डिंडौरी जिले की कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने ग्राम पंचायत घुसिया माल के ढीमरटोला में पेयजल की लंबी समस्या का त्वरित समाधान कर प्रशासनिक संवेदनशीलता का एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। यह कार्रवाई तब हुई जब कुछ दिन पूर्व ढीमरटोला के ग्रामीण पेयजल संकट को लेकर जनसुनवाई में कलेक्टर के पास पहुँचे थे। समस्या की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को दो दिनों के भीतर व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए थे और इन्हीं निर्देशों के क्रियान्वयन का जायजा लेने वे स्वयं गांव पहुँचीं। ग्रामीणों ने बताया कि पानी की कमी के कारण उन्हें कुओं में उतरकर पानी भरना पड़ रहा था। स्थिति का प्रत्यक्ष अवलोकन करने के बाद, कलेक्टर ने खराब पड़े बोरवेल में अपने समक्ष एक नया पंप लगवाकर उसे चालू कराया और घर-घर पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी करवाईं। उन्होंने स्वयं बोरवेल का पानी पीकर उसकी गुणवत्ता जाँची और बच्चों को भी पानी पिलाया। ग्रामीणों की सुविधा के लिए दो-दो हजार लीटर क्षमता की दो पानी टंकियां भी स्थापित की गईं और कम वोल्टेज की समस्या सामने आने पर तत्काल स्टेबलाइजर लगाने के निर्देश देकर व्यवस्था को सुचारु बनाया गया। इस दौरान उन्होंने जल जीवन मिशन के अंतर्गत किए गए कार्यों का निरीक्षण भी किया। कलेक्टर की इस मौजूदगी और त्वरित निर्णयों से गांव में उत्साह का माहौल बन गया, जहाँ ग्रामीणों ने पहली बार किसी वरिष्ठ अधिकारी को मौके पर खड़े होकर समस्या का समाधान करते देखा। ग्रामीणों को संबोधित करते हुए, कलेक्टर ने गर्मी के मौसम में पानी के सदुपयोग की अपील की और मोटर संचालन की जिम्मेदारी किसी जिम्मेदार व्यक्ति को सौंपने का सुझाव दिया ताकि पूरे गांव को समय पर पर्याप्त पानी मिल सके। निरीक्षण के दौरान, कलेक्टर ने जल संरक्षण का संदेश भी दिया। उन्होंने ग्रामीणों को सोखता टैंक निर्माण की जानकारी दी और उन्हें घरों में ऐसे टैंक बनाने के लिए प्रेरित किया, यह समझाते हुए कि इससे भूजल स्तर संरक्षित रहेगा और वर्षा जल संचयन को भी बढ़ावा मिलेगा। इस अवसर पर रामबाबू देवांगन, सुंदरलाल यादव, चेतराम अहिरवार, प्रमोद उपाध्याय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। कलेक्टर की इस पहल ने न केवल पेयजल संकट का समाधान किया, बल्कि प्रशासन और ग्रामीणों के बीच विश्वास की एक नई मिसाल भी कायम की है।
डिंडौरी जिले की कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने ग्राम पंचायत घुसिया माल के ढीमरटोला में पेयजल की लंबी समस्या का त्वरित समाधान कर प्रशासनिक संवेदनशीलता का एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। यह कार्रवाई तब हुई जब कुछ दिन पूर्व ढीमरटोला के ग्रामीण पेयजल संकट को लेकर जनसुनवाई में कलेक्टर के पास पहुँचे थे। समस्या की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को दो दिनों के भीतर व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए थे और इन्हीं निर्देशों के क्रियान्वयन का जायजा लेने वे स्वयं गांव पहुँचीं। ग्रामीणों ने बताया कि पानी की कमी के कारण उन्हें कुओं में उतरकर पानी भरना पड़ रहा था। स्थिति का प्रत्यक्ष अवलोकन करने के बाद, कलेक्टर ने खराब पड़े बोरवेल में अपने समक्ष एक नया पंप लगवाकर उसे चालू कराया और घर-घर पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी करवाईं। उन्होंने स्वयं बोरवेल का पानी पीकर उसकी गुणवत्ता जाँची और बच्चों को भी पानी पिलाया। ग्रामीणों की सुविधा के लिए दो-दो हजार लीटर क्षमता की दो पानी टंकियां भी स्थापित की गईं और कम वोल्टेज की समस्या सामने आने पर तत्काल स्टेबलाइजर लगाने के निर्देश देकर व्यवस्था को सुचारु
बनाया गया। इस दौरान उन्होंने जल जीवन मिशन के अंतर्गत किए गए कार्यों का निरीक्षण भी किया। कलेक्टर की इस मौजूदगी और त्वरित निर्णयों से गांव में उत्साह का माहौल बन गया, जहाँ ग्रामीणों ने पहली बार किसी वरिष्ठ अधिकारी को मौके पर खड़े होकर समस्या का समाधान करते देखा। ग्रामीणों को संबोधित करते हुए, कलेक्टर ने गर्मी के मौसम में पानी के सदुपयोग की अपील की और मोटर संचालन की जिम्मेदारी किसी जिम्मेदार व्यक्ति को सौंपने का सुझाव दिया ताकि पूरे गांव को समय पर पर्याप्त पानी मिल सके। निरीक्षण के दौरान, कलेक्टर ने जल संरक्षण का संदेश भी दिया। उन्होंने ग्रामीणों को सोखता टैंक निर्माण की जानकारी दी और उन्हें घरों में ऐसे टैंक बनाने के लिए प्रेरित किया, यह समझाते हुए कि इससे भूजल स्तर संरक्षित रहेगा और वर्षा जल संचयन को भी बढ़ावा मिलेगा। इस अवसर पर रामबाबू देवांगन, सुंदरलाल यादव, चेतराम अहिरवार, प्रमोद उपाध्याय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। कलेक्टर की इस पहल ने न केवल पेयजल संकट का समाधान किया, बल्कि प्रशासन और ग्रामीणों के बीच विश्वास की एक नई मिसाल भी कायम की है।
- डिंडौरी जिले के नेवसा पंचायत के पतेरा टोला की महिलाएँ गंभीर जल संकट से जूझ रही थीं, जिसके चलते वे कलेक्टर की जन सुनवाई में कुएँ के गंदे पानी की बोतल लेकर पहुँचीं और अपनी समस्या बताई। इस मामले को एक प्रमुख समाचार प्लेटफॉर्म ने प्रमुखता से दिखाया था। खबर दिखाए जाने के तुरंत बाद, कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने इस पर संज्ञान लिया। उन्होंने पतेरा टोला में बोरिंग मशीन भिजवाकर वर्षों से बंद पड़े पुराने बोरिंग को फिर से चालू करवाया, जिससे ग्रामीणों को स्वच्छ पानी मिल सका। कलेक्टर ने ग्रामीणों को जल संरक्षण के महत्व के बारे में भी जागरूक किया, उन्हें अपने घरों में सोख्ता गड्ढे बनाकर पानी सहेजने की सलाह दी। दूषित जल की समस्या से मुक्ति मिलने और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होने से ग्रामीणों ने कलेक्टर का आभार व्यक्त किया और अपनी खुशी जाहिर की।1
- डिंडोरी में अमरकंटक रोड स्थित जेल बिल्डिंग के पास लगी एक इमरजेंसी लाइट पिछले एक महीने से लगातार जल रही है और चमचमाती रहती है। इस स्थिति को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों की घोर बेपरवाही पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्या इसीलिए यह लाइट लगाई गई थी कि इसकी देखरेख और संचालन में जिम्मेदार लोग इस कदर बेपरवाह रहें।1
- उमरिया जिले के अन्तिम छोर पर, अनुपपुर की सीमा से सटे तिवनी गांव के पास अमौदा बिजौरा में हुए भीषण सड़क हादसे के बाद जिला प्रशासन ने त्वरित संवेदनशीलता दिखाते हुए राहत और उपचार कार्यों की कमान संभाल ली है। घटना की सूचना मिलते ही कलेक्टर राखी सहाय ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाली पहुंचकर घायल मरीजों से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। उन्होंने चिकित्सकों व स्वास्थ्य कर्मियों को सभी घायलों को गुणवत्तापूर्ण और समुचित उपचार प्रदान करने, साथ ही गंभीर रूप से घायल मरीजों की विशेष निगरानी रखने तथा उपचार में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने की सख्त हिदायत दी। कलेक्टर ने पीड़ित परिवारों को हर संभव प्रशासनिक सहायता का भी भरोसा दिलाया। दूसरी ओर, पाली एसडीएम मीनाक्षी बंजारे ने दुर्घटना से प्रभावित सभी व्यक्तियों का सत्यापित और लिखित विवरण तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेजा है। प्रशासनिक पुष्टि के अनुसार, इस हादसे में पड़मनिया निवासी भूपत सिंह (50 वर्ष), गिजरी निवासी बीर सिंह (60 वर्ष), पड़मनिया निवासी घनश्याम सिंह (45 वर्ष) और गिजरी निवासी सहबल बैगा (55 वर्ष) की दुखद मृत्यु हो गई है। वहीं, सूत्रों से यह सूचना भी मिली है कि मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान दो अन्य घायलों का निधन हो गया है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इस हृदयविदारक दुर्घटना पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गहरा दुख व्यक्त किया है और मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने की घोषणा की है। प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और राहत दल लगातार प्रभावित परिवारों की सहायता में जुटे हुए हैं, और पूरे क्षेत्र में इस दर्दनाक हादसे को लेकर शोक व संवेदना का वातावरण व्याप्त है।1
- उमरिया, मध्य प्रदेश में कलेक्टर राखी सहाय ने सड़क हादसे में घायल हुए लोगों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने घायलों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।1
- डिंडोरी जिले की ग्राम पंचायत घुसिया माल में लंबे समय से चली आ रही जल संकट की समस्या के बीच, शुक्रवार को जल जीवन मिशन के तहत बिछाई गई पाइपलाइन से पानी का फव्वारा उठता देखा गया, जिसमें ग्रामीण नहाते भी नजर आए। ग्रामीणों ने बताया कि जल जीवन मिशन की यह पाइपलाइन कई जगह से फटी हुई है। इसके साथ ही, अनेक स्थानों पर प्लंबरों द्वारा पाइपलाइन वॉल्व की कसावट में लापरवाही बरती गई है, जिसके परिणामस्वरूप हजारों लीटर पानी व्यर्थ बह रहा है। इसी संदर्भ में, कलेक्टर डिंडोरी अंजू पवन भदोरिया के निर्धारित जिला प्रशासनिक अधिकारी ग्राम पंचायत पहुंचे। उन्होंने पंचायत को निर्देश दिए कि सूखे पड़े सभी कुओं में टैंकर के माध्यम से पानी भरा जाए। इसके अतिरिक्त, कलेक्टर ने जल जीवन मिशन की टूटी हुई पाइपलाइन की मरम्मत करने के भी निर्देश जारी किए हैं।1
- डिंडोरी जिले में मरीजों को समय पर एंबुलेंस नहीं मिल पा रही है, जिससे गंभीर मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिले में संचालित कई एंबुलेंस खराब हालत में हैं, जिसके चलते जिला अस्पताल से जबलपुर और अन्य शहरों के लिए रेफर किए जाने वाले मरीजों को अक्सर एंबुलेंस के लिए कई-कई घंटे इंतजार करना पड़ता है। जिले में कुल 29 वाहन संचालित हैं, जिनमें जननी एक्सप्रेस, बेसिक लाइफ सपोर्ट और एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस शामिल हैं। इनमें से कई वाहन खराब होकर खड़े हैं और अपनी मरम्मत का इंतजार कर रहे हैं। इस समस्या का एक उदाहरण मंडला जिले के एक घायल मरीज के परिजनों ने बताया, जिन्होंने रात 8 बजे एंबुलेंस के लिए कॉल किया था, लेकिन वाहन अगले दिन दोपहर 1 बजे ही उपलब्ध हो सका। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि प्रतिदिन कई मरीजों को दूसरे शहरों के लिए रेफर किया जाता है, जिसके कारण एंबुलेंस की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। निरीक्षण के दौरान कई एंबुलेंस जर्जर हालत में मिलीं, जो लाखों किलोमीटर चल चुकी हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि जब मरीजों को अस्पताल पहुंचाने वाली एंबुलेंस ही खराब हों, तो आपात स्थिति में लोगों को समय पर इलाज कैसे मिल पाएगा।1
- बिरसिंहपुर पाली थाना क्षेत्र के ग्राम तिवनी (शनिधाम) के पास शुक्रवार दोपहर एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया, जहाँ एक ट्रैक्टर-ट्रॉली पलट जाने से चार लोगों की मौत हो गई और 41 अन्य घायल हो गए। इस हादसे में आठ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद शहडोल रेफर किया गया है। घटना स्थल पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मिली जानकारी के अनुसार, करीब 45 लोग ग्राम गिंजरी से ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार होकर अनूपपुर जिले के ग्राम बिजौरा में आयोजित एक धार्मिक पुजाई कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। तिवनी गांव में शनिधाम के पास पुलिया पर पहुँचते ही ट्रैक्टर अचानक अनियंत्रित होकर पलट गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि यदि ट्रैक्टर पुलिया से नीचे गिर जाता, तो यह हादसा और भी भयावह हो सकता था। हादसे के तुरंत बाद, स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया। सूचना मिलने पर 108 एम्बुलेंस और पुलिस टीम भी मौके पर पहुँची और सभी घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाली लाया गया। अस्पताल में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में घायलों के पहुँचने से वहाँ भी अफरा-तफरी का माहौल निर्मित हो गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए, पाली एसडीएम मीनाक्षी बंजारे ने तत्काल तहसीलदार संतोष चौधरी को अस्पताल में तैनात किया, जो उपचार व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं। चिकित्सकों की एक टीम लगातार घायलों के उपचार में जुटी हुई है। फिलहाल पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रही है और प्रारंभिक आशंका तेज रफ्तार तथा वाहन में क्षमता से अधिक सवारियां होने की जताई जा रही है। इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल व्याप्त है।1
- उमरिया से सटे अनूपपुर जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में शुक्रवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। पुष्पराजगढ़ ब्लॉक के गिंजरी गांव स्थित शनि मंदिर के पास श्रद्धालुओं से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित होकर पलट गई, जिसमें मौके पर ही 4 ग्रामीणों की मौत हो गई और लगभग 41 लोग घायल हो गए। कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, ग्राम पड़मनिया और आसपास के करीब 50 ग्रामीण ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार होकर बिजौरा में आयोजित पूजन कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। अनूपपुर सीमा से लगे तिवनी गांव स्थित शनि धाम के पास अचानक ट्रैक्टर-ट्रॉली का संतुलन बिगड़ने से यह भयावह हादसा हुआ। ट्रॉली पलटने से कई लोग उसके नीचे दब गए, जिससे मौके पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। आसपास के ग्रामीणों ने तुरंत मदद की, जिसके बाद सूचना पर पाली एसडीएम, पुलिस प्रशासन और राजस्व अमला मौके पर पहुंचा और स्थानीय लोगों की सहायता से राहत व बचाव कार्य चलाया। घायलों को एम्बुलेंस व निजी वाहनों से पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार जारी है, जबकि गंभीर घायलों को जिला अस्पताल रेफर किया गया है। हादसे में घनश्याम गोड़ (पड़मनिया), सहबल बैगा (गिंजरी), वीर सिंह पिता माधव सिंह (गिंजरी) और भूपति सिंह पिता भगीरथ सिंह (पड़वानिया) की मौत हो गई, जिससे उनके गांवों में मातम छा गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। इस दर्दनाक हादसे ने पाली अस्पताल की बदहाली को भी उजागर कर दिया, जहाँ बड़ी संख्या में घायल पहुंचने पर पर्याप्त स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं थे और कई घायलों को जमीन पर लिटाकर इलाज करना पड़ा। अस्पताल परिसर में अव्यवस्था का माहौल देखा गया, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था की ऐसी तस्वीर सामने आने पर लोगों में गहरी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और पर्याप्त संसाधन होते तो घायलों को अधिक राहत मिल सकती थी। इस घटना के बाद प्रशासनिक व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है।4