logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा उपचुनाव की सियासत में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहाँ भारतीय जनता पार्टी द्वारा पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिए जाने के बाद शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने उन्हें अपनी पार्टी से चुनाव लड़ने का खुला प्रस्ताव दिया है। शिवसेना (UBT) के मध्य प्रदेश प्रमुख सुनील शर्मा ने कहा कि यदि डॉ. नरोत्तम मिश्रा इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं, तो वे पार्टी के "मशाल" चुनाव चिन्ह पर दतिया उपचुनाव लड़ सकते हैं। उन्होंने बताया कि यह प्रस्ताव पार्टी नेतृत्व से चर्चा के बाद दिया गया है। साथ ही सुनील शर्मा ने दावा किया कि यदि मिश्रा उम्मीदवार बनते हैं, तो पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे सहित अन्य वरिष्ठ नेता उनके समर्थन में चुनाव प्रचार करने भी दतिया आ सकते हैं। दरअसल, भाजपा द्वारा दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद यह नाराजगी बढ़ी थी। इस फैसले के विरोध में मिश्रा के समर्थकों ने प्रदर्शन किया, राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगाया और कई स्थानों पर तनाव की स्थिति बन गई। इस बीच, डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने शिवसेना (UBT) के प्रस्ताव और अन्य किसी दल में जाने की अटकलों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे भाजपा के साथ हैं, पार्टी के निर्णय का सम्मान करते हैं और अधिकृत प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार करेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिवसेना (UBT) का यह प्रस्ताव भाजपा के भीतर पैदा हुई असंतोष की स्थिति को राजनीतिक अवसर में बदलने की एक प्रतीकात्मक कोशिश थी, लेकिन मिश्रा के सार्वजनिक बयान के बाद अब इसकी संभावना बेहद कम बची है।

4 hrs ago
user_Deepak ojha
Deepak ojha
Local News Reporter गुना नगर, गुना, मध्य प्रदेश•
4 hrs ago
15077973-4c00-4ef1-ac57-ddeeb06e9fce

मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा उपचुनाव की सियासत में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहाँ भारतीय जनता पार्टी द्वारा पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिए जाने के बाद शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने उन्हें अपनी पार्टी से चुनाव लड़ने का खुला प्रस्ताव दिया है। शिवसेना (UBT) के मध्य प्रदेश प्रमुख सुनील शर्मा ने कहा कि यदि डॉ. नरोत्तम मिश्रा इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं, तो वे पार्टी के "मशाल" चुनाव चिन्ह पर दतिया उपचुनाव लड़ सकते हैं। उन्होंने बताया कि यह प्रस्ताव पार्टी नेतृत्व से चर्चा के बाद दिया गया है। साथ ही सुनील शर्मा ने दावा किया कि यदि मिश्रा उम्मीदवार बनते हैं, तो पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे सहित अन्य वरिष्ठ नेता उनके समर्थन में चुनाव प्रचार करने भी दतिया आ सकते हैं। दरअसल, भाजपा द्वारा दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद यह नाराजगी बढ़ी थी। इस फैसले के विरोध में मिश्रा के समर्थकों ने प्रदर्शन किया, राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगाया और कई स्थानों पर तनाव की स्थिति बन गई। इस बीच, डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने शिवसेना (UBT) के प्रस्ताव और अन्य किसी दल में जाने की अटकलों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे भाजपा के साथ हैं, पार्टी के निर्णय का सम्मान करते हैं और अधिकृत प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार करेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिवसेना (UBT) का यह प्रस्ताव भाजपा के भीतर पैदा हुई असंतोष की स्थिति को राजनीतिक अवसर में बदलने की एक प्रतीकात्मक कोशिश थी, लेकिन मिश्रा के सार्वजनिक बयान के बाद अब इसकी संभावना बेहद कम बची है।

More news from Madhya Pradesh and nearby areas
  • पानीहाटी के पूर्व विधायक निर्मल घोष को नव तृणमूल के ऋतब्रत से मिलने जाते देखा गया है। इस मुलाकात को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री अर्जुन सिंह ने कहा है कि निर्मल घोष क्या करते हैं और किस तृणमूल के साथ रहते हैं, यह उनका पूरी तरह से निजी मामला है। लेकिन कानून अपने रास्ते पर चलेगा। मंत्री अर्जुन सिंह ने स्पष्ट किया कि निर्मल घोष चाहे किसी के भी साथ रहें, उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा और पुलिस अपना काम करेगी।
    1
    पानीहाटी के पूर्व विधायक निर्मल घोष को नव तृणमूल के ऋतब्रत से मिलने जाते देखा गया है। इस मुलाकात को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री अर्जुन सिंह ने कहा है कि निर्मल घोष क्या करते हैं और किस तृणमूल के साथ रहते हैं, यह उनका पूरी तरह से निजी मामला है। लेकिन कानून अपने रास्ते पर चलेगा। मंत्री अर्जुन सिंह ने स्पष्ट किया कि निर्मल घोष चाहे किसी के भी साथ रहें, उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा और पुलिस अपना काम करेगी।
    user_JONOMON KHOBOR
    JONOMON KHOBOR
    Guna, Madhya Pradesh•
    2 hrs ago
  • guna city
    1
    guna city
    user_Abhishek Kushwah guna
    Abhishek Kushwah guna
    गुना नगर, गुना, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • मध्य प्रदेश में ऐतिहासिक गोदावर्मन बनाम भारत सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भ्रष्टाचार विरोधी संस्था 'सिस्टम परिवर्तन अभियान' (Crusaders Against Corruption) ने मध्य प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद राज्य में अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। संस्था ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि 15 मई 2025 को सर्वोच्च न्यायालय ने गोदावर्मन प्रकरण में महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए राज्यों को निर्देश दिए थे कि वास्तविक रूप से वन श्रेणी में आने वाली सभी जमीनों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए। इसके तहत वन भूमि से अवैध कब्जे हटाने, अवैध उपयोग की स्थिति में संबंधितों से भूमि का मूल्य वसूलने और उस राशि का उपयोग वनीकरण व वन संरक्षण में करने का निर्देश था। संगठन का आरोप है कि इस आदेश के लगभग 14 महीने बीत जाने के बाद भी मध्य प्रदेश में न तो अतिक्रमण हटाया गया है और न ही अवैध उपयोगकर्ताओं से भूमि की कीमत वसूली गई है, जबकि कई क्षेत्रों में वन भूमि पर निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियां लगातार जारी हैं। पत्र में सीहोर वनमंडल के एक मामले को प्रमुखता से उठाते हुए आरोप लगाया गया है कि लगभग 50 लाख वर्गफुट वन भूमि पर्यटन विभाग को हस्तांतरित कर दी गई, जहां अब एक निजी होटल और रिसॉर्ट परियोजना विकसित की जा रही है। संस्था का दावा है कि इस वन क्षेत्र में बड़ी संख्या में पेड़ मौजूद थे और निर्माण के चलते यह क्षेत्र प्रभावित हुआ है। संगठन ने पूरे प्रदेश में वन भूमि का सर्वे कराने, अवैध कब्जे हटाने, भूमि का मूल्य वसूलने और दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की वन विभाग या किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं की गई है और इस मामले पर फिलहाल वन विभाग की प्रतिक्रिया आना बाकी है।
    1
    मध्य प्रदेश में ऐतिहासिक गोदावर्मन बनाम भारत सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भ्रष्टाचार विरोधी संस्था 'सिस्टम परिवर्तन अभियान' (Crusaders Against Corruption) ने मध्य प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद राज्य में अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।

संस्था ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि 15 मई 2025 को सर्वोच्च न्यायालय ने गोदावर्मन प्रकरण में महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए राज्यों को निर्देश दिए थे कि वास्तविक रूप से वन श्रेणी में आने वाली सभी जमीनों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए। इसके तहत वन भूमि से अवैध कब्जे हटाने, अवैध उपयोग की स्थिति में संबंधितों से भूमि का मूल्य वसूलने और उस राशि का उपयोग वनीकरण व वन संरक्षण में करने का निर्देश था। संगठन का आरोप है कि इस आदेश के लगभग 14 महीने बीत जाने के बाद भी मध्य प्रदेश में न तो अतिक्रमण हटाया गया है और न ही अवैध उपयोगकर्ताओं से भूमि की कीमत वसूली गई है, जबकि कई क्षेत्रों में वन भूमि पर निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियां लगातार जारी हैं।

पत्र में सीहोर वनमंडल के एक मामले को प्रमुखता से उठाते हुए आरोप लगाया गया है कि लगभग 50 लाख वर्गफुट वन भूमि पर्यटन विभाग को हस्तांतरित कर दी गई, जहां अब एक निजी होटल और रिसॉर्ट परियोजना विकसित की जा रही है। संस्था का दावा है कि इस वन क्षेत्र में बड़ी संख्या में पेड़ मौजूद थे और निर्माण के चलते यह क्षेत्र प्रभावित हुआ है। संगठन ने पूरे प्रदेश में वन भूमि का सर्वे कराने, अवैध कब्जे हटाने, भूमि का मूल्य वसूलने और दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की वन विभाग या किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं की गई है और इस मामले पर फिलहाल वन विभाग की प्रतिक्रिया आना बाकी है।
    user_Deepak ojha
    Deepak ojha
    Local News Reporter गुना नगर, गुना, मध्य प्रदेश•
    19 hrs ago
  • गुना के बमोरी विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाली ग्राम पंचायत झागर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में साइकिल वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान कक्षा 9 में नवीन प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं को साइकिलें प्रदान की गईं। इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य नरेंद्र भार्गव, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी आशुतोष श्रीवास्तव और स्कूल का समस्त स्टाफ विशेष रूप से उपस्थित रहा। विद्यालय के प्राचार्य नरेंद्र भार्गव ने बताया कि दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों को निशुल्क साइकिल वितरण का कार्य लगातार जारी है। शासन की इस कल्याणकारी योजना से दूरस्थ क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं को विद्यालय आने-जाने में काफी सुविधा मिलेगी। प्राचार्य ने छात्रों को नियमित रूप से स्कूल आने और अच्छे अंकों से उत्तीर्ण होकर अपना भविष्य संवारने की सीख दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा ही जीवन का मूल आधार है और शिक्षित होकर ही हम अपना जीवन सुधार सकते हैं। इस मौके पर विद्यालय के स्टाफ ने सभी अभिभावकों से अपने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजने की अपील की। स्टाफ ने जानकारी दी कि शासन द्वारा छात्रों के हित में साइकिल के साथ-साथ निशुल्क छात्रवृत्ति और पुस्तकों का भी वितरण किया जा रहा है, जिसका लाभ विद्यार्थियों को समय पर मिल रहा है।
    1
    गुना के बमोरी विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाली ग्राम पंचायत झागर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में साइकिल वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान कक्षा 9 में नवीन प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं को साइकिलें प्रदान की गईं। इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य नरेंद्र भार्गव, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी आशुतोष श्रीवास्तव और स्कूल का समस्त स्टाफ विशेष रूप से उपस्थित रहा।

विद्यालय के प्राचार्य नरेंद्र भार्गव ने बताया कि दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों को निशुल्क साइकिल वितरण का कार्य लगातार जारी है। शासन की इस कल्याणकारी योजना से दूरस्थ क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं को विद्यालय आने-जाने में काफी सुविधा मिलेगी। प्राचार्य ने छात्रों को नियमित रूप से स्कूल आने और अच्छे अंकों से उत्तीर्ण होकर अपना भविष्य संवारने की सीख दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा ही जीवन का मूल आधार है और शिक्षित होकर ही हम अपना जीवन सुधार सकते हैं।

इस मौके पर विद्यालय के स्टाफ ने सभी अभिभावकों से अपने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजने की अपील की। स्टाफ ने जानकारी दी कि शासन द्वारा छात्रों के हित में साइकिल के साथ-साथ निशुल्क छात्रवृत्ति और पुस्तकों का भी वितरण किया जा रहा है, जिसका लाभ विद्यार्थियों को समय पर मिल रहा है।
    user_रणधीर चदेल
    रणधीर चदेल
    पत्रकार (फोटोग्राफर) Guna, Madhya Pradesh•
    22 hrs ago
  • अशोकनगर जिले के शाढ़ौरा नगर और इसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में रविवार, 12 जुलाई 2026 को बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बाधित रहेगी। विद्युत वितरण केंद्र शाढ़ौरा द्वारा जारी सूचना के अनुसार, इस दिन सुबह 10:00 बजे से लेकर शाम 4:00 बजे तक कुल 6 घंटे का बिजली शटडाउन लिया जाएगा। इस दौरान 11 केवी शाढ़ौरा टाउन फीडर और 11 केवी मुशावदा पंप फीडर से जुड़ी बिजली सप्लाई पूरी तरह बंद रहेगी, जिससे नगर सहित संबंधित ग्रामीण इलाकों के लोग प्रभावित होंगे। शाढ़ौरा विद्युत वितरण केंद्र के सहायक प्रबंधक ने बताया कि यह शटडाउन आरडीएसएस (RDSS) योजना के अंतर्गत 11 केवी लाइन के कंडक्टर संवर्धन कार्य को पूरा करने के लिए लिया जा रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि संवर्धन का यह काम निर्धारित समय से पहले पूरा हो जाता है, तो सभी प्रभावित क्षेत्रों की विद्युत आपूर्ति को तत्काल बहाल कर दिया जाएगा।
    1
    अशोकनगर जिले के शाढ़ौरा नगर और इसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में रविवार, 12 जुलाई 2026 को बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बाधित रहेगी। विद्युत वितरण केंद्र शाढ़ौरा द्वारा जारी सूचना के अनुसार, इस दिन सुबह 10:00 बजे से लेकर शाम 4:00 बजे तक कुल 6 घंटे का बिजली शटडाउन लिया जाएगा। इस दौरान 11 केवी शाढ़ौरा टाउन फीडर और 11 केवी मुशावदा पंप फीडर से जुड़ी बिजली सप्लाई पूरी तरह बंद रहेगी, जिससे नगर सहित संबंधित ग्रामीण इलाकों के लोग प्रभावित होंगे।

शाढ़ौरा विद्युत वितरण केंद्र के सहायक प्रबंधक ने बताया कि यह शटडाउन आरडीएसएस (RDSS) योजना के अंतर्गत 11 केवी लाइन के कंडक्टर संवर्धन कार्य को पूरा करने के लिए लिया जा रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि संवर्धन का यह काम निर्धारित समय से पहले पूरा हो जाता है, तो सभी प्रभावित क्षेत्रों की विद्युत आपूर्ति को तत्काल बहाल कर दिया जाएगा।
    user_Devesh Ojha patrakaar
    Devesh Ojha patrakaar
    Local News Reporter शाढ़ोरा, अशोकनगर, मध्य प्रदेश•
    15 hrs ago
  • राजस्थान के बारां जिले की छबड़ा तहसील में तेलनी ग्राम पंचायत के निकट प्रकृति के बीच स्थित ऐतिहासिक कोटड़ा मेघनाथ का किला आज सरकारी उपेक्षा के चलते महज खंडहर के रूप में तब्दील हो चुका है। छबड़ा कस्बे से करीब 20 किलोमीटर दूर हिंगलोट और नियामतपुर बाँधों के बीच पहाड़ी पर बना यह दुर्ग अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। जंगलों से होकर जाने वाले दुर्गम रास्तों के बीच स्थित इस मौन गवाह को इतिहास की किताबों में भले ही जगह नहीं मिल सकी हो, लेकिन यह स्थानीय लोगों की स्मृतियों में आज भी जीवित है। स्थानीय जनश्रुतियों और इसकी स्थापत्य शैली के अनुसार, इस किले का निर्माण संभवतः 11वीं से 15वीं शताब्दी के बीच खींची चौहानों द्वारा कराया गया था। यह किला गागरोन दुर्ग की सुरक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। बड़े-बड़े पत्थरों को चूने से जोड़कर बने इस किले के मुख्य दुर्ग क्षेत्र, आवासीय व मंदिर परिसर और गुप्त सुरंगों व जल स्रोतों के अवशेष आज भी दिखाई देते हैं। स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, यह किला खींची चौहानों की संकटकालीन राजधानी और सैन्य छावनी था, जहां से आसपास के क्षेत्रों पर नजर रखी जाती थी। इसके साथ ही, अंग्रेजी शासनकाल में भी इस किले से कर वसूला जाता था। यहाँ हनुमान जी के मंदिर के साथ-साथ राजस्थान का एकमात्र मेघनाथ मंदिर भी स्थित है, जहां हर चतुर्दशी को विशेष पूजा की जाती है और मान्यता है कि यहाँ आने से हर समस्या का समाधान हो जाता है। वर्तमान समय में प्राकृतिक क्षरण और देखरेख के अभाव में इस किले की दीवारें गिर चुकी हैं। इस प्राचीन धरोहर को बचाने के लिए सेवानिवृत्त व्याख्याता और भूगोलवेत्ता एस.एल. नागर ने छबड़ा तहसील की प्राचीन विरासतों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया है। लेखक व अध्यापक अरविंद गुर्जर का कहना है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और राजस्थान पर्यटन विभाग को इस किले का अध्ययन कर इसे संरक्षित करना चाहिए और पर्यटन के रूप में विकसित करना चाहिए। उन्होंने स्थानीय युवाओं और इतिहास प्रेमियों से भी इस अमूल्य धरोहर को बचाने के लिए आगे आने की अपील की है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस विरासत को सुरक्षित रखा जा सके।
    4
    राजस्थान के बारां जिले की छबड़ा तहसील में तेलनी ग्राम पंचायत के निकट प्रकृति के बीच स्थित ऐतिहासिक कोटड़ा मेघनाथ का किला आज सरकारी उपेक्षा के चलते महज खंडहर के रूप में तब्दील हो चुका है। छबड़ा कस्बे से करीब 20 किलोमीटर दूर हिंगलोट और नियामतपुर बाँधों के बीच पहाड़ी पर बना यह दुर्ग अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। जंगलों से होकर जाने वाले दुर्गम रास्तों के बीच स्थित इस मौन गवाह को इतिहास की किताबों में भले ही जगह नहीं मिल सकी हो, लेकिन यह स्थानीय लोगों की स्मृतियों में आज भी जीवित है।

स्थानीय जनश्रुतियों और इसकी स्थापत्य शैली के अनुसार, इस किले का निर्माण संभवतः 11वीं से 15वीं शताब्दी के बीच खींची चौहानों द्वारा कराया गया था। यह किला गागरोन दुर्ग की सुरक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। बड़े-बड़े पत्थरों को चूने से जोड़कर बने इस किले के मुख्य दुर्ग क्षेत्र, आवासीय व मंदिर परिसर और गुप्त सुरंगों व जल स्रोतों के अवशेष आज भी दिखाई देते हैं। स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, यह किला खींची चौहानों की संकटकालीन राजधानी और सैन्य छावनी था, जहां से आसपास के क्षेत्रों पर नजर रखी जाती थी। इसके साथ ही, अंग्रेजी शासनकाल में भी इस किले से कर वसूला जाता था। यहाँ हनुमान जी के मंदिर के साथ-साथ राजस्थान का एकमात्र मेघनाथ मंदिर भी स्थित है, जहां हर चतुर्दशी को विशेष पूजा की जाती है और मान्यता है कि यहाँ आने से हर समस्या का समाधान हो जाता है।

वर्तमान समय में प्राकृतिक क्षरण और देखरेख के अभाव में इस किले की दीवारें गिर चुकी हैं। इस प्राचीन धरोहर को बचाने के लिए सेवानिवृत्त व्याख्याता और भूगोलवेत्ता एस.एल. नागर ने छबड़ा तहसील की प्राचीन विरासतों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया है। लेखक व अध्यापक अरविंद गुर्जर का कहना है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और राजस्थान पर्यटन विभाग को इस किले का अध्ययन कर इसे संरक्षित करना चाहिए और पर्यटन के रूप में विकसित करना चाहिए। उन्होंने स्थानीय युवाओं और इतिहास प्रेमियों से भी इस अमूल्य धरोहर को बचाने के लिए आगे आने की अपील की है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस विरासत को सुरक्षित रखा जा सके।
    user_Alakh Jyoti Yog Present
    Alakh Jyoti Yog Present
    Yoga instructor Chhabra, Baran•
    22 hrs ago
  • कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस हवाई अड्डे (दमदम हवाई अड्डा) की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाते हुए रनवे के बेहद करीब स्थित सदी पुरानी गौरीपुर जामे मस्जिद को स्थानांतरित करने की योजना बनाई जा रही है। इस सिलसिले में शुक्रवार को उत्तर 24 परगना के जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) कार्यालय में स्थानीय विधायक और मस्जिद समिति के सदस्यों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इसके बाद हवाई अड्डा प्राधिकरण के प्रतिनिधियों और सुरक्षा समिति के सदस्यों की मौजूदगी वाले एक विशेष निरीक्षण दल ने मस्जिद का दौरा किया। हवाई अड्डा सुरक्षा समिति ने भी इस मुद्दे पर अलग से बैठक की है। करीब 136 साल पुरानी यह मस्जिद, जिसे 'बांकड़ा मस्जिद' भी कहा जाता है, हवाई अड्डे की सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि रनवे से बिल्कुल सटीक दूरी पर स्थित होने के कारण, भारी बारिश या घने कोहरे में कम दृश्यता के दौरान यह मस्जिद पायलटों के लिए 'विजुअल इल्यूजन' (दृष्टिभ्रम) पैदा करती है, जिससे किसी गंभीर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इसके अलावा, इस मस्जिद की वजह से पिछले 30 वर्षों से हवाई अड्डे के दूसरे रनवे के विस्तार का काम रुका हुआ है। हालांकि मस्जिद स्थानांतरण का मामला पिछले तीन दशकों से चर्चा में है, लेकिन स्थानीय बाधाओं और पिछली वामपंथी व तृणमूल कांग्रेस सरकारों की ढिलाई के कारण हवाई अड्डे की सुरक्षा के बजाय धार्मिक भावनाओं की राजनीति हावी रही। इस ऐतिहासिक स्थल का इतिहास पुराना है। कोलकाता हवाई अड्डा 1924 में शुरू हुआ था और 1962 में एअरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने हवाई अड्डे के विस्तार के लिए इस प्राचीन वक्फ संपत्ति का अधिग्रहण किया था। उस समय इसके पास से गुजरने वाले यशोर रोड को 1965 में मुख्य मार्ग से ढाई किलोमीटर घुमाकर गौरीपुर मोड़ से जोड़ दिया गया, जिससे अब मस्जिद यशोर रोड से करीब 3 किलोमीटर दूर हवाई अड्डे की चारदीवारी के अंदर सुरक्षित है। नमाजियों के लिए यहाँ जाने की एक विशेष और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है; गौरीपुर काली मंदिर के विपरीत बने एक छोटे लोहे के गेट पर CISF वॉच टावर तैनात है। यहाँ घंटी बजाने के बाद नमाज पढ़ने वालों का आधार कार्ड जांचा जाता है और फिर हवाई अड्डा प्राधिकरण उन्हें विशेष बसों के जरिए मस्जिद तक ले जाता है। दैनिक तीन शिफ्टों में ऐसी 4 बसों की व्यवस्था होती है। यदि भविष्य में इस मस्जिद को हटाने या ढहाने का काम शुरू होता है, तो बाहरी दुनिया को इसका पता भी नहीं चलेगा क्योंकि हवाई अड्डे के अपने उपकरण सीधे रनवे के रास्ते पुराने टर्मिनल के कार्गो विभाग से वहाँ तक पहुँच सकते हैं।
    1
    कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस हवाई अड्डे (दमदम हवाई अड्डा) की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाते हुए रनवे के बेहद करीब स्थित सदी पुरानी गौरीपुर जामे मस्जिद को स्थानांतरित करने की योजना बनाई जा रही है। इस सिलसिले में शुक्रवार को उत्तर 24 परगना के जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) कार्यालय में स्थानीय विधायक और मस्जिद समिति के सदस्यों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इसके बाद हवाई अड्डा प्राधिकरण के प्रतिनिधियों और सुरक्षा समिति के सदस्यों की मौजूदगी वाले एक विशेष निरीक्षण दल ने मस्जिद का दौरा किया। हवाई अड्डा सुरक्षा समिति ने भी इस मुद्दे पर अलग से बैठक की है।

करीब 136 साल पुरानी यह मस्जिद, जिसे 'बांकड़ा मस्जिद' भी कहा जाता है, हवाई अड्डे की सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि रनवे से बिल्कुल सटीक दूरी पर स्थित होने के कारण, भारी बारिश या घने कोहरे में कम दृश्यता के दौरान यह मस्जिद पायलटों के लिए 'विजुअल इल्यूजन' (दृष्टिभ्रम) पैदा करती है, जिससे किसी गंभीर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इसके अलावा, इस मस्जिद की वजह से पिछले 30 वर्षों से हवाई अड्डे के दूसरे रनवे के विस्तार का काम रुका हुआ है। हालांकि मस्जिद स्थानांतरण का मामला पिछले तीन दशकों से चर्चा में है, लेकिन स्थानीय बाधाओं और पिछली वामपंथी व तृणमूल कांग्रेस सरकारों की ढिलाई के कारण हवाई अड्डे की सुरक्षा के बजाय धार्मिक भावनाओं की राजनीति हावी रही।

इस ऐतिहासिक स्थल का इतिहास पुराना है। कोलकाता हवाई अड्डा 1924 में शुरू हुआ था और 1962 में एअरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने हवाई अड्डे के विस्तार के लिए इस प्राचीन वक्फ संपत्ति का अधिग्रहण किया था। उस समय इसके पास से गुजरने वाले यशोर रोड को 1965 में मुख्य मार्ग से ढाई किलोमीटर घुमाकर गौरीपुर मोड़ से जोड़ दिया गया, जिससे अब मस्जिद यशोर रोड से करीब 3 किलोमीटर दूर हवाई अड्डे की चारदीवारी के अंदर सुरक्षित है। नमाजियों के लिए यहाँ जाने की एक विशेष और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है; गौरीपुर काली मंदिर के विपरीत बने एक छोटे लोहे के गेट पर CISF वॉच टावर तैनात है। यहाँ घंटी बजाने के बाद नमाज पढ़ने वालों का आधार कार्ड जांचा जाता है और फिर हवाई अड्डा प्राधिकरण उन्हें विशेष बसों के जरिए मस्जिद तक ले जाता है। दैनिक तीन शिफ्टों में ऐसी 4 बसों की व्यवस्था होती है। यदि भविष्य में इस मस्जिद को हटाने या ढहाने का काम शुरू होता है, तो बाहरी दुनिया को इसका पता भी नहीं चलेगा क्योंकि हवाई अड्डे के अपने उपकरण सीधे रनवे के रास्ते पुराने टर्मिनल के कार्गो विभाग से वहाँ तक पहुँच सकते हैं।
    user_JONOMON KHOBOR
    JONOMON KHOBOR
    Guna, Madhya Pradesh•
    21 hrs ago
  • बारां के कवाई थाना क्षेत्र में कवाई-खानपुर मार्ग पर ग्राम शोलाहेड़ी के पास दो मोटरसाइकिलों की आमने-सामने टक्कर हो गई, जिसमें पांच लोग घायल हो गए। यह हादसा शनिवार शाम करीब 4:00 बजे हुआ। हादसे में पहली मोटरसाइकिल पर सवार छीपाबड़ौद थाना क्षेत्र के पचाड़ निवासी 45 वर्षीय सुरेशचंद नगर, उनकी पत्नी भगवती बाई और उनका पौत्र आरू घायल हुए हैं। वहीं, दूसरी मोटरसाइकिल पर सवार हरनावदा शाहजी थाना क्षेत्र के हरिपुरा टांडा निवासी 45 वर्षीय रामनाथ और झनझनी निवासी 30 वर्षीय त्रिलोक भी चोटिल हुए हैं। दुर्घटना के बाद सभी घायलों को तुरंत उपचार के लिए सीएचसी कवाई लाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद सुरेशचंद, रामनाथ और त्रिलोक की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए जिला चिकित्सालय बारां रेफर किया गया है। शेष दो घायलों का उपचार कवाई में ही चल रहा है। घटनास्थल पर फिलहाल कानून एवं शांति व्यवस्था सामान्य है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।
    3
    बारां के कवाई थाना क्षेत्र में कवाई-खानपुर मार्ग पर ग्राम शोलाहेड़ी के पास दो मोटरसाइकिलों की आमने-सामने टक्कर हो गई, जिसमें पांच लोग घायल हो गए। यह हादसा शनिवार शाम करीब 4:00 बजे हुआ। हादसे में पहली मोटरसाइकिल पर सवार छीपाबड़ौद थाना क्षेत्र के पचाड़ निवासी 45 वर्षीय सुरेशचंद नगर, उनकी पत्नी भगवती बाई और उनका पौत्र आरू घायल हुए हैं। वहीं, दूसरी मोटरसाइकिल पर सवार हरनावदा शाहजी थाना क्षेत्र के हरिपुरा टांडा निवासी 45 वर्षीय रामनाथ और झनझनी निवासी 30 वर्षीय त्रिलोक भी चोटिल हुए हैं।

दुर्घटना के बाद सभी घायलों को तुरंत उपचार के लिए सीएचसी कवाई लाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद सुरेशचंद, रामनाथ और त्रिलोक की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए जिला चिकित्सालय बारां रेफर किया गया है। शेष दो घायलों का उपचार कवाई में ही चल रहा है। घटनास्थल पर फिलहाल कानून एवं शांति व्यवस्था सामान्य है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।
    user_User10561
    User10561
    छिपाबड़ौद, बारां, राजस्थान•
    15 hrs ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.