मध्य प्रदेश के दमोह जिले में भगवती मानव कल्याण संगठन ने विभिन्न मांगों को लेकर राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। संगठन ने आरोप लगाया है कि दमोह के आबकारी विभाग में पदस्थ कुछ अधिकारियों के शराब ठेकेदारों और अवैध शराब माफियाओं से संबंध हैं, जिसके कारण वे कोई कार्रवाई नहीं करते हैं। संगठन ने इन अधिकारियों के तत्काल स्थानांतरण और उनकी संपत्ति की जांच की मांग की है। संगठन ने यह भी आरोप लगाया है कि जिले में संचालित शासकीय शराब दुकानों में निर्धारित समय से अधिक समय तक शराब की बिक्री की जा रही है और आबकारी विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। संगठन ने मांग की है कि संबंधित शराब दुकान के ठेकेदारों और प्रबंधकों को सह-आरोपी बनाया जाए। इसके अलावा, संगठन ने जिले के विभिन्न पुलिस थानों और चौकियों में अवैध शराब, जुआ, सट्टा, गांजा, अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण, अवैध गौवंश परिवहन और अन्य सामाजिक बुराइयों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने दावा किया है कि वह लगभग 20 वर्षों से इन सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जन जागरण और सहयोगात्मक रूप से शासन प्रशासन और पुलिस का सहयोग करता आ रहा है। संगठन ने ग्राम पंचायतों और पुलिस प्रशासन के सहयोग से लगभग 300 से अधिक ग्राम पंचायतों में शराब मुक्त ग्राम पंचायत घोषित कराने का प्रस्ताव पारित कराया है। संगठन ने ज्ञापन में जल्द कार्रवाई की मांग की है।
मध्य प्रदेश के दमोह जिले में भगवती मानव कल्याण संगठन ने विभिन्न मांगों को लेकर राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। संगठन ने आरोप लगाया है कि दमोह के आबकारी विभाग में पदस्थ कुछ अधिकारियों के शराब ठेकेदारों और अवैध शराब माफियाओं से संबंध हैं, जिसके कारण वे कोई कार्रवाई नहीं करते हैं। संगठन ने इन अधिकारियों के तत्काल स्थानांतरण और उनकी संपत्ति की जांच की मांग की है। संगठन ने यह भी आरोप लगाया है कि जिले में संचालित शासकीय शराब दुकानों में निर्धारित समय से अधिक समय तक शराब की बिक्री की जा रही है और आबकारी विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। संगठन ने मांग की है कि संबंधित शराब दुकान के ठेकेदारों और प्रबंधकों को सह-आरोपी बनाया जाए। इसके अलावा, संगठन ने जिले के विभिन्न पुलिस थानों और चौकियों में अवैध शराब, जुआ, सट्टा, गांजा, अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण, अवैध गौवंश परिवहन और अन्य सामाजिक बुराइयों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने दावा किया है कि वह लगभग 20 वर्षों से इन सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जन जागरण और सहयोगात्मक रूप से शासन प्रशासन और पुलिस का सहयोग करता आ रहा है। संगठन ने ग्राम पंचायतों और पुलिस प्रशासन के सहयोग से लगभग 300 से अधिक ग्राम पंचायतों में शराब मुक्त ग्राम पंचायत घोषित कराने का प्रस्ताव पारित कराया है। संगठन ने ज्ञापन में जल्द कार्रवाई की मांग की है।
- मध्य प्रदेश के दमोह जिले में भगवती मानव कल्याण संगठन ने विभिन्न मांगों को लेकर राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। संगठन ने आरोप लगाया है कि दमोह के आबकारी विभाग में पदस्थ कुछ अधिकारियों के शराब ठेकेदारों और अवैध शराब माफियाओं से संबंध हैं, जिसके कारण वे कोई कार्रवाई नहीं करते हैं। संगठन ने इन अधिकारियों के तत्काल स्थानांतरण और उनकी संपत्ति की जांच की मांग की है। संगठन ने यह भी आरोप लगाया है कि जिले में संचालित शासकीय शराब दुकानों में निर्धारित समय से अधिक समय तक शराब की बिक्री की जा रही है और आबकारी विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। संगठन ने मांग की है कि संबंधित शराब दुकान के ठेकेदारों और प्रबंधकों को सह-आरोपी बनाया जाए। इसके अलावा, संगठन ने जिले के विभिन्न पुलिस थानों और चौकियों में अवैध शराब, जुआ, सट्टा, गांजा, अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण, अवैध गौवंश परिवहन और अन्य सामाजिक बुराइयों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने दावा किया है कि वह लगभग 20 वर्षों से इन सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जन जागरण और सहयोगात्मक रूप से शासन प्रशासन और पुलिस का सहयोग करता आ रहा है। संगठन ने ग्राम पंचायतों और पुलिस प्रशासन के सहयोग से लगभग 300 से अधिक ग्राम पंचायतों में शराब मुक्त ग्राम पंचायत घोषित कराने का प्रस्ताव पारित कराया है। संगठन ने ज्ञापन में जल्द कार्रवाई की मांग की है।1
- दमोह जिले के जबेरा तहसील के पटेरा क्षेत्र में बिजली कटौती के विरोध में ग्रामीणों ने कुम्हारी पटेरा मार्ग पर जाम लगा दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले 4 दिनों से बिजली नहीं आ रही है और शहर में बिजली की आपूर्ति सामान्य है। ग्रामीणों ने एकजुट होकर मार्ग को बंद कर दिया। पुलिस प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को समझाइश दी और जाम को खुलवाया। इसके बाद मुख्य कटनी पटेरा मार्ग पर आवाजाही फिर से शुरू हो सकी। ग्रामीणों ने विद्युत विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं और भेदभाव करने का आरोप लगाया है।2
- रामकृष्ण जैसा क्यों नहीं बनाया जा रही हैं ... जबकि आदरणीय झूठा।1
- किलकिला नदी किनारे दफन मिले मृत भ्रूण की जांच तेज, DNA से होगी मां की पहचान पन्ना शहर में किलकिला नदी किनारे दफन मिले मृत भ्रूण के मामले में कोतवाली पुलिस ने जांच तेज कर दी है। पुलिस ने कब्र खुदवाकर शव निकलवाया, पोस्टमार्टम कराया और मां की पहचान के लिए डीएनए सैंपल सुरक्षित रखे हैं। मामले में निजी अस्पताल के रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज भी जब्त कर लिए गए हैं। पुलिस के अनुसार, धाम मोहल्ला निवासी स्वीपर राकेश डुमार ने बताया कि 22 जुलाई को एक वृद्ध महिला ने निजी अस्पताल के बाहर मृत भ्रूण देकर उसे दफनाने के लिए ₹2,000 दिए थे। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने शव निकलवाकर जांच शुरू की। गर्भनाल पर मेडिकल क्लैंप मिलने से संस्थागत प्रसव की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल पुलिस मृत भ्रूण की मां की पहचान, वृद्ध महिला की तलाश और पूरे मामले की जांच में जुटी है।1
- मध्य प्रदेश के दमोह जिले के हटा क्षेत्र में बिजली कटौती को लेकर स्थानीय लोगों ने अजब धाम फतेहपुर सब स्टेशन के बाहर प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में लोग सब स्टेशन के बाहर एकत्रित हुए और बिजली आपूर्ति बहाल करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों में स्थानीय निवासी, किसान और व्यापारी शामिल थे, जिन्होंने बिजली कटौती से हो रही परेशानियों का जिक्र किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि बिजली कटौती के कारण उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कृषि कार्यों में बाधा, व्यापारिक गतिविधियों में व्यवधान और घरेलू उपयोग में असुविधा की शिकायतें प्रमुख थीं। लोगों ने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे और बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे।1
- पन्ना जिले के रायपुरा में युवा राजनीति की सक्रिय शुरुआत को लेकर चर्चा है। यह बात सामने आई है कि युवा राजनीति की शुरुआत क्यों और कैसे हुई। इस बारे में स्थानीय युवाओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच बातचीत चल रही है। इस क्षेत्र में राजनीतिक जागरूकता बढ़ने के साथ ही युवा वर्ग राजनीतिक गतिविधियों में अधिक शामिल हो रहा है। स्थानीय राजनीतिक दलों और संगठनों द्वारा युवाओं को राजनीति में शामिल करने के प्रयास भी देखे जा रहे हैं।1
- मध्य प्रदेश के दमोह जिले में सोमवार को भगवती मानव कल्याण संगठन एवं भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के हजारों कार्यकर्ताओं ने गांव-गांव में फैलते शराब के कारोबार और आबकारी विभाग की कथित निष्क्रियता के विरोध में सड़कों पर उतरकर विशाल जनरैली निकाली। इस रैली में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की भारी भागीदारी देखी गई, जिसने पूरे शहर का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। रैली के बाद जिला कलेक्टर को राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर प्रदेश में प्रभावी शराबबंदी लागू करने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि सरकार एक ओर नशामुक्त समाज की बात करती है, वहीं दूसरी ओर गांव-गांव में शराब की दुकानें और अवैध शराब का कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। इससे युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में जा रही है, परिवार आर्थिक और सामाजिक रूप से टूट रहे हैं तथा अपराधों में लगातार वृद्धि हो रही है। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि आबकारी विभाग अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में पूरी तरह असफल साबित हुआ है। ज्ञापन में मांग की गई कि गांवों और आबादी वाले क्षेत्रों से शराब की बिक्री तत्काल बंद की जाए, अवैध शराब के कारोबार पर कठोर कार्रवाई हो तथा आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक स्वार्थ का नहीं, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को बचाने का जनआंदोलन है। यदि सरकार ने शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए, तो प्रदेशभर में चरणबद्ध और व्यापक आंदोलन चलाया जाएगा, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। हजारों कार्यकर्ताओं की एक ही पुकार थी— 'शराब मुक्त हो हर गांव, सुरक्षित हो हर परिवार। नशा नहीं, संस्कार चाहिए; शराब नहीं, रोजगार चाहिए।'4
- वन विभाग ने मध्य प्रदेश के दमोह जिले के पटेरा क्षेत्र में वन भूमि पर किए गए अवैध अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। बीजा डोल पीएफ-384 क्षेत्र में लगभग 15 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है। स्थानीय लोगों द्वारा वन भूमि पर अवैध रूप से तार फेंसिंग कर फसल बो दी गई थी। अतिक्रमण की सूचना मिलने पर वन परिक्षेत्र अधिकारी अखिलेश चौरसिया के नेतृत्व में उड़नदस्ता टीम मौके पर पहुंची और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की। इस दौरान वन भूमि से अवैध कब्जा हटाकर भूमि को विभाग के कब्जे में लिया गया। वन विभाग ने बताया कि संबंधित अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम के तहत वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, मझगुवा खेड़ा वन क्षेत्र के अंतर्गत लगभग 85 हेक्टेयर भूमि, जहां पौधरोपण का कार्य प्रारंभ किया गया था, वहां भी कुछ लोगों द्वारा अतिक्रमण का प्रयास किया गया। वन विभाग की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उक्त भूमि को भी अतिक्रमण मुक्त कराया। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन भूमि पर किसी भी प्रकार के अवैध कब्जे या अतिक्रमण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा तथा भविष्य में भी ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।2