मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन और धार्मिक-आध्यात्मिक तीर्थ स्थल पवित्र नगरी अमरकंटक में शनिवार शाम आकाशीय बिजली गिरने से एक दर्दनाक हादसा हो गया। नगर परिषद अमरकंटक के वार्ड क्रमांक 2 बराती क्षेत्र में, शाम लगभग 4 बजे, तेज आंधी-तूफान और मूसलाधार वर्षा के दौरान बिजली की चपेट में आने से एक युवक और एक युवती की मौके पर ही गंभीर रूप से झुलसकर मृत्यु हो गई। वहीं, एक अन्य किशोरी भी इस घटना में घायल हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, वार्ड क्रमांक 2 बराती में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के समापन के बाद भंडारे में प्रसाद ग्रहण कर तीनों अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान मौसम अचानक खराब हो गया और तेज गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिर गई। इसकी चपेट में आने से 18 वर्षीय हर्ष टांडिया और 17 वर्षीय आरती वर्मा गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि 17 वर्षीय राधा भी बिजली की चपेट में आकर घायल हुई। घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों की सहायता से तीनों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अमरकंटक पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने हर्ष टांडिया और आरती वर्मा को मृत घोषित कर दिया। घायल राधा का उपचार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जारी है। घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। स्थानीय प्रशासन एवं पुलिस द्वारा आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन और धार्मिक-आध्यात्मिक तीर्थ स्थल पवित्र नगरी अमरकंटक में शनिवार शाम आकाशीय बिजली गिरने से एक दर्दनाक हादसा हो गया। नगर परिषद अमरकंटक के वार्ड क्रमांक 2 बराती क्षेत्र में, शाम लगभग 4 बजे, तेज आंधी-तूफान और मूसलाधार वर्षा के दौरान बिजली की चपेट में आने से एक युवक और एक युवती की मौके पर ही गंभीर रूप से झुलसकर मृत्यु हो गई। वहीं, एक अन्य किशोरी भी इस घटना में घायल हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, वार्ड क्रमांक 2 बराती में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के समापन के बाद भंडारे में प्रसाद ग्रहण कर तीनों अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान मौसम अचानक खराब हो गया और तेज गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिर गई। इसकी चपेट में आने से 18 वर्षीय हर्ष टांडिया और 17 वर्षीय आरती वर्मा गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि 17 वर्षीय राधा भी बिजली की चपेट में आकर घायल हुई। घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों की सहायता से तीनों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अमरकंटक पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने हर्ष टांडिया और आरती वर्मा को मृत घोषित कर दिया। घायल राधा का उपचार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जारी है। घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। स्थानीय प्रशासन एवं पुलिस द्वारा आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
- आज पेंड्रा रोड पर मौसम में भारी बदलाव देखा गया। क्षेत्र में तेज आंधी, तूफान और गरज के साथ जोरदार बारिश हो रही है।1
- शहडोल जिले के सोन टोला वाटर प्लांट में नहाने गया एक किशोर डूब गया। रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद किशोर का शव बरामद कर लिया गया है।1
- डिण्डौरी जिले के शहपुरा में स्थित नर्मदांचल गौ सेवा समिति, ढोंढ़ा, जैविक खेती का प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान करने वाला एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है। जिले के प्रसिद्ध जैविक कृषि विशेषज्ञ श्री बिहारी लाल साहू द्वारा संचालित यह समिति विगत 10 वर्षों से जैविक खेती के क्षेत्र में सक्रिय है। श्री साहू न केवल स्वयं जैविक खेती करते हैं, बल्कि डिण्डौरी और आसपास के क्षेत्रों के किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए निरंतर प्रशिक्षण भी देते हैं। वे किसानों के साथ-साथ महाविद्यालयों, विद्यालयों, शासकीय संस्थानों और एनजीओ के माध्यम से डिण्डौरी सहित अन्य जिलों में जैविक खेती के प्रति जागरूकता फैलाने का सराहनीय कार्य कर रहे हैं, जिसमें उनके फार्म हाउस में जैविक खेती का लाइव डेमो भी प्रदर्शित किया जाता है। समिति पशुओं के गोबर से बायोगैस के निर्माण का भी प्रदर्शन करती है, जिसे प्लास्टिक के 6 फुट चौड़े और 10 फुट लंबे टांके में घोलकर डाला जाता है। इसमें 4 इंच का पाइप गोबर घोल डालने के लिए और दूसरा 4 इंच का पाइप ओवरफ्लो के लिए लगा होता है, जहाँ से गैस बनने के बाद निकलने वाली वेस्ट स्लरी उत्तम जैविक खाद का काम करती है। एक तीसरा पाइप गैस को सीधे चूल्हे तक ले जाता है। यह जैव-अपघटनीय पदार्थों को बिना ऑक्सीजन के सड़ाकर बनती है, जिसमें 55-65% मीथेन और 30-40% CO2 होती है, जो एक बार लगने के बाद कई वर्षों तक चलती है। यह कार्य आत्मा परियोजना के तहत डिण्डौरी जिले में 33 बीआरसी किसानों को भी दिया गया है। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन, भारत सरकार, जैव आदान संसाधन केंद्र द्वारा प्राकृतिक खेती के लिए आवश्यक जैविक उत्पाद उपलब्ध कराए जाते हैं, और बिहारी लाल साहू एक बीआरसी के रूप में प्राकृतिक खेती पर मार्गदर्शन, जानकारी और सलाह भी देते हैं, जिसके लिए उनका नारा है, 'जैविक खेती अपनाएं, स्वास्थ्य और धरती बचाएं'। नर्मदांचल गौ सेवा समिति में गौवंश आधारित प्राकृतिक जैविक खाद जैसे केंचुआ खाद, वर्मीवाश, जीवामृत, अग्नि अस्त्र आदि का निर्माण कर विक्रय किया जाता है। साथ ही बीज उपचार सहित जैविक कृषि से संबंधित विभिन्न प्रक्रियाओं की जानकारी निशुल्क प्रदान की जाती है। यहां जैविक फार्म में केला, पपीता, अदरक, करेला, सेमी, टमाटर, गोभी, बैंगन, आलू, मटर, प्याज, लहसुन, लाल भाजी, मेथी भाजी जैसी विभिन्न फसलें जैविक विधि से उगाई जाती हैं। जैविक कृषि विशेषज्ञ बिहारी लाल साहू ने इस अवसर पर बताया कि जैविक उत्पाद मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी होते हैं और रासायनिक मुक्त खेती मिट्टी की उर्वरता तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए भी आवश्यक है। उनके अनुसार, जैविक खेती से किसानों की लागत कम होती है और उपज की गुणवत्ता बेहतर होती है। कार्यक्रम में बिहारी लाल साहू, आयुष साहू, प्रगति साहू सहित अन्य जन उपस्थित रहे। बिहारी लाल साहू डिण्डौरी जिला आत्मा परियोजना के सभी अधिकारियों का हार्दिक अभिनंदन करते हैं। उन्होंने 20 हजार से अधिक विद्यार्थियों और 80 हजार से अधिक किसानों को प्राकृतिक/जैविक खेती पर प्रशिक्षण दिया है, और इस संदेश को एक दोहे के माध्यम से भी व्यक्त किया है: 'ऐसी खेती कीजिए, खाद रसायन दूर। खेत बचे जीवन बचे, स्वाद रहे भरपूर।'1
- डिंडौरी जिला जल संरचनाओं के निर्माण और जल स्रोतों के जीर्णोद्धार में पूरे देश में दूसरे स्थान पर है। पिछले दो महीनों से जिले में जनभागीदारी के माध्यम से लगातार यह कार्य किया जा रहा है। अब तक जिला और जनपद पंचायत क्षेत्रों में कुल 6 लाख 26 हजार 955 जल संरचनाओं का निर्माण कराया जा चुका है, जिसमें ग्रामीणों की सक्रिय भूमिका रही है। अधिकारियों ने ग्रामीणों को जल संरक्षण का महत्व समझाया, जिससे उन्हें यह बात समझ आई कि पानी रोकने से ही बचेगा और फिर से उपलब्ध होगा। इस समझ के बाद, लोगों ने स्वयं प्रेरित होकर अपने घरों में जल संचय के कार्य शुरू कर दिए। बजाग जनपद पंचायत की सिंहपुर ग्राम पंचायत में, जहाँ लगभग साढ़े तीन सौ मकान हैं, हर घर में सोखता पिट और छतों से बारिश के पानी को रोकने के लिए पाइप के जरिए वाटर हार्वेस्टिंग की तैयारी की गई है। गांव की महिला मेकिन बाई ने बताया कि पहले उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी, लेकिन सरपंच दीपचंद पूषाम और अधिकारियों ने उन्हें जल का महत्व समझाया, जिसके बाद उन्होंने स्वयं मेहनत कर और थोड़ा पैसा खर्च कर पाइप खरीदे और घर के सामने सोखता पिट बनाया, जिसमें अब निस्तार का पानी जा रहा है। इसी तरह, जमुना खैरवार ने भी स्वीकार किया कि वे पहले पानी का महत्व नहीं जानते थे और सोचते थे कि पानी उपलब्ध कराना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। सरपंच और अधिकारियों द्वारा थोड़ी मेहनत से पानी बचाने और धरती को रिचार्ज करने की जानकारी देने के बाद उन्होंने अपने घर में दो सोखता पिट बनवाए। अब वे गांव में जाकर अन्य लोगों को भी जागरूक कर रही हैं ताकि बारिश का पानी रोका जा सके और आने वाली पीढ़ी के लिए पानी बचाया जा सके। इसके अतिरिक्त, आजीविका परियोजना से जुड़ी कृषक सखी सुदामा सुरेश्वर ने 'मां की बगिया' योजना के बारे में बताया, जिसके तहत पांच हितग्राही हैं। एक बगिया में 15 नींबू और 35 आम के पेड़ लगाए गए हैं, जिन्हें टपक पद्धति से पानी दिया जा रहा है। कृषक सखी ने पानी बचाने और पेड़ों को सुरक्षित रखने के लिए हितग्राहियों को जागरूक किया और उन्हें टपकना, हांडी और स्लाइन की बोतल से पेड़ों को पानी देने के तरीके बताए। अब ये हितग्राही स्वयं पेड़ों की सुरक्षा और सिंचाई का कार्य कर रहे हैं, जिससे यह सुनिश्चित हो रहा है कि पानी की बचत के साथ-साथ पर्यावरण का भी ध्यान रखा जा सके।1
- डिंडौरी जिले की कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने ग्राम पंचायत घुसिया माल के ढीमरटोला में पेयजल की लंबी समस्या का त्वरित समाधान कर प्रशासनिक संवेदनशीलता का एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। यह कार्रवाई तब हुई जब कुछ दिन पूर्व ढीमरटोला के ग्रामीण पेयजल संकट को लेकर जनसुनवाई में कलेक्टर के पास पहुँचे थे। समस्या की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को दो दिनों के भीतर व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए थे और इन्हीं निर्देशों के क्रियान्वयन का जायजा लेने वे स्वयं गांव पहुँचीं। ग्रामीणों ने बताया कि पानी की कमी के कारण उन्हें कुओं में उतरकर पानी भरना पड़ रहा था। स्थिति का प्रत्यक्ष अवलोकन करने के बाद, कलेक्टर ने खराब पड़े बोरवेल में अपने समक्ष एक नया पंप लगवाकर उसे चालू कराया और घर-घर पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी करवाईं। उन्होंने स्वयं बोरवेल का पानी पीकर उसकी गुणवत्ता जाँची और बच्चों को भी पानी पिलाया। ग्रामीणों की सुविधा के लिए दो-दो हजार लीटर क्षमता की दो पानी टंकियां भी स्थापित की गईं और कम वोल्टेज की समस्या सामने आने पर तत्काल स्टेबलाइजर लगाने के निर्देश देकर व्यवस्था को सुचारु बनाया गया। इस दौरान उन्होंने जल जीवन मिशन के अंतर्गत किए गए कार्यों का निरीक्षण भी किया। कलेक्टर की इस मौजूदगी और त्वरित निर्णयों से गांव में उत्साह का माहौल बन गया, जहाँ ग्रामीणों ने पहली बार किसी वरिष्ठ अधिकारी को मौके पर खड़े होकर समस्या का समाधान करते देखा। ग्रामीणों को संबोधित करते हुए, कलेक्टर ने गर्मी के मौसम में पानी के सदुपयोग की अपील की और मोटर संचालन की जिम्मेदारी किसी जिम्मेदार व्यक्ति को सौंपने का सुझाव दिया ताकि पूरे गांव को समय पर पर्याप्त पानी मिल सके। निरीक्षण के दौरान, कलेक्टर ने जल संरक्षण का संदेश भी दिया। उन्होंने ग्रामीणों को सोखता टैंक निर्माण की जानकारी दी और उन्हें घरों में ऐसे टैंक बनाने के लिए प्रेरित किया, यह समझाते हुए कि इससे भूजल स्तर संरक्षित रहेगा और वर्षा जल संचयन को भी बढ़ावा मिलेगा। इस अवसर पर रामबाबू देवांगन, सुंदरलाल यादव, चेतराम अहिरवार, प्रमोद उपाध्याय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। कलेक्टर की इस पहल ने न केवल पेयजल संकट का समाधान किया, बल्कि प्रशासन और ग्रामीणों के बीच विश्वास की एक नई मिसाल भी कायम की है।2
- समनापुर क्षेत्र में नौतपा के दौरान हुई बारिश ने गर्मी का असर काफी कम कर दिया है। इस बारिश के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली है। किसान भी इस बारिश को फायदेमंद मान रहे हैं, क्योंकि इससे खेतों में नमी बढ़ी है और आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों में भी मदद मिलेगी।1
- अनूपपुर जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) श्रीमती अर्चना कुमारी ने जिला पंचायत सभागार में जनपद पंचायत अनूपपुर के ग्राम पंचायत स्तरीय अमले के साथ एक बैठक आयोजित की। इस दौरान उन्होंने विभिन्न ग्रामीण विकास कार्यों की गहन समीक्षा करते हुए संबंधितों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। बैठक में जनपद पंचायत अनूपपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री रवि ग्वाल, सहायक यंत्री श्री सुरेंद्र पाण्डेय, सहायक कार्यक्रम अधिकारी अरविंद सिंह, जिला पंचायत के सीनियर डाटा मैनेजर श्री जे एल डोंगरे, उप यंत्री, जनपद पंचायत के योजना प्रभारी तथा ग्राम पंचायतों के सचिव एवं ग्राम रोजगार सहायक उपस्थित रहे। श्रीमती अर्चना कुमारी ने जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत अच्छा कार्य करने के लिए ग्राम पंचायतों के अमले को प्रोत्साहित किया और प्रदेश की रैंकिंग के अनुसार बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अभियान में अधिक से अधिक मानव दिवसों का सृजन करने, भौतिक लक्ष्यों को पूरा करने और व्यय मापदंडों के अनुरूप कार्य करने पर जोर दिया। सीईओ ने निर्माण कार्यों के स्थलों पर अनिवार्य रूप से साइन बोर्ड लगाए जाने तथा जल स्रोतों के इनलेट और आउटलेट पर पिचिंग के कार्यों में अधिकतम श्रमिकों को नियोजित करने के निर्देश भी दिए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने मनरेगा योजना के कार्यों को जून माह तक पूरा करने तथा 'एक बगिया मां के नाम' पौधरोपण की समीक्षा करते हुए पौधों की सुरक्षा के लिए फेंसिंग और गैप फिलिंग के संबंध में निर्देश दिए। जिला पंचायत सीईओ ने सभी इंजीनियरों को उनके कार्यक्षेत्र के अंतर्गत लक्ष्यगत कार्यों की पूर्णता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास जनमन तथा आवास प्लस के कार्यों की समीक्षा करते हुए हितग्राही-वार प्रगति लाने और लंबित कार्यों को पूरा करने के लिए हितग्राहियों से लगातार संपर्क बनाए रखने को कहा। बैठक में नल जल योजना, स्वच्छ भारत मिशन के कार्यों की भी समीक्षा की गई। लंबित विद्युत देयकों के भुगतान और अनुपयोगी विद्युत कनेक्शनों को विच्छेदित कराने के साथ ही, उन्होंने जल दर्पण मोबाइल ऐप के माध्यम से ऑनलाइन ग्राम पंचायत करों के भुगतान की प्रक्रिया का प्रचार-प्रसार कर करदाताओं से भुगतान सुनिश्चित कराने पर भी बल दिया। इस संबंध में जिला पंचायत के सीनियर डाटा मैनेजर ने पंचायत दर्पण मोबाइल ऐप के संबंध में जानकारी प्रदान की। जिला पंचायत सीईओ ने विशेष रूप से 'एक बगिया मां के नाम' पौधरोपण की गैप फिलिंग और जनमन आवास की पूर्णता के लिए पुनः निर्देश दिए।1
- आज पेंड्रा रोड में दोपहर से मौसम में अचानक बदलाव देखा गया है। करीब दो बजे से शुरू हुई यह मौसमी उथल-पुथल शाम होते-होते और अधिक बिगड़ गई। तेज हवाओं के साथ पानी की बौछारें भी देखी गईं, जिससे इलाके में आंधी-तूफान आने की संभावना बनी हुई है।1
- डिंडोरी जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली एंबुलेंस व्यवस्था खुद ही खराब स्थिति में है। इस बदहाली के कारण गंभीर मरीजों और उनके परिजनों को समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है। हालत यह है कि जिला अस्पताल से जबलपुर सहित अन्य बड़े अस्पतालों के लिए रेफर किए गए मरीजों को एंबुलेंस के लिए घंटों तक इंतजार करना पड़ता है। डिंडोरी जिले में वर्तमान में जननी एक्सप्रेस, बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) और एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) समेत कुल 29 एंबुलेंस वाहन संचालित हैं। हालांकि, इनमें से कई वाहन लंबे समय से खराब होकर खड़े हैं और मरम्मत की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इस स्थिति के चलते जिले की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।1