करेली क्षेत्र की दशा और दिशा बदलने वाली महत्वाकांक्षी छिंदवाड़ा-करेली-सागर रेल लाइन के निर्माण की मांग क्षेत्रवासी दशकों से कर रहे हैं। इस परियोजना का सर्वे कार्य वर्षों पूर्व पूरा हो चुका है और अब इसे अमलीजामा पहनाने की जरूरत है। इसी क्रम में, शनिवार सुबह मध्य प्रदेश के परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह के गृह ग्राम लोलरी स्थित आवास पर तेंदूखेड़ा एवं करेली क्षेत्र के जागरूक लोगों ने माननीय मंत्री जी से इस रेल लाइन निर्माण हेतु सक्रिय पहल करने का आग्रह किया। मंत्री श्री राव ने इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सांसद रहते हुए उन्होंने इस परियोजना के लिए हरसंभव प्रयास किए थे और भविष्य में उसकी मेहनत के सुखद परिणाम आएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि यह एक बड़ी परियोजना है जिसमें अनेक व्यवहारिक कठिनाइयां होती हैं, जिसके कारण ऐसी परियोजनाओं को मूर्तरूप लेने में समय लगता है। मंत्री की इस प्रतिक्रिया के बाद एक बार फिर छिंदवाड़ा-करेली-सागर रेल लाइन निर्माण को लेकर लोगों में आशा जगी है। उक्त रेल लाइन के निर्माण से जहां उत्तर से दक्षिण की दूरी कम होगी, वहीं क्षेत्र के विकास के द्वार भी खुलेंगे। नरसिंहपुर जिले के करेली से छिंदवाड़ा होते हुए सागर जाने वाली इस रेलवे लाइन का सर्वे पूरा हो चुका है, जिसमें कुल 28 रेलवे स्टेशन बनने हैं। 279.37 किलोमीटर की इस लाइन पर छिंदवाड़ा, करेली, मकरोनिया और सागर ये 4 रेलवे स्टेशन पहले से बने हुए हैं, जबकि 24 नए स्टेशन बनने हैं। यह सर्वे रेलवे की पिंक बुक में दर्ज है और इसका नया डीपीआर भी बन गया है, जिस पर केवल बजट का आवंटन शेष है। 1970 से इस प्रस्तावित रेल लाइन की मांग की जा रही है और संसद में भी जन प्रतिनिधियों द्वारा इसे कई बार उठाया गया है। यह मार्ग गोंडवाना और बुंदेलखंड के विकास के लिए नए द्वार खोलेगा तथा सागर, दमोह, होशंगाबाद और छिंदवाड़ा संसदीय क्षेत्रों के शहरी और ग्रामीण अंचल से होकर गुजरेगा, जो विकास में मील का पत्थर साबित होगा। इस मार्ग के बनने से नागपुर के रास्ते दक्षिण जाने और राजधानी दिल्ली की दूरी भी कम हो जाएगी; वर्तमान में नरसिंहपुर से नागपुर पहुंचने में 12 घंटे लगते हैं, जो इस लाइन के बनने के बाद मात्र 3 घंटे लगेंगे। सतपुड़ा बुंदेलखंड अंचल देश में रेल सुविधाओं में सबसे ज्यादा पिछड़ा हुआ है, जहां देश की 5 प्रतिशत आबादी होने के बावजूद कुल रेल लाइनों का एक प्रतिशत भी नहीं है। यह रेलमार्ग उत्तर भारत में राजधानी दिल्ली और दक्षिण भारत में चेन्नई-कन्याकुमारी के बीच की लंबी दूरी को कम करेगा और 5000 से भी अधिक गांवों को सीधे महानगरों से जोड़ेगा, जिससे नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
करेली क्षेत्र की दशा और दिशा बदलने वाली महत्वाकांक्षी छिंदवाड़ा-करेली-सागर रेल लाइन के निर्माण की मांग क्षेत्रवासी दशकों से कर रहे हैं। इस परियोजना का सर्वे कार्य वर्षों पूर्व पूरा हो चुका है और अब इसे अमलीजामा पहनाने की जरूरत है। इसी क्रम में, शनिवार सुबह मध्य प्रदेश के परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह के गृह ग्राम लोलरी स्थित आवास पर तेंदूखेड़ा एवं करेली क्षेत्र के जागरूक लोगों ने माननीय मंत्री जी से इस रेल लाइन निर्माण हेतु सक्रिय पहल करने का आग्रह किया। मंत्री श्री राव ने इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सांसद रहते हुए उन्होंने इस परियोजना के लिए हरसंभव प्रयास किए थे और भविष्य में उसकी मेहनत के सुखद परिणाम आएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि यह एक बड़ी परियोजना है जिसमें अनेक व्यवहारिक कठिनाइयां होती हैं, जिसके कारण ऐसी परियोजनाओं को मूर्तरूप लेने में समय लगता है। मंत्री की इस प्रतिक्रिया के बाद एक बार फिर छिंदवाड़ा-करेली-सागर रेल लाइन निर्माण को लेकर लोगों में आशा जगी है। उक्त रेल लाइन के निर्माण से जहां उत्तर से दक्षिण की दूरी कम होगी, वहीं क्षेत्र के विकास के द्वार भी खुलेंगे। नरसिंहपुर जिले के करेली से छिंदवाड़ा होते हुए सागर जाने वाली इस रेलवे लाइन का सर्वे पूरा हो चुका है, जिसमें कुल 28 रेलवे स्टेशन बनने हैं। 279.37 किलोमीटर की इस लाइन पर छिंदवाड़ा, करेली, मकरोनिया और सागर ये 4 रेलवे स्टेशन पहले से बने हुए हैं, जबकि 24 नए स्टेशन बनने हैं। यह सर्वे रेलवे की पिंक बुक में दर्ज है और इसका नया डीपीआर भी बन गया है, जिस पर केवल बजट का आवंटन शेष है। 1970 से इस प्रस्तावित रेल लाइन की मांग की जा रही है और संसद में भी जन प्रतिनिधियों द्वारा इसे कई बार उठाया गया है। यह मार्ग गोंडवाना और बुंदेलखंड के विकास के लिए नए द्वार खोलेगा तथा सागर, दमोह, होशंगाबाद और छिंदवाड़ा संसदीय क्षेत्रों के शहरी और ग्रामीण अंचल से होकर गुजरेगा, जो विकास में मील का पत्थर साबित होगा। इस मार्ग के बनने से नागपुर के रास्ते दक्षिण जाने और राजधानी दिल्ली की दूरी भी कम हो जाएगी; वर्तमान में नरसिंहपुर से नागपुर पहुंचने में 12 घंटे लगते हैं, जो इस लाइन के बनने के बाद मात्र 3 घंटे लगेंगे। सतपुड़ा बुंदेलखंड अंचल देश में रेल सुविधाओं में सबसे ज्यादा पिछड़ा हुआ है, जहां देश की 5 प्रतिशत आबादी होने के बावजूद कुल रेल लाइनों का एक प्रतिशत भी नहीं है। यह रेलमार्ग उत्तर भारत में राजधानी दिल्ली और दक्षिण भारत में चेन्नई-कन्याकुमारी के बीच की लंबी दूरी को कम करेगा और 5000 से भी अधिक गांवों को सीधे महानगरों से जोड़ेगा, जिससे नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
- मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में एक गेहूं खरीदी केंद्र पर अनियमितता का मामला सामने आया है। यहां एक कर्मचारी का रिश्वत लेते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो वायरल होने के बाद, संबंधित कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।1
- नरसिंहपुर के रेलवे हॉस्पिटल में मलेरिया दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हॉस्पिटल का समस्त स्टाफ मौजूद रहा, और सभी ने कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।1
- साझा किए गए एक विचार में यह सलाह दी गई है कि जीवन में कुछ लोगों को छोड़ देना अत्यंत आवश्यक होता है। इस संदेश के अनुसार, ऐसा इसलिए ज़रूरी है क्योंकि यदि उन लोगों को नहीं छोड़ा जाता है, तो वे आपको कहीं का नहीं छोड़ेंगे, जिसका अर्थ है कि वे आपको किसी भी स्थिति में स्थिर या संतुष्ट नहीं रहने देंगे।1
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- Post by Sourabh Kumar nath1
- कैबिनेट मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कि ग्रह ग्राम लोलरी में क्षेत्रीय जनों से मुलाकात1
- पिपरिया में एक इलेक्ट्रॉनिक व्यापारी से ₹5,00,000 (पाँच लाख रुपये) की रंगदारी मांगने का मामला सामने आया है। यह मांग व्यापारी से की गई रंगदारी से संबंधित है।1
- नरसिंहपुर के गाडरवारा से एक वीडियो सामने आया है, जिसमें दो पक्षों के बीच हुए झगड़े से इलाके में सनसनी फैल गई। इस विवाद में एक पक्ष के चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिनके सिर में गंभीर चोटें आई हैं। घायलों को तत्काल गाडरवारा सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। मिली जानकारी के अनुसार, यह विवाद गाडरवारा क्षेत्र के ककरा रोड स्थित शक्कर नदी पुल के पास एक खाली पड़े प्लॉट पर अवैध कब्जे को लेकर शुरू हुआ था। बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच लाठी-डंडे चलने लगे, जिसके बाद विवाद ने खूनी संघर्ष का रूप ले लिया। इस हमले में एक ही परिवार के चार लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका उपचार गाडरवारा के सरकारी अस्पताल में किया जा रहा है।1