आधुनिकता की मार से मिट्टी के बर्तन व्यवसाय पर संकट, कुम्हार समाज ने सरकार से लगाई गुहार आधुनिकता की मार से मिट्टी के बर्तन व्यवसाय पर संकट, कुम्हार समाज ने सरकार से लगाई गुहार डुमरी: डुमरी प्रखंड क्षेत्र में पारंपरिक मिट्टी के बर्तन बनाने का पुश्तैनी व्यवसाय अब अस्तित्व के संकट से गुजर रहा है। जानकारी देते हुए लावा बार डुमरी निवासी साजन कुम्हार ने बताया कि बदलते समय और आधुनिक बाजार व्यवस्था के कारण कुम्हार समाज की आजीविका पर गंभीर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक एवं चाइनीज उत्पादों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा, स्थानीय स्तर पर उचित बाजार की कमी, आधुनिकीकरण का अभाव और लगातार आर्थिक तंगी के कारण यह पारंपरिक व्यवसाय धीरे-धीरे समाप्ति की ओर बढ़ रहा है। साजन कुम्हार ने बताया कि पहले गांव के अधिकांश घरों में कुम्हार समाज के लोग अपने पूर्वजों से मिले इस पुरखौती पेशे से जुड़े रहते थे। शादी-विवाह, त्योहार, धार्मिक अनुष्ठान और दैनिक उपयोग के लिए मिट्टी के बर्तनों की भारी मांग हुआ करती थी, जिससे परिवारों का जीवनयापन सम्मानपूर्वक चलता था। लेकिन समय के साथ लोगों की जीवनशैली बदल गई और बाजार में सस्ते प्लास्टिक व मशीन से बने सामानों की भरमार हो गई, जिससे पारंपरिक कारीगरों की मेहनत और कला की कीमत घटती चली गई। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में पूरे क्षेत्र में मात्र छह से सात परिवार ही इस परंपरा को जीवित रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। युवा पीढ़ी भी आर्थिक असुरक्षा के कारण इस पेशे से दूरी बना रही है, जिससे आने वाले समय में यह कला पूरी तरह विलुप्त होने का खतरा पैदा हो गया है। कुम्हार समाज ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि आधुनिक उपकरण, प्रशिक्षण, आसान ऋण सुविधा, कच्चे माल की उपलब्धता और स्थायी बाजार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही स्थानीय मेलों, सरकारी योजनाओं और हस्तशिल्प प्रोत्साहन कार्यक्रमों में प्राथमिकता देकर इस पारंपरिक कला को संरक्षण दिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो सदियों पुरानी यह सांस्कृतिक विरासत इतिहास बनकर रह जाएगी। #गुमला #डुमरी #कुम्हारसमाज #मिट्टीकेबर्तन #पारंपरिककला #ग्रामीणरोजगार #झारखंडसमाचार #लोकलन्यूज #हुनरकीपहचान
आधुनिकता की मार से मिट्टी के बर्तन व्यवसाय पर संकट, कुम्हार समाज ने सरकार से लगाई गुहार आधुनिकता की मार से मिट्टी के बर्तन व्यवसाय पर संकट, कुम्हार समाज ने सरकार से लगाई गुहार डुमरी: डुमरी प्रखंड क्षेत्र में पारंपरिक मिट्टी के बर्तन बनाने का पुश्तैनी व्यवसाय अब अस्तित्व के संकट से गुजर रहा है। जानकारी देते हुए लावा बार डुमरी निवासी साजन कुम्हार ने बताया कि बदलते समय और आधुनिक बाजार व्यवस्था के कारण कुम्हार समाज की आजीविका पर गंभीर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक एवं चाइनीज उत्पादों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा, स्थानीय स्तर पर उचित बाजार की कमी, आधुनिकीकरण का अभाव और लगातार आर्थिक तंगी के कारण यह पारंपरिक व्यवसाय धीरे-धीरे समाप्ति की ओर बढ़ रहा है। साजन कुम्हार ने बताया कि पहले गांव के अधिकांश घरों में कुम्हार समाज के लोग अपने पूर्वजों से मिले इस पुरखौती पेशे से जुड़े रहते थे। शादी-विवाह, त्योहार, धार्मिक अनुष्ठान और दैनिक उपयोग के लिए मिट्टी के बर्तनों की भारी मांग हुआ करती थी, जिससे परिवारों का जीवनयापन सम्मानपूर्वक चलता था। लेकिन समय के साथ लोगों की जीवनशैली बदल गई और बाजार में सस्ते प्लास्टिक व मशीन से बने सामानों की भरमार हो गई, जिससे पारंपरिक कारीगरों की मेहनत और कला की कीमत घटती चली गई। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में पूरे क्षेत्र में मात्र छह से सात परिवार ही इस परंपरा को जीवित रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। युवा पीढ़ी भी आर्थिक असुरक्षा के कारण इस पेशे से दूरी बना रही है, जिससे आने वाले समय में यह कला पूरी तरह विलुप्त होने का खतरा पैदा हो गया है। कुम्हार समाज ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि आधुनिक उपकरण, प्रशिक्षण, आसान ऋण सुविधा, कच्चे माल की उपलब्धता और स्थायी बाजार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही स्थानीय मेलों, सरकारी योजनाओं और हस्तशिल्प प्रोत्साहन कार्यक्रमों में प्राथमिकता देकर इस पारंपरिक कला को संरक्षण दिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो सदियों पुरानी यह सांस्कृतिक विरासत इतिहास बनकर रह जाएगी। #गुमला #डुमरी #कुम्हारसमाज #मिट्टीकेबर्तन #पारंपरिककला #ग्रामीणरोजगार #झारखंडसमाचार #लोकलन्यूज #हुनरकीपहचान
- उदयपुर में सगाई के कुछ घंटों बाद युवक की सड़क हादसे में मौत#udaipurnews #udaipurpolice #roadaccident #jaivardhannews #rajsamand1
- Post by Ajaytete Good Mañana1
- गुमला सदर थाना क्षेत्र के टैसेरा मोड़ के पास गुरुवार रात ट्रैक्टर और बाइक की सीधी टक्कर में एक युवक की मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया। मृतक की पहचान अंबवा बेरटोली निवासी 32 वर्षीय अरविंद खड़िया के रूप में हुई है, जबकि घायल बंगरू पालकोट निवासी 30 वर्षीय पैरू बिलुंग है। जानकारी के अनुसार अरविंद खड़िया अपनी बाइक से पैरू बिलुंग को उसके घर छोड़ने के लिए बंगरू जा रहा था। इसी दौरान टैसेरा मोड़ के पास सामने से आ रहे ट्रैक्टर से उसकी बाइक की जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों बाइक सवार सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए दोनों घायलों को तत्काल 108 एंबुलेंस की मदद से गुमला सदर अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में इलाज के दौरान अरविंद खड़िया ने दम तोड़ दिया, जबकि पैरू बिलुंग की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है और उसका इलाज जारी है। घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं पुलिस मामले की जांच में जुट गई है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।1
- Post by हमर जशपुर1
- रामप्रवेश गुप्ता नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर देशभर में चल रही राजनीतिक बहस के बीच महुआडांड़ क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन किया गया। स्थानीय कार्यकर्ताओं एवं लोगों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करते हुए उनका पुतला दहन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि कांग्रेस पार्टी ने महिलाओं के हित से जुड़े इस महत्वपूर्ण अधिनियम का समर्थन नहीं किया, जिससे आम जनता, विशेषकर महिलाओं में नाराजगी देखी जा रही है। उन्होंने कहा कि नारी सशक्तिकरण जैसे गंभीर विषय पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और सभी दलों को मिलकर महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करना चाहिए। इस दौरान कार्यक्रम में मंडल अध्यक्ष प्रशांत सिंह, अमित जाजवाल सांसद प्रतिनिधि संजय जायसवाल दिलीप जायसवाल सुनील जायसवाल दिलीप प्रसाद संजय राय विश्वनाथ राम रोहित सिंह विनोद कुमार सिंह राजेंद्र सोनी कृष्णा लोहारा विशेष रूप से उपस्थित रहे। उपस्थित नेताओं ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए यह अधिनियम ऐतिहासिक कदम है और इसका विरोध दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारेबाजी की और सरकार से मांग की कि इस कानून को जल्द प्रभावी रूप से लागू किया जाए, ताकि महिलाओं को इसका सीधा लाभ मिल सके। कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, लेकिन इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।3
- दिनांक 30/4/2026 दो पहर के 3 बजे बारिस होते समय बीजली के प्रहार् से ग्राम पंचायत् लोखंडी के करम कोना के एक पोवाल् माचे मे आग लगी किसी भी प्रकार का जीव जंतु को कोई हनी नही पहुची। गाव के सभी लोग आग बुझाने पहुचे लेकीन बहुत देर होने के कारण बुझाने मे असमर्थत रे ।1
- रामप्रवेश गुप्ता गुरुवार को महुआडांड़ प्रखंड में एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। संत मिखाईल स्कूल, साले से छुट्टी के बाद घर लौट रहे बच्चों से भरा एक टेम्पो अनियंत्रित होकर पलट गया। हादसे में कक्षा 7 के छात्र अंकुर मिंज (ग्राम अक्सी) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दर्जनों बच्चे घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, छुट्टी के बाद करीब 30 बच्चे एक ही टेम्पो में ठूंस-ठूंसकर बैठाए गए थे। वाहन जब साले बस्ती पार कर मौनाडीह के पास मुख्य सड़क पर पहुंचा, तभी चालक के पास आगे 5-6 लोगों के बैठे होने के कारण स्टेयरिंग नियंत्रित करना मुश्किल हो गया। संतुलन बिगड़ते ही टेम्पो अचानक पलट गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। स्थानीय ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए घायलों को वाहन से बाहर निकाला और तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महुआडांड़ पहुंचाया। सूचना मिलते ही परिजन भी अस्पताल पहुंचे, जहां का माहौल गमगीन हो गया। घायलों में आर्तीक बाड़ा, सोनू एक्का, अवैश कुजुर, अनुज उरांव, शुभम खलखो, अनुरूपा एक्का, नेहा टोप्पो, प्रिज्मा केरकेट्टा, एंजेल टोप्पो, वर्तिका केरकेट्टा, अर्श मिंज, साक्षी टोप्पो समेत कई बच्चे शामिल हैं। सभी का इलाज जारी है, जबकि कुछ को हल्की चोटें आई हैं। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में हादसे का मुख्य कारण ओवरलोडिंग बताया जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि इस मार्ग पर बच्चों को रोजाना इसी तरह क्षमता से अधिक भरकर ले जाया जाता था, लेकिन प्रशासनिक चेतावनियों के बावजूद इस पर रोक नहीं लग पाई। गौरतलब है कि थाना प्रभारी द्वारा पूर्व में स्कूलों और कॉलेजों में यातायात नियमों को लेकर जागरूकता अभियान चलाया गया था और ओवरलोडिंग पर सख्ती बरतने की चेतावनी भी दी गई थी। इसके बावजूद लापरवाही जारी रही। 👉 घटना के बाद इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि स्कूली बच्चों के लिए सुरक्षित परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ओवरलोडिंग पर सख्ती से रोक लगे और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।2
- Post by AAM JANATA1
- भारत की धरती में खजाना था, लेकिन फायदा दूसरे उठाते रहे। दशकों तक हम Rare Earth minerals निकालकर बाहर भेजते रहे। चीन उनसे मैग्नेट बनाता रहा, और हम वही मैग्नेट महंगे दामों पर खरीदते रहे। लेकिन 2025 में मोदी सरकार ने खेल बदल दिया। ₹7,280 करोड़ की रेयर अर्थ मैग्नेट प्रोडक्शन योजना को मंजूरी मिली। अब सिर्फ खनन नहीं, पूरी वैल्यू चेन भारत में बनेगी: * खनन * प्रोसेसिंग * धातु और मिश्र धातु * तैयार मैग्नेट यानी कच्चा माल नहीं, अब तैयार उत्पाद दुनिया तक जाएगा। इन्हीं मैग्नेट से चलेंगे इलेक्ट्रिक वाहन, घूमेंगी पवन चक्कियां, मजबूत होंगे रक्षा सिस्टम और आगे बढ़ेगा भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर। ⚡ यही है असली आत्मनिर्भर भारत, जहां अपनी धरती का खजाना, अपने ही हाथों की ताकत बनता है। 🇮🇳1