गुमला के सिसई थाना परिसर में बकरीद पर्व के शांतिपूर्ण आयोजन हेतु एक शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सुरेश प्रसाद यादव और अंचल पुलिस निरीक्षक गुलशन भेंगरा ने की, जिसमें पर्व को आपसी भाईचारे और शांतिपूर्ण ढंग से मनाने की अपील की गई। पुलिस प्रशासन ने लोगों से किसी भी प्रकार की अफवाहों से बचने का आग्रह किया। साथ ही, सोशल मीडिया पर गलत अफवाह फैलाने वालों की पहचान कर तत्काल थाना प्रभारी को सूचना देने के निर्देश दिए गए, ताकि ऐसे व्यक्तियों पर उचित कार्रवाई की जा सके। बैठक के दौरान अंजुमन फलाहुल मुस्लेमिन संगठन सिसई ने बकरीद की नमाज़ के निर्धारित समय की जानकारी दी। बताया गया कि सिसई के आठ अलग-अलग मस्जिदों और ईदगाहों में सुबह 6:30 बजे से 8:00 बजे तक नमाज़ अदा की जाएगी। संगठन ने पशु बलि की तस्वीरें या वीडियो लेने और उन्हें सोशल मीडिया पर साझा करने पर सख्त प्रतिबंध लगाने की बात भी कही। प्रशासन ने आगामी 28 मई को मनाए जाने वाले बकरीद पर्व के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने का आश्वासन दिया। विशेष रूप से, 28 मई को बृहस्पतिवार होने के कारण सिसई प्रखंड में लगने वाले साप्ताहिक बाजार में भारी भीड़ की आशंका के मद्देनजर सड़कों पर वाहनों के आवागमन को वन-वे (एक तरफा) रखा जाएगा, ताकि जाम की स्थिति न बने और आम जनता को असुविधा न हो। इस अवसर पर जिला परिषद सदस्य सिसई उत्तरी विजयलक्ष्मी कुमारी, पंसस रेखा देवी, जाकिर अली, थाना प्रभारी नीरज कुमार, एसआई अजय कुमार, जनप्रतिनिधि सुनीता कुमारी, शकुंतला देवी, बंदीराम उरांव, शांति समिति के सदस्य अंजुमन सदर सलमान अली, बैबूल अंसारी, निरंजन सिंह, तेजमोहन साहु, विपिन बिहारी झा, कैप्टन लोहरा उरांव, मनोज वर्मा, सूरज सिंह, नवल महतो, सुप्रदीप साहु सहित कई अन्य प्रबुद्ध गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
गुमला के सिसई थाना परिसर में बकरीद पर्व के शांतिपूर्ण आयोजन हेतु एक शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सुरेश प्रसाद यादव और अंचल पुलिस निरीक्षक गुलशन भेंगरा ने की, जिसमें पर्व को आपसी भाईचारे और शांतिपूर्ण ढंग से मनाने की अपील की गई। पुलिस प्रशासन ने लोगों से किसी भी प्रकार की अफवाहों से बचने का आग्रह किया। साथ ही, सोशल मीडिया पर गलत अफवाह
फैलाने वालों की पहचान कर तत्काल थाना प्रभारी को सूचना देने के निर्देश दिए गए, ताकि ऐसे व्यक्तियों पर उचित कार्रवाई की जा सके। बैठक के दौरान अंजुमन फलाहुल मुस्लेमिन संगठन सिसई ने बकरीद की नमाज़ के निर्धारित समय की जानकारी दी। बताया गया कि सिसई के आठ अलग-अलग मस्जिदों और ईदगाहों में सुबह 6:30 बजे से 8:00 बजे तक नमाज़ अदा की जाएगी। संगठन ने पशु बलि की तस्वीरें या वीडियो लेने और
उन्हें सोशल मीडिया पर साझा करने पर सख्त प्रतिबंध लगाने की बात भी कही। प्रशासन ने आगामी 28 मई को मनाए जाने वाले बकरीद पर्व के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने का आश्वासन दिया। विशेष रूप से, 28 मई को बृहस्पतिवार होने के कारण सिसई प्रखंड में लगने वाले साप्ताहिक बाजार में भारी भीड़ की आशंका के मद्देनजर सड़कों पर वाहनों के आवागमन को वन-वे (एक तरफा) रखा जाएगा, ताकि जाम की स्थिति
न बने और आम जनता को असुविधा न हो। इस अवसर पर जिला परिषद सदस्य सिसई उत्तरी विजयलक्ष्मी कुमारी, पंसस रेखा देवी, जाकिर अली, थाना प्रभारी नीरज कुमार, एसआई अजय कुमार, जनप्रतिनिधि सुनीता कुमारी, शकुंतला देवी, बंदीराम उरांव, शांति समिति के सदस्य अंजुमन सदर सलमान अली, बैबूल अंसारी, निरंजन सिंह, तेजमोहन साहु, विपिन बिहारी झा, कैप्टन लोहरा उरांव, मनोज वर्मा, सूरज सिंह, नवल महतो, सुप्रदीप साहु सहित कई अन्य प्रबुद्ध गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
- झारखंड के गुमला जिले के पालकोट स्थित केराटोली निवासी 38 वर्षीय तीर्थनाथ सिंह को उनके छोटे भाई मनोहर सिंह ने शनिवार सुबह धान रोपने को लेकर हुए विवाद में हथौड़ी से मारकर घायल कर दिया। यह घटना सुबह करीब 8 बजे हुई। परिजनों ने तीर्थनाथ सिंह को इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया है, जहाँ जमीन विवाद में मारपीट के बाद वे ज़ख़्मी हालत में उपचाराधीन हैं।1
- दामोदर नदी के उद्गम स्थल पर माननीय राज्यपाल महोदय द्वारा विधि-विधान और श्रद्धा भाव के साथ पूजा-अर्चना की गई। इस अवसर पर एक मेले का आयोजन किया गया था, जिसमें हजारों की संख्या में लोगों ने शामिल होकर अपनी सहभागिता दर्ज कराई।1
- झारखंड के गुमला जिले के पालकोट प्रखंड स्थित बंगारू में 'मोनू सुपर' नामक एक यात्री बस अनियंत्रित होकर पलट गई। इस दुर्घटना के परिणामस्वरूप, कई लोगों के जख्मी होने की खबर मिली है।1
- सोशल मीडिया पर लोहरदगा से एक हैरान कर देने वाला सवाल वायरल हो रहा है, जिसमें सीधे तौर पर पूछा गया है कि क्या ईसाई और आदिवासी 'एक ही मां के औलाद' हैं। यह पोस्ट ईसाई और आदिवासी पहचान के बीच के संबंध पर एक तीव्र और विवादास्पद प्रश्न उठाता है, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।1
- कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में भटकल के पास एक नदी में सीपियां इकट्ठा करने गए आठ लोगों की डूबने से मौत हो गई है। इस दर्दनाक हादसे के बाद दो अन्य लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। मरने वालों में सात महिलाएं शामिल थीं। यह घटना तब हुई जब ये लोग नदी में सीपियां चुन रहे थे।1
- झारखंड में पड़ रही भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते हीटवेव के प्रकोप को देखते हुए, राज्य सरकार आम लोगों को राहत पहुँचाने के लिए लगातार पहल कर रही है। इसी क्रम में, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर राज्यभर के सरकारी कार्यालयों, प्रमुख चौक-चौराहों, अस्पतालों, बस स्टैंडों और सार्वजनिक स्थलों पर राहगीरों और आम नागरिकों के लिए 'प्याऊ' (पेयजल व्यवस्था) की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि गर्मी के इस कठिन दौर में लोगों को स्वच्छ एवं ठंडा पेयजल उपलब्ध कराया जाए, साथ ही प्याऊ स्थलों पर सूचना बोर्ड भी लगाए जाएँ ताकि राहगीरों को इसकी जानकारी आसानी से मिल सके। इस पहल के तहत, चैनपुर में पुलिस ने भी आम लोगों के लिए प्याऊ लगाकर एक सराहनीय कदम उठाया है।1
- आदिवासी महिलाएँ अपने अधिकारों की रक्षा के लिए दिल्ली पहुँची हैं।1
- सवाल पूछे जाने पर एक भाजपा नेता ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत को आज़ादी मिलने के इतने समय बाद भी अब तक सड़क का निर्माण क्यों नहीं हो पाया था। उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई कि जब राज्यपाल महोदय को आना था, तो वही सड़क मात्र एक दिन के भीतर बनकर तैयार हो गई।1
- झारखंड के गुमला जिले के डुमरी प्रखंड में सरकार की महत्वाकांक्षी अबुआ आवास योजना, जिसका उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्की छत उपलब्ध कराना है, वृद्ध तेतरी देवी के लिए एक अधूरा सपना बनकर रह गई है। उन्हें इस योजना के तहत आवास स्वीकृत तो मिला, लेकिन निर्माण सामग्री खराब हो जाने के कारण उनका घर आज तक पूरा नहीं बन सका है। आवास निर्माण के लिए गिराई गई सीमेंट कुछ ही दिनों में खराब होकर पत्थर जैसी बन गई, जिसके बाद निर्माण कार्य पूरी तरह रुक गया। आर्थिक रूप से बेहद कमजोर तेतरी देवी दोबारा सामग्री खरीदने में असमर्थ हैं, जिस कारण उनका घर अधूरा पड़ा हुआ है। स्थिति यह है कि तेतरी देवी के पास रहने के लिए खुद का घर तक नहीं बचा है और वह दूसरों के घरों में रहकर किसी तरह अपना जीवन गुजार रही हैं। वृद्धावस्था में भी वह मजदूरी और छोटे-मोटे काम कर दो वक्त की रोटी का इंतजाम करती हैं, और बढ़ती उम्र के साथ उनकी परेशानियां तथा संघर्ष भी बढ़ते जा रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि तेतरी देवी बेहद गरीब परिवार से आती हैं और लंबे समय से कठिन परिस्थितियों में जीवन बिता रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जरूरतमंद लोगों तक उसका पूरा फायदा पहुंचना चाहिए। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मामले की जांच कर तेतरी देवी को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि जीवन के अंतिम पड़ाव में उन्हें भी एक सुरक्षित छत नसीब हो सके।1