मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में, विशेषकर बिजौरा सहित करीब 42 गांवों में भीषण पेयजल संकट बना हुआ है। विकास के बड़े-बड़े दावों के बावजूद, ये गाँव बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं, जिससे ग्रामीण प्रशासनिक उपेक्षा से नाराज होकर आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। ग्रामीणों ने ग्राम सभा में सर्वसम्मति से निर्णय लेते हुए स्पष्ट कर दिया है कि "जब तक गांव में नर्मदा का पानी नहीं आएगा, तब तक वोट नहीं दिया जाएगा।" स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यह समस्या हर साल मार्च में शुरू होकर जुलाई तक चलती है, जब कुएं, बावड़ी और हैंडपंप सूखने लगते हैं। वर्तमान में अधिकांश हैंडपंप पूरी तरह से सूख चुके हैं, और जिनसे पानी आ भी रहा है, उनसे दूषित और मटमैला पानी निकल रहा है। हालात इतने बदतर हैं कि हजार-हजार फीट तक गहरे बोर कराने के बावजूद पाताल में भी पानी नहीं मिल रहा है। इस भीषण गर्मी में घर की महिलाएं और बच्चे चिलचिलाती धूप में कई किलोमीटर पैदल चलकर पानी लाने को मजबूर हैं, जिससे उनकी आजीविका और बच्चों की पढ़ाई पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। शासन-प्रशासन के रवैये से आक्रोशित ग्रामीणों ने अब गांधीवादी तरीके से विरोध दर्ज कराने का फैसला किया है। ग्राम सभा में पारित प्रस्ताव के अनुसार, वे आगामी पंचायत चुनावों से लेकर विधानसभा और लोकसभा चुनावों तक मतदान का पूर्ण बहिष्कार करेंगे। इसके साथ ही, जब तक मां नर्मदा का जल हर घर तक स्थायी रूप से नहीं पहुंचता, तब तक किसी भी राजनीतिक दल के नेता को गांव में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा, जिसके लिए गांव की सीमाओं पर नेताओं की नो-एंट्री के बोर्ड लगाने की तैयारी की जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि नेता केवल चुनाव के समय वोट मांगने आते हैं और बड़े-बड़े वादे करके चले जाते हैं, लेकिन जीतने के बाद जनता को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है। उन्होंने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से केवल अस्थायी टैंकर वाले समाधान की बजाय, नर्मदा पाइपलाइन जैसी कोई स्थायी योजना लाकर इन 42 गांवों के जल संकट को हमेशा के लिए खत्म करने की मांग की है।
मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में, विशेषकर बिजौरा सहित करीब 42 गांवों में भीषण पेयजल संकट बना हुआ है। विकास के बड़े-बड़े दावों के बावजूद, ये गाँव बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं, जिससे ग्रामीण प्रशासनिक उपेक्षा से नाराज होकर आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। ग्रामीणों ने ग्राम सभा में सर्वसम्मति से निर्णय लेते हुए स्पष्ट कर दिया है कि "जब तक गांव में नर्मदा का पानी नहीं आएगा, तब तक वोट नहीं दिया जाएगा।" स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यह समस्या हर साल
मार्च में शुरू होकर जुलाई तक चलती है, जब कुएं, बावड़ी और हैंडपंप सूखने लगते हैं। वर्तमान में अधिकांश हैंडपंप पूरी तरह से सूख चुके हैं, और जिनसे पानी आ भी रहा है, उनसे दूषित और मटमैला पानी निकल रहा है। हालात इतने बदतर हैं कि हजार-हजार फीट तक गहरे बोर कराने के बावजूद पाताल में भी पानी नहीं मिल रहा है। इस भीषण गर्मी में घर की महिलाएं और बच्चे चिलचिलाती धूप में कई किलोमीटर पैदल चलकर पानी लाने को मजबूर हैं, जिससे उनकी आजीविका और
बच्चों की पढ़ाई पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। शासन-प्रशासन के रवैये से आक्रोशित ग्रामीणों ने अब गांधीवादी तरीके से विरोध दर्ज कराने का फैसला किया है। ग्राम सभा में पारित प्रस्ताव के अनुसार, वे आगामी पंचायत चुनावों से लेकर विधानसभा और लोकसभा चुनावों तक मतदान का पूर्ण बहिष्कार करेंगे। इसके साथ ही, जब तक मां नर्मदा का जल हर घर तक स्थायी रूप से नहीं पहुंचता, तब तक किसी भी राजनीतिक दल के नेता को गांव में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा, जिसके लिए गांव की
सीमाओं पर नेताओं की नो-एंट्री के बोर्ड लगाने की तैयारी की जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि नेता केवल चुनाव के समय वोट मांगने आते हैं और बड़े-बड़े वादे करके चले जाते हैं, लेकिन जीतने के बाद जनता को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है। उन्होंने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से केवल अस्थायी टैंकर वाले समाधान की बजाय, नर्मदा पाइपलाइन जैसी कोई स्थायी योजना लाकर इन 42 गांवों के जल संकट को हमेशा के लिए खत्म करने की मांग की है।
- एक्सप्रेस एमपी सीजी न्यूज़ द्वारा सुर्खियां प्रस्तुत की गई हैं।1
- एक युवती ने इंस्टाग्राम पर अपने सुसाइड का एक वीडियो वायरल किया था। इस मामले की जानकारी सामने आने पर पुलिस ने तत्काल इसका संज्ञान लिया।1
- नरसिंहपुर के रेलवे हॉस्पिटल में मलेरिया दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हॉस्पिटल का समस्त स्टाफ मौजूद रहा, और सभी ने कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।1
- मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के कुछ गांवों में जल संकट को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। इसी आक्रोश के चलते इन गांवों के निवासियों ने आगामी चुनावों के बहिष्कार का ऐलान कर दिया है, साथ ही 'पानी नहीं तो वोट नहीं' का स्पष्ट नारा दिया है। ग्रामीणों ने यह भी संकेत दिए हैं कि उनकी इस समस्या पर ध्यान न देने वाले नेताओं को इन गांवों में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।1
- नरसिंहपुर जिले के तेंदूखेड़ा क्षेत्र के भामा गांव में उस समय सनसनी फैल गई, जब ग्रामीणों ने गांव में घूम रहे एक आवारा सांड को पानी की टंकी पर चढ़ा हुआ देखा। इस घटना को देखकर बड़ी संख्या में गांव के लोग पानी की टंकी के नीचे एकत्रित हो गए। ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना प्रशासनिक अधिकारियों को दी, जिन्हें मौके पर बुलाया गया। इसके बाद, आवारा सांड को पानी की टंकी से सुरक्षित नीचे उतारने के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं और ये प्रयास अभी भी जारी हैं।1
- नरसिंहपुर जिले की गाडरवारा तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम ललवानी में पेयजल व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि नल-जल योजना के तहत घरों तक पहुंचाया जा रहा पानी गंदा और दूषित है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। उनके अनुसार, सप्लाई होने वाले पानी में लगातार मिट्टी, कचरा और दुर्गंध की शिकायतें मिल रही हैं। गाडरवारा के ग्रामीण क्षेत्र में गंदे पानी की इस सप्लाई को लेकर लोगों ने संबंधित अधिकारियों से गुहार लगाई है।1
- नरसिंहपुर जिले में एक व्यक्ति ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत की है, जिसमें उसने बताया है कि शराब के लिए पैसे न देने पर उसका साला उसके साथ गाली-गलौज करता है। इस संबंध में पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई है।1
- नरसिंहपुर के गाडरवारा से एक वीडियो सामने आया है, जिसमें दो पक्षों के बीच हुए झगड़े से इलाके में सनसनी फैल गई। इस विवाद में एक पक्ष के चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिनके सिर में गंभीर चोटें आई हैं। घायलों को तत्काल गाडरवारा सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। मिली जानकारी के अनुसार, यह विवाद गाडरवारा क्षेत्र के ककरा रोड स्थित शक्कर नदी पुल के पास एक खाली पड़े प्लॉट पर अवैध कब्जे को लेकर शुरू हुआ था। बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच लाठी-डंडे चलने लगे, जिसके बाद विवाद ने खूनी संघर्ष का रूप ले लिया। इस हमले में एक ही परिवार के चार लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका उपचार गाडरवारा के सरकारी अस्पताल में किया जा रहा है।1