ के आरोप को जांच में झूठा पाया गया है।
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    हरदोई में बकरीद के दिन एक ई-रिक्शा चालक को समुदाय विशेष के दबंगों ने बीच सड़क पर बेरहमी से पीटा, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली और उनके इकबाल पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। घटना से एक दिन पहले ही नगर में पुलिस ने भारी संख्या में फ्लैग मार्च किया था, इसके बावजूद हुई इस वारदात और पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई से प्रथम पक्ष हैरान है।

पिटाई का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। घटना 28 मई की है, जब मोहल्ला खेडाबीबीजेई निवासी दलित विशाल पुत्र राजेश अपनी बहन श्वेता के साथ मोटरसाइकिल पर बाजार जा रहे थे। कैनरा बैंक मोहल्ला चौक के पास सामने से स्कूटी पर आ रहे मोहल्ला हाता सुभान खाँ, कस्बा व शाहाबाद निवासी निसार व रिजवान पुत्रगण अली अहमद से उनकी टक्कर हो गई। इसी मामूली बात पर विवाद बढ़ने पर ई-रिक्शा चालक की जमकर पिटाई की गई। वीडियो वायरल होने के बाद कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों के कुल छह लोगों – विशाल के पक्ष से दो और रिजवान-निसार पक्ष से चार – को हिरासत में लिया।

पीड़ित पक्ष की महिलाओं ने छेड़छाड़ का भी आरोप लगाया था। इस संबंध में अपर पुलिस अधीक्षक मार्तंड प्रताप सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि विशाल और एक अन्य युवक का मेडिकल परीक्षण कराया गया और तहरीर के आधार पर द्वितीय पक्ष के रिजवान, निसार सहित चार लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया। एएसपी सिंह ने यह भी बताया कि घटना के बाद विशाल पक्ष की महिलाएं थाना और सीओ कार्यालय पर विवाद कर रही थीं, और एक युवती मोबाइल से वीडियो बना रही थी। आरक्षी वीरेश कुमार ने उसे वीडियो बनाने से मना किया और युवती का मोबाइल छीन लिया। महिला द्वारा लगाए गए छेड़छाड़ के आरोप को जांच में झूठा पाया गया है।
    user_संतोष तिवारी ब्यूरो चीफ दैनिक
    संतोष तिवारी ब्यूरो चीफ दैनिक
    Hardoi, Uttar Pradesh•
    20 hrs ago
  • हरदोई में सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्मों पर डीएम चौराहे से अशोक स्तम्भ हटाए जाने से संबंधित खबरें प्रसारित होने के बाद प्रशासन ने इन्हें पूरी तरह से भ्रामक और असत्य बताया है। प्रशासन ने इस संबंध में लगाए जा रहे आरोपों को पूर्णतया निराधार करार देते हुए उनका खंडन किया है। जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि नगर पालिका हरदोई शहर के प्रमुख चौराहों पर सौंदर्यकरण का कार्य करा रही है और डीएम चौराहे पर अशोक स्तम्भ यथावत स्थापित है। जिलाधिकारी हरदोई, श्री अनुनय झा ने भी इस मामले में अपनी बाइट जारी करते हुए लोगों से अपील की है कि वे सत्यता जाने बिना किसी भी प्रकार की भ्रामक खबर प्रसारित न करें। प्रशासन ने नागरिकों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं से जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करने और अफवाहों से बचने का आग्रह किया है।
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    हरदोई में सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्मों पर डीएम चौराहे से अशोक स्तम्भ हटाए जाने से संबंधित खबरें प्रसारित होने के बाद प्रशासन ने इन्हें पूरी तरह से भ्रामक और असत्य बताया है। प्रशासन ने इस संबंध में लगाए जा रहे आरोपों को पूर्णतया निराधार करार देते हुए उनका खंडन किया है।

जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि नगर पालिका हरदोई शहर के प्रमुख चौराहों पर सौंदर्यकरण का कार्य करा रही है और डीएम चौराहे पर अशोक स्तम्भ यथावत स्थापित है। जिलाधिकारी हरदोई, श्री अनुनय झा ने भी इस मामले में अपनी बाइट जारी करते हुए लोगों से अपील की है कि वे सत्यता जाने बिना किसी भी प्रकार की भ्रामक खबर प्रसारित न करें। प्रशासन ने नागरिकों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं से जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करने और अफवाहों से बचने का आग्रह किया है।
    user_जागो न्यूज हरदोई "उ. प्र."
    जागो न्यूज हरदोई "उ. प्र."
    Court reporter हरदोई, हरदोई, उत्तर प्रदेश•
    20 hrs ago
  • हरदोई जिले के शाहाबाद थाना क्षेत्र में चौक स्थित केनरा बैंक के पास एक बाइक और स्कूटी की आमने-सामने की टक्कर के बाद दो पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों पक्षों से कुल 6 लोगों को हिरासत में ले लिया है। यह घटना 28 मई 2026 को हुई थी जब विशाल अपनी बहन श्वेता के साथ बाइक से बाजार जा रहे थे। रास्ते में उनकी स्कूटी सवार निसार और रिजवान से टक्कर हो गई, जिसके बाद दोनों पक्षों में कहासुनी और मारपीट शुरू हो गई। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने पहले पक्ष से 2 लोगों को और दूसरे पक्ष से 4 लोगों को हिरासत में लिया। पीड़ित पक्ष की तहरीर पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया है। घटना के बाद पहले पक्ष की कुछ महिलाएं थाने और क्षेत्राधिकारी कार्यालय पर पहुंचकर वाद-विवाद करने लगीं। इसी दौरान, जब एक युवती मोबाइल से वीडियो बना रही थी, तो आरक्षी वीरेश कुमार ने उसे मना किया और उसका मोबाइल ले लिया, जिस पर बाद में चर्चाएं भी थीं। हालांकि, अपर पुलिस अधीक्षक (पश्चिमी) मार्तंड प्रकाश सिंह ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि जांच में छेड़खानी जैसी कोई घटना नहीं पाई गई है। यह मामला सिर्फ गाड़ी टकराने के विवाद से संबंधित है, और पुलिस द्वारा इसमें विधिक कार्रवाई की जा रही है।
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    हरदोई जिले के शाहाबाद थाना क्षेत्र में चौक स्थित केनरा बैंक के पास एक बाइक और स्कूटी की आमने-सामने की टक्कर के बाद दो पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों पक्षों से कुल 6 लोगों को हिरासत में ले लिया है।

यह घटना 28 मई 2026 को हुई थी जब विशाल अपनी बहन श्वेता के साथ बाइक से बाजार जा रहे थे। रास्ते में उनकी स्कूटी सवार निसार और रिजवान से टक्कर हो गई, जिसके बाद दोनों पक्षों में कहासुनी और मारपीट शुरू हो गई। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने पहले पक्ष से 2 लोगों को और दूसरे पक्ष से 4 लोगों को हिरासत में लिया। पीड़ित पक्ष की तहरीर पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया है।

घटना के बाद पहले पक्ष की कुछ महिलाएं थाने और क्षेत्राधिकारी कार्यालय पर पहुंचकर वाद-विवाद करने लगीं। इसी दौरान, जब एक युवती मोबाइल से वीडियो बना रही थी, तो आरक्षी वीरेश कुमार ने उसे मना किया और उसका मोबाइल ले लिया, जिस पर बाद में चर्चाएं भी थीं। हालांकि, अपर पुलिस अधीक्षक (पश्चिमी) मार्तंड प्रकाश सिंह ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि जांच में छेड़खानी जैसी कोई घटना नहीं पाई गई है। यह मामला सिर्फ गाड़ी टकराने के विवाद से संबंधित है, और पुलिस द्वारा इसमें विधिक कार्रवाई की जा रही है।
    user_प्रवीण कुमार
    प्रवीण कुमार
    Local News Reporter हरदोई, हरदोई, उत्तर प्रदेश•
    20 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले से मिली जानकारी के अनुसार, डीएम चौराहे से अशोक स्तंभ को नहीं हटाया गया है। इस मामले में जिले के जिलाधिकारी (DM) अनुनय झा ने स्थिति की सच्चाई को स्पष्ट किया है।
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    उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले से मिली जानकारी के अनुसार, डीएम चौराहे से अशोक स्तंभ को नहीं हटाया गया है। इस मामले में जिले के जिलाधिकारी (DM) अनुनय झा ने स्थिति की सच्चाई को स्पष्ट किया है।
    user_Sonu Kanaujiya
    Sonu Kanaujiya
    Newsagent Hardoi, Uttar Pradesh•
    21 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश के शाहाबाद थाना क्षेत्र में 28 मई 2026 को बाइक और स्कूटी की टक्कर के बाद दो पक्षों के बीच विवाद और मारपीट का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, विशाल (राजेश के पुत्र) अपनी बहन श्वेता के साथ बाइक से बाजार जा रहे थे, तभी कैनरा बैंक मोड़ चौक के पास उनकी स्कूटी पर सवार निसार और रिजवान से टक्कर हो गई। यह मामूली टक्कर जल्द ही कहासुनी में बदल गई और फिर मारपीट तक पहुंच गई। सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों से कुल छह लोगों को हिरासत में ले लिया। प्रथम पक्ष का मेडिकल परीक्षण कराने के बाद उनकी तहरीर पर शाहाबाद थाने में संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। घटना के बाद कुछ महिलाएं शाहाबाद थाने और क्षेत्राधिकारी कार्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन करने लगीं। इस दौरान एक युवती मोबाइल से वीडियो बना रही थी, जिस पर आरक्षी वीरेश कुमार ने उसे वीडियो बनाने से मना किया और मोबाइल अपने कब्जे में ले लिया। सोशल मीडिया पर इस घटना से संबंधित एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें कुछ लोग छेड़खानी के आरोप लगा रहे थे, लेकिन पुलिस जांच में ऐसी किसी घटना की पुष्टि नहीं हुई है। अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी मार्तंड प्रकाश सिंह ने बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की है।
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    उत्तर प्रदेश के शाहाबाद थाना क्षेत्र में 28 मई 2026 को बाइक और स्कूटी की टक्कर के बाद दो पक्षों के बीच विवाद और मारपीट का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, विशाल (राजेश के पुत्र) अपनी बहन श्वेता के साथ बाइक से बाजार जा रहे थे, तभी कैनरा बैंक मोड़ चौक के पास उनकी स्कूटी पर सवार निसार और रिजवान से टक्कर हो गई। यह मामूली टक्कर जल्द ही कहासुनी में बदल गई और फिर मारपीट तक पहुंच गई।

सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों से कुल छह लोगों को हिरासत में ले लिया। प्रथम पक्ष का मेडिकल परीक्षण कराने के बाद उनकी तहरीर पर शाहाबाद थाने में संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

घटना के बाद कुछ महिलाएं शाहाबाद थाने और क्षेत्राधिकारी कार्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन करने लगीं। इस दौरान एक युवती मोबाइल से वीडियो बना रही थी, जिस पर आरक्षी वीरेश कुमार ने उसे वीडियो बनाने से मना किया और मोबाइल अपने कब्जे में ले लिया। सोशल मीडिया पर इस घटना से संबंधित एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें कुछ लोग छेड़खानी के आरोप लगा रहे थे, लेकिन पुलिस जांच में ऐसी किसी घटना की पुष्टि नहीं हुई है। अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी मार्तंड प्रकाश सिंह ने बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की है।
    user_ज्ञानेश मिश्रा
    ज्ञानेश मिश्रा
    Traditional Storyteller हरदोई, हरदोई, उत्तर प्रदेश•
    21 hrs ago
  • हरदोई के शाहाबाद कस्बे में बकरीद के मौके पर एक मामूली सड़क हादसा देखते ही देखते दो समुदायों के टकराव और फिर पुलिसिया विवाद में बदल गया। मोहल्ला चौक क्षेत्र में हुई इस मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। पुलिस के अनुसार, 28 मई को विशाल पुत्र राजेश अपनी बहन श्वेता के साथ बाइक से बाजार जा रहे थे। कैनरा बैंक के पास सामने से स्कूटी पर आ रहे निसार और रिजवान पुत्रगण अली अहमद से उनकी टक्कर हो गई। आरोप है कि टक्कर के बाद दोनों पक्षों में कहासुनी शुरू हुई, जो मारपीट में बदल गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने प्रथम पक्ष के दो और द्वितीय पक्ष के चार लोगों को हिरासत में लिया। पुलिस ने प्रथम पक्ष का मेडिकल परीक्षण कराने के बाद उनकी तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया। हालांकि, असली विवाद घटना के बाद शुरू हुआ, जब प्रथम पक्ष की महिलाएं क्षेत्राधिकारी (सीओ) कार्यालय पहुंचीं और वहां जमकर बहस व हंगामा हुआ। इसी दौरान, एक युवती द्वारा मोबाइल से वीडियो बनाए जाने पर आरक्षी वीरेश कुमार ने उसका मोबाइल छीन लिया। पुलिस का दावा है कि जांच में छेड़खानी जैसी कोई घटना सामने नहीं आई है, लेकिन वायरल वीडियो और घटनास्थल पर हुए हाई-वोल्टेज ड्रामे ने शाहाबाद पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि त्योहार के दिन एक मामूली विवाद को समय रहते शांत न कर पाना पुलिस की संवेदनशीलता और नियंत्रण क्षमता दोनों पर प्रश्नचिह्न लगाता है। इस पूरे मामले में अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी मार्तंड प्रकाश सिंह ने पुलिस कार्रवाई और घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बयान जारी किया है। सीओ कार्यालय के बाहर पुलिस और पीड़ित परिवार के बीच सड़क पर हुए इस हाई-वोल्टेज हंगामे ने सीधे तौर पर शाहाबाद सीओ सर्कल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, खासकर सीओ पद पर तैनात आईपीएस आलोक राज नारायण की कार्यशैली पर। क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि उनके कार्यकाल में शाहाबाद सीओ सर्कल लगातार विवादों, बढ़ते अपराधों और पुलिस की आक्रामक कार्यशैली को लेकर चर्चा में रहा है। लोगों का कहना है कि शाहाबाद के इतिहास में पहली बार सीओ कार्यालय और सीओ पेशी की छवि इतनी अधिक विवादित और बदनाम दिखाई दे रही है। आईपीएस के 'सिंघम' मॉडल पर भी सवाल उठे हैं, जैसे कि ट्रक सीजिंग में सख्ती दिखती है, लेकिन नशा, खनन, डकैती और माफियाओं पर चुप्पी क्यों है? ओवरलोड ट्रकों पर कार्रवाई होती है, लेकिन गांजा, स्मैक और चरस तस्करी के बड़े नेटवर्क आज तक नहीं टूटे। सीओ पेशी कार्यालय के पीछे तक गांजा बिक्री की चर्चाओं के बावजूद निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? शिकायतकर्ताओं के अनुसार, बड़े अपराधों और खनन मामलों में फोन तक रिसीव नहीं होते, जबकि सड़क पर आम लोगों से भिड़ंत की तस्वीरें वायरल हो जाती हैं। मलकापुर डकैती जैसे मामलों में दूसरे जिले की पुलिस को खुलासा करना पड़ा, जिससे स्थानीय खुफिया और अपराध नियंत्रण तंत्र की भूमिका पर प्रश्नचिह्न लगता है। खनन माफियाओं, भूमाफियाओं, जुआ-सट्टा और अवैध नशा कारोबार पर वैसी 'सिंघम स्टाइल' कार्रवाई क्यों नहीं दिखी, जैसी ट्रक सीजिंग में दिखाई गई? अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब सीओ कार्यालय के ठीक बाहर ही हालात नियंत्रित नहीं रह पा रहे हैं, तो पूरे सर्किल की कानून व्यवस्था आखिर किस भरोसे चल रही है? घटना के बाद इलाके में पुलिस की कार्यशैली को लेकर नाराजगी और चर्चा दोनों तेज हो गई हैं।
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    हरदोई के शाहाबाद कस्बे में बकरीद के मौके पर एक मामूली सड़क हादसा देखते ही देखते दो समुदायों के टकराव और फिर पुलिसिया विवाद में बदल गया। मोहल्ला चौक क्षेत्र में हुई इस मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।

पुलिस के अनुसार, 28 मई को विशाल पुत्र राजेश अपनी बहन श्वेता के साथ बाइक से बाजार जा रहे थे। कैनरा बैंक के पास सामने से स्कूटी पर आ रहे निसार और रिजवान पुत्रगण अली अहमद से उनकी टक्कर हो गई। आरोप है कि टक्कर के बाद दोनों पक्षों में कहासुनी शुरू हुई, जो मारपीट में बदल गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने प्रथम पक्ष के दो और द्वितीय पक्ष के चार लोगों को हिरासत में लिया। पुलिस ने प्रथम पक्ष का मेडिकल परीक्षण कराने के बाद उनकी तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया।

हालांकि, असली विवाद घटना के बाद शुरू हुआ, जब प्रथम पक्ष की महिलाएं क्षेत्राधिकारी (सीओ) कार्यालय पहुंचीं और वहां जमकर बहस व हंगामा हुआ। इसी दौरान, एक युवती द्वारा मोबाइल से वीडियो बनाए जाने पर आरक्षी वीरेश कुमार ने उसका मोबाइल छीन लिया। पुलिस का दावा है कि जांच में छेड़खानी जैसी कोई घटना सामने नहीं आई है, लेकिन वायरल वीडियो और घटनास्थल पर हुए हाई-वोल्टेज ड्रामे ने शाहाबाद पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि त्योहार के दिन एक मामूली विवाद को समय रहते शांत न कर पाना पुलिस की संवेदनशीलता और नियंत्रण क्षमता दोनों पर प्रश्नचिह्न लगाता है। इस पूरे मामले में अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी मार्तंड प्रकाश सिंह ने पुलिस कार्रवाई और घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बयान जारी किया है।

सीओ कार्यालय के बाहर पुलिस और पीड़ित परिवार के बीच सड़क पर हुए इस हाई-वोल्टेज हंगामे ने सीधे तौर पर शाहाबाद सीओ सर्कल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, खासकर सीओ पद पर तैनात आईपीएस आलोक राज नारायण की कार्यशैली पर। क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि उनके कार्यकाल में शाहाबाद सीओ सर्कल लगातार विवादों, बढ़ते अपराधों और पुलिस की आक्रामक कार्यशैली को लेकर चर्चा में रहा है। लोगों का कहना है कि शाहाबाद के इतिहास में पहली बार सीओ कार्यालय और सीओ पेशी की छवि इतनी अधिक विवादित और बदनाम दिखाई दे रही है। आईपीएस के 'सिंघम' मॉडल पर भी सवाल उठे हैं, जैसे कि ट्रक सीजिंग में सख्ती दिखती है, लेकिन नशा, खनन, डकैती और माफियाओं पर चुप्पी क्यों है? ओवरलोड ट्रकों पर कार्रवाई होती है, लेकिन गांजा, स्मैक और चरस तस्करी के बड़े नेटवर्क आज तक नहीं टूटे। सीओ पेशी कार्यालय के पीछे तक गांजा बिक्री की चर्चाओं के बावजूद निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? शिकायतकर्ताओं के अनुसार, बड़े अपराधों और खनन मामलों में फोन तक रिसीव नहीं होते, जबकि सड़क पर आम लोगों से भिड़ंत की तस्वीरें वायरल हो जाती हैं। मलकापुर डकैती जैसे मामलों में दूसरे जिले की पुलिस को खुलासा करना पड़ा, जिससे स्थानीय खुफिया और अपराध नियंत्रण तंत्र की भूमिका पर प्रश्नचिह्न लगता है। खनन माफियाओं, भूमाफियाओं, जुआ-सट्टा और अवैध नशा कारोबार पर वैसी 'सिंघम स्टाइल' कार्रवाई क्यों नहीं दिखी, जैसी ट्रक सीजिंग में दिखाई गई?

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब सीओ कार्यालय के ठीक बाहर ही हालात नियंत्रित नहीं रह पा रहे हैं, तो पूरे सर्किल की कानून व्यवस्था आखिर किस भरोसे चल रही है? घटना के बाद इलाके में पुलिस की कार्यशैली को लेकर नाराजगी और चर्चा दोनों तेज हो गई हैं।
    user_OmdevDixit (Pappu Dixit)
    OmdevDixit (Pappu Dixit)
    Farmer हरदोई, हरदोई, उत्तर प्रदेश•
    13 hrs ago
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