सऊदी अरब की जेल में 20 साल बिताने के बाद केरल के अब्दुल रहीम आखिरकार अपने घर लौट आए हैं। यह सिर्फ एक व्यक्ति की रिहाई की कहानी नहीं, बल्कि दुनिया भर के केरलवासियों की बेमिसाल एकजुटता और उस जिंदादिल इंसानियत की मिसाल है जिसने एक बेगुनाह को मौत के मुँह से वापस खींच लिया। कोझिकोड के अब्दुल रहीम 2006 में, जब वे महज 24 साल के थे, ड्राइवर की नौकरी करने सऊदी अरब गए थे। वहाँ उन्हें अपने कफ़ील के 17 वर्षीय दिव्यांग बेटे अनास की देखभाल का जिम्मा भी मिला, जो एक लाइफ-सपोर्ट मशीन के सहारे सांस लेता था। दिसंबर 2006 में, कार चलाते समय अनास ने पीछे से कुछ विवाद किया। उसे शांत करने के प्रयास में, रहीम का हाथ गलती से अनास के गले में लगी मशीन से टकरा गया, जिससे वह निकल गई। कुछ ही देर में अनास बेहोश हो गया और उसकी मृत्यु हो गई। इस घटना को दुर्घटना मानते हुए भी, सऊदी कानून के तहत रहीम पर हत्या का मामला दर्ज किया गया। साल 2011 में एक सऊदी अदालत ने उन्हें फांसी की सजा सुनाई, जिसे अपीलीय अदालतों ने भी बरकरार रखा। सऊदी अरब के कानून में प्रावधान है कि यदि पीड़ित परिवार 'ब्लड मनी' (मुआवजा या दियत) लेकर माफ करने को तैयार हो जाए, तो मौत की सजा टल सकती है। सालों के अथक प्रयासों के बाद, पीड़ित परिवार 15 मिलियन सऊदी रियाल (लगभग 34 करोड़ रुपये) लेकर रहीम को क्षमा करने पर सहमत हुआ। इतनी बड़ी धनराशि जुटा पाना एक साधारण परिवार के लिए असंभव था, जिसके बाद एक अभूतपूर्व क्राउडफंडिंग अभियान शुरू किया गया। पैसे एकत्र करने के लिए एक विशेष मोबाइल ऐप लॉन्च किया गया और केरल के नेताओं, प्रवासियों, आम नागरिकों और दुनिया भर के मलयाली समुदाय ने एकजुट होकर महज कुछ ही दिनों में ₹34 करोड़ की भारी-भरकम राशि जुटा ली। अप्रैल 2024 में यह रकम सऊदी अदालत में जमा कराई गई, जिसके बाद उनकी फांसी की सजा आधिकारिक रूप से रद्द कर दी गई। फांसी की सजा टलने के बाद भी रहीम को अपनी निर्धारित जेल की अवधि पूरी करनी थी, जो अरबी कैलेंडर (हिजरी) की गणना के अनुसार 20 मई 2026 को समाप्त हुई। सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया। जब अब्दुल रहीम केरल के कोझिकोड एयरपोर्ट पर उतरे, तो 20 साल बाद उन्होंने अपनी बूढ़ी माँ फातिमा और अपने परिवार को गले लगाया। उनकी माँ के अटूट विश्वास और लाखों लोगों की दुआओं का ही यह प्रतिफल था कि आज रहीम अपने वतन की खुली हवा में सांस ले रहे हैं। यह घटना यह विश्वास दिलाती है कि मानवता आज भी ज़िंदा है, और साथ ही यह हमें एक बड़ी सीख भी देती है कि चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों, दो रोटी कम खाइए लेकिन अपने ही देश में रहिए। अपने देश और अपने परिवार के पास रहने से अच्छा इस दुनिया में कुछ भी नहीं है।
सऊदी अरब की जेल में 20 साल बिताने के बाद केरल के अब्दुल रहीम आखिरकार अपने घर लौट आए हैं। यह सिर्फ एक व्यक्ति की रिहाई की कहानी नहीं, बल्कि दुनिया भर के केरलवासियों की बेमिसाल एकजुटता और उस जिंदादिल इंसानियत की मिसाल है जिसने एक बेगुनाह को मौत के मुँह से वापस खींच लिया। कोझिकोड के अब्दुल रहीम 2006 में, जब वे महज 24 साल के थे, ड्राइवर की नौकरी करने सऊदी अरब गए थे। वहाँ उन्हें अपने कफ़ील के 17 वर्षीय दिव्यांग बेटे अनास की देखभाल का जिम्मा भी मिला, जो एक लाइफ-सपोर्ट मशीन के सहारे सांस लेता था। दिसंबर 2006 में, कार चलाते समय अनास ने पीछे से कुछ विवाद किया। उसे शांत करने के प्रयास में, रहीम का हाथ गलती से अनास के गले में लगी मशीन से टकरा गया, जिससे वह निकल गई। कुछ ही देर में अनास बेहोश हो गया और उसकी मृत्यु हो गई। इस घटना को दुर्घटना मानते हुए भी, सऊदी कानून के तहत रहीम पर हत्या का मामला दर्ज किया गया। साल 2011 में एक सऊदी अदालत ने उन्हें फांसी की सजा सुनाई, जिसे अपीलीय अदालतों ने भी बरकरार रखा। सऊदी अरब के कानून में प्रावधान है कि यदि पीड़ित परिवार 'ब्लड मनी' (मुआवजा या दियत) लेकर माफ करने को तैयार हो जाए, तो मौत की सजा टल सकती है। सालों के अथक प्रयासों के बाद, पीड़ित परिवार 15 मिलियन सऊदी रियाल (लगभग 34 करोड़ रुपये) लेकर रहीम को क्षमा करने पर सहमत हुआ। इतनी बड़ी धनराशि जुटा पाना एक साधारण परिवार के लिए असंभव था, जिसके बाद एक अभूतपूर्व क्राउडफंडिंग अभियान शुरू किया गया। पैसे एकत्र करने के लिए एक विशेष मोबाइल ऐप लॉन्च किया गया और केरल के नेताओं, प्रवासियों, आम नागरिकों और दुनिया भर के मलयाली समुदाय ने एकजुट होकर महज कुछ ही दिनों में ₹34 करोड़ की भारी-भरकम राशि जुटा ली। अप्रैल 2024 में यह रकम सऊदी अदालत में जमा कराई गई, जिसके बाद उनकी फांसी की सजा आधिकारिक रूप से रद्द कर दी गई। फांसी की सजा टलने के बाद भी रहीम को अपनी निर्धारित जेल की अवधि पूरी करनी थी, जो अरबी कैलेंडर (हिजरी) की गणना के अनुसार 20 मई 2026 को समाप्त हुई। सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया। जब अब्दुल रहीम केरल के कोझिकोड एयरपोर्ट पर उतरे, तो 20 साल बाद उन्होंने अपनी बूढ़ी माँ फातिमा और अपने परिवार को गले लगाया। उनकी माँ के अटूट विश्वास और लाखों लोगों की दुआओं का ही यह प्रतिफल था कि आज रहीम अपने वतन की खुली हवा में सांस ले रहे हैं। यह घटना यह विश्वास दिलाती है कि मानवता आज भी ज़िंदा है, और साथ ही यह हमें एक बड़ी सीख भी देती है कि चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों, दो रोटी कम खाइए लेकिन अपने ही देश में रहिए। अपने देश और अपने परिवार के पास रहने से अच्छा इस दुनिया में कुछ भी नहीं है।
- आजमगढ़ के सरायमीर थाना क्षेत्र के मिर्जापुर गांव में एक प्रेमी अपनी प्रेमिका से मिलने पहुंचा। इस दौरान ग्रामीणों ने दोनों की मांग भरवा दी, जो रिश्ते को स्वीकार करने का एक प्रतीकात्मक कदम माना जाता है। हालांकि, इस घटना के बाद पिता ने इस रिश्ते को मंजूर न करने की बात कही है।1
- पुलिस अधीक्षक मऊ कमलेश बहादुर के निर्देशन में जनपद मऊ में अपराधों और अपराधियों के विरुद्ध एक व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में, जनपद के विभिन्न थाना क्षेत्रों में प्रभावी कार्रवाई करते हुए अभियुक्तों की गिरफ्तारी और बरामदगी की जा रही है। इस अभियान के तहत, हलधरपुर पुलिस ने 30 मई 2026 को एक अभियुक्त को गिरफ्तार किया है, जिस पर दुर्गा मंदिर से आभूषण चोरी करने का आरोप है। गिरफ्तार किए गए अभियुक्त की पहचान जोगिन्द्र चौहान उर्फ जोगी, पुत्र विशुनी चौहान, निवासी खराड़गाड़ी, थाना हलधरपुर, जनपद मऊ के रूप में हुई है, जिसकी उम्र लगभग 61 वर्ष बताई गई है। उसे खालिसपुर के पास से पकड़ा गया। यह मामला मु0अ0सं0 107/2026 धारा 331(4)/305(a) बी.एन.एस. से संबंधित है। पुलिस की जांच के अनुसार, अभियुक्त ने 28 मई 2026 को दिन में ग्राम गढ़वा स्थित दुर्गा मंदिर में विश्राम किया था और शाम के सुनसान वक्त का फायदा उठाकर मंदिर से आभूषण चुरा लिए थे। पुलिस ने अभियुक्त के कब्जे से चोरी किए हुए पीले धातु के तीन टुकड़े बरामद किए हैं। गिरफ्तार अभियुक्त को माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है, और इस प्रकरण में धारा 317 (2) बी.एन.एस. की बढ़ोतरी भी की गई है। जनपद पुलिस का यह अभियान अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से लगातार जारी है।3
- आज, 31 मई 2026 को मऊ क्रांति न्यूज के प्रचार मंत्री अब्दुल रहमान इदरीसी, जो मऊ जनपद के निवासी हैं, मीडिया कवरेज के सिलसिले में गाजीपुर जा रहे थे। इसी दौरान गाजीपुर के मरदह थाना क्षेत्र के अंतर्गत पोस्ट सिनोरा के पास उनकी गाड़ी को पीछे से आ रहे एक पिकअप वाहन ने टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में दो लोगों को गंभीर चोटें आईं। घटना की सूचना तत्काल डायल 112 पुलिस को दी गई, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक सहायता प्रदान की। अब्दुल रहमान इदरीसी ने बताया कि उनकी स्थिति सामान्य है और चिंता की कोई बात नहीं है। पुलिस की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच बातचीत के बाद मामला आपसी सुलह-समझौते के आधार पर निपटा लिया गया। मौके पर मौजूद लोगों ने पुलिस की तत्परता और सहयोग की सराहना की। दुर्घटना के बाद यातायात भी सामान्य रूप से चलता रहा।4
- Post by Akku news1
- भारतीय राष्ट्रीय पार्टी के संस्थापक मंडल सदस्य भाई मनोज मौर्य जी का आज निधन हो गया।1
- अंबेडकर नगर थाना मालीपुर जहां पेड़ काटने वालों का उपद्रव पुलिस की सह पर कुछ इस तरह से होता है कि धरती बंजर हो जाने को तैयार है। यह घटना है तारखुर्द से सटे गांव उस्मापुर की है । जहां नरेंद्र कुमार उपाध्याय पुत्र स्वर्गीय राममिलन की ट्यूबवेल के पास खंभा लगा हुआ था । और पेड़ काटने वालों ने कुछ इस तरह से पेड़ काटा कि पेड़ धड़ाम से आकर गिरा बिजली के तार के ऊपर। और खंभा गिरकर टूट गया। नुकसान विद्युत उपभोक्ता नरेंद्र कुमार उपाध्याय और विद्युत विभाग का हुआ। दुर्घटना का निमंत्रण बात ही छोड़िए ट्यूबेल मलिक ने इस दुर्घटना की सूचना बिजली विभाग को दी। नजदीकी पावर हाउस से जूनियर इंजीनियर ने आकर हालत को देखा, पेड़ काटने वाले पड़ोसी गांव कल्याणपुर निवासी राम सिंह वर्मा नामक आदमी ने , जे ई को मां बहन की गालियां दी और मारने को दौड़ा लिया। सरकारी कर्मचारी अपमान नहीं सह पाया । साहब ने 112नंबर डायल किया । पुलिस के आते ही राम सिंह वर्मा मौके से भाग गया। मालीपुर थानाध्यक्ष स्वतंत्र कुमार मौर्य के बारे में सूत्र बताते हैं कि थानेदार ने ठेकेदार के परिवार से एक लाख की उचित डिमांड कर रहे हैं। इसमें 80 हजार रुपए का ट्रांसफार्मर का और 10 हजार रुपए का खंभा और तार की कीमत भी जोड़ी गई । जबकि यह पैसा थानेदार अगर पाएगा तो पेड़ काटने वाले पर मुकदमा नहीं लिखा जाएगा। और बहुत ठंडा ठंडा कूल कूल मिजाज से आपस में मिल बैठकर थाने के मध्य समझौता हो जाएगा । जूनियर इंजीनियर विद्युत अगर रिश्वत से कुछ हिस्सा पा जाएगा तो, शायद बेचारा अपनी प्यारी मां बहन की गालियां भी भूल जाएगा। फिलहाल कल शनिवार दोपहर की घटना शुरू-शुरू में खूब गर्मी दिखाई। लेकिन धीरे-धीरे मामला शीतल बस्ते में जा रहा है। जैसे देवरहा गांव की युवा विधवा कैशरी बानो का सामूहिक दुराचार... और हत्याकांड धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में जा रहा है! धन्य है भाजपा युग में रिश्वत राज। और धन्य है थाना अध्यक्ष मालीपुर, स्वतंत्र कुमार मौर्य के सिर पर थानेदारी का ताज।। धन्य है लेडी सिंघम प्राची सिंह का डरावना शब्र। कि अगर वे कुछ भी स्वतंत्र कुमार मौर्य को बोलेंगी । तो डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का फोन आ जाएगा ? कि हमारे थानेदार को अपने टच कैसे किया ? अंबेडकर नगर से आपका दिल ऊब गया है क्या ? समीक्षा मिश्रा ब्यूरो चीफ1
- गाजीपुर के एक होटल में गोली चलने की घटना सामने आई है, जिसमें एक युवक की जान चली गई। इस मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस जांच में जुट गई है।1