सीएम हेमंत सोरेन का बड़ा फैसला: शहीद जवानों के बच्चों के लिए बनेंगे अत्याधुनिक आवासीय विद्यालय झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों के कल्याण के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। उन्होंने विशेष रूप से उन जवानों के बच्चों की शिक्षा के लिए आवासीय विद्यालयों (Residential Schools) की स्थापना करने का निर्णय लिया है, जो ड्यूटी के दौरान शहीद हो जाते हैं या गंभीर रूप से घायल होते हैं। मुख्यमंत्री ने इस पहल के पीछे की संवेदनाओं को साझा करते हुए कहा: जवानों की पृष्ठभूमि: पुलिस और सेना में शामिल होने वाले अधिकतर नौजवान किसान और मजदूर परिवारों से आते हैं। बहुत कम ही ऐसे अवसर होते हैं जब किसी बड़े पूंजीपति परिवार का बच्चा इन बलों में शामिल हो। शिक्षा की व्यवस्था: सरकार ने निर्णय लिया है कि जवानों के बच्चों को उन्हीं के वातावरण में बेहतर शिक्षा मिले। इसके लिए सह-शिक्षा (Co-ed) आवासीय विद्यालय स्थापित किए जाएंगे, जहाँ लड़के और लड़कियां दोनों पढ़ सकेंगे। कल्याणकारी कदम: यह विद्यालय "सेंटर ऑफ एक्सीलेंस" के रूप में विकसित किए जाएंगे, ताकि शहीद जवानों के परिवारों को संबल मिल सके और उनके बच्चों का भविष्य उज्ज्वल हो।
सीएम हेमंत सोरेन का बड़ा फैसला: शहीद जवानों के बच्चों के लिए बनेंगे अत्याधुनिक आवासीय विद्यालय झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों के कल्याण के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। उन्होंने विशेष रूप से उन जवानों के बच्चों की शिक्षा के लिए आवासीय विद्यालयों (Residential Schools) की स्थापना करने का निर्णय लिया है, जो ड्यूटी के दौरान शहीद हो जाते हैं या गंभीर रूप से घायल होते हैं। मुख्यमंत्री ने इस पहल के पीछे की संवेदनाओं को साझा करते हुए कहा: जवानों की पृष्ठभूमि: पुलिस और सेना में शामिल होने वाले अधिकतर नौजवान किसान और मजदूर परिवारों से आते हैं। बहुत कम ही ऐसे अवसर होते हैं जब किसी बड़े पूंजीपति परिवार का बच्चा इन बलों में शामिल हो। शिक्षा की व्यवस्था: सरकार ने निर्णय लिया है कि जवानों के बच्चों को उन्हीं के वातावरण में बेहतर शिक्षा मिले। इसके लिए सह-शिक्षा (Co-ed) आवासीय विद्यालय स्थापित किए जाएंगे, जहाँ लड़के और लड़कियां दोनों पढ़ सकेंगे। कल्याणकारी कदम: यह विद्यालय "सेंटर ऑफ एक्सीलेंस" के रूप में विकसित किए जाएंगे, ताकि शहीद जवानों के परिवारों को संबल मिल सके और उनके बच्चों का भविष्य उज्ज्वल हो।
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- पत्रकार पर हमले का हजारीबाग प्रेस क्लब ने जताया विरोध, दोषियों पर जल्द कार्रवाई की मांग हजारीबाग। हजारीबाग सदर अस्पताल में स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के सामने मंगलवार को मीडिया कर्मियों पर हमला को हजारीबाग प्रेस क्लब ने दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए घटना की कड़ी निंदा की है। इस घटना पर हजारीबाग प्रेस क्लब ने कड़ा विरोध जताया है। क्लब के अध्यक्ष मुरारी सिंह ने कहा कि एक मंत्री के कार्यक्रम में पत्रकारों पर हमला किया जाना शर्मनाक है। इसकी जितनी भी निंदा की जाए कम है। मंत्री से सवाल पूछने पर उपस्थित पत्रकारों पर गुंडे जान लेवा हमला कर देंगे यह लोकतंत्र को शर्मसार करता है। अब पत्रकार सुरक्षित नहीं हैं , जबकि उसी स्थान पर जिले के कई बड़े पुलिस और जिला के पदाधिकारी भी उपस्थित थे। वहीं क्लब के सचिव दीपक सिंह ने कहा कि पत्रकारों पर सुनियोजित हमला किया गया है। वहां उपस्थित गुंडे सवाल पूछने पर आग बबूला हो गए और पत्रकारों पर ही हमला कर दिया। जिसने दो पत्रकार साथी को चोट भी आए हैं । यह घटना बर्दाश्त के बाहर है, अगर जल्द उन गुंडों को गिरफ्तार नहीं किया जाता तो हमलोग आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। अंजाम देने वालों को प्रशासन चिन्हित कर जल्द गिरफ्तार करे। यह केवल एक पत्रकार पर हमला नहीं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा और कायराना प्रहार है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सत्ता के संरक्षण में पत्रकारों की आवाज दबाने का प्रयास किया गया है, इसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। यह घटना प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला है और इससे पूरे पत्रकार समाज में भारी रोष है।2
- आज के दौर में आरक्षण एक ऐसा मुद्दा बन चुका है, जिस पर देश का हर वर्ग अपनी-अपनी राय रखता है। लेकिन हाल ही में एक युवा ने जिस तरह से इस विषय पर अपनी बात रखी, उसने पूरे सिस्टम की परतें खोलकर रख दीं। युवा का कहना है कि आरक्षण का मूल उद्देश्य समाज के पिछड़े और वंचित वर्गों को आगे बढ़ाना था, लेकिन अब यह व्यवस्था कई जगहों पर अपने असली मकसद से भटकती नजर आ रही है।1
- -- पत्रकारों को निशाना बनाकर हमला करने वाले लोकतंत्र के लिए हैं खतरा अविलंब हो गिरफ्तारी: संपूर्णा नंद भारती -- झारखण्ड में पत्रकारों के साथ लगातार बदसलूकी एवं हमले की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं: शाहनवाज हसन -- राँची। हजारीबाग में स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के अस्पताल निरीक्षण के दौरान पत्रकारों को निशाना बनाकर हमला करने की भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ(BSPS) की झारखण्ड राज्य इकाई झारखण्ड जर्नलिस्ट एसोसियेशन(JJA) ने कड़ी निंदा की है। बीएसपीएस के राष्ट्रीय सचिव चंदन मिश्रा ने अपने वक्तव्य में कहा है कि जो जानकारी प्राप्त हुई है वह बहुत ही गंभीर मामला है, एक पत्रकार राज्य के स्वास्थ मंत्री से जब प्रश्न पूछता है तो उसे मंत्री के समक्ष ही मंत्री के समर्थकों द्वारा बुरी तरह से पिटाई की जाती है, पत्रकार की पिटाई मंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों के सामने होती है और सभी मौन रहते हैं। श्री मिश्रा ने कहा कि यह हमला किसी एक अथवा दो पत्रकार पर नहीं किया गया है, यह हमला लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर है जिसकी भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ(BSPS) एवं झारखण्ड राज्य इकाई झारखण्ड जर्नलिस्ट एसोसियेशन(JJA) कड़ी निंदा करते हुए दोषियों की अविलंब गिरफ्तारी की मांग करता है। वहीं पूरे प्रकरण में झारखण्ड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संपूर्णा नंद भारती ने कहा है कि पत्रकारों को निशाना बनाकर हमला करने वाले लोकतंत्र के लिए खतरा हैं हमलावरों की अविलंब हो गिरफ्तारी होनी चाहिए। बीएसपीएस एवं जेजेए के संस्थापक शाहनवाज हसन ने कहा कि झारखण्ड में पत्रकारों के साथ लगातार बदसलूकी एवं हमले की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, इसे लेकर संगठन ने झारखण्ड सहित राष्ट्रीय स्तर पर धरना प्रदर्शन कर "पत्रकार सुरक्षा कानून" लागू करने की मांग झारखण्ड एवं केंद्र सरकार से की है। श्री हसन ने कहा पत्रकारों को सवाल पूछने पर मंत्री के समक्ष मारपीट की जाती है और इसके विरुद्ध कार्रवाई के स्थान पर प्रशासन मूकदर्शक बने रहता है यह शर्मशार करने वाली घटना है। मामले को लेकर राष्ट्रीय संयुक्त सचिव विष्णु शंकर उपाध्याय, प्रदेश सचिव जावेद इस्लाम, हजारीबाग जिला अध्यक्ष कृष्णा गुप्ता, उपाध्यक्ष अर्जुन सोनी, अजय मिश्रा सहित हजारीबाग के समय जेजेए के सदस्यों ने जो हजारीबाग प्रेस क्लब के भी सदस्य हैं कड़ी शब्दों में निंदा करती हुए कार्रवाई की मांग की है।1
- झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों के कल्याण के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। उन्होंने विशेष रूप से उन जवानों के बच्चों की शिक्षा के लिए आवासीय विद्यालयों (Residential Schools) की स्थापना करने का निर्णय लिया है, जो ड्यूटी के दौरान शहीद हो जाते हैं या गंभीर रूप से घायल होते हैं। मुख्यमंत्री ने इस पहल के पीछे की संवेदनाओं को साझा करते हुए कहा: जवानों की पृष्ठभूमि: पुलिस और सेना में शामिल होने वाले अधिकतर नौजवान किसान और मजदूर परिवारों से आते हैं। बहुत कम ही ऐसे अवसर होते हैं जब किसी बड़े पूंजीपति परिवार का बच्चा इन बलों में शामिल हो। शिक्षा की व्यवस्था: सरकार ने निर्णय लिया है कि जवानों के बच्चों को उन्हीं के वातावरण में बेहतर शिक्षा मिले। इसके लिए सह-शिक्षा (Co-ed) आवासीय विद्यालय स्थापित किए जाएंगे, जहाँ लड़के और लड़कियां दोनों पढ़ सकेंगे। कल्याणकारी कदम: यह विद्यालय "सेंटर ऑफ एक्सीलेंस" के रूप में विकसित किए जाएंगे, ताकि शहीद जवानों के परिवारों को संबल मिल सके और उनके बच्चों का भविष्य उज्ज्वल हो।1
- हजारीबाग में पत्रकारों का खून सस्ता? मंत्री के सामने गुंडागर्दी, पुलिस बनी तमाशबीन अब चुप रहोगे तो अगला नंबर तुम्हारा! यह सिर्फ एक घटना नहीं है, यह पत्रकारिता की इज्जत पर खुला हमला है। यह उस सिस्टम का काला चेहरा है, जहां सवाल पूछने की सजा लाठी और गालियों से दी जाती है। हजारीबाग में जो हुआ, उसने साबित कर दिया कि अगर पत्रकार आज भी नहीं जागे, तो कल उनकी पहचान ही मिटा दी जाएगी। बटेंगे तो कटेंगे अब सिर्फ जुमला नहीं, हकीकत बन चुका है। सोमवार को पौता जंगल से दो लड़कियों और एक लड़के का शव बरामद हुआ, एक बेहद संवेदनशील मामला। परिजनों के बुलावे पर स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी हजारीबाग पहुंचे। यह स्वाभाविक था कि पत्रकार वहां मौजूद रहें और सवाल करें। लेकिन सवाल पूछना यहां अपराध बन गया। जैसे ही पत्रकार ने चतरा के एयर एम्बुलेंस हादसे पर सवाल किया, माहौल अचानक जहरीला हो गया। खुद को मृतक का भाई बताने वाला एक युवक भड़क उठा। उसने पत्रकारों को दलाल कहकर गालियां दीं, अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और यह सब मंत्री के सामने हुआ।2
- मंत्री इरफान अंसारी के समर्थकों की दबंगई: हजारीबाग में पत्रकारों से की मारपीट हजारीबाग: चतरा विमान हादसे के पीड़ितों को न्याय और मुआवजे की मांग अब विवादों के घेरे में आ गई है। मंगलवार को हजारीबाग स्थित शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब झारखंड सरकार के मंत्री इरफान अंसारी के समर्थकों ने सवाल पूछने पर पत्रकारों के साथ बदसलूकी और मारपीट की। मामले की मुख्य बातें: सवाल पर भड़के समर्थक: पत्रकार ने चतरा विमान हादसे में अब तक पीड़ितों को मुआवजा न मिलने और संबंधित एयरलाइन कंपनी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने को लेकर मंत्री इरफान अंसारी से सवाल किया था। मारपीट और धक्का-मुक्की: सवाल सुनते ही मंत्री के आसपास मौजूद समर्थकों ने आपा खो दिया। आरोप है कि समर्थकों ने पत्रकारों को कवरेज करने से रोका और उनके साथ मारपीट की। पीड़ितों की अनदेखी: हादसे के इतने समय बाद भी मुआवजे की फाइल अटकी होने के कारण पीड़ितों के परिजनों में पहले से ही आक्रोश है। अब पत्रकारों के साथ हुई इस घटना ने प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मौके पर तनाव का माहौल घटना के बाद शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज परिसर में काफी देर तक तनाव बना रहा। स्थानीय पत्रकारों ने इस व्यवहार की कड़ी निंदा की है और इसे 'लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला' करार दिया है। सोशल मीडिया पर आक्रोश सोशल मीडिया पर भी इस घटना से जुड़े वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिसमें पत्रकारों के साथ हो रही धक्का-मुक्की को देखा जा सकता है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झारखंड सरकार को टैग करते हुए लोग दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। #IrfanAnsari #JharkhandNews #PressFreedom #Hazaribagh #HemantSoren #ChatraPlaneCrash1
- हजारीबाग। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया पर हजारीबाग में एक कायराना हमला हुआ है। मंगलवार को हजारीबाग सदर अस्पताल में सूबे के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान कवरेज कर रहे पत्रकारों पर कुछ असामाजिक तत्वों ने जानलेवा हमला कर दिया। इस घटना के बाद हजारीबाग प्रेस क्लब ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। पुलिस की मौजूदगी में हुआ हमला हजारीबाग प्रेस क्लब के अध्यक्ष मुरारी सिंह ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक बताया है। उन्होंने कहा कि एक ओर जहां जिले के बड़े पुलिस और प्रशासनिक पदाधिकारी मौजूद थे, वहीं दूसरी ओर मंत्री से सवाल पूछने पर पत्रकारों पर हमला कर दिया गया। सिंह ने सवाल उठाया कि जब प्रशासनिक सुरक्षा के बीच पत्रकार सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता का क्या होगा? उन्होंने इस घटना को लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला बताया। सुनियोजित हमले का आरोप क्लब के सचिव दीपक सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह हमला पूरी तरह से सुनियोजित था। सवाल पूछे जाने पर वहां मौजूद कुछ लोग आग बबूला हो गए और मारपीट शुरू कर दी, जिसमें दो पत्रकार साथी घायल हुए हैं। उन्होंने इसे सत्ता के संरक्षण में पत्रकारों की आवाज दबाने का प्रयास करार दिया। प्रेस क्लब ने दी आंदोलन की चेतावनी प्रेस क्लब ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि इस घटना को अंजाम देने वाले 'गुंडों' को जल्द से जल्द चिन्हित कर गिरफ्तार नहीं किया गया, तो पूरे जिले के पत्रकार सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे। क्लब ने कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता पर इस तरह का प्रहार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस घटना के बाद पूरे पत्रकार समाज में भारी रोष व्याप्त है और सभी ने एक सुर में न्याय की मांग की है।3