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सोना खरीदने से पहले हो जाएं सावधान! देखें सिर्फ कनक ज्वेलर्स Gold Line का लोगो! धोखे से बचें! नकली ज्वेलरी से दूरी, असली के लिए कनक ज्वेलर्स Gold Line जरूरी

20 hrs ago
user_PRANSHI TV
PRANSHI TV
Media company बिहार शरीफ, नालंदा, बिहार•
20 hrs ago

सोना खरीदने से पहले हो जाएं सावधान! देखें सिर्फ कनक ज्वेलर्स Gold Line का लोगो! धोखे से बचें! नकली ज्वेलरी से दूरी, असली के लिए कनक ज्वेलर्स Gold Line जरूरी

More news from Bihar and nearby areas
  • बिहार शरीफ के सुंदरगढ़ स्थित ब्रिलियंट कान्वेंट की सभागार में नारी शक्ति का स्वाभिमान विपक्ष ने फिर किया अपमान, जन आक्रोश महिला सम्मेलन का आयोजन किया गया, जहां मुख्य अतिथि के रूप में डॉक्टर पूनम शर्मा के साथ दर्जनों की संख्या में महिला कार्यकर्ता सम्मिलित हुई...
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    बिहार शरीफ के सुंदरगढ़ स्थित ब्रिलियंट कान्वेंट की सभागार में  नारी शक्ति का स्वाभिमान विपक्ष ने फिर किया अपमान,  जन आक्रोश महिला सम्मेलन का आयोजन किया गया, जहां मुख्य अतिथि के रूप में डॉक्टर पूनम शर्मा के साथ दर्जनों की संख्या में महिला कार्यकर्ता सम्मिलित हुई...
    user_ख़बरें टी वी
    ख़बरें टी वी
    Journalist Nalanda, Bihar•
    16 hrs ago
  • महिला मोर्चा की कार्यकर्ता सड़क पर उतरीं और विरोध प्रदर्शन किया।
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    महिला मोर्चा की कार्यकर्ता सड़क पर उतरीं और विरोध प्रदर्शन किया।
    user_National TV Bihar  🗞️ 📰
    National TV Bihar 🗞️ 📰
    Local News Reporter बिहार, नालंदा, बिहार•
    19 hrs ago
  • दूध से भरा हुआ साइकिल गिरा दिया
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    दूध से भरा हुआ साइकिल गिरा दिया
    user_Singer Ravi Tiger
    Singer Ravi Tiger
    Artist राजगीर, नालंदा, बिहार•
    8 hrs ago
  • पटना/बख्तियारपुर : "मिसी गांव की प्राचीन कुटिया आज एक दिव्य धाम के रूप में जगमगा उठी है। मंगलवार की सुबह यहाँ अखंड कीर्तन के अवसर पर भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें भारी संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालु शामिल हुए। महंत सागर दास जी महाराज के नेतृत्व में मिसी की इस ऐतिहासिक धरोहर को अब पर्यटन स्थल के रूप में सवारा जा रहा है। महाराज जी ने सभी ग्रामीणों का अभिवादन करते हुए इस विकास कार्य में सहयोग की अपील की है। श्रद्धा और उल्लास का यह संगम देखने लायक है। बने रहिए हमारे साथ ऐसी ही धार्मिक और सकारात्मक खबरों के लिए। खबर जंक्शन के लिए
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    पटना/बख्तियारपुर : "मिसी गांव की प्राचीन कुटिया आज एक दिव्य धाम के रूप में जगमगा उठी है। मंगलवार की सुबह यहाँ अखंड कीर्तन के अवसर पर भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें भारी संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालु शामिल हुए। महंत सागर दास जी महाराज के नेतृत्व में मिसी की इस ऐतिहासिक धरोहर को अब पर्यटन स्थल के रूप में सवारा जा रहा है। महाराज जी ने सभी ग्रामीणों का अभिवादन करते हुए इस विकास कार्य में सहयोग की अपील की है। श्रद्धा और उल्लास का यह संगम देखने लायक है। बने रहिए हमारे साथ ऐसी ही धार्मिक और सकारात्मक खबरों के लिए। खबर जंक्शन के लिए
    user_Khabar Junction Live
    Khabar Junction Live
    Local News Reporter बख्तियारपुर, पटना, बिहार•
    9 hrs ago
  • Post by S.K SINGH
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    Post by S.K SINGH
    user_S.K SINGH
    S.K SINGH
    Medical Lab शेखपुरा, शेखपुरा, बिहार•
    1 hr ago
  • शेखपुरा - बिहार सरकार के पूर्व मंत्री श्रेया सिंह ने भाजपा कार्यालय में पहुँचकर कर किया प्रेस वार्ता, जहाँ भाजपा के ज़िला अध्यक्ष रेशमा भारती के अगुआई में श्रेया सिंह का भव्य स्वागत किया गया.
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    शेखपुरा - बिहार सरकार के पूर्व मंत्री श्रेया सिंह ने भाजपा कार्यालय में पहुँचकर कर किया प्रेस वार्ता, जहाँ भाजपा के ज़िला अध्यक्ष रेशमा भारती के अगुआई में श्रेया सिंह का भव्य स्वागत किया गया.
    user_कुमार सुबिद
    कुमार सुबिद
    पत्रकार Sheikhpura, Bihar•
    1 hr ago
  • #मोदी जी वायरल वीडियो
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    #मोदी जी वायरल वीडियो
    user_Rajesh Kumar
    Rajesh Kumar
    Consultant Bihar Sharif, Nalanda•
    20 hrs ago
  • पटना/बख्तियारपुर में अपराधियों के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसकी बानगी सोमवार रात करीब 8:30 बजे देखने को मिली। बख्तियारपुर-हरनौत फोरलेन पर मानसरोवर पंप के पास अज्ञात बाइक सवार अपराधियों ने दो युवकों, सैना कुमार और प्रकाश कुमार पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई। घटना की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सैना कुमार के सीने के पास तीन गोलियां लगी हैं। जैसे ही गोलियों की गूँज सुनाई दी, इलाके में अफरा-तफरी मच गई। बख्तियारपुर थानाध्यक्ष देवानंद शर्मा ने खुद मौके पर पहुँचकर घायलों को PMCH भिजवाने की व्यवस्था की। शुरुआती चर्चाओं में इसे आपसी रंजिश बताया जा रहा है, लेकिन मुख्य सड़क पर इस तरह की गोलीबारी ने पुलिस की गश्ती और सुरक्षा दावों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। हम इस खबर पर पल-पल की अपडेट आप तक पहुँचाते रहेंगे।"
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    पटना/बख्तियारपुर में अपराधियों के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसकी बानगी सोमवार रात करीब 8:30 बजे देखने को मिली। बख्तियारपुर-हरनौत फोरलेन पर मानसरोवर पंप के पास अज्ञात बाइक सवार अपराधियों ने दो युवकों, सैना कुमार और प्रकाश कुमार पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई।
घटना की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सैना कुमार के सीने के पास तीन गोलियां लगी हैं। जैसे ही गोलियों की गूँज सुनाई दी, इलाके में अफरा-तफरी मच गई। बख्तियारपुर थानाध्यक्ष देवानंद शर्मा ने खुद मौके पर पहुँचकर घायलों को PMCH भिजवाने की व्यवस्था की। शुरुआती चर्चाओं में इसे आपसी रंजिश बताया जा रहा है, लेकिन मुख्य सड़क पर इस तरह की गोलीबारी ने पुलिस की गश्ती और सुरक्षा दावों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। हम इस खबर पर पल-पल की अपडेट आप तक पहुँचाते रहेंगे।"
    user_Khabar Junction Live
    Khabar Junction Live
    Local News Reporter बख्तियारपुर, पटना, बिहार•
    20 hrs ago
  • बिहार में अप्रैल 2016 से लागू शराबबंदी को अब 10 साल पूरे होने को हैं। सरकार के ताज़ा आंकड़ों (मार्च 2026 तक) और विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, इस कानून का प्रभाव और इसकी चुनौतियां दोनों ही काफी व्यापक रही हैं। ​1. 10 साल का लेखा-जोखा: गिरफ्तारी और मुकदमे ​हाल ही में बिहार सरकार द्वारा जारी आंकड़ों और न्यायिक समीक्षा के अनुसार स्थिति कुछ इस प्रकार है: ​गिरफ्तारियां: पिछले 10 वर्षों में लगभग 17 लाख से अधिक लोगों को शराबबंदी कानून के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। ​दर्ज केस (FIR): अब तक कुल 11.37 लाख से ज्यादा मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें से लगभग 5.77 लाख केस पुलिस ने और 5.60 लाख केस उत्पाद विभाग ने दर्ज किए हैं। ​पेंडिंग केस और बोझ: न्यायपालिका पर इस कानून का भारी दबाव है। मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 5.70 लाख मामलों का निपटारा किया जा चुका है, जिसका अर्थ है कि अभी भी करीब 5.67 लाख केस अदालतों में लंबित (Pending) हैं। ​जब्ती: 10 सालों में लगभग 4.83 करोड़ लीटर अवैध शराब जब्त की गई है, जिसमें विदेशी और देसी शराब की मात्रा लगभग बराबर है। इसके अलावा 1.67 लाख वाहन भी जब्त किए गए हैं। ​2. सिस्टम की नाकामियां: एक गंभीर विश्लेषण ​पटना हाई कोर्ट और विभिन्न सामाजिक अध्ययनों ने शराबबंदी को लागू करने वाले सिस्टम की कई खामियों को उजागर किया है: ​भ्रष्टाचार और पुलिस-माफिया साठगांठ ​हाई कोर्ट ने कई बार टिप्पणी की है कि राज्य की मशीनरी इस कानून को पूरी तरह लागू करने में विफल रही है। आरोप है कि स्थानीय पुलिस और उत्पाद विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से शराब की होम डिलीवरी एक "समानांतर अर्थव्यवस्था" बन गई है। ​गरीबों पर गाज, माफिया 'आजाद' ​विपक्ष और सामाजिक कार्यकर्ताओं का तर्क है कि जेल जाने वाले 17 लाख लोगों में से 50% से अधिक लोग समाज के अत्यंत पिछड़े या गरीब तबके से आते हैं, जो अक्सर "कैरियर" (ढोने वाले) के रूप में इस्तेमाल होते हैं। बड़े शराब माफिया और किंगपिन अक्सर कानून के शिकंजे से बाहर रहते हैं। ​न्यायपालिका पर अतिरिक्त बोझ ​इतनी बड़ी संख्या में मुकदमों के कारण निचली अदालतों में सामान्य आपराधिक मामलों की सुनवाई प्रभावित हुई है। हालांकि सरकार ने विशेष 'एक्साइज कोर्ट' बनाए हैं, लेकिन केस पेंडेंसी की दर अभी भी बहुत ऊंची है। ​जहरीली शराब की त्रासदी (Hooch Tragedy) ​पूर्ण शराबबंदी के बावजूद, अवैध रूप से निर्मित जहरीली शराब के कारण बिहार में समय-समय पर बड़ी मौतें होती रही हैं। यह सिस्टम की विफलता का सबसे काला पक्ष है, जहाँ लोग सरकारी नियंत्रण न होने के कारण असुरक्षित रसायनों का सेवन कर लेते हैं। ​प्रमुख असर और वर्तमान स्थिति (2026) ​सकारात्मक पक्ष: महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा में कमी और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार (शिक्षा और भोजन पर खर्च बढ़ना) दर्ज किया गया है। ​आर्थिक नुकसान: बिहार को सालाना लगभग 5,000 करोड़ से 8,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, जिसकी कुल भरपाई अब तक 30,000 करोड़ रुपये से अधिक मानी जा रही है। ​नया मोड़: 2026 के अप्रैल माह में बिहार की राजनीति में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं, जहाँ कुछ गठबंधन सहयोगी शराबबंदी कानून में ढील देने या इसे चरणबद्ध तरीके से वापस लेने पर चर्चा कर रहे हैं। ​Liquor Ban Impact in Bihar: A 10-Year Report ​
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    बिहार में अप्रैल 2016 से लागू शराबबंदी को अब 10 साल पूरे होने को हैं। सरकार के ताज़ा आंकड़ों (मार्च 2026 तक) और विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, इस कानून का प्रभाव और इसकी चुनौतियां दोनों ही काफी व्यापक रही हैं।
​1. 10 साल का लेखा-जोखा: गिरफ्तारी और मुकदमे
​हाल ही में बिहार सरकार द्वारा जारी आंकड़ों और न्यायिक समीक्षा के अनुसार स्थिति कुछ इस प्रकार है:
​गिरफ्तारियां: पिछले 10 वर्षों में लगभग 17 लाख से अधिक लोगों को शराबबंदी कानून के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
​दर्ज केस (FIR): अब तक कुल 11.37 लाख से ज्यादा मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें से लगभग 5.77 लाख केस पुलिस ने और 5.60 लाख केस उत्पाद विभाग ने दर्ज किए हैं।
​पेंडिंग केस और बोझ: न्यायपालिका पर इस कानून का भारी दबाव है। मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 5.70 लाख मामलों का निपटारा किया जा चुका है, जिसका अर्थ है कि अभी भी करीब 5.67 लाख केस अदालतों में लंबित (Pending) हैं।
​जब्ती: 10 सालों में लगभग 4.83 करोड़ लीटर अवैध शराब जब्त की गई है, जिसमें विदेशी और देसी शराब की मात्रा लगभग बराबर है। इसके अलावा 1.67 लाख वाहन भी जब्त किए गए हैं।
​2. सिस्टम की नाकामियां: एक गंभीर विश्लेषण
​पटना हाई कोर्ट और विभिन्न सामाजिक अध्ययनों ने शराबबंदी को लागू करने वाले सिस्टम की कई खामियों को उजागर किया है:
​भ्रष्टाचार और पुलिस-माफिया साठगांठ
​हाई कोर्ट ने कई बार टिप्पणी की है कि राज्य की मशीनरी इस कानून को पूरी तरह लागू करने में विफल रही है। आरोप है कि स्थानीय पुलिस और उत्पाद विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से शराब की होम डिलीवरी एक "समानांतर अर्थव्यवस्था" बन गई है।
​गरीबों पर गाज, माफिया 'आजाद'
​विपक्ष और सामाजिक कार्यकर्ताओं का तर्क है कि जेल जाने वाले 17 लाख लोगों में से 50% से अधिक लोग समाज के अत्यंत पिछड़े या गरीब तबके से आते हैं, जो अक्सर "कैरियर" (ढोने वाले) के रूप में इस्तेमाल होते हैं। बड़े शराब माफिया और किंगपिन अक्सर कानून के शिकंजे से बाहर रहते हैं।
​न्यायपालिका पर अतिरिक्त बोझ
​इतनी बड़ी संख्या में मुकदमों के कारण निचली अदालतों में सामान्य आपराधिक मामलों की सुनवाई प्रभावित हुई है। हालांकि सरकार ने विशेष 'एक्साइज कोर्ट' बनाए हैं, लेकिन केस पेंडेंसी की दर अभी भी बहुत ऊंची है।
​जहरीली शराब की त्रासदी (Hooch Tragedy)
​पूर्ण शराबबंदी के बावजूद, अवैध रूप से निर्मित जहरीली शराब के कारण बिहार में समय-समय पर बड़ी मौतें होती रही हैं। यह सिस्टम की विफलता का सबसे काला पक्ष है, जहाँ लोग सरकारी नियंत्रण न होने के कारण असुरक्षित रसायनों का सेवन कर लेते हैं।
​प्रमुख असर और वर्तमान स्थिति (2026)
​सकारात्मक पक्ष: महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा में कमी और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार (शिक्षा और भोजन पर खर्च बढ़ना) दर्ज किया गया है।
​आर्थिक नुकसान: बिहार को सालाना लगभग 5,000 करोड़ से 8,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, जिसकी कुल भरपाई अब तक 30,000 करोड़ रुपये से अधिक मानी जा रही है।
​नया मोड़: 2026 के अप्रैल माह में बिहार की राजनीति में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं, जहाँ कुछ गठबंधन सहयोगी शराबबंदी कानून में ढील देने या इसे चरणबद्ध तरीके से वापस लेने पर चर्चा कर रहे हैं।
​Liquor Ban Impact in Bihar: A 10-Year Report
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    user_RUBY JOURNALIST
    RUBY JOURNALIST
    Court reporter बाढ़, पटना, बिहार•
    2 hrs ago
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