एक ने कुल्हाड़ी से गला काटा , एक ने चाकू घोपा : रिकॉर्ड में जो फरार , वही सरपंच पति का हत्यारा , स्पिनर डॉग ने सुलझाई मर्डर मिस्ट्री खंडवा के गुड़ी रेंज के जंगलों में करीब 10 हजार एकड़ वनभूमि पर अतिक्रमण कर खेती शुरू करने वालों के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई ने एक ऐसी दुश्मनी को जन्म दिया, जिसका अंत बोरखेड़ा के सरपंच पति रूमसिंग की हत्या के रूप में हुआ। रूमसिंग की गर्दन पर कुल्हाड़ी से वार किया गया। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों को शक था कि जंगल में अतिक्रमण के खिलाफ हुई कार्रवाई और उनके मकान तोड़े जाने के पीछे रूमसिंग की मुखबिरी थी। रूमसिंग राजनीति में आने से पहले वन विभाग में चौकीदार रह चुका था। जंगल और वन अमले से उसके पुराने संपर्क थे। यही वजह रही कि अतिक्रमणकारियों की नजर में वह प्रशासन का मददगार बन गया। दिलचस्प यह है कि हत्या का मुख्य आरोपी छतरसिंह खुद पुराने आपराधिक मामलों में पुलिस रिकॉर्ड में फरार है। पुलिस के मुताबिक उसी ने रूमसिंग की गर्दन पर कुल्हाड़ी का पहला वार किया। हत्या के बाद वह फिर फरार हो गया।10 हजार एकड़ जंगल कैसे बना विवाद की जड़ कोरोनाकाल यानी 2019-20 के दौरान गुड़ी रेंज के जंगलों में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण शुरू हुआ। आरोप है कि झाबुआ, धार और बड़वानी क्षेत्र से आए लोगों ने जंगल में कब्जे करना शुरू किया। धीरे-धीरे अतिक्रमण बढ़ता गया। करीब चार साल में लगभग 10 हजार एकड़ जंगल साफ कर खेती शुरू कर दी गई। गुड़ी रेंज के बोरखेड़ा और भिलाईखेड़ा इलाके में इसका सबसे ज्यादा असर दिखाई दिया। 2022 के बाद अतिक्रमणकारियों ने जंगल साफ कर खेत तैयार कर लिए। स्थानीय लोगों ने विरोध शुरू किया तो प्रशासन भी सक्रिय हुआ। 2023 से लगातार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई होने लगी। जेसीबी से कब्जे हटाए गए और जंगल में दोबारा अतिक्रमण रोकने की कोशिश की गई, लेकिन असली टकराव इसी साल जून में हुआ।150 जेसीबी, तीन दिन की कार्रवाई और टूट गए मकान बारिश से पहले जून में प्रशासन ने गुड़ी रेंज के जंगल में बड़े स्तर पर कार्रवाई की। करीब तीन दिन तक 150 जेसीबी मशीनों से जंगल में कंटूर खोदे गए। कार्रवाई के दौरान वन विभाग की जमीन के साथ राजस्व भूमि पर बने अतिक्रमणकारियों के मकान भी प्रशासन की नजर में आए। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में मकानों को तोड़ा गया। यही कार्रवाई आगे चलकर हत्या की वजह बनी। पुलिस जांच के मुताबिक अतिक्रमणकारियों को शक था कि उनके मकान और कब्जे की जानकारी प्रशासन तक पहुंचाने में रूमसिंग की भूमिका थी।रूमसिंग की हत्या में मुखबिरी का पूरा खेल पुलिस के मुताबिक हत्या की साजिश में दिनेश की भूमिका भी सामने आई है। जांच में यह बात सामने आई कि रूमसिंग जब अकेला निकला तो दिनेश ने उसकी लाइव लोकेशन फोन के जरिए छतरसिंह तक पहुंचाई। छतरसिंह और उसके साथी पहले से खेत में छिपे हुए थे। लोकेशन मिलते ही रूमसिंग को घेर लिया गया और हमला कर दिया गया। यानी पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक हत्या अचानक हुए विवाद का नतीजा नहीं, बल्कि रैकी, लोकेशन और घात लगाकर किए गए हमले की साजिश थी।
एक ने कुल्हाड़ी से गला काटा , एक ने चाकू घोपा : रिकॉर्ड में जो फरार , वही सरपंच पति का हत्यारा , स्पिनर डॉग ने सुलझाई मर्डर मिस्ट्री खंडवा के गुड़ी रेंज के जंगलों में करीब 10 हजार एकड़ वनभूमि पर अतिक्रमण कर खेती शुरू करने वालों के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई ने एक ऐसी दुश्मनी को जन्म दिया, जिसका अंत बोरखेड़ा के सरपंच पति रूमसिंग की हत्या के रूप में हुआ। रूमसिंग की गर्दन पर कुल्हाड़ी से वार किया गया। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों को शक था कि जंगल में अतिक्रमण के खिलाफ हुई कार्रवाई और उनके मकान तोड़े जाने के पीछे रूमसिंग की मुखबिरी थी। रूमसिंग राजनीति में आने से पहले वन विभाग में चौकीदार रह चुका था। जंगल और वन अमले से उसके पुराने संपर्क थे। यही वजह रही कि अतिक्रमणकारियों की नजर में वह प्रशासन का मददगार बन गया। दिलचस्प यह है कि हत्या का मुख्य आरोपी छतरसिंह खुद पुराने आपराधिक मामलों में पुलिस रिकॉर्ड में फरार है। पुलिस के मुताबिक उसी
ने रूमसिंग की गर्दन पर कुल्हाड़ी का पहला वार किया। हत्या के बाद वह फिर फरार हो गया।10 हजार एकड़ जंगल कैसे बना विवाद की जड़ कोरोनाकाल यानी 2019-20 के दौरान गुड़ी रेंज के जंगलों में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण शुरू हुआ। आरोप है कि झाबुआ, धार और बड़वानी क्षेत्र से आए लोगों ने जंगल में कब्जे करना शुरू किया। धीरे-धीरे अतिक्रमण बढ़ता गया। करीब चार साल में लगभग 10 हजार एकड़ जंगल साफ कर खेती शुरू कर दी गई। गुड़ी रेंज के बोरखेड़ा और भिलाईखेड़ा इलाके में इसका सबसे ज्यादा असर दिखाई दिया। 2022 के बाद अतिक्रमणकारियों ने जंगल साफ कर खेत तैयार कर लिए। स्थानीय लोगों ने विरोध शुरू किया तो प्रशासन भी सक्रिय हुआ। 2023 से लगातार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई होने लगी। जेसीबी से कब्जे हटाए गए और जंगल में दोबारा अतिक्रमण रोकने की कोशिश की गई, लेकिन असली टकराव इसी साल जून में हुआ।150 जेसीबी, तीन दिन की कार्रवाई और टूट गए मकान बारिश से पहले जून में प्रशासन ने गुड़ी रेंज के जंगल में बड़े स्तर
पर कार्रवाई की। करीब तीन दिन तक 150 जेसीबी मशीनों से जंगल में कंटूर खोदे गए। कार्रवाई के दौरान वन विभाग की जमीन के साथ राजस्व भूमि पर बने अतिक्रमणकारियों के मकान भी प्रशासन की नजर में आए। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में मकानों को तोड़ा गया। यही कार्रवाई आगे चलकर हत्या की वजह बनी। पुलिस जांच के मुताबिक अतिक्रमणकारियों को शक था कि उनके मकान और कब्जे की जानकारी प्रशासन तक पहुंचाने में रूमसिंग की भूमिका थी।रूमसिंग की हत्या में मुखबिरी का पूरा खेल पुलिस के मुताबिक हत्या की साजिश में दिनेश की भूमिका भी सामने आई है। जांच में यह बात सामने आई कि रूमसिंग जब अकेला निकला तो दिनेश ने उसकी लाइव लोकेशन फोन के जरिए छतरसिंह तक पहुंचाई। छतरसिंह और उसके साथी पहले से खेत में छिपे हुए थे। लोकेशन मिलते ही रूमसिंग को घेर लिया गया और हमला कर दिया गया। यानी पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक हत्या अचानक हुए विवाद का नतीजा नहीं, बल्कि रैकी, लोकेशन और घात लगाकर किए गए हमले की साजिश थी।
- #कौमीएकता #हिंदीउर्दू #साहित्यिककार्यक्रम #गंगाजमुनातहजीब #शायरी #भाईचारा खंडवा में कौमी एकता नशिस्त का आयोजन हिंदी-उर्दू को बढ़ावा देने साहित्यकार एक मंच पर शायरी के जरिए दिया कौमी एकता का संदेश Qaumi Ekta Mushaira Organized in Khandwa Hindi-Urdu Literature Promoted Through Unity Event Poets Give Message of Communal Harmony YouTube | ANT ALL INDIA NEWS NETWORK 9424550560 एडिटर इन चीफ Masood javed1
- शिवसेना जिला प्रमुख गणेश भावसार ने बताया कि महर्षि दधीचि जीवन बगीचा पार्क तोड़कर भाजपा का दौरा चरित्र देखा जा सकता है" ऋषि पंचमी पर हार्दिक शुभकामनाएं " सर्वे ऋषिभ्यो नमो नमः।। शिवसेना जिला प्रमुख गणेश भावसार ने बताया कि महर्षि दधीचि पार्क को तोड़कर पार्किंग बनाना भाजपा की दोहरी मानसिकता देखी जा सकती" ऋषि पंचमी पर हार्दिक शुभकामनाएं " सर्वे ऋषिभ्यो नमो नमः।।1
- सनावद कृषि उपज मंडी समिति के सभी व्यापारी अपने मांगों को लेकर 17 तारीख से जिला हड़ताल पर जा रहे हैं सनावद से ग्राउंड रिपोर्ट भगवान सिंह चौहान। सनावद कृषि उपज मंडी के समस्त व्यापारियों ने 17 तारीख से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मंडी सेक्रेटरी को लिखित में आवेदन दिया कि हम सभी व्यापारी 17 तारीख को हड़ताल पर जा रहे हैं वहीं सुदर्शन ट्रेडिंग कंपनी के व्यापारी ने कहा कि जगह टैक्स और अन्य सुविधाओं को लेकर हम 1 तारीख से अनिश्चित हड़ताल पर जा रहे हैं हड़ताल पर अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें भगवान सिंह चौहान 98263 930142
- *छिपानेर घाट पर रेड, अवैध रेत उत्खनन में प्रयुक्त पनडुब्बी पकड़ी गई* *खनिज विभाग विभाग की मिलीभगत से बगैर रायल्टी चोरी हो रही है नर्मदा नदी से उत्खनन कर रेत चोरी। तीन साल से बंद है खदान *नर्मदा नदी में अवैध रेत उत्खनन पर पुलिस का शिकंजा* *छिपानेर घाट पर रेड, अवैध रेत उत्खनन में प्रयुक्त पनडुब्बी पकड़ी गई* हरदा/करताना- पुलिस अधीक्षक जिला हरदा के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जिला हरदा के मार्गदर्शन तथा पुलिस अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस), टिमरनी के मार्गदर्शन में अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना टिमरनी एवं पुलिस चौकी करताना द्वारा छिपानेर घाट, नर्मदा नदी पर कार्रवाई करते हुए अवैध रेत उत्खनन में प्रयुक्त एक पनडुब्बी पकड़ी गई। *छिपानेर घाट पर पुलिस की रेड कार्रवाई* थाना प्रभारी टिमरनी निरीक्षक मुकेश गौड के नेतृत्व में पुलिस चौकी करताना की टीम के साथ छिपानेर घाट, नर्मदा नदी क्षेत्र में कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान नदी में अवैध रेत उत्खनन के लिए प्रयुक्त एक पनडुब्बी पुलिस के हाथ लगी। पुलिस टीम द्वारा मौके पर आवश्यक कार्रवाई करते हुए उक्त पनडुब्बी को जप्त किया कर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की गई । *अवैध रेत उत्खनन के विरुद्ध सख्त कार्रवाई जारी* नर्मदा नदी में अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन करने वालों के विरुद्ध पुलिस द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है। अवैध गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों एवं उनके संसाधनों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अवैध खनन एवं परिवहन के विरुद्ध पुलिस की कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।4
- नमस्कार में निडर भारत न्यूज़ से ओर आप देख रहे है सच निडरता से ग्राम लिमडी खोदर्रा अपनी मूल भूत सुविधा से कोसों दूर है परेशान होकर महिलाएं ओर पुरुषों ने आज महू तहसील पहुंच दिया ज्ञापन ओर कहां सहाब न हॉस्पिटल है न स्कूल है न रोड है न पीने का पानी 80 साल की एक वृद्ध अम्मा ने अपने गांव की सारी हकीकत बताई वहीं जनसुनवाई में हरसोला भगोरा की जनता भी पहुंच अपनी समस्या को लेकर निडर भारत से विजय डावर की रिपोर्ट नमस्कार में निडर भारत न्यूज़ से ओर आप देख रहे है सच निडरता से ग्राम लिमडी खोदर्रा अपनी मूल भूत सुविधा से कोसों दूर है परेशान होकर महिलाएं ओर पुरुषों ने आज महू तहसील पहुंच दिया ज्ञापन ओर कहां सहाब न हॉस्पिटल है न स्कूल है न रोड है न पीने का पानी 80 साल की एक वृद्ध अम्मा ने अपने गांव की सारी हकीकत बताई वहीं जनसुनवाई में हरसोला भगोरा की जनता भी पहुंच अपनी समस्या को लेकर निडर भारत से विजय डावर की रिपोर्ट1
- जानलेवा सफर प्रशासन क्यों बेखबर।ड्रम वाली नांव पर रस्सी से बांध कर नदी का करना पड़ रहा जानलेवा सफर ड्रम के जुगाड़ वाली नाव, जोखिम वाला सफर। जान जोखिम में डालकर नदी पार करते ग्रामीण। मंदसौर से करीब 17 किलोमीटर दूर स्थित ,दमदम गांव में आज भी ग्रामीण, मूलभूत सुविधा के अभाव में ,अपनी जान जोखिम में डालकर सोमली नदी पार करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने नदी पार करने के लिए चार ड्रम ,और लकड़ी की मदद से एक जुगाड़ वाली नाव, तैयार कर रखी है। इसी नाव के सहारे दमदम, आक्या सहित आसपास के गांवों के ग्रामीण, रोजाना नदी पार कर अपने खेतों तक पहुंचते हैं। किसी भी दिन बड़ी घटना होने की संभावना बनी रहती है।हालात का तत्काल प्रभाव से जायजा लेते हुए जिला प्रशासन को समय रहते ध्यान देना चाहिए ।अब देखना यह है कि, आखिर ग्रामिणो को जोखिम भरे नाव के सफ़र से छुटकारा कब मिलेगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। जानलेवा सफर क्या बड़ी घटना का है इंतजार, प्रशासन सुस्त1
- कलेक्टर नहीं आए तो कुत्ते के गले में ज्ञापन पहनाया : खंडवा में 8 माँगो को लेकर किसानों की रैली, कक्काजी बोले , की कलेक्टर की अकड़ निकालेगे खंडवा में मंगलवार को भारतीय किसान - मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अधिक्षक शिवकुमार कक्काजी के नेतृत्व में किसान अधिकार रैली निकाली गई । दोपहर 3 बजे सब्जी मंडी से रैली शुरू हुई रैली शाम करीब 4 बजे कलेक्ट्रेट पोहची । यहां किसानों ने नारेबाज़ी कर प्रदर्शन किया । किसान कलेक्टर को ही ज्ञापन सौंपने की मांग पर अड़े रहे।1
- एक ने कुल्हाड़ी से गला काटा , एक ने चाकू घोपा : रिकॉर्ड में जो फरार , वही सरपंच पति का हत्यारा , स्पिनर डॉग ने सुलझाई मर्डर मिस्ट्री खंडवा के गुड़ी रेंज के जंगलों में करीब 10 हजार एकड़ वनभूमि पर अतिक्रमण कर खेती शुरू करने वालों के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई ने एक ऐसी दुश्मनी को जन्म दिया, जिसका अंत बोरखेड़ा के सरपंच पति रूमसिंग की हत्या के रूप में हुआ। रूमसिंग की गर्दन पर कुल्हाड़ी से वार किया गया। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों को शक था कि जंगल में अतिक्रमण के खिलाफ हुई कार्रवाई और उनके मकान तोड़े जाने के पीछे रूमसिंग की मुखबिरी थी। रूमसिंग राजनीति में आने से पहले वन विभाग में चौकीदार रह चुका था। जंगल और वन अमले से उसके पुराने संपर्क थे। यही वजह रही कि अतिक्रमणकारियों की नजर में वह प्रशासन का मददगार बन गया। दिलचस्प यह है कि हत्या का मुख्य आरोपी छतरसिंह खुद पुराने आपराधिक मामलों में पुलिस रिकॉर्ड में फरार है। पुलिस के मुताबिक उसी ने रूमसिंग की गर्दन पर कुल्हाड़ी का पहला वार किया। हत्या के बाद वह फिर फरार हो गया।10 हजार एकड़ जंगल कैसे बना विवाद की जड़ कोरोनाकाल यानी 2019-20 के दौरान गुड़ी रेंज के जंगलों में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण शुरू हुआ। आरोप है कि झाबुआ, धार और बड़वानी क्षेत्र से आए लोगों ने जंगल में कब्जे करना शुरू किया। धीरे-धीरे अतिक्रमण बढ़ता गया। करीब चार साल में लगभग 10 हजार एकड़ जंगल साफ कर खेती शुरू कर दी गई। गुड़ी रेंज के बोरखेड़ा और भिलाईखेड़ा इलाके में इसका सबसे ज्यादा असर दिखाई दिया। 2022 के बाद अतिक्रमणकारियों ने जंगल साफ कर खेत तैयार कर लिए। स्थानीय लोगों ने विरोध शुरू किया तो प्रशासन भी सक्रिय हुआ। 2023 से लगातार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई होने लगी। जेसीबी से कब्जे हटाए गए और जंगल में दोबारा अतिक्रमण रोकने की कोशिश की गई, लेकिन असली टकराव इसी साल जून में हुआ।150 जेसीबी, तीन दिन की कार्रवाई और टूट गए मकान बारिश से पहले जून में प्रशासन ने गुड़ी रेंज के जंगल में बड़े स्तर पर कार्रवाई की। करीब तीन दिन तक 150 जेसीबी मशीनों से जंगल में कंटूर खोदे गए। कार्रवाई के दौरान वन विभाग की जमीन के साथ राजस्व भूमि पर बने अतिक्रमणकारियों के मकान भी प्रशासन की नजर में आए। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में मकानों को तोड़ा गया। यही कार्रवाई आगे चलकर हत्या की वजह बनी। पुलिस जांच के मुताबिक अतिक्रमणकारियों को शक था कि उनके मकान और कब्जे की जानकारी प्रशासन तक पहुंचाने में रूमसिंग की भूमिका थी।रूमसिंग की हत्या में मुखबिरी का पूरा खेल पुलिस के मुताबिक हत्या की साजिश में दिनेश की भूमिका भी सामने आई है। जांच में यह बात सामने आई कि रूमसिंग जब अकेला निकला तो दिनेश ने उसकी लाइव लोकेशन फोन के जरिए छतरसिंह तक पहुंचाई। छतरसिंह और उसके साथी पहले से खेत में छिपे हुए थे। लोकेशन मिलते ही रूमसिंग को घेर लिया गया और हमला कर दिया गया। यानी पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक हत्या अचानक हुए विवाद का नतीजा नहीं, बल्कि रैकी, लोकेशन और घात लगाकर किए गए हमले की साजिश थी।3