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उमरिया, मध्य प्रदेश में कलेक्टर राखी सहाय ने सड़क हादसे में घायल हुए लोगों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने घायलों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
JIYAUDDIN ANSARI
उमरिया, मध्य प्रदेश में कलेक्टर राखी सहाय ने सड़क हादसे में घायल हुए लोगों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने घायलों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
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- शहडोल जिले के सोन टोला वाटर प्लांट में नहाने गया एक किशोर डूब गया। रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद किशोर का शव बरामद कर लिया गया है।1
- शहडोल के आरटीओ कार्यालय में एक समुदाय विशेष से संबंधित धार्मिक पुस्तक को एक बक्से में रखे जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है। यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने स्थानीय लोगों का ध्यान खींचा है। इस घटना को लेकर विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने कड़ी आपत्ति जताई है। संगठन ने सोहागपुर पुलिस थाने और कमिश्नर को एक ज्ञापन सौंपकर इस पूरे मामले की गहनता से जाँच करने की मांग की है।1
- बिरसिंहपुर पाली थाना क्षेत्र के ग्राम तिवनी (शनिधाम) के पास शुक्रवार दोपहर एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया, जहाँ एक ट्रैक्टर-ट्रॉली पलट जाने से चार लोगों की मौत हो गई और 41 अन्य घायल हो गए। इस हादसे में आठ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद शहडोल रेफर किया गया है। घटना स्थल पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मिली जानकारी के अनुसार, करीब 45 लोग ग्राम गिंजरी से ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार होकर अनूपपुर जिले के ग्राम बिजौरा में आयोजित एक धार्मिक पुजाई कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। तिवनी गांव में शनिधाम के पास पुलिया पर पहुँचते ही ट्रैक्टर अचानक अनियंत्रित होकर पलट गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि यदि ट्रैक्टर पुलिया से नीचे गिर जाता, तो यह हादसा और भी भयावह हो सकता था। हादसे के तुरंत बाद, स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया। सूचना मिलने पर 108 एम्बुलेंस और पुलिस टीम भी मौके पर पहुँची और सभी घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाली लाया गया। अस्पताल में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में घायलों के पहुँचने से वहाँ भी अफरा-तफरी का माहौल निर्मित हो गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए, पाली एसडीएम मीनाक्षी बंजारे ने तत्काल तहसीलदार संतोष चौधरी को अस्पताल में तैनात किया, जो उपचार व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं। चिकित्सकों की एक टीम लगातार घायलों के उपचार में जुटी हुई है। फिलहाल पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रही है और प्रारंभिक आशंका तेज रफ्तार तथा वाहन में क्षमता से अधिक सवारियां होने की जताई जा रही है। इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल व्याप्त है।1
- डिण्डौरी जिले के शहपुरा में स्थित नर्मदांचल गौ सेवा समिति, ढोंढ़ा, जैविक खेती का प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान करने वाला एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है। जिले के प्रसिद्ध जैविक कृषि विशेषज्ञ श्री बिहारी लाल साहू द्वारा संचालित यह समिति विगत 10 वर्षों से जैविक खेती के क्षेत्र में सक्रिय है। श्री साहू न केवल स्वयं जैविक खेती करते हैं, बल्कि डिण्डौरी और आसपास के क्षेत्रों के किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए निरंतर प्रशिक्षण भी देते हैं। वे किसानों के साथ-साथ महाविद्यालयों, विद्यालयों, शासकीय संस्थानों और एनजीओ के माध्यम से डिण्डौरी सहित अन्य जिलों में जैविक खेती के प्रति जागरूकता फैलाने का सराहनीय कार्य कर रहे हैं, जिसमें उनके फार्म हाउस में जैविक खेती का लाइव डेमो भी प्रदर्शित किया जाता है। समिति पशुओं के गोबर से बायोगैस के निर्माण का भी प्रदर्शन करती है, जिसे प्लास्टिक के 6 फुट चौड़े और 10 फुट लंबे टांके में घोलकर डाला जाता है। इसमें 4 इंच का पाइप गोबर घोल डालने के लिए और दूसरा 4 इंच का पाइप ओवरफ्लो के लिए लगा होता है, जहाँ से गैस बनने के बाद निकलने वाली वेस्ट स्लरी उत्तम जैविक खाद का काम करती है। एक तीसरा पाइप गैस को सीधे चूल्हे तक ले जाता है। यह जैव-अपघटनीय पदार्थों को बिना ऑक्सीजन के सड़ाकर बनती है, जिसमें 55-65% मीथेन और 30-40% CO2 होती है, जो एक बार लगने के बाद कई वर्षों तक चलती है। यह कार्य आत्मा परियोजना के तहत डिण्डौरी जिले में 33 बीआरसी किसानों को भी दिया गया है। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन, भारत सरकार, जैव आदान संसाधन केंद्र द्वारा प्राकृतिक खेती के लिए आवश्यक जैविक उत्पाद उपलब्ध कराए जाते हैं, और बिहारी लाल साहू एक बीआरसी के रूप में प्राकृतिक खेती पर मार्गदर्शन, जानकारी और सलाह भी देते हैं, जिसके लिए उनका नारा है, 'जैविक खेती अपनाएं, स्वास्थ्य और धरती बचाएं'। नर्मदांचल गौ सेवा समिति में गौवंश आधारित प्राकृतिक जैविक खाद जैसे केंचुआ खाद, वर्मीवाश, जीवामृत, अग्नि अस्त्र आदि का निर्माण कर विक्रय किया जाता है। साथ ही बीज उपचार सहित जैविक कृषि से संबंधित विभिन्न प्रक्रियाओं की जानकारी निशुल्क प्रदान की जाती है। यहां जैविक फार्म में केला, पपीता, अदरक, करेला, सेमी, टमाटर, गोभी, बैंगन, आलू, मटर, प्याज, लहसुन, लाल भाजी, मेथी भाजी जैसी विभिन्न फसलें जैविक विधि से उगाई जाती हैं। जैविक कृषि विशेषज्ञ बिहारी लाल साहू ने इस अवसर पर बताया कि जैविक उत्पाद मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी होते हैं और रासायनिक मुक्त खेती मिट्टी की उर्वरता तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए भी आवश्यक है। उनके अनुसार, जैविक खेती से किसानों की लागत कम होती है और उपज की गुणवत्ता बेहतर होती है। कार्यक्रम में बिहारी लाल साहू, आयुष साहू, प्रगति साहू सहित अन्य जन उपस्थित रहे। बिहारी लाल साहू डिण्डौरी जिला आत्मा परियोजना के सभी अधिकारियों का हार्दिक अभिनंदन करते हैं। उन्होंने 20 हजार से अधिक विद्यार्थियों और 80 हजार से अधिक किसानों को प्राकृतिक/जैविक खेती पर प्रशिक्षण दिया है, और इस संदेश को एक दोहे के माध्यम से भी व्यक्त किया है: 'ऐसी खेती कीजिए, खाद रसायन दूर। खेत बचे जीवन बचे, स्वाद रहे भरपूर।'1
- डिंडौरी जिला जल संरचनाओं के निर्माण और जल स्रोतों के जीर्णोद्धार में पूरे देश में दूसरे स्थान पर है। पिछले दो महीनों से जिले में जनभागीदारी के माध्यम से लगातार यह कार्य किया जा रहा है। अब तक जिला और जनपद पंचायत क्षेत्रों में कुल 6 लाख 26 हजार 955 जल संरचनाओं का निर्माण कराया जा चुका है, जिसमें ग्रामीणों की सक्रिय भूमिका रही है। अधिकारियों ने ग्रामीणों को जल संरक्षण का महत्व समझाया, जिससे उन्हें यह बात समझ आई कि पानी रोकने से ही बचेगा और फिर से उपलब्ध होगा। इस समझ के बाद, लोगों ने स्वयं प्रेरित होकर अपने घरों में जल संचय के कार्य शुरू कर दिए। बजाग जनपद पंचायत की सिंहपुर ग्राम पंचायत में, जहाँ लगभग साढ़े तीन सौ मकान हैं, हर घर में सोखता पिट और छतों से बारिश के पानी को रोकने के लिए पाइप के जरिए वाटर हार्वेस्टिंग की तैयारी की गई है। गांव की महिला मेकिन बाई ने बताया कि पहले उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी, लेकिन सरपंच दीपचंद पूषाम और अधिकारियों ने उन्हें जल का महत्व समझाया, जिसके बाद उन्होंने स्वयं मेहनत कर और थोड़ा पैसा खर्च कर पाइप खरीदे और घर के सामने सोखता पिट बनाया, जिसमें अब निस्तार का पानी जा रहा है। इसी तरह, जमुना खैरवार ने भी स्वीकार किया कि वे पहले पानी का महत्व नहीं जानते थे और सोचते थे कि पानी उपलब्ध कराना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। सरपंच और अधिकारियों द्वारा थोड़ी मेहनत से पानी बचाने और धरती को रिचार्ज करने की जानकारी देने के बाद उन्होंने अपने घर में दो सोखता पिट बनवाए। अब वे गांव में जाकर अन्य लोगों को भी जागरूक कर रही हैं ताकि बारिश का पानी रोका जा सके और आने वाली पीढ़ी के लिए पानी बचाया जा सके। इसके अतिरिक्त, आजीविका परियोजना से जुड़ी कृषक सखी सुदामा सुरेश्वर ने 'मां की बगिया' योजना के बारे में बताया, जिसके तहत पांच हितग्राही हैं। एक बगिया में 15 नींबू और 35 आम के पेड़ लगाए गए हैं, जिन्हें टपक पद्धति से पानी दिया जा रहा है। कृषक सखी ने पानी बचाने और पेड़ों को सुरक्षित रखने के लिए हितग्राहियों को जागरूक किया और उन्हें टपकना, हांडी और स्लाइन की बोतल से पेड़ों को पानी देने के तरीके बताए। अब ये हितग्राही स्वयं पेड़ों की सुरक्षा और सिंचाई का कार्य कर रहे हैं, जिससे यह सुनिश्चित हो रहा है कि पानी की बचत के साथ-साथ पर्यावरण का भी ध्यान रखा जा सके।1
- डिंडौरी जिले की कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने ग्राम पंचायत घुसिया माल के ढीमरटोला में पेयजल की लंबी समस्या का त्वरित समाधान कर प्रशासनिक संवेदनशीलता का एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। यह कार्रवाई तब हुई जब कुछ दिन पूर्व ढीमरटोला के ग्रामीण पेयजल संकट को लेकर जनसुनवाई में कलेक्टर के पास पहुँचे थे। समस्या की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को दो दिनों के भीतर व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए थे और इन्हीं निर्देशों के क्रियान्वयन का जायजा लेने वे स्वयं गांव पहुँचीं। ग्रामीणों ने बताया कि पानी की कमी के कारण उन्हें कुओं में उतरकर पानी भरना पड़ रहा था। स्थिति का प्रत्यक्ष अवलोकन करने के बाद, कलेक्टर ने खराब पड़े बोरवेल में अपने समक्ष एक नया पंप लगवाकर उसे चालू कराया और घर-घर पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी करवाईं। उन्होंने स्वयं बोरवेल का पानी पीकर उसकी गुणवत्ता जाँची और बच्चों को भी पानी पिलाया। ग्रामीणों की सुविधा के लिए दो-दो हजार लीटर क्षमता की दो पानी टंकियां भी स्थापित की गईं और कम वोल्टेज की समस्या सामने आने पर तत्काल स्टेबलाइजर लगाने के निर्देश देकर व्यवस्था को सुचारु बनाया गया। इस दौरान उन्होंने जल जीवन मिशन के अंतर्गत किए गए कार्यों का निरीक्षण भी किया। कलेक्टर की इस मौजूदगी और त्वरित निर्णयों से गांव में उत्साह का माहौल बन गया, जहाँ ग्रामीणों ने पहली बार किसी वरिष्ठ अधिकारी को मौके पर खड़े होकर समस्या का समाधान करते देखा। ग्रामीणों को संबोधित करते हुए, कलेक्टर ने गर्मी के मौसम में पानी के सदुपयोग की अपील की और मोटर संचालन की जिम्मेदारी किसी जिम्मेदार व्यक्ति को सौंपने का सुझाव दिया ताकि पूरे गांव को समय पर पर्याप्त पानी मिल सके। निरीक्षण के दौरान, कलेक्टर ने जल संरक्षण का संदेश भी दिया। उन्होंने ग्रामीणों को सोखता टैंक निर्माण की जानकारी दी और उन्हें घरों में ऐसे टैंक बनाने के लिए प्रेरित किया, यह समझाते हुए कि इससे भूजल स्तर संरक्षित रहेगा और वर्षा जल संचयन को भी बढ़ावा मिलेगा। इस अवसर पर रामबाबू देवांगन, सुंदरलाल यादव, चेतराम अहिरवार, प्रमोद उपाध्याय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। कलेक्टर की इस पहल ने न केवल पेयजल संकट का समाधान किया, बल्कि प्रशासन और ग्रामीणों के बीच विश्वास की एक नई मिसाल भी कायम की है।2
- समनापुर क्षेत्र में नौतपा के दौरान हुई बारिश ने गर्मी का असर काफी कम कर दिया है। इस बारिश के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली है। किसान भी इस बारिश को फायदेमंद मान रहे हैं, क्योंकि इससे खेतों में नमी बढ़ी है और आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों में भी मदद मिलेगी।1
- डिंडोरी जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली एंबुलेंस व्यवस्था खुद ही खराब स्थिति में है। इस बदहाली के कारण गंभीर मरीजों और उनके परिजनों को समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है। हालत यह है कि जिला अस्पताल से जबलपुर सहित अन्य बड़े अस्पतालों के लिए रेफर किए गए मरीजों को एंबुलेंस के लिए घंटों तक इंतजार करना पड़ता है। डिंडोरी जिले में वर्तमान में जननी एक्सप्रेस, बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) और एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) समेत कुल 29 एंबुलेंस वाहन संचालित हैं। हालांकि, इनमें से कई वाहन लंबे समय से खराब होकर खड़े हैं और मरम्मत की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इस स्थिति के चलते जिले की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।1
- उमरिया से सटे अनूपपुर जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में शुक्रवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। पुष्पराजगढ़ ब्लॉक के गिंजरी गांव स्थित शनि मंदिर के पास श्रद्धालुओं से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित होकर पलट गई, जिसमें मौके पर ही 4 ग्रामीणों की मौत हो गई और लगभग 41 लोग घायल हो गए। कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, ग्राम पड़मनिया और आसपास के करीब 50 ग्रामीण ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार होकर बिजौरा में आयोजित पूजन कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। अनूपपुर सीमा से लगे तिवनी गांव स्थित शनि धाम के पास अचानक ट्रैक्टर-ट्रॉली का संतुलन बिगड़ने से यह भयावह हादसा हुआ। ट्रॉली पलटने से कई लोग उसके नीचे दब गए, जिससे मौके पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। आसपास के ग्रामीणों ने तुरंत मदद की, जिसके बाद सूचना पर पाली एसडीएम, पुलिस प्रशासन और राजस्व अमला मौके पर पहुंचा और स्थानीय लोगों की सहायता से राहत व बचाव कार्य चलाया। घायलों को एम्बुलेंस व निजी वाहनों से पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार जारी है, जबकि गंभीर घायलों को जिला अस्पताल रेफर किया गया है। हादसे में घनश्याम गोड़ (पड़मनिया), सहबल बैगा (गिंजरी), वीर सिंह पिता माधव सिंह (गिंजरी) और भूपति सिंह पिता भगीरथ सिंह (पड़वानिया) की मौत हो गई, जिससे उनके गांवों में मातम छा गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। इस दर्दनाक हादसे ने पाली अस्पताल की बदहाली को भी उजागर कर दिया, जहाँ बड़ी संख्या में घायल पहुंचने पर पर्याप्त स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं थे और कई घायलों को जमीन पर लिटाकर इलाज करना पड़ा। अस्पताल परिसर में अव्यवस्था का माहौल देखा गया, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था की ऐसी तस्वीर सामने आने पर लोगों में गहरी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और पर्याप्त संसाधन होते तो घायलों को अधिक राहत मिल सकती थी। इस घटना के बाद प्रशासनिक व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है।4