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सिसोदिया ने बयान दिया है कि पंजाब की जनता ने मान सरकार के कार्यकाल के दौरान किए गए कार्यों का स्पष्ट रूप से समर्थन किया है।

15 hrs ago
user_पं. सतीश लबानिया
पं. सतीश लबानिया
गाडरवारा, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश•
15 hrs ago

सिसोदिया ने बयान दिया है कि पंजाब की जनता ने मान सरकार के कार्यकाल के दौरान किए गए कार्यों का स्पष्ट रूप से समर्थन किया है।

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • सिसोदिया ने बयान दिया है कि पंजाब की जनता ने मान सरकार के कार्यकाल के दौरान किए गए कार्यों का स्पष्ट रूप से समर्थन किया है।
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    सिसोदिया ने बयान दिया है कि पंजाब की जनता ने मान सरकार के कार्यकाल के दौरान किए गए कार्यों का स्पष्ट रूप से समर्थन किया है।
    user_पं. सतीश लबानिया
    पं. सतीश लबानिया
    गाडरवारा, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश•
    15 hrs ago
  • नरसिंहपुर के रेलवे हॉस्पिटल में मलेरिया दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हॉस्पिटल का समस्त स्टाफ मौजूद रहा, और सभी ने कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
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    नरसिंहपुर के रेलवे हॉस्पिटल में मलेरिया दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हॉस्पिटल का समस्त स्टाफ मौजूद रहा, और सभी ने कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
    user_Satish Vishwakarma
    Satish Vishwakarma
    Photographer करेली, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के कुछ गांवों में जल संकट को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। इसी आक्रोश के चलते इन गांवों के निवासियों ने आगामी चुनावों के बहिष्कार का ऐलान कर दिया है, साथ ही 'पानी नहीं तो वोट नहीं' का स्पष्ट नारा दिया है। ग्रामीणों ने यह भी संकेत दिए हैं कि उनकी इस समस्या पर ध्यान न देने वाले नेताओं को इन गांवों में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।
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    मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के कुछ गांवों में जल संकट को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। इसी आक्रोश के चलते इन गांवों के निवासियों ने आगामी चुनावों के बहिष्कार का ऐलान कर दिया है, साथ ही 'पानी नहीं तो वोट नहीं' का स्पष्ट नारा दिया है। ग्रामीणों ने यह भी संकेत दिए हैं कि उनकी इस समस्या पर ध्यान न देने वाले नेताओं को इन गांवों में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।
    user_कृष्णकांत प्रदीप शर्मा करेली
    कृष्णकांत प्रदीप शर्मा करेली
    Electrician करेली, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश•
    16 hrs ago
  • नरसिंहपुर जिले के तेंदूखेड़ा के समीप भामा गाँव में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक सांड पानी की टंकी पर चढ़ गया। इन दिनों ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे ही कुछ अजीबोगरीब वाकये देखने को मिल रहे हैं, और इसी कड़ी में यह घटना हुई है। सांड के टंकी पर चढ़ जाने के बाद अब ग्रामीण उसे नीचे उतारने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। ग्रामीण इस बात को लेकर उलझन में हैं कि आखिर सांड को सुरक्षित नीचे कैसे लाया जाए, और इस संबंध में उधेड़बुन लगातार जारी है।
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    नरसिंहपुर जिले के तेंदूखेड़ा के समीप भामा गाँव में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक सांड पानी की टंकी पर चढ़ गया। इन दिनों ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे ही कुछ अजीबोगरीब वाकये देखने को मिल रहे हैं, और इसी कड़ी में यह घटना हुई है। सांड के टंकी पर चढ़ जाने के बाद अब ग्रामीण उसे नीचे उतारने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। ग्रामीण इस बात को लेकर उलझन में हैं कि आखिर सांड को सुरक्षित नीचे कैसे लाया जाए, और इस संबंध में उधेड़बुन लगातार जारी है।
    user_Dharmendra sahu
    Dharmendra sahu
    Photographer तेंदूखेड़ा, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश•
    16 hrs ago
  • एक युवती ने इंस्टाग्राम पर अपने सुसाइड का एक वीडियो वायरल किया था। इस मामले की जानकारी सामने आने पर पुलिस ने तत्काल इसका संज्ञान लिया।
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    एक युवती ने इंस्टाग्राम पर अपने सुसाइड का एक वीडियो वायरल किया था। इस मामले की जानकारी सामने आने पर पुलिस ने तत्काल इसका संज्ञान लिया।
    user_पंकज गुप्ता "पत्रकार"
    पंकज गुप्ता "पत्रकार"
    Advertising agency नरसिंहपुर, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश•
    15 hrs ago
  • मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में, विशेषकर बिजौरा सहित करीब 42 गांवों में भीषण पेयजल संकट बना हुआ है। विकास के बड़े-बड़े दावों के बावजूद, ये गाँव बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं, जिससे ग्रामीण प्रशासनिक उपेक्षा से नाराज होकर आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। ग्रामीणों ने ग्राम सभा में सर्वसम्मति से निर्णय लेते हुए स्पष्ट कर दिया है कि "जब तक गांव में नर्मदा का पानी नहीं आएगा, तब तक वोट नहीं दिया जाएगा।" स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यह समस्या हर साल मार्च में शुरू होकर जुलाई तक चलती है, जब कुएं, बावड़ी और हैंडपंप सूखने लगते हैं। वर्तमान में अधिकांश हैंडपंप पूरी तरह से सूख चुके हैं, और जिनसे पानी आ भी रहा है, उनसे दूषित और मटमैला पानी निकल रहा है। हालात इतने बदतर हैं कि हजार-हजार फीट तक गहरे बोर कराने के बावजूद पाताल में भी पानी नहीं मिल रहा है। इस भीषण गर्मी में घर की महिलाएं और बच्चे चिलचिलाती धूप में कई किलोमीटर पैदल चलकर पानी लाने को मजबूर हैं, जिससे उनकी आजीविका और बच्चों की पढ़ाई पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। शासन-प्रशासन के रवैये से आक्रोशित ग्रामीणों ने अब गांधीवादी तरीके से विरोध दर्ज कराने का फैसला किया है। ग्राम सभा में पारित प्रस्ताव के अनुसार, वे आगामी पंचायत चुनावों से लेकर विधानसभा और लोकसभा चुनावों तक मतदान का पूर्ण बहिष्कार करेंगे। इसके साथ ही, जब तक मां नर्मदा का जल हर घर तक स्थायी रूप से नहीं पहुंचता, तब तक किसी भी राजनीतिक दल के नेता को गांव में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा, जिसके लिए गांव की सीमाओं पर नेताओं की नो-एंट्री के बोर्ड लगाने की तैयारी की जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि नेता केवल चुनाव के समय वोट मांगने आते हैं और बड़े-बड़े वादे करके चले जाते हैं, लेकिन जीतने के बाद जनता को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है। उन्होंने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से केवल अस्थायी टैंकर वाले समाधान की बजाय, नर्मदा पाइपलाइन जैसी कोई स्थायी योजना लाकर इन 42 गांवों के जल संकट को हमेशा के लिए खत्म करने की मांग की है।
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    मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में, विशेषकर बिजौरा सहित करीब 42 गांवों में भीषण पेयजल संकट बना हुआ है। विकास के बड़े-बड़े दावों के बावजूद, ये गाँव बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं, जिससे ग्रामीण प्रशासनिक उपेक्षा से नाराज होकर आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। ग्रामीणों ने ग्राम सभा में सर्वसम्मति से निर्णय लेते हुए स्पष्ट कर दिया है कि "जब तक गांव में नर्मदा का पानी नहीं आएगा, तब तक वोट नहीं दिया जाएगा।"

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यह समस्या हर साल मार्च में शुरू होकर जुलाई तक चलती है, जब कुएं, बावड़ी और हैंडपंप सूखने लगते हैं। वर्तमान में अधिकांश हैंडपंप पूरी तरह से सूख चुके हैं, और जिनसे पानी आ भी रहा है, उनसे दूषित और मटमैला पानी निकल रहा है। हालात इतने बदतर हैं कि हजार-हजार फीट तक गहरे बोर कराने के बावजूद पाताल में भी पानी नहीं मिल रहा है। इस भीषण गर्मी में घर की महिलाएं और बच्चे चिलचिलाती धूप में कई किलोमीटर पैदल चलकर पानी लाने को मजबूर हैं, जिससे उनकी आजीविका और बच्चों की पढ़ाई पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।

शासन-प्रशासन के रवैये से आक्रोशित ग्रामीणों ने अब गांधीवादी तरीके से विरोध दर्ज कराने का फैसला किया है। ग्राम सभा में पारित प्रस्ताव के अनुसार, वे आगामी पंचायत चुनावों से लेकर विधानसभा और लोकसभा चुनावों तक मतदान का पूर्ण बहिष्कार करेंगे। इसके साथ ही, जब तक मां नर्मदा का जल हर घर तक स्थायी रूप से नहीं पहुंचता, तब तक किसी भी राजनीतिक दल के नेता को गांव में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा, जिसके लिए गांव की सीमाओं पर नेताओं की नो-एंट्री के बोर्ड लगाने की तैयारी की जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि नेता केवल चुनाव के समय वोट मांगने आते हैं और बड़े-बड़े वादे करके चले जाते हैं, लेकिन जीतने के बाद जनता को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है। उन्होंने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से केवल अस्थायी टैंकर वाले समाधान की बजाय, नर्मदा पाइपलाइन जैसी कोई स्थायी योजना लाकर इन 42 गांवों के जल संकट को हमेशा के लिए खत्म करने की मांग की है।
    user_पत्रकार आशीष कुमार दुबे
    पत्रकार आशीष कुमार दुबे
    Media and information sciences faculty नरसिंहपुर, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश•
    15 hrs ago
  • सतधारा बरमान क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण पर्यटकों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार, यहां न तो कोई उचित नाली व्यवस्था है, न ही कचरा निपटान के लिए कोई कचरा घर और न ही कोई कॉम्प्लेक्स मौजूद है। इन सुविधाओं की कमी के चलते वहां आने वाले पर्यटक अक्सर सड़क किनारे ही गंदगी फैलाते हैं। इस स्थिति को देखते हुए, संबंधित अधिकारियों से इस मामले पर जल्द से जल्द कार्रवाई करने की अपील की गई है, ताकि इस समस्या का समाधान हो सके।
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    सतधारा बरमान क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण पर्यटकों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार, यहां न तो कोई उचित नाली व्यवस्था है, न ही कचरा निपटान के लिए कोई कचरा घर और न ही कोई कॉम्प्लेक्स मौजूद है।

इन सुविधाओं की कमी के चलते वहां आने वाले पर्यटक अक्सर सड़क किनारे ही गंदगी फैलाते हैं। इस स्थिति को देखते हुए, संबंधित अधिकारियों से इस मामले पर जल्द से जल्द कार्रवाई करने की अपील की गई है, ताकि इस समस्या का समाधान हो सके।
    user_धर्मेंद्रयादव
    धर्मेंद्रयादव
    केसली, सागर, मध्य प्रदेश•
    23 hrs ago
  • मध्य प्रदेश ने गेहूं उपार्जन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है, जहां प्रदेश में किसानों से 104 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की रिकॉर्ड खरीदी की गई है। इस उल्लेखनीय प्रदर्शन के साथ, मध्य प्रदेश गेहूं उपार्जन के मामले में देश में प्रथम स्थान पर पहुँच गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस बात की जानकारी दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह भी बताया कि इस वर्ष लघु एवं सीमांत किसानों से प्राथमिकता के साथ गेहूं खरीदी का निर्णय लिया गया था, जिससे लाखों अन्नदाताओं को सीधा लाभ मिला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में मध्य प्रदेश सरकार किसान हित, कृषि विकास और और ग्रामीण समृद्धि के लिए निरंतर संकल्पित होकर कार्य कर रही है।
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    मध्य प्रदेश ने गेहूं उपार्जन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है, जहां प्रदेश में किसानों से 104 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की रिकॉर्ड खरीदी की गई है। इस उल्लेखनीय प्रदर्शन के साथ, मध्य प्रदेश गेहूं उपार्जन के मामले में देश में प्रथम स्थान पर पहुँच गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस बात की जानकारी दी है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह भी बताया कि इस वर्ष लघु एवं सीमांत किसानों से प्राथमिकता के साथ गेहूं खरीदी का निर्णय लिया गया था, जिससे लाखों अन्नदाताओं को सीधा लाभ मिला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में मध्य प्रदेश सरकार किसान हित, कृषि विकास और और ग्रामीण समृद्धि के लिए निरंतर संकल्पित होकर कार्य कर रही है।
    user_पं. सतीश लबानिया
    पं. सतीश लबानिया
    गाडरवारा, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश•
    15 hrs ago
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