बस्ती साइबर थाना पुलिस ने निवेश (इन्वेस्टमेंट) और शेयर ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का झांसा देकर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक बड़े संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस बड़ी सफलता के तहत गिरोह के सरगना समेत चार आरोपितों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपित सोशल मीडिया, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और अन्य ऑनलाइन माध्यमों के जरिए लोगों से संपर्क स्थापित कर उन्हें कम समय में कई गुना लाभ दिलाने का झांसा देते थे। शुरुआत में पीड़ितों का भरोसा जीतने के लिए उन्हें मामूली लाभ दिखाया जाता था, लेकिन बड़ी रकम अलग-अलग बैंक खातों में निवेश कराने के बाद आरोपित उनसे पूरी तरह संपर्क तोड़ लेते थे। इस तरह गिरोह ने विभिन्न राज्यों के लोगों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया। लगातार मिल रही शिकायतों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर साइबर थाना पुलिस ने इस मामले की गहन जांच शुरू की थी। पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजेक्शन का विश्लेषण करते हुए एक योजनाबद्ध कार्रवाई के तहत गिरोह के सरगना सहित चारों सदस्यों को धर दबोचा। इनके कब्जे से ठगी में इस्तेमाल किए जाने वाले तीन मोबाइल फोन, पांच चेक बुक, चार एटीएम कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, जीएसटी से संबंधित दस्तावेज और नगद धनराशि बरामद की गई है। पुलिस अब बरामद दस्तावेजों और बैंक खातों की बारीकी से जांच कर यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह का नेटवर्क कितने राज्यों तक फैला हुआ था और ठगी की कुल रकम कितनी है। इसके साथ ही गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने इस मामले में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने अपील की है कि निवेश या शेयर ट्रेडिंग के नाम पर मिलने वाले आकर्षक ऑफरों के झांसे में न आएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी थाने को दें।
बस्ती साइबर थाना पुलिस ने निवेश (इन्वेस्टमेंट) और शेयर ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का झांसा देकर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक बड़े संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस बड़ी सफलता के तहत गिरोह के सरगना समेत चार आरोपितों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपित सोशल मीडिया, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और अन्य ऑनलाइन माध्यमों के जरिए लोगों से संपर्क स्थापित कर उन्हें कम समय में कई गुना लाभ दिलाने का झांसा देते थे। शुरुआत में पीड़ितों का भरोसा जीतने के लिए उन्हें मामूली लाभ दिखाया जाता था, लेकिन बड़ी रकम अलग-अलग बैंक खातों में निवेश कराने के बाद आरोपित उनसे पूरी तरह संपर्क तोड़ लेते थे। इस तरह गिरोह ने विभिन्न राज्यों के लोगों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया। लगातार मिल रही शिकायतों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर साइबर थाना पुलिस ने इस मामले की गहन जांच शुरू की थी। पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजेक्शन का विश्लेषण करते हुए एक योजनाबद्ध कार्रवाई के तहत गिरोह के सरगना सहित चारों सदस्यों को धर दबोचा। इनके कब्जे से ठगी में इस्तेमाल किए जाने वाले तीन मोबाइल फोन, पांच चेक बुक, चार एटीएम कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, जीएसटी से संबंधित दस्तावेज और नगद धनराशि बरामद की गई है। पुलिस अब बरामद दस्तावेजों और बैंक खातों की बारीकी से जांच कर यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह का नेटवर्क कितने राज्यों तक फैला हुआ था और ठगी की कुल रकम कितनी है। इसके साथ ही गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने इस मामले में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने अपील की है कि निवेश या शेयर ट्रेडिंग के नाम पर मिलने वाले आकर्षक ऑफरों के झांसे में न आएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी थाने को दें।
- संत कबीर नगर के रिजर्व पुलिस लाइन परिसर में "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान के तहत पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना द्वारा अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह की उपस्थिति में वृक्षारोपण किया गया। इस अवसर पर उपस्थित सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करने का संकल्प भी दिलाया गया। इस जनहितकारी अभियान के अंतर्गत जनपद के समस्त थाना और चौकी परिसरों में प्रभारी निरीक्षकों, थानाध्यक्षों तथा चौकी प्रभारियों द्वारा फलदार, छायादार और औषधीय पौधे रोपे गए। जनपद पुलिस के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने इस पर्यावरण संरक्षण अभियान में उत्साहपूर्वक अपनी सहभागिता दर्ज कराई। वृक्षारोपण के दौरान पुलिस अधीक्षक ने कहा कि वृक्ष पृथ्वी की अमूल्य धरोहर हैं, जो पर्यावरण को संतुलित रखने के साथ-साथ शुद्ध ऑक्सीजन प्रदान कर मानव जीवन को सुरक्षित और स्वस्थ बनाते हैं। उन्होंने पुलिसकर्मियों से अपील की कि लगाए गए पौधों का संरक्षण करें ताकि भविष्य में जनपद को अधिक हरित, स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त बनाया जा सके। इस कार्यक्रम में क्षेत्राधिकारी खलीलाबाद प्रियम राजशेखर पाण्डेय, प्रतिसार निरीक्षक रामबली यादव और पीआरओ मनीष जायसवाल सहित पुलिस विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।4
- संतकबीरनगर के मेंहदावल में "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान के अंतर्गत रिजर्व पुलिस लाइन परिसर में एसपी संदीप कुमार मीना द्वारा एएसपी सुशील कुमार सिंह की उपस्थिति में वृक्षारोपण किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम में उपस्थित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को पर्यावरण संरक्षण तथा लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करने का संकल्प दिलाया गया। इस अभियान के तहत जनपद के सभी थाना और चौकी परिसरों में भी प्रभारी निरीक्षकों, थानाध्यक्षों और चौकी प्रभारियों द्वारा फलदार, छायादार तथा औषधीय पौधे रोपे गए। जनपद पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण के इस जनहितकारी अभियान को सफल बनाया। वृक्षारोपण के दौरान एसपी ने कहा कि वृक्ष पृथ्वी की अमूल्य धरोहर हैं, जो न केवल पर्यावरण को संतुलित रखते हैं बल्कि शुद्ध ऑक्सीजन प्रदान कर मानव जीवन को सुरक्षित और स्वस्थ भी बनाते हैं। उन्होंने पुलिसकर्मियों से लगाए गए पौधों के नियमित संरक्षण की अपील की ताकि जनपद को अधिक हरित, स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त बनाया जा सके। इस कार्यक्रम के दौरान क्षेत्राधिकारी खलीलाबाद प्रियम राजशेखर पाण्डेय, प्रतिसार निरीक्षक रामबली यादव और पीआरओ एसपी मनीष जायसवाल सहित पुलिस विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।1
- संत कबीर नगर में सर्विलांस टीम की सक्रियता से पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए 161 गुमशुदा एंड्रॉइड मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इन मोबाइलों की अनुमानित कीमत लगभग ₹60 लाख बताई जा रही है, जिनकी चोरी और गुमशुदगी की रिपोर्ट विभिन्न थानों के अंतर्गत दर्ज कराई गई थी। पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन में मिली इस बड़ी राहत से मोबाइल स्वामियों के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई है और उन्होंने पुलिस टीम का दिल से आभार व्यक्त किया है। पुलिस टीम के इस उत्कृष्ट और सराहनीय कार्य से खुश होकर पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना द्वारा पूरी टीम को प्रोत्साहन स्वरूप ₹25,000 का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की गई है।1
- संतकबीरनगर पुलिस ने गुमशुदा मोबाइल फोन बरामद करने के अभियान में एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए 161 एंड्रॉइड मोबाइल फोन बरामद किए हैं। बरामद किए गए इन मोबाइलों की अनुमानित कीमत लगभग 60 लाख रुपये बताई गई है। खोए हुए मोबाइल वापस मिलने के बाद उनके स्वामियों के चेहरों पर खुशी लौट आई और उन्होंने पुलिस टीम का आभार जताया है। इस उत्कृष्ट कार्य से खुश होकर पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने मोबाइल बरामद करने वाली पुलिस टीम को 25 हजार रुपये के नगद पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की है। यह सफलता पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह के मार्गदर्शन, क्षेत्राधिकारी सर्विलांस सेल अमित कुमार के पर्यवेक्षण तथा प्रभारी निरीक्षक सर्विलांस सेल अजय कुमार सिंह के नेतृत्व में गठित टीम ने हासिल की है। पुलिस ने जनपद के सभी थानों में सीईआईआर (CEIR) पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई की। सीईआईआर पोर्टल एवं सीसीटीएनएस प्रणाली से मिली तकनीकी जानकारी, आईएमईआई नंबर तथा सिम विश्लेषण के आधार पर मोबाइल फोन ट्रेस कर उन्हें बरामद किया गया। पुलिस के अनुसार, ये मोबाइल केवल संतकबीरनगर ही नहीं बल्कि दिल्ली, लखनऊ, बेंगलुरु, मुंबई, तमिलनाडु, बिहार, गुजरात, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और तेलंगाना सहित देश के विभिन्न राज्यों से बरामद किए गए हैं, जिन्हें उनके वास्तविक स्वामियों को सौंपने की प्रक्रिया जारी है। पुलिस अधीक्षक ने आम जनता से अपील की है कि मोबाइल फोन गुम या चोरी होने पर तत्काल CEIR पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि आईएमईआई नंबर को ब्लॉक कर उसे ट्रेस किया जा सके। इसके लिए आधार कार्ड, मोबाइल खरीद का बिल, गुमशुदगी या एफआईआर की प्रति, मोबाइल नंबर, आईएमईआई नंबर और मोबाइल मॉडल की जानकारी होना आवश्यक है। इस अभियान के तहत कोतवाली खलीलाबाद से 18, दुधारा से 20, महिला थाना से 8, धनघटा से 14, महुली से 41, मेंहदावल से 9, बखिरा से 13, बेलहरकला से 36 तथा धर्मसिंहवा थाना से 2 मोबाइल बरामद किए गए। इस महत्वपूर्ण कार्रवाई में सर्विलांस सेल के प्रभारी निरीक्षक अजय कुमार सिंह, मुख्य आरक्षी विनोद कुमार सिंह, आरक्षी ज्ञान प्रकाश सिंह, अमरजीत मौर्य, नितीश कुमार और पीयूष कुमार गुप्ता सहित विभिन्न थानों के पुलिसकर्मियों ने मुख्य भूमिका निभाई।1
- संतकबीरनगर के मगहर स्थित संत कबीर अकादमी ऑडिटोरियम में निषाद पार्टी का बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। सम्मेलन को संबोधित करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर पर मजबूत होने और सत्ता में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया। इस अवसर पर पूर्व सांसद ई. प्रवीण निषाद और मेंहदावल विधायक अनिल त्रिपाठी भी मंच पर मौजूद रहे। अपने संबोधन में संजय निषाद ने कहा कि हमारे वंशज इस देश के राजा थे और उन्होंने देश की आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों के खिलाफ अहम भूमिका निभाते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। उन्होंने कहा कि देश के कुछ लोग अंग्रेजों के साथ खड़े रहे, जिसके परिणाम स्वरूप आजादी के बाद उन्हें समस्त अधिकार प्राप्त हो गए, जबकि विरोध करने के कारण हमारे समाज को गरीबी का दंश झेलना पड़ा। उन्होंने जोर देकर कहा कि पूर्ण संवैधानिक अधिकार प्राप्त करने के लिए समाज को और अधिक संगठित होने की जरूरत है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले हर बूथ को मजबूत करने से ही प्रदेश की सत्ता में निषाद पार्टी की मजबूत हिस्सेदारी तय होगी। सम्मेलन के दौरान पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व सांसद प्रवीण निषाद ने समाज के अधिकारों की लड़ाई में शहीद हुए अखिलेश निषाद के बलिदान को याद किया और कार्यकर्ताओं से आगामी चुनाव में प्रचंड जीत हासिल करने के लिए कमर कसने की अपील की। मेंहदावल विधायक अनिल त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि देश और प्रदेश की अन्य राजनीतिक पार्टियों ने हमेशा निषाद समाज का शोषण किया और मतों के बदले उन्हें धोखा दिया। इसके साथ ही महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मालती निषाद ने भी अन्य दलों पर राजनीतिक छल करने का आरोप लगाते हुए संगठित पहचान बनाकर सत्ता हासिल करने की बात कही। इस अवसर पर राष्ट्रीय सचिव रविंद्र मणि, प्रदेश प्रभारी बाबूराम सहित कई अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।1
- बस्ती के कप्तानगंज रेंज के अंतर्गत कचौलिया और रैकवार मार्ग पर वन विभाग की घोर लापरवाही और संवेदनहीनता का एक बड़ा मामला सामने आया है। बीती 11 जुलाई की रात को आई तेज आंधी-पानी के कारण कचौलिया फार्म के समीप एक विशालकाय पेड़ गिर गया, जो आज भी आधी सड़क को घेरे हुए है। 12 जुलाई का दिन ढलने को आ गया है, लेकिन जिम्मेदार विभाग की नींद अब तक नहीं टूटी है, जिससे यह मार्ग राहगीरों के लिए मुसीबत का सबब बना हुआ है। इस व्यस्त मार्ग से हर पल लोगों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन सड़क पर गिरी पेड़ की टहनियां और झाड़ियां अंधेरे में दिखाई नहीं देतीं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा काफी बढ़ गया है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग को इस संबंध में सूचना दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे विभाग के अधिकारी किसी बड़ी अनहोनी या हादसे का इंतजार कर रहे हैं। वन विभाग की इस उदासीनता से स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने तीखे शब्दों में मांग की है कि युद्धस्तर पर कार्रवाई करते हुए अविलंब इस पेड़ को सड़क से हटाकर यातायात को सुचारू किया जाए। इसके साथ ही, इतने घंटों तक सड़क को बाधित छोड़ने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच कराकर कड़ी कार्रवाई की जाए। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कब जागता है या फिर जनता को खुद अपनी जान जोखिम में डालकर कोई कदम उठाना पड़ेगा।1
- गाजियाबाद के एक स्पा सेंटर में हुई छापेमारी और उसके बाद पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई ने कानून और समानता के दावों पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस स्पा सेंटर से पुलिस ने कथित तौर पर 'सेक्स रैकेट' चलाने के आरोप में 23 लड़कियों और 5 लड़कों को हिरासत में लिया था। लेकिन असली खेल थाने के भीतर देखने को मिला, जहां पुलिस ने इस मामले में बेहद ही पक्षपातपूर्ण और दोहरा रवैया अपनाया। हिरासत में लिए जाने के बाद, पुलिस ने लड़कियों को सिर्फ पूछताछ करके और चेतावनी देकर घर भेज दिया, जबकि हिरासत में लिए गए लड़कों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उनका चालान काट दिया गया। इस सिलेक्टिव कार्रवाई पर तीखे सवाल उठाते हुए अजीत मिश्रा (खोजी) ने पूछा है कि अगर कानून सबके लिए समान है, तो यह भेदभाव क्यों किया जा रहा है? क्या अपराध की परिभाषा जेंडर यानी लिंग के आधार पर बदल जाती है? अगर यह वास्तव में एक रैकेट था, तो इसमें शामिल हर व्यक्ति—चाहे वह लड़का हो या लड़की—बराबर का गुनहगार क्यों नहीं है? पुलिस की इस कार्रवाई को 'पितृसत्तात्मक' सोच का चश्मा बताते हुए यह सवाल उठाया गया है कि क्या लड़कियां हमेशा सिर्फ 'विक्टिम' ही होती हैं? महिलाओं के प्रति इस तरह का नरम रुख अपनाकर पुलिस असल में उन महिलाओं के साथ न्याय नहीं कर रही है जो शायद अपनी मर्जी से इस काम में थीं, बल्कि वह कानूनी प्रक्रिया का मजाक उड़ा रही है। कानून का काम निष्पक्ष होना है, न कि किसी की दया पर फैसला सुनाना। इस तरह का दोहरा रवैया न्याय व्यवस्था से भरोसा कम करता है और साबित करता है कि समानता सिर्फ कागजों तक ही सीमित है। न्याय का तराजू संतुलित होना चाहिए, जो किसी के जेंडर या प्रभाव के बोझ से न झुके।1