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नरसिंहपुर के रेलवे हॉस्पिटल में मलेरिया दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हॉस्पिटल का समस्त स्टाफ मौजूद रहा, और सभी ने कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
Satish Vishwakarma
नरसिंहपुर के रेलवे हॉस्पिटल में मलेरिया दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हॉस्पिटल का समस्त स्टाफ मौजूद रहा, और सभी ने कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
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- नरसिंहपुर के रेलवे हॉस्पिटल में मलेरिया दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हॉस्पिटल का समस्त स्टाफ मौजूद रहा, और सभी ने कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।1
- मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के कुछ गांवों में जल संकट को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। इसी आक्रोश के चलते इन गांवों के निवासियों ने आगामी चुनावों के बहिष्कार का ऐलान कर दिया है, साथ ही 'पानी नहीं तो वोट नहीं' का स्पष्ट नारा दिया है। ग्रामीणों ने यह भी संकेत दिए हैं कि उनकी इस समस्या पर ध्यान न देने वाले नेताओं को इन गांवों में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।1
- एक युवती ने इंस्टाग्राम पर अपने सुसाइड का एक वीडियो वायरल किया था। इस मामले की जानकारी सामने आने पर पुलिस ने तत्काल इसका संज्ञान लिया।1
- मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में, विशेषकर बिजौरा सहित करीब 42 गांवों में भीषण पेयजल संकट बना हुआ है। विकास के बड़े-बड़े दावों के बावजूद, ये गाँव बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं, जिससे ग्रामीण प्रशासनिक उपेक्षा से नाराज होकर आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। ग्रामीणों ने ग्राम सभा में सर्वसम्मति से निर्णय लेते हुए स्पष्ट कर दिया है कि "जब तक गांव में नर्मदा का पानी नहीं आएगा, तब तक वोट नहीं दिया जाएगा।" स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यह समस्या हर साल मार्च में शुरू होकर जुलाई तक चलती है, जब कुएं, बावड़ी और हैंडपंप सूखने लगते हैं। वर्तमान में अधिकांश हैंडपंप पूरी तरह से सूख चुके हैं, और जिनसे पानी आ भी रहा है, उनसे दूषित और मटमैला पानी निकल रहा है। हालात इतने बदतर हैं कि हजार-हजार फीट तक गहरे बोर कराने के बावजूद पाताल में भी पानी नहीं मिल रहा है। इस भीषण गर्मी में घर की महिलाएं और बच्चे चिलचिलाती धूप में कई किलोमीटर पैदल चलकर पानी लाने को मजबूर हैं, जिससे उनकी आजीविका और बच्चों की पढ़ाई पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। शासन-प्रशासन के रवैये से आक्रोशित ग्रामीणों ने अब गांधीवादी तरीके से विरोध दर्ज कराने का फैसला किया है। ग्राम सभा में पारित प्रस्ताव के अनुसार, वे आगामी पंचायत चुनावों से लेकर विधानसभा और लोकसभा चुनावों तक मतदान का पूर्ण बहिष्कार करेंगे। इसके साथ ही, जब तक मां नर्मदा का जल हर घर तक स्थायी रूप से नहीं पहुंचता, तब तक किसी भी राजनीतिक दल के नेता को गांव में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा, जिसके लिए गांव की सीमाओं पर नेताओं की नो-एंट्री के बोर्ड लगाने की तैयारी की जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि नेता केवल चुनाव के समय वोट मांगने आते हैं और बड़े-बड़े वादे करके चले जाते हैं, लेकिन जीतने के बाद जनता को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है। उन्होंने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से केवल अस्थायी टैंकर वाले समाधान की बजाय, नर्मदा पाइपलाइन जैसी कोई स्थायी योजना लाकर इन 42 गांवों के जल संकट को हमेशा के लिए खत्म करने की मांग की है।4
- सिसोदिया ने बयान दिया है कि पंजाब की जनता ने मान सरकार के कार्यकाल के दौरान किए गए कार्यों का स्पष्ट रूप से समर्थन किया है।1
- नरसिंहपुर जिले के तेंदूखेड़ा के समीप भामा गाँव में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक सांड पानी की टंकी पर चढ़ गया। इन दिनों ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे ही कुछ अजीबोगरीब वाकये देखने को मिल रहे हैं, और इसी कड़ी में यह घटना हुई है। सांड के टंकी पर चढ़ जाने के बाद अब ग्रामीण उसे नीचे उतारने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। ग्रामीण इस बात को लेकर उलझन में हैं कि आखिर सांड को सुरक्षित नीचे कैसे लाया जाए, और इस संबंध में उधेड़बुन लगातार जारी है।1
- नरसिंहपुर जिले के तेंदूखेड़ा क्षेत्र के भामा गांव में उस समय सनसनी फैल गई, जब ग्रामीणों ने गांव में घूम रहे एक आवारा सांड को पानी की टंकी पर चढ़ा हुआ देखा। इस घटना को देखकर बड़ी संख्या में गांव के लोग पानी की टंकी के नीचे एकत्रित हो गए। ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना प्रशासनिक अधिकारियों को दी, जिन्हें मौके पर बुलाया गया। इसके बाद, आवारा सांड को पानी की टंकी से सुरक्षित नीचे उतारने के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं और ये प्रयास अभी भी जारी हैं।1
- पिपरिया में एक इलेक्ट्रॉनिक व्यापारी से ₹5,00,000 (पाँच लाख रुपये) की रंगदारी मांगने का मामला सामने आया है। यह मांग व्यापारी से की गई रंगदारी से संबंधित है।1