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कोडरमा जिले के डोमचांच में, युवा ब्रिटिश काल के 52 एकड़ शिवसागर तालाब को संवारने के लिए आगे आए हैं। पिछले 15 दिनों से, ये युवा श्रमदान के माध्यम से इस ऐतिहासिक तालाब में स्वच्छता अभियान चला रहे हैं।
KUMAR ANKU
कोडरमा जिले के डोमचांच में, युवा ब्रिटिश काल के 52 एकड़ शिवसागर तालाब को संवारने के लिए आगे आए हैं। पिछले 15 दिनों से, ये युवा श्रमदान के माध्यम से इस ऐतिहासिक तालाब में स्वच्छता अभियान चला रहे हैं।
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- झारखंड सरकार के निर्देशों के तहत डोमचांच प्रखंड कार्यालय में शुक्रवार को सुबह 10 बजे से एक प्रखंड स्तरीय ड्राइविंग लाइसेंस शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर विशेष रूप से लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए था। शिविर में लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस के लिए कुल 76 लोगों ने आवेदन किया। ऑनलाइन ड्राइविंग टेस्ट में 28 अभ्यर्थी सफल रहे, जबकि 15 अभ्यर्थी असफल घोषित हुए। वहीं, 33 अभ्यर्थियों का टेस्ट लिया जाना अभी शेष है। इस शिविर के दौरान जिला परिवहन पदाधिकारी विजय कुमार सोनी और मोटर यान निरीक्षक जोसफ टोप्पो सहित परिवहन विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मी मौजूद रहे।1
- Post by Md Javed Ansari1
- चौपारण प्रखंड के छोटे से गांव ललकी माटी में आजादी के दशकों बाद भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। ग्रामीणों को आज भी बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। यह गंभीर सवाल बना हुआ है कि आखिर कब इस गांव तक विकास पहुंचेगा और कब यहां के ग्रामीणों की आवाज सुनी जाएगी, जो दशकों से बुनियादी जरूरतों का इंतजार कर रहे हैं।1
- चलते ई-रिक्शा को बंद करने वाले चाइनीज एप्स पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि बदमाश इन एप्स का इस्तेमाल ब्लूटूथ के जरिए ई-रिक्शा की बैटरी को बंद करने के लिए करते थे। इस तकनीक से चलते हुए ई-रिक्शा अचानक रुक जाते थे, जिससे खतरा पैदा होता था। हालांकि, इलेक्ट्रिक कार और स्कूटर को इस तरह के खतरे का सामना नहीं करना पड़ेगा, वे इस प्रणाली से अप्रभावित और सुरक्षित हैं।1
- बिहार के नवादा जिले के बजरा गांव में कथित विकास कार्यों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि पंचायत के नाम पर 'करोड़ों का खेल' हुआ है, जिससे यह अनिश्चितता बनी हुई है कि गांव में वास्तव में विकास हुआ है या यह एक बड़ा घोटाला है। पोस्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि आखिर जनता के पैसे का हिसाब कौन देगा। लोगों से अपील की गई है कि वे इस मामले की पूरी सच्चाई जानने के लिए वीडियो देखें, अपनी राय कमेंट में लिखें और इसे ज्यादा से ज्यादा साझा करें। इसके साथ ही, जनता से '#अब_जागो_सवाल_पूछो_जवाब_मांगो' का सशक्त आह्वान किया गया है, ताकि इस कथित अनियमितता पर जवाबदेही तय की जा सके।1
- गिरिडीह जिले के तिसरी प्रखंड अंतर्गत भंडारी गांव में कनोदवा पुल के समीप लगभग 68 लाख रुपये की लागत से बनाए जा रहे दो चेक डैम के निर्माण कार्य में घटिया सामग्री के इस्तेमाल का गंभीर मामला सामने आया है। स्थानीय जोगियापहारी निवासी उपेंद्र पांडेय ने आरोप लगाया है कि लगभग 500 मीटर की दूरी पर दो चेक डैम का निर्माण गलत है, जबकि दूसरा चेक डैम विभागीय कनीय अभियंता (जेई) की उपस्थिति में ग्रामीणों की बैठक कर पांडेय भीठा मौजा में अधिक दूरी पर बनाया जाना था। झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के प्रखंड अध्यक्ष रिंकू बरनवाल ने भी निर्माण में खराब गुणवत्ता के पत्थर, गिट्टी और अत्यधिक मिट्टी युक्त नदी के बालू के उपयोग का आरोप लगाया है। इसके साथ ही, वन क्षेत्र से अवैध रूप से पत्थर लाने की आशंका भी जताई गई है। मामला सामने आने के बाद, कनीय अभियंता आलोक कुमार ने सामग्री के फोटो और वीडियो देखने के उपरांत पत्थरों की गुणवत्ता को खराब स्वीकार किया है। उन्होंने इस संबंध में जांच के बाद उचित कार्रवाई करने की बात कही है। वहीं, वन विभाग के रेंजर अनिल कुमार ने भी इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यदि वन क्षेत्र से पत्थर लाए जा रहे हैं, तो वन अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जेएमएम प्रखंड अध्यक्ष ने इस पूरे मामले की शिकायत गिरिडीह उपायुक्त और मुख्यमंत्री से करने की चेतावनी दी है।1
- कोडरमा उपायुक्त उत्कृष्ट गुप्ता ने शुक्रवार दोपहर 12 बजे आयोजित जनता दरबार में लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं और शिकायतें सुनीं। इस दौरान, उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राप्त सभी शिकायतों के निष्पक्ष जांच प्रतिवेदन एक सप्ताह के भीतर प्रस्तुत किए जाएं, ताकि मामलों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित हो सके। उपायुक्त ने जनता को यह भी आश्वासन दिया कि उनकी शिकायतों का ससमय और पारदर्शी तरीके से समाधान किया जाएगा, तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।1
- झारखंड के पलामू जिले में स्थित मेदिनीनगर में हुई पहली तेज़ बारिश ने शहर की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। इस भारी बरसात के कारण कई इलाकों में सड़कें पूरी तरह से जलमग्न हो गईं, जिससे लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बारिश का पानी नालियों से निकलकर घरों तक पहुँच गया, जिससे निवासियों की मुश्किलें और बढ़ गईं। यह स्थिति शहरी जल निकासी और बुनियादी ढांचे की खराब व्यवस्था को उजागर करती है।1