डीग में निर्माणाधीन नए बस स्टैंड को लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि बस स्टैंड के निर्माण कार्य में बेहद घटिया गुणवत्ता की सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसका प्रमाण यह है कि बस स्टैंड के अभी चालू होने से पहले ही इसकी चारदीवारी का एक हिस्सा भरभरा कर गिर गया है। स्थानीय नागरिकों ने भवन के अन्य हिस्सों में भी दरारें और कई अन्य खामियां बताई हैं, जो निर्माण की खराब गुणवत्ता को दर्शाती हैं। लोगों ने आशंका जताई है कि अगर इस निर्माण कार्य की समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है। इस गंभीर मामले को लेकर क्षेत्र के लोगों ने कड़ा विरोध प्रदर्शन किया है, जिसमें उन्होंने संबंधित विभाग और प्रशासन से निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच कराने के साथ-साथ दोषी ठेकेदारों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि जनता के पैसे से बनने वाली इस महत्वपूर्ण परियोजना में किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
डीग में निर्माणाधीन नए बस स्टैंड को लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि बस स्टैंड के निर्माण कार्य में बेहद घटिया गुणवत्ता की सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसका प्रमाण यह है कि बस स्टैंड के अभी चालू होने से पहले ही इसकी चारदीवारी का एक हिस्सा भरभरा कर गिर गया है। स्थानीय नागरिकों ने भवन के अन्य हिस्सों में भी दरारें और कई अन्य खामियां बताई हैं, जो निर्माण की खराब गुणवत्ता को दर्शाती हैं। लोगों ने आशंका जताई है कि अगर इस निर्माण कार्य की समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है। इस गंभीर मामले को लेकर क्षेत्र के लोगों ने कड़ा विरोध प्रदर्शन किया है, जिसमें उन्होंने संबंधित विभाग और प्रशासन से निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच कराने के साथ-साथ दोषी ठेकेदारों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि जनता के पैसे से बनने वाली इस महत्वपूर्ण परियोजना में किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
- डीग में निर्माणाधीन नए बस स्टैंड को लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि बस स्टैंड के निर्माण कार्य में बेहद घटिया गुणवत्ता की सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसका प्रमाण यह है कि बस स्टैंड के अभी चालू होने से पहले ही इसकी चारदीवारी का एक हिस्सा भरभरा कर गिर गया है। स्थानीय नागरिकों ने भवन के अन्य हिस्सों में भी दरारें और कई अन्य खामियां बताई हैं, जो निर्माण की खराब गुणवत्ता को दर्शाती हैं। लोगों ने आशंका जताई है कि अगर इस निर्माण कार्य की समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है। इस गंभीर मामले को लेकर क्षेत्र के लोगों ने कड़ा विरोध प्रदर्शन किया है, जिसमें उन्होंने संबंधित विभाग और प्रशासन से निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच कराने के साथ-साथ दोषी ठेकेदारों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि जनता के पैसे से बनने वाली इस महत्वपूर्ण परियोजना में किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।1
- राजस्थान के लोहा सर गाँव में सड़क टूटी हुई है, जिसे बनवाने के लिए स्थानीय सरपंच द्वारा कोई सुनवाई नहीं की जा रही है। एक नागरिक ने सभी संबंधित अधिकारियों से अपील की है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और सरपंच से बात करके सड़क का निर्माण करवाएँ। शिकायतकर्ता ने अधिकारियों से इस मुद्दे को उठाने और सड़क बनवाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है।1
- कमई ग्राम पंचायत के ग्रामीणों ने पंचायत प्रशासन पर मनमानी और आवास योजना में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का गंभीर आरोप लगाया है, जिससे उनमें गहरी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर होने और पात्र होने के बावजूद कई परिवारों को आवास योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है, जबकि इस सूची में कुछ अन्य लोगों के नाम शामिल कर लिए गए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, कई गरीब परिवार वर्षों से पक्के मकान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उनका आरोप है कि लाभार्थियों के चयन में पारदर्शिता की कमी है और ग्राम सभा में उठाई गई शिकायतों पर भी कोई अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। प्रधान की इस कार्यप्रणाली से ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है और आवास योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।3
- भरतपुर में बयाना विधायक और नगरपालिका की अधिशासी अधिकारी (ईओ) के बीच हुई नोकझोंक के बाद, अब ईओ अनीता कुशवाह का बयान सामने आया है। इस घटना ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है और मामला अब तेज़ी से चर्चाओं में है। ईओ अनीता कुशवाह ने बताया कि बैठक के दौरान एक आम व्यक्ति ने टिप्पणी की थी। इस पर विधायक ने उस व्यक्ति को बैठक से बाहर निकालने की बात कही, जो उन्हें बिल्कुल भी उचित नहीं लगी। इसी बात को लेकर बैठक का माहौल काफी गरमा गया। इस पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद से, राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इस मामले को लेकर चर्चाओं का दौर तेज़ हो गया है।1
- मथुरा जनपद में लगभग दो दशक से चल रहे सनसिटी हाईटेक भूमि घोटाले से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जहाँ पीड़ित नेम सिंह, जो अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, ने कुछ विधिक और वास्तविक तथ्यों पर ध्यान आकर्षित कराया है। यह विवादित भूमि खसरा नंबर 422, ग्राम रामताल, सुनरख बाँगर, तहसील सदर, जिला मथुरा में स्थित है, जिस पर प्रार्थी का पुराना, शांतिपूर्ण और वास्तविक कब्ज़ा होने का दावा है। इस संपत्ति के मालिकाना हक, बैनामा निरस्तीकरण और स्थायी निषेधाज्ञा को लेकर न्यायालय द्वितीय अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन, मथुरा में 11 सितंबर 2017 से 'नेम सिंह बनाम सनसिटी' नामक एक दीवानी वाद विचाराधीन है। इस दीवानी मुकदमे के लंबित रहने के दौरान, सिटी मजिस्ट्रेट, मथुरा द्वारा धारा 146 सीआर.पी.सी. के तहत पारित कुर्की के आदेश को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 2 जनवरी 2023 को अंतिम आदेश पारित करते हुए पूरी तरह से निरस्त कर दिया है। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मामला सिविल कोर्ट के अधीन है और इस जमीन को किसी भी व्यक्ति को नहीं बेचा जा सकता है। हालांकि, उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद, सनसिटी द्वारा नेम सिंह की जमीन को किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया गया है। इसी कारण नेम सिंह लगातार अदालत और सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। अब यह देखना होगा कि इस मामले में अदालत और आला अधिकारी क्या निर्णय लेते हैं, या फिर यूं ही इस पीड़ित को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ेंगी। यह वर्षों से मथुरा में चला आ रहा सनसिटी हाईटेक भूमि विवाद कब थमेगा, यह एक बड़ा प्रश्न है।1
- मथुरा के एक गांव में ग्राम प्रधान ने चुनाव जीतने के बाद एक विवादित बयान देकर जनता में भारी आक्रोश भर दिया है। प्रधान ने खुले तौर पर यह दावा किया है कि उन्होंने पैसा खर्च करके प्रधानी खरीदी है, जिसके बाद अब वे सिर्फ गांव से कमाई करेंगे और विकास कार्य भी केवल उन्हीं लोगों के लिए किए जाएंगे जिन्होंने उन्हें वोट दिया। प्रधान के इस तानाशाही भरे ऐलान के खिलाफ ग्रामीणों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका स्पष्ट कहना है कि जल निगम ग्रामीण और अन्य विकास कार्यों के लिए आने वाला सरकारी धन पूरे गांव के लिए होता है, न कि किसी एक व्यक्ति या केवल अपने मतदाताओं के लिए। यह धन ग्राम प्रधान की निजी खरीद नहीं है। गांव की जनता ने इस पक्षपातपूर्ण और भ्रष्ट आचरण के खिलाफ अब चुप न बैठने का संकल्प लिया है। ग्राम प्रधान के खिलाफ विकास कार्यों में पक्षपात, सरकारी धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के संबंध में शिकायत भी दर्ज कराई गई है। ग्रामीण इस खुलेआम तानाशाही के खिलाफ न्याय की मांग कर रहे हैं।3
- मथुरा के गोवर्धन तहसील स्थित ग्राम पाली के ग्रामीण पिछले एक महीने से अधिक समय से अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं, जिसके चलते यह सवाल उठ रहा है कि क्या नेताओं की ऊंची पहुंच के आगे जनता की परेशानियां बौनी साबित हो रही हैं। यह स्थिति नाली निर्माण के नाम पर एक ठेकेदार की घोर लापरवाही और तानाशाही के कारण बनी है, जहाँ सड़क के दोनों ओर गहरी खुदाई कर रास्ते अवरुद्ध कर दिए गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार ने बिना किसी योजना के सड़क के दोनों तरफ खुदाई करके काम अधूरा छोड़ दिया है, जो कछुआ गति से चल रहा है और अब तक पूरा नहीं हुआ है। इसके परिणामस्वरूप, मकानों के ठीक सामने गहरी खुदाई होने से ग्रामीणों के पास घर से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा है। यह परेशानी केवल ग्रामीणों तक ही सीमित नहीं है; गोवर्धन-छाता मुख्य मार्ग पर नाली खुदाई के बाद मिट्टी को लावारिस छोड़ दिया गया है, जिससे पूरी सड़क ब्लॉक हो गई है और राहगीरों का निकलना मुश्किल हो गया है। चूंकि यह मार्ग सीधे गोवर्धन श्री गिर्राज जी के धाम को जोड़ता है, इसलिए देश-विदेश से आने वाले हजारों श्रद्धालु रोजाना यहाँ घंटों लंबे जाम में फंसने को विवश हैं। छोटी सी चूक भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है, लेकिन ठेकेदार को इससे कोई सरोकार नहीं है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस बदइंतजामी और सुस्त कार्यशैली के खिलाफ आवाज उठाने पर ठेकेदार सुधरने के बजाय अपनी धौंस दिखाता है। वह खुद को बड़े-बड़े राजनेताओं का करीबी बताकर और अपने राजनीतिक लिंक्स का हवाला देकर ग्रामीणों को चुप कराने की कोशिश करता है। शायद यही वजह है कि गोवर्धन तहसील से लेकर मथुरा जिला प्रशासन तक, इस ठेकेदार की तानाशाही के आगे पूरी तरह मौन धारण किए हुए है। एक ओर जहाँ सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ के विकास कार्यों से जनता को असुविधा न होने देने के सख्त निर्देश हैं, वहीं ग्राम पाली की जमीनी हकीकत इन दावों की धज्जियां उड़ा रही है। अब देखना यह होगा कि क्या मथुरा जिला प्रशासन और गोवर्धन के आला अधिकारी इस लापरवाह ठेकेदार पर कोई ठोस कार्रवाई करेंगे, या श्रद्धालुओं और ग्रामीणों को इसी नरकीय स्थिति में रहने के लिए छोड़ दिया जाएगा, क्योंकि आरोप है कि मथुरा का जिला प्रशासन एक लापरवाह ठेकेदार के आगे पूरी तरह नतमस्तक हो चुका है।1