भारतीय किसान यूनियन श्रमिक जनशक्ति के दीपक कुमार युवा जिला अध्यक्ष लखनऊ और आनंद कुमार के नेतृत्व में अंबेडकर जयंती मनाई गईडॉ. भीमराव अम्बेडकर: समानता के योद्धा परिचय 14 अप्रैल को भारत में बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर की जयंती मनाई जाती है। उनका जन्म 1891 में मध्य प्रदेश के महू में एक दलित परिवार में हुआ था। बचपन से ही छुआछूत और भेदभाव का सामना करने वाले अम्बेडकर ने शिक्षा के बल पर दुनिया को चुनौती दी। कोलंबिया और लंदन विश्वविद्यालय से डिग्री हासिल कर वे भारत के पहले विधिवेत्ता बने। संघर्ष की कहानी अम्बेडकर ने दलितों के अधिकारों के लिए जीवनभर लड़ाई लड़ी। 1927 में महाड सत्याग्रह में उन्होंने दलितों को सार्वजनिक तालाब से पानी पीने का हक दिलाया। पूना पैक्ट के जरिए उन्होंने दलितों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र की मांग की। स्वतंत्र भारत के संविधान सभा के अध्यक्ष बनकर उन्होंने 26 जनवरी 1950 को लागू होने वाला संविधान तैयार किया, जिसमें समानता, स्वतंत्रता और न्याय के सिद्धांत हैं। अनुच्छेद 14 से 18 तक छुआछूत को खत्म करने वाले प्रावधान इन्हीं की देन हैं। महान विरासत अम्बेडकर ने महिलाओं, मजदूरों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर भी जोर दिया। 1956 में नागपुर में लाखों लोगों के साथ बौद्ध धर्म अपनाकर उन्होंने अस्पृश्यता के खिलाफ एक बड़ा संदेश दिया। आज भी 'जय भीम' का नारा करोड़ों लोगों को प्रेरित करता है। उनकी किताबें जैसे 'अनिहिलेशन ऑफ कास्ट' और 'बुद्धा एंड हिज धम्मा' सामाजिक न्याय की मशाल जलाती हैं। आज का संदेश अम्बेडकर जयंती हमें याद दिलाती है कि शिक्षा ही सबसे बड़ा हथियार है। असमानता खत्म करने के लिए हमें उनके सपनों को साकार करना होगा।
भारतीय किसान यूनियन श्रमिक जनशक्ति के दीपक कुमार युवा जिला अध्यक्ष लखनऊ और आनंद कुमार के नेतृत्व में अंबेडकर जयंती मनाई गईडॉ. भीमराव अम्बेडकर: समानता के योद्धा परिचय 14 अप्रैल को भारत में बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर की जयंती मनाई जाती है। उनका जन्म 1891 में मध्य प्रदेश के महू में एक दलित परिवार में हुआ था। बचपन से ही छुआछूत और भेदभाव का सामना करने वाले अम्बेडकर ने शिक्षा के बल पर दुनिया को चुनौती दी। कोलंबिया और लंदन विश्वविद्यालय से डिग्री हासिल कर वे भारत के पहले विधिवेत्ता बने। संघर्ष की कहानी अम्बेडकर ने दलितों के अधिकारों के लिए जीवनभर लड़ाई लड़ी। 1927 में महाड सत्याग्रह में उन्होंने दलितों को सार्वजनिक तालाब से पानी पीने का हक दिलाया। पूना पैक्ट के जरिए उन्होंने दलितों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र की मांग की। स्वतंत्र भारत के संविधान सभा के अध्यक्ष बनकर उन्होंने 26 जनवरी 1950 को लागू होने वाला संविधान तैयार किया, जिसमें समानता, स्वतंत्रता और न्याय के सिद्धांत हैं। अनुच्छेद 14 से 18 तक छुआछूत को खत्म करने वाले प्रावधान इन्हीं की देन हैं। महान विरासत अम्बेडकर ने महिलाओं, मजदूरों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर भी जोर दिया। 1956 में नागपुर में लाखों लोगों के साथ बौद्ध धर्म अपनाकर उन्होंने अस्पृश्यता के खिलाफ एक बड़ा संदेश दिया। आज भी 'जय भीम' का नारा करोड़ों लोगों को प्रेरित करता है। उनकी किताबें जैसे 'अनिहिलेशन ऑफ कास्ट' और 'बुद्धा एंड हिज धम्मा' सामाजिक न्याय की मशाल जलाती हैं। आज का संदेश अम्बेडकर जयंती हमें याद दिलाती है कि शिक्षा ही सबसे बड़ा हथियार है। असमानता खत्म करने के लिए हमें उनके सपनों को साकार करना होगा।
- Unna news agencyनवाबगंज, बाराबंकी, उत्तर प्रदेश🙏7 hrs ago
- अध्यक्ष लखनऊ और आनंद कुमार के नेतृत्व में अंबेडकर जयंती मनाई गईडॉ. भीमराव अम्बेडकर: समानता के योद्धा परिचय 14 अप्रैल को भारत में बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर की जयंती मनाई जाती है। उनका जन्म 1891 में मध्य प्रदेश के महू में एक दलित परिवार में हुआ था। बचपन से ही छुआछूत और भेदभाव का सामना करने वाले अम्बेडकर ने शिक्षा के बल पर दुनिया को चुनौती दी। कोलंबिया और लंदन विश्वविद्यालय से डिग्री हासिल कर वे भारत के पहले विधिवेत्ता बने। संघर्ष की कहानी अम्बेडकर ने दलितों के अधिकारों के लिए जीवनभर लड़ाई लड़ी। 1927 में महाड सत्याग्रह में उन्होंने दलितों को सार्वजनिक तालाब से पानी पीने का हक दिलाया। पूना पैक्ट के जरिए उन्होंने दलितों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र की मांग की। स्वतंत्र भारत के संविधान सभा के अध्यक्ष बनकर उन्होंने 26 जनवरी 1950 को लागू होने वाला संविधान तैयार किया, जिसमें समानता, स्वतंत्रता और न्याय के सिद्धांत हैं। अनुच्छेद 14 से 18 तक छुआछूत को खत्म करने वाले प्रावधान इन्हीं की देन हैं। महान विरासत अम्बेडकर ने महिलाओं, मजदूरों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर भी जोर दिया। 1956 में नागपुर में लाखों लोगों के साथ बौद्ध धर्म अपनाकर उन्होंने अस्पृश्यता के खिलाफ एक बड़ा संदेश दिया। आज भी 'जय भीम' का नारा करोड़ों लोगों को प्रेरित करता है। उनकी किताबें जैसे 'अनिहिलेशन ऑफ कास्ट' और 'बुद्धा एंड हिज धम्मा' सामाजिक न्याय की मशाल जलाती हैं। आज का संदेश अम्बेडकर जयंती हमें याद दिलाती है कि शिक्षा ही सबसे बड़ा हथियार है। असमानता खत्म करने के लिए हमें उनके सपनों को साकार करना होगा।1
- Post by मोहित पासी ब्लॉक अध्यक्ष लाखन आर्मी1
- Post by Sandeep Pasi1
- #आदर्श_मीडिया_एसोसिएशन #trending #ambedkarjayanti #lucknow1
- प्रयागराज जिले के जारी गांव में डाक्टर भीमराव अम्बेडकर जयंती के अवसर पर भव्य रैली का आयोजन किया गया। इस मौके पर आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे जिससे पूरे क्षेत्र में उत्साह और उमंग का माहौल देखने को मिला। इस अवसर पर सांसद उज्वल रमण सिंह जी उपस्थित रहे और जनता को संबोधित किया। इस आयोजन में युवा, बुजुर्ग और सभी वर्गों के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए, जिससे कार्यक्रम बहुत ही भव्य और सफल रहा। पूरे कार्यक्रम के दौरान एकता, समानता और भाईचारे का संदेश दिया गया। कार्यक्रम को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने में जारी पुलिस प्रशासन का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके सहयोग और बेहतर व्यवस्था के कारण 14 अप्रैल का यह आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से सफलतापूर्वक पूरा हुआ।1
- लखनऊ एस आर ग्रुप ऑफ़ इंस्टिट्यूशन के चेयरमैन सदस्य विधान परिषद सीतापुर श्री पवन सिंह चौहान को आप बीती जग बीती न्यूज़ के ब्यूरो चीफ रामजी त्रिपाठी ने आगामी 17 मई को महिला सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने के लिए किया आमंत्रित श्री चौहान ने कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति दी1
- बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है, जहां लंबे समय से सत्ता में रहे Nitish Kumar के इस्तीफे के बाद अब नए नेतृत्व का रास्ता साफ हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने अपने वरिष्ठ नेता Samrat Choudhary को विधायक दल का नेता चुन लिया है, जिसके बाद उनके मुख्यमंत्री बनने की संभावना लगभग तय मानी जा रही है। जानकारी के मुताबिक, सम्राट चौधरी जल्द ही मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। इस घटनाक्रम को बिहार की राजनीति में बड़े सत्ता परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है, जिससे नए राजनीतिक समीकरण बनने की उम्मीद है। वहीं, चुनावी दौर में राजनीतिक रणनीतिकार Prashant Kishor द्वारा लगाए गए आरोपों और राजनीतिक बयानबाजी के बीच अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। राजनीतिक जानकार इसे राज्य की राजनीति में नए दौर की शुरुआत मान रहे हैं।1
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