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श्री राधिका मोटर्स
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- शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती पर नेशनल अकाली दल ने उठाई क्रांतिकारियों को उचित राष्ट्रीय सम्मान देने की मांग नई दिल्ली। शहीद-ए-आजम भगत सिंह जी की जयंती के अवसर पर नेशनल अकाली दल की ओर से श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता नेशनल अकाली दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा ने की। इस अवसर पर शहीद भगत सिंह जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई तथा देश की आजादी के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले सभी ज्ञात-अज्ञात क्रांतिकारियों एवं स्वतंत्रता सेनानियों को नमन किया गया। इस अवसर पर परमजीत सिंह पम्मा ने केंद्र सरकार एवं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से मांग की कि भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को व्यापक स्तर पर राष्ट्रीय सम्मान दिया जाए। उन्होंने कहा कि जिन महान बलिदानियों को अब तक औपचारिक रूप से “शहीद” का दर्जा दिए जाने की मांग उठती रही है, उनके योगदान और ऐतिहासिक भूमिका पर सरकार द्वारा उचित विचार किया जाना चाहिए। पम्मा ने कहा कि शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का बलिदान भारतीय इतिहास में सदैव अमर रहेगा। इनके अलावा चंद्रशेखर आजाद, राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला खान, बटुकेश्वर दत्त, जतिन दास, भगवती चरण वोहरा, खुदीराम बोस, सूर्य सेन, शहीद उधम सिंह और रास बिहारी बोस सहित अनेक क्रांतिकारियों ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन राष्ट्र को समर्पित किया। पम्मा ने कहा कि स्वतंत्रता केवल किसी एक दिन या तारीख का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे असंख्य ज्ञात-अज्ञात वीरों का संघर्ष, त्याग और बलिदान जुड़ा हुआ है। इन महान क्रांतिकारियों के जीवन और संघर्ष को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है, ताकि युवा पीढ़ी देश के स्वतंत्रता संग्राम के वास्तविक इतिहास और बलिदान की भावना को समझ सके। परमजीत सिंह पम्मा ने कहा, “जिन वीरों ने देश की आजादी के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया, उनके सम्मान, स्मृति और योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना पूरे राष्ट्र की जिम्मेदारी है। उनके बलिदान को हमेशा याद रखा जाना चाहिए।” पम्मा ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि स्वतंत्रता संग्राम में अपना जीवन बलिदान करने वाले क्रांतिकारियों एवं स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का व्यापक स्तर पर सम्मान किया जाए तथा उनके नाम, संघर्ष और बलिदान को राष्ट्रीय इतिहास में उचित स्थान दिया जाए। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने “इंकलाब जिंदाबाद” और “भारत माता की जय” के नारों के साथ शहीद-ए-आजम भगत सिंह जी तथा देश के सभी अमर क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर दीपक, मित्तल, सुनील पुरी, वरिंदर आर्य, कुलदीप सिंह, बलविंदर सिंह सरना, तृण सोनी, भाई सुलेमान सहित नेशनल अकाली दल के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे और शहीद भगत सिंह जी को श्रद्धांजलि अर्पित की।1
- पिलखुवा में 70 वर्षीय व्यक्ति का शव मिलने से हड़कंप, पुलिस ने शुरू की जांच | Hapur News हापुड़ के पिलखुवा थाना क्षेत्र में करीब 70 वर्षीय व्यक्ति का शव मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। पुलिस के अनुसार, 26 सितंबर 2026 को सुबह करीब 8:09 बजे डायल 112 के माध्यम से सूचना मिली कि एक व्यक्ति का शव पड़ा हुआ है। सूचना पर पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। मृतक की पहचान महमूद अली पुत्र स्वर्गीय मुन्शी अली, उम्र करीब 70 वर्ष, निवासी मोहल्ला गढ़ी, थाना पिलखुवा, जनपद हापुड़ के रूप में हुई। पुलिस के प्रारंभिक निरीक्षण में शरीर पर किसी प्रकार की जाहिरा चोट के निशान नहीं मिले हैं। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आवश्यक जानकारी जुटाई और मामले में नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई शुरू कर दी है। मौत के वास्तविक कारणों को लेकर पुलिस अन्य तथ्यों की जानकारी जुटा रही है।1
- आशा कार्यकर्ता को धमकी, वीडियो वायरल; जमीनी विवाद में हत्या की धमकी का आरोप मेरठ के ब्रह्मपुरी में दबंगई का वीडियो वायरल आशा कार्यकर्ता को हत्या की धमकी देने का आरोप। मामला नूर नगर का बताया जा रहा है, जहां 14 फीट रास्ते की जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। आरोप है कि युवक ने महिला से गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। शिकायत मिलने के बाद ब्रह्मपुरी पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।1
- दिल्ली हाट में 1 से 7 नवंबर तक सजेगा राष्ट्रीय गोधन दीपावली महोत्सव *गोसंवर्धन को अर्थव्यवस्था से जोड़ने की पहल* _- देशभर की गौशालाओं के प्राकृतिक एवं गो-आधारित उत्पादों के लगेंगे 400 स्टॉल_ _- गोसंवर्धन को पर्यावरण, अर्थव्यवस्था व रोजगार से जोड़ने पर रहेगा विशेष जोर_ _- आत्मनिर्भर गौशालाओं के मॉडल होंगे पेश_ _- 1966 के गोसंरक्षण आंदोलन के संतों को श्रद्धांजलि_ *नई दिल्ली।* गोसंवर्धन को संरक्षण और धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधि तक सीमित रखने के बजाय आत्मनिर्भरता, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने के उद्देश्य से ‘राष्ट्रीय गोधन दीपावली महोत्सव 2026’ का आयोजन 1 से 7 नवंबर तक दिल्ली हाट, जनकपुरी में किया जाएगा। इसकी घोषणा नॉर्थ एवेन्यू स्थित एमपी क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में की गई। प्रेस वार्ता में पूर्व असम राज्यपाल प्रो. जगदीश मुखी, भारतीय किसान संघ के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष सतीश छिकारा, अशोक सचदेवा तथा पूर्व विधायक मदन लाल सहित विभिन्न सामाजिक और किसान संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। प्रो. जगदीश मुखी ने गोसंवर्धन को भारतीय जीवन-पद्धति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक संरचना में गौ आधारित जीवन पद्धति का विशेष महत्व रहा है। वर्तमान समय में पर्यावरण संकट, प्रदूषण और रासायनिक खेती से उत्पन्न चुनौतियों के बीच गौ-आधारित प्राकृतिक जीवनशैली एक प्रभावी विकल्प के रूप में उभर रही है। उन्होंने कहा कि गौ-धन की जिस प्रकार उपेक्षा हो रही है, आने वाले समय में दूध से ज्यादा अभाव गोमूत्र का होगा। गोमूत्र औषधिय दृष्टि से जीवनदायिनी है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से इस अभियान को जनांदोलन का स्वरूप देने का आह्वान किया। राष्ट्रीय गोधन महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक विजय खुराना ने कहा कि महोत्सव का उद्देश्य गौशालाओं को केवल संरक्षण केंद्र के रूप में देखना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और रोजगार सृजन करने वाली आर्थिक इकाइयों के रूप में विकसित करना है। उन्होंने कहा, “यह महोत्सव केवल प्रदर्शनी और बिक्री का मंच नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा, संस्कृति, स्वदेशी उत्पादों, प्राकृतिक जीवनशैली और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का व्यापक अभियान है।” महोत्सव का आयोजन राष्ट्रीय गोधन महासंघ की ओर से दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम, दिल्ली सरकार, काउजोन तथा सनातन धर्म प्रतिनिधि सभा, दिल्ली के सहयोग से किया जा रहा है। दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम ने दिल्ली हाट, जनकपुरी को आयोजन स्थल के रूप में उपलब्ध कराने की स्वीकृति दी है। आयोजकों के अनुसार महोत्सव में करीब 400 स्टॉल लगाए जाएंगे। इनमें देश के विभिन्न हिस्सों की गौशालाओं, गोसेवकों और संस्थाओं द्वारा तैयार प्राकृतिक तथा गो-आधारित उत्पादों का प्रदर्शन किया जाएगा। गोबर और गोमूत्र आधारित उत्पादों, पंचगव्य, जैविक खाद, प्राकृतिक खेती तथा अन्य उत्पादों के माध्यम से गौशालाओं के लिए आय के नए स्रोत विकसित करने पर जोर रहेगा। खुराना ने बताया कि देश में लगभग 22 हजार गौशालाएं हैं। इन्हें स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़कर ग्रामीण रोजगार और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सकता है। महोत्सव में आधुनिक तकनीक के माध्यम से गौशालाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के विभिन्न नमूने भी प्रस्तुत किए जाएंगे। महोत्सव का आधार पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और रोजगार रहेगा। इसके अलावा 7 नवंबर 1966 के संसद मार्ग गोसंरक्षण आंदोलन में जान गंवाने वाले संतों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। आयोजकों ने देशभर के गौसेवकों, उद्यमियों, शोधकर्ताओं और आम नागरिकों से महोत्सव में भाग लेने का आह्वान किया है।1
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